Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 6, Shlok 45
प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः। अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम्

परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TeluguIND

అయితే యోగి పట్టుదలతో శ్రమించి, పాపాలను పోగొట్టి, అనేక జన్మల క్రమేణా పరిపూర్ణత పొంది, ఉన్నతమైన లక్ష్యాన్ని చేరుకుంటాడు.

SindhiIND

پر يوگي جيڪو محنت سان ڪوشش ڪري ٿو، گناهن کان پاڪ ٿئي ٿو ۽ ڪيترن ئي جنمن ۾ بتدريج پورو ٿئي ٿو، اعليٰ مقصد تائين پهچي ٿو.

NepaliIND

तर जो योगी तत्परतापूर्वक प्रयास गर्छ, पाप-शुद्धि र धेरै जन्महरूमा क्रमशः सिद्ध हुन्छ, ऊ उच्च लक्ष्यमा पुग्छ।

BhojpuriIND

बाकिर जवन योगी लगन से प्रयास करेला, पाप से शुद्ध आ कई गो जन्मन पर धीरे-धीरे सिद्ध होला, ऊ उच्चतम लक्ष्य तक पहुँच जाला।

TamilIND

ஆனால் விடாமுயற்சியுடன் பாடுபடும் யோகி, பாவங்களை நீக்கி, பல பிறவிகளில் படிப்படியாக முழுமையடைந்து, உயர்ந்த இலக்கை அடைகிறான்.

MalayalamIND

എന്നാൽ കഠിനാധ്വാനം ചെയ്യുന്ന യോഗി, പാപങ്ങളിൽ നിന്ന് ശുദ്ധി വരുത്തി, അനേകം ജന്മങ്ങളിൽ ക്രമേണ പൂർണ്ണത കൈവരിക്കുന്നു, ഏറ്റവും ഉയർന്ന ലക്ഷ്യത്തിലെത്തുന്നു.

BengaliIND

কিন্তু যোগী যে অধ্যবসায়ের সাথে চেষ্টা করে, পাপ থেকে শুদ্ধ হয় এবং বহু জন্মে ধীরে ধীরে সিদ্ধ হয়, সে সর্বোচ্চ লক্ষ্যে পৌঁছায়।

GujaratiIND

પરંતુ યોગી જે સતત પ્રયત્ન કરે છે, પાપોથી શુદ્ધ થાય છે અને ઘણા જન્મોમાં ધીમે ધીમે પૂર્ણ થાય છે, તે ઉચ્ચ લક્ષ્ય સુધી પહોંચે છે.

PunjabiIND

ਪਰ ਉਹ ਯੋਗੀ ਜੋ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਜਨਮਾਂ ਵਿੱਚ ਲਗਾਤਾਰ, ਪਾਪਾਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁੱਧ ਅਤੇ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਸੰਪੂਰਨ ਹੋ ਕੇ ਯਤਨ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਉੱਚਤਮ ਟੀਚੇ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

KannadaIND

ಆದರೆ ಶ್ರದ್ಧೆಯಿಂದ ಶ್ರಮಿಸುವ ಯೋಗಿ, ಪಾಪಗಳನ್ನು ಶುದ್ಧೀಕರಿಸಿ ಮತ್ತು ಅನೇಕ ಜನ್ಮಗಳಲ್ಲಿ ಕ್ರಮೇಣ ಪರಿಪೂರ್ಣತೆಯನ್ನು ಹೊಂದುತ್ತಾನೆ, ಉನ್ನತ ಗುರಿಯನ್ನು ತಲುಪುತ್ತಾನೆ.

MarathiIND

परंतु जो योगी अथक परिश्रम करतो, पापांपासून शुद्ध होतो आणि अनेक जन्मांत हळूहळू परिपूर्ण होतो, तो सर्वोच्च ध्येयापर्यंत पोहोचतो.

AssameseIND

কিন্তু যি যোগী অধ্যৱসায়ী, পাপ বিশুদ্ধ আৰু বহু জন্মৰ ওপৰত ক্ৰমান্বয়ে সিদ্ধ হয়, তেওঁ সৰ্বোচ্চ লক্ষ্যত উপনীত হয়।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--[वैराग्यवान् योगभ्रष्ट तो तत्त्वज्ञ जीवन्मुक्त योगियोंके कुलमें जन्म लेने और वहाँ विशेषतासे यत्न करनेके कारण सुगमतासे परमात्माको प्राप्त हो जाता है। परन्तु श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट परमात्माको कैसे प्राप्त होता है? इसका वर्णन इस श्लोकमें करते हैं।]

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

योगित्व श्रेष्ठ किस कारणसे है जो प्रयत्नपूर्वक अधिक साधनमें लगा हुआ है वह विद्वान् योगी विशुद्धकिल्बिष अर्थात् अनेक जन्मोंमें थोड़ेथोड़े संस्कारोंको एकत्रितकर उन अनेक जन्मोंके सञ्चित संस्कारोंसे पापरहित होकर सिद्ध अवस्थाको प्राप्त हुआ सम्यक् ज्ञानको प्राप्त करके परमगति मोक्षको प्राप्त होता है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

योगनिष्ठस्य श्रेष्ठत्वे हेत्वन्तरं वक्तुमुत्तरश्लोकमवतारयति कुतश्चेति। मृदुप्रयत्नोऽपि क्रमेण मोक्ष्यते चेदधिकप्रयत्नस्य क्लेशहेतोरकिञ्चित्करत्वमित्याशङ्क्य हेत्वन्तरमेव प्रकटयति प्रयत्नादिति। तत्र योगविषये प्रयत्नातिरेके सतीत्यर्थः। ततः संचितसंस्कारसमुदायादिति यावत्। समुत्पन्नसम्यग्दर्शनवशात्प्रकृष्टा गतिः संन्यासिना लभ्यते तेन शीघ्रं मुक्तिमिच्छन्नधिकप्रयत्नो भवेदल्पप्रयत्नस्तु चिरेणैव मुक्तिभागित्यर्थः।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

इतश्च योगित्वं श्रेय इत्याह प्रयत्नादिति। प्रयत्नादधिकयत्नात्प्रकर्षेण यत्नेन यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः संशुद्धपापाोऽनेकेषु जन्मसु किंचित्कंचित्संस्कारजातमुपचित्य तेनोपचितेनानेकजन्मकृतेन संसिद्धोऽनेकजन्मसंसिद्धस्ततः प्राप्ततत्त्वसाक्षात्कारः सन् परां मोक्षाख्यां गतिं याति। यत्तु तत इति तच्छब्देन प्रकृतं चलितमानसत्वं परामृशति। ततश्चलितमानसत्वाद्धेतोः। अयंभावः चलितत्वदशायां काम्यानि कर्माणि यानि कृतानि तेषां प्रत्येकं फलदातृत्वात् युगपत्सर्वकर्मफलसंयोगासंभवात् एकैकस्य फलमनुभूय शुचीनां श्रीमतां योगिनां वा गेहे जन्मानुभूय पुनः कर्मयोगे यतमानः तत्तत्काम्यकर्मसंख्याकजन्मान्यनुभूय ज्ञानसंपन्नः सन् मोक्षं प्रतिपद्यत इति। प्रयत्नादिति कर्मणि ल्यब्लोपे पञ्चमी। प्रयत्नं प्राप्येत्यर्थः। कर्मयोगी कर्मानुष्ठाता। योगिनं विशिनष्टि यतमान इति। उज्क्षितदर्प इत्यर्थः। शुचीनां श्रीमतां योगिनां वा कुलेऽहमुत्पन्न इत्यभिमानवर्जति इति भाव इति तच्चिन्त्यम्। निरर्थकाया ल्यब्लोपकल्पनायाः प्रकृष्टपरामर्शकल्पनाया उत्तरश्लोकेन सर्वतः श्रैष्ठ्येन वर्ण्यमानस्य योगिनः क्रमयोगिपरत्वेन वर्णनस्य जिज्ञासुरपीत्यननुरोधेन यतमानपदव्याख्यानस्य चायुक्तत्वादिति दिक्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
prayatnātwith great effort
yatamānaḥendeavoring
tuand
yogīa yogi
sanśhuddhapurified
kilbiṣhaḥfrom material desires
anekaafter many, many
janmabirths
sansiddhaḥattain perfection
tataḥthen
yātiattains
parāmthe highest
gatimpath
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 6.44
पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः। जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते

वह (श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट मनुष्य) भोगोंके परवश होता हुआ भी पूर्वजन्ममें किये हुए अभ्यास-(साधन-) के कारण ही परमात्माकी तरफ खिंच जाता है; क्योंकि योग-(समता-) का जिज्ञासु भी वेदोंमें कहे हुए सकाम कर्मोंका अतिक्रमण कर जाता है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 6.46
तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः। कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन

(सकामभाववाले) तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है -- ऐसा मेरा मत है। अतः हे अर्जुन ! तू योगी हो जा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 6Shlok 45
Bhagavad Gita · Adhyay 6, Shlok 45
प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः। अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम्

परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 6 श्लोक 45 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 6 श्लोक 45 का हिंदी अर्थ: "परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Abhyasa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 45?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 45 translates to: "But the Yogi who strives assiduously, purified of sins and perfected gradually over many births, reaches the highest goal. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः। अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 6, श्लोक 45 है जो Bhagavad Gita के Abhyasa Yoga में संकलित है। परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "prayatnād yatamānas tu yogī sanśhuddha-kilbiṣhaḥ" mean in English?

"prayatnād yatamānas tu yogī sanśhuddha-kilbiṣhaḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 45. But the Yogi who strives assiduously, purified of sins and perfected gradually over many births, reaches the highest goal. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.