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Sudarshana Chakra
Adhyay 7, Shlok 10
बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्। बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्

हे पृथानन्दन ! सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान। बुद्धिमानोंमें बुद्धि और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MarathiIND

हे अर्जुना, सर्व प्राणिमात्रांचे शाश्वत बीज म्हणून मला जाण; मी बुद्धीमानांची बुद्धी आणि वैभवशाली वस्तूंचे वैभव आहे.

MalayalamIND

ഹേ അർജുനാ, എല്ലാ ജീവജാലങ്ങളുടെയും ശാശ്വത ബീജമായി എന്നെ അറിയുക. ഞാൻ ബുദ്ധിമാന്മാരുടെ ബുദ്ധിയും മഹത്തായ വസ്തുക്കളുടെ മഹത്വവുമാണ്.

OdiaIND

ହେ ଅର୍ଜୁନ, ମୋତେ ସମସ୍ତ ପ୍ରାଣୀମାନଙ୍କର ଅନନ୍ତ ବୀଜ ଭାବରେ ଜାଣ; ମୁଁ ବୁଦ୍ଧିମାନମାନଙ୍କର ବୁଦ୍ଧି, ଏବଂ ଚମତ୍କାର ବସ୍ତୁର ଗ lend ରବ |

GujaratiIND

હે અર્જુન, મને સર્વ જીવોના શાશ્વત બીજ તરીકે જાણો; હું બુદ્ધિશાળીઓની બુદ્ધિ છું, અને ભવ્ય પદાર્થોનો વૈભવ છું.

PunjabiIND

ਹੇ ਅਰਜੁਨ, ਮੈਨੂੰ ਸਾਰੇ ਜੀਵਾਂ ਦੇ ਅਨਾਦਿ ਬੀਜ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਜਾਣੋ; ਮੈਂ ਬੁੱਧੀਮਾਨਾਂ ਦੀ ਅਕਲ ਹਾਂ, ਅਤੇ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਵਸਤੂਆਂ ਦੀ ਸ਼ਾਨ ਹਾਂ।

TamilIND

அர்ஜுனா, என்னை எல்லா உயிர்களின் நித்திய விதையாக அறிந்துகொள்; நான் புத்திசாலிகளின் புத்திசாலித்தனம், மற்றும் அற்புதமான பொருட்களின் மகத்துவம்.

BengaliIND

হে অর্জুন, আমাকে সকল প্রাণীর অনন্ত বীজরূপে জান; আমি বুদ্ধিমানদের বুদ্ধিমত্তা, এবং জাঁকজমকপূর্ণ বস্তুর জাঁকজমক।

KannadaIND

ಓ ಅರ್ಜುನಾ, ನನ್ನನ್ನು ಎಲ್ಲಾ ಜೀವಿಗಳ ಶಾಶ್ವತ ಬೀಜವೆಂದು ತಿಳಿಯಿರಿ; ನಾನು ಬುದ್ಧಿವಂತರ ಬುದ್ಧಿವಂತಿಕೆ ಮತ್ತು ಭವ್ಯವಾದ ವಸ್ತುಗಳ ವೈಭವ.

TeluguIND

ఓ అర్జునా, అన్ని జీవులకు శాశ్వతమైన బీజంగా నన్ను తెలుసుకోండి; నేనే బుద్ధిమంతుల తెలివిని, అద్భుతమైన వస్తువుల వైభవాన్ని.

SindhiIND

مون کي ڄاڻو، اي ارجن، سڀني مخلوقن جي دائمي ٻج وانگر؛ مان عقلمندن جي عقل آهيان، ۽ شاندار شين جو شان آهيان.

NepaliIND

हे अर्जुन, मलाई सबै प्राणीहरूको शाश्वत बीजको रूपमा जान। म बुद्धिमानहरूको बुद्धि हुँ, र भव्य वस्तुहरूको वैभव हुँ।

AssameseIND

হে অৰ্জুন, মোক সকলো সত্তাৰ চিৰবীজ বুলি চিনি পাওক; মই বুদ্ধিজীৱীৰ বুদ্ধি, আৰু ভৱিষ্যৎ বস্তুৰ মহিমা।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्'--हे पार्थ ! सम्पूर्ण प्राणियोंका सनातन (अविनाशी) बीज मैं हूँ अर्थात् सबका कारण मैं ही हूँ। सम्पूर्ण प्राणी बीजरूप मेरेसे उत्पन्न होते हैं, मेरेमें ही रहते हैं और अन्तमें मेरेमें ही लीन होते हैं। मेरे बिना प्राणीकी स्वतन्त्र सत्ता नहीं है।जितने बीज होते हैं, वे सब वृक्षसे उत्पन्न होते हैं और वृक्ष पैदा करके नष्ट हो जाते हैं। परन्तु यहाँ जिस बीजका वर्णन है, वह बीज 'सनातन' है अर्थात् आदि-अन्तसे रहित (अनादि एवं अनन्त) है। इसीको नवें अध्यायके अठारहवें श्लोकमें 'अव्यय बीज' कहा गया है। यह चेतन-तत्त्व अव्यय अर्थात् अविनाशी है। यह स्वयं विकार-रहित रहते हुए ही सम्पूर्ण जगत्का उत्पादक, आश्रय और प्रकाशक है तथा जगत्का कारण है।गीतामें 'बीज' शब्द कहीं भगवान् और कहीं जीवात्मा--दोनोंके लिये आया है। यहाँ जो 'बीज' शब्द आया है, वह भगवान्का वाचक है; क्योंकि यहाँ कारणरूपसे विभूतियोंका वर्णन है। दसवें अध्यायके उन्तालसीवें श्लोकमें विभूतिरूपसे आया बीज शब्द भी भगवान्का ही वाचक है; क्योंकि वहाँ उनको सम्पूर्ण प्राणियोंका कारण कहा गया है। नवें अध्यायके अठारहवें श्लोकमें 'बीज' शब्द भगवान्के लिये आया है; क्योंकि उसी अध्यायके उन्नीसवें श्लोकमें 'सदसच्चाहमर्जुन' पदमें कहा गया है कि कार्य और कारण सब मैं ही हूँ। सब कुछ भगवान् ही होनेसे 'बीज' शब्द भगवान्का वाचक है। चौदहवें अध्यायके चौथे श्लोकमें 'अहं बीजप्रदः पिता' 'मैं बीज प्रदान करनेवाला पिता हूँ'--ऐसा होनेसे वहाँ 'बीज' शब्द जीवात्माका वाचक है। 'बीज' शब्द जीवात्माका वाचक तभी होता है, जब यह जडके साथ अपना सम्बन्ध मान लेता है, नहीं तो यह भगवान्का स्वरूप ही है।

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Sri Harikrishnadas Goenka

हे पार्थ मुझे तू सब भूतोंका सनातन पुरातन बीज अर्थात् उनकी उत्पत्तिका मूल कारण जान। तथा मैं ही बुद्धिमानोंकी बुद्धि अर्थात् विवेकशक्ति और तेजस्वियों अर्थात् प्रभावशाली पुरुषोंका तेज प्रभाव हूँ।

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Scripture Scholar

Sri Anandgiri

ननु सर्वाणि भूतानि स्वकारणे प्रोतानि कथं तेषां त्वयि प्रोतत्वं तत्राह बीजमिति। बीजान्तरापेक्षयानवस्थां वारयति सनातनमिति। चैतन्यस्याभिव्यञ्जकं तत्त्वनिश्चयसामर्थ्यं बुद्धिस्तद्वतां या बुद्धिस्तद्भूते मयि सर्वे बुद्धिमन्तः प्रोता भवन्तीत्याह कि़ञ्चेति। प्रागल्भ्यवतां यत्प्रागल्भ्यं तद्भूते मयि तद्वन्तः प्रोता इत्याह तेज इति। तद्धि प्रागल्भ्यं यत्पराभिभवसामर्थ्यं परैश्चाप्रधृष्यत्वम्।

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Sri Dhanpati

ननु सर्वाणि भूतानि स्वस्वकारणे प्रोतानि खतं तेषां त्वयि प्रोतत्वमित्याशङ्क्याह। बीजं जन्मादिकरणं सर्वभूतानां मां विद्धि जानीहि। यथा सर्वेषां पाण्डवानां युष्माकं साक्षान्माद्या मन्त्रदानेन परम्परया च पृथैव बीजं तथेति द्योतयन्नाह हे पार्थेति। बीजान्तरापेक्षयानवस्थां वारयति। सनातनं चिरन्तरनम्। बुद्धिरन्तःकरणस्य विवेकशक्तिर्बह्य सत्यं जगन्मिथ्येति विवेचनसामर्थ्यं तद्रूपे मयि बुद्धिमन्तः प्रोताः। तथा तेजसि प्रागल्म्यभूते मयि तेजस्विनः प्रोताः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
bījamthe seed
māmme
sarvabhūtānām
viddhiknow
pārthaArjun, the son of Pritha
sanātanamthe eternal
buddhiḥintellect
buddhimatām
asmi(I) am
tejaḥsplendor
tejasvināmof the splendid
ahamI
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 7.9
पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ। जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु

पृथ्वीमें पवित्र गन्ध मैं हूँ, और अग्निमें तेज मैं हूँ, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें जीवनीशक्ति मैं हूँ और तपस्वियोंमें तपस्या मैं हूँ। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 7.11
बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम्। धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! बलवालोंमें काम और रागसे रहित बल मैं हूँ। मनुषयोंमें धर्मसे अविरुद्ध (धर्मयुक्त) काम मैं हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 7Shlok 10
Bhagavad Gita · Adhyay 7, Shlok 10
बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्। बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्

हे पृथानन्दन ! सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान। बुद्धिमानोंमें बुद्धि और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 7 श्लोक 10 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 7 श्लोक 10 का हिंदी अर्थ: "हे पृथानन्दन ! सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान। बुद्धिमानोंमें बुद्धि और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Paramahamsa Vijnana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 7 Verse 10?

Bhagavad Gita Chapter 7 Verse 10 translates to: "Know Me, O Arjuna, as the eternal seed of all beings; I am the intelligence of the intelligent, and the splendour of the splendid objects. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्। बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विना" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 7, श्लोक 10 है जो Bhagavad Gita के Paramahamsa Vijnana Yoga में संकलित है। हे पृथानन्दन ! सम्पूर्ण प्राणियोंका अनादि बीज मुझे जान। बुद्धिमानोंमें बुद्धि और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "bījaṁ māṁ sarva-bhūtānāṁ viddhi pārtha sanātanam" mean in English?

"bījaṁ māṁ sarva-bhūtānāṁ viddhi pārtha sanātanam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 7 Verse 10. Know Me, O Arjuna, as the eternal seed of all beings; I am the intelligence of the intelligent, and the splendour of the splendid objects. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.