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Sudarshana Chakra
Adhyay 9, Shlok 29
समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्

मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MarathiIND

मी सर्व प्राण्यांसाठी समान आहे; माझ्यासाठी कोणीही द्वेषी किंवा प्रिय नाही. पण जे माझी भक्तिभावाने पूजा करतात ते माझ्यामध्ये आहेत आणि मीही त्यांच्यामध्ये आहे.

PunjabiIND

ਮੈਂ ਸਭ ਜੀਵਾਂ ਲਈ ਇੱਕੋ ਜਿਹਾ ਹਾਂ; ਮੇਰੇ ਲਈ ਕੋਈ ਨਫ਼ਰਤ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਜਾਂ ਪਿਆਰਾ ਨਹੀਂ ਹੈ; ਪਰ ਜੋ ਸ਼ਰਧਾ ਨਾਲ ਮੇਰੀ ਭਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਹ ਮੇਰੇ ਵਿੱਚ ਹਨ ਅਤੇ ਮੈਂ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾਂ।

BengaliIND

আমি সকল প্রাণীর জন্য একই; আমার কাছে ঘৃণ্য বা প্রিয় কেউ নেই; কিন্তু যারা ভক্তি সহকারে আমার উপাসনা করে তারা আমার মধ্যে আছে এবং আমিও তাদের মধ্যে আছি।

MalayalamIND

എല്ലാ ജീവജാലങ്ങൾക്കും ഞാൻ ഒരുപോലെയാണ്; എനിക്ക് വെറുക്കപ്പെട്ടവനോ പ്രിയപ്പെട്ടവനോ ഇല്ല; എന്നാൽ ഭക്തിയോടെ എന്നെ ആരാധിക്കുന്നവർ എന്നിലുണ്ട്, ഞാനും അവരിലുണ്ട്.

KannadaIND

ನಾನು ಎಲ್ಲ ಜೀವಿಗಳಿಗೂ ಒಂದೇ; ನನಗೆ ದ್ವೇಷಿಸುವವರು ಅಥವಾ ಪ್ರಿಯರು ಯಾರೂ ಇಲ್ಲ; ಆದರೆ ನನ್ನನ್ನು ಭಕ್ತಿಯಿಂದ ಪೂಜಿಸುವವರು ನನ್ನಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ ಮತ್ತು ಅವರಲ್ಲಿ ನಾನೂ ಇದ್ದೇನೆ.

MizoIND

Thilsiam zawng zawng tan pawh inang ka ni; Ka tan chuan huat leh duh tak an awm lo; nimahsela inpekna nena Mi chibai buktute chu Keimahah an awm a, kei pawh anmahniah ka awm ve bawk.

MaithiliIND

हम सब प्राणी के लेल एके छी; हमरा घृणित वा प्रिय कियो नहि अछि; मुदा जे सभ भक्तिपूर्वक हमर आराधना करैत छथि, ओ सभ हमरा मे छथि, आ हमहूँ हुनका सभ मे छी।

TeluguIND

నేను అన్ని జీవులకు ఒకటే; నాకు ద్వేషం లేదా ప్రియమైన ఎవరూ లేరు; కానీ భక్తితో నన్ను పూజించే వారు నాలో ఉన్నారు, నేను కూడా వారిలోనే ఉన్నాను.

NepaliIND

म सबै प्राणीको लागि समान छु; मलाई घृणित वा प्रिय कोही छैन; तर मलाई भक्तिपूर्वक पुज्नेहरू ममा छन् र म पनि तिनीहरूमा छु।

SindhiIND

مان سڀني مخلوقن لاءِ ساڳيو آهيان. مون لاءِ ڪو به نفرت ڪندڙ يا پيارو ناهي. پر جيڪي عقيدت سان منھنجي پوڄا ڪن ٿا سي مون ۾ آھن ۽ مان بہ انھن ۾ آھيان.

TamilIND

எல்லா உயிர்களுக்கும் நான் ஒன்றே; எனக்கு வெறுக்கத்தக்க அல்லது அன்பான எவரும் இல்லை; ஆனால் என்னை பக்தியுடன் வணங்குபவர்கள் என்னில் இருக்கிறார்கள், நானும் அவர்களில் இருக்கிறேன்.

GujaratiIND

હું બધા જીવો માટે સમાન છું; મને કોઈ દ્વેષી કે પ્રિય નથી; પરંતુ જેઓ મારી ભક્તિ કરે છે તેઓ મારામાં છે અને હું પણ તેમનામાં છું.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'समोऽहं सर्वभूतेषु'-- मैं स्थावरजंगम आदि सम्पूर्ण प्राणियोंमें व्यापकरूपसे और कृपादृष्टिसे सम हूँ। तात्पर्य है कि मैं सबमें समानरूपसे व्यापक, परिपूर्ण हूँ --'मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना' (गीता 9। 4), और मेरी सबपर समानरूपसे कृपादृष्टि है--'सुहृदं सर्वभूतानाम्' (गीता 5। 29)।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

( यदि कहो कि ) तब तो भगवान् रागद्वेषसे युक्त हैं क्योंकि वे भक्तोंपर ही अनुग्रह करते हैं दूसरोंपर नहीं करते? तो यह कहना ठीक नहीं है --, मैं सभी प्राणियोंके प्रति समान हूँ? मेरा न तो ( कोई ) द्वेष्य है और न ( कोई ) प्रिय है। मैं अग्निके समान हूँ। जैसे अग्नि अपनेसे दूर रहनेवाले प्राणियोंके शीतका निवारण नहीं करता? पास आनेवालोंका ही करता है? वैसे ही मैं भक्तोंपर अनुग्रह किया करता हूँ? दूसरों पर नहीं। जो ( भक्त ) मुझ ईश्वरका प्रेमपूर्वक भजन करते हैं? वे मुझमें स्वभावसे ही स्थित हैं? कुछ मेरी आसक्तिके कारण नहीं औरमैं भी स्वभावसेही उनमें स्थित हूँ? दूसरोंमें नहीं। परन्तु इतनेहीसे यह बात नहीं है कि मेरा उनमें ( दूसरोंमें ) द्वेष है।

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Scripture Scholar

Sri Anandgiri

भगवतो रागद्वेषवत्त्वेनानीश्वरत्वमाशङ्क्य परिहरति -- रागेत्यादिना। तर्हि भगवद्भजनमकिंचित्करमित्याशङ्क्याह -- अग्निवदिति। तत्प्रपञ्चयति -- यथेति। भक्तानभक्तांश्चानुगृह्णतोऽननुगृह्णतश्च भगवतो न कथं रागादिमत्त्वमित्याशङ्क्याह -- ये भजन्तीति। ये वर्णाश्रमादिधर्मैर्मां भजन्ति ते तेनैव भजनेनाचिन्त्यमाहात्म्येन परिशुद्धबुद्धयो मयि मत्समीपे वर्तन्ते मदभिव्यक्तियोग्यचित्ता भवन्ति। तुशब्दोऽस्य विशेषस्य द्योतनार्थः। तेषु च समीपे तेषामहमपि स्वभावतो वर्तमानस्तदनुग्रहपरो भवामि। यथा व्यापकमपि सावित्रं तेजः स्वच्छे दर्पणादौ प्रतिफलति तथा परमेश्वरोऽवर्जनीयतया भक्तिनिरस्तसमस्तकलुषसत्त्वेषु पुरुषेषु संनिधत्ते दैवीं प्रकृतिमाश्रिता मां भजन्तीत्युक्तत्वादित्यर्थः।

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Sri Dhanpati

ननु मोक्षादिदानेन भक्ताननुह्णतस्तददानेनाभक्तानननुगृह्णतस्त्व वैषम्यमिति चेत्तत्राह -- सम इति। अहं परमात्मा सच्चिदानन्दघनः सर्वभूतेषु ब्रह्मादिस्तम्ब पर्यन्वेष समः समानः। यतो मम द्वेषविषयः कश्चितपि न भवति रागाविषयश्च। एवं तर्हि कथं भक्ताननुगृह्णासि नेतरानिति तरह -- य इति। तुशब्दः शङ्काव्यवच्छेदार्थः। यता सवितृप्रकाशः स्वच्छास्वच्छातर्पणेषु समोऽपि स्वच्छेषु विशेषेण वर्तते नास्वच्छेषु। यथा वह्निः सर्वसमोऽपि सन्निहितानां शीतं नाशयति नासन्निहितानाम्। यथावा कल्पवृक्षो भक्ताननुगृह्णाति लाभक्तान्। एवं ये तु भक्त्या मां भजन्ते सेवन्ते ते स्वभावतो मयि वर्तन्ते। मदाकाराकारितचित्तवृत्तयोऽनुग्रहभाजो भवन्तीत्यर्थः। अहंच तेषु स्वभावत एव वर्ते तेषां चित्तवृत्तौ स्वभावादेव प्रतिफलितोऽनुग्राहको भवामीत्यर्थः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
samaḥequally disposed
ahamI
sarvabhūteṣhu
nano one
meto me
dveṣhyaḥinimical
astiis
nanot
priyaḥdear
yewho
bhajantiworship with love
tubut
māmme
bhaktyāwith devotion
mayireside in me
tesuch persons
teṣhuin them
chaand
apialso
ahamI
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Bhagavad Gita · 9.28
शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः। संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि

इस प्रकार मेरे अर्पण करनेसे जिनसे कर्मबन्धन होता है, ऐसे शुभ (विहित) और अशुभ (निषिद्ध) सम्पूर्ण कर्मोंके फलोंसे तू मुक्त हो जायगा। ऐसे अपनेसहित सब कुछ मेरे अर्पण करनेवाला और सबसे मुक्त हुआ तू मेरेको प्राप्त हो जायगा। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 9.30
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः

अगर कोई दुराचारी-से-दुराचारी भी अनन्यभावसे मेरा भजन करता है, तो उसको साधु ही मानना चाहिये। कारण कि उसने निश्चय बहुत अच्छी तरह कर लिया है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 9Shlok 29
Bhagavad Gita · Adhyay 9, Shlok 29
समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्

मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 29 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 29 का हिंदी अर्थ: "मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 29?

Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 29 translates to: "I am the same to all beings; there is none hateful or dear to Me; but those who worship Me with devotion are in Me, and I am also in them. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः। ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते त" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 9, श्लोक 29 है जो Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga में संकलित है। मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "samo ’haṁ sarva-bhūteṣhu na me dveṣhyo ’sti na priyaḥ" mean in English?

"samo ’haṁ sarva-bhūteṣhu na me dveṣhyo ’sti na priyaḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 29. I am the same to all beings; there is none hateful or dear to Me; but those who worship Me with devotion are in Me, and I am also in them. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.