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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 4
अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन। इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन

हे मधुसूदन! मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ? क्योंकि हे अरिसूदन! ये दोनों ही पूजाके योग्य हैं। — VaniSagar

Global Translations

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BengaliIND

হে মধুসূদন, ভীষ্ম ও দ্রোণের বিরুদ্ধে তীর নিয়ে যুদ্ধে কি করে যুদ্ধ করব, যারা পূজার যোগ্য, হে শত্রুদের বিনাশকারী?

MarathiIND

हे मधुसूदना, हे शत्रूंचा नाश करणाऱ्या भीष्म आणि द्रोण यांच्याशी मी बाणांनी युद्ध कसे करू शकतो?

NepaliIND

हे मधुसूदना, हे शत्रुको संहारक, पूजायोग्य भीष्म र द्रोणसँग बाण लिएर युद्धमा कसरी लड्न सक्छु?

MalayalamIND

ഹേ മധുസൂദനാ, ശത്രുസംഹാരകനേ, പൂജിക്കപ്പെടാൻ യോഗ്യരായ ഭീഷ്മർക്കും ദ്രോണർക്കും എതിരെ ഞാൻ എങ്ങനെ അസ്ത്രങ്ങൾ കൊണ്ട് യുദ്ധം ചെയ്യും?

TeluguIND

ఓ మధుసూదనా, శత్రునాశకుడా, పూజింపదగిన భీష్ముడు, ద్రోణులతో నేను బాణాలతో ఎలా యుద్ధం చేయగలను?

SindhiIND

اي مدھوسودن، اي دشمنن کي ناس ڪندڙ ڀشم ۽ درون، جيڪي پوڄا جي لائق آهن، تن سان تيرن سان ڪيئن وڙهان؟

KannadaIND

ಓ ಮಧುಸೂದನಾ, ಶತ್ರುನಾಶಕನೇ, ಪೂಜೆಗೆ ಅರ್ಹರಾದ ಭೀಷ್ಮ ಮತ್ತು ದ್ರೋಣರ ವಿರುದ್ಧ ನಾನು ಹೇಗೆ ಬಾಣಗಳಿಂದ ಯುದ್ಧ ಮಾಡಲಿ?

MaithiliIND

हे मधुसूदन, हे शत्रुनाशक पूजन योग्य भीष्म आ द्रोणक विरुद्ध हम बाण सँ युद्ध मे कोना लड़ब।

KonkaniIND

हे मधुसूदन, हे दुस्मान नाशक, पूज्यायोग्य भीष्म आनी द्रोण हांचे आड बाणांनी झुजांत कसो झुजूं?

MizoIND

Aw Madhusudana, aw hmêlma tichhetu, biak tlâk Bhishma leh Drona te chu engtin nge thal hmanga indonaah ka beih theih ang?

AssameseIND

হে মধুসুদন, হে শত্ৰুৰ ধ্বংস, পূজাৰ যোগ্য ভীষ্ম আৰু দ্ৰোণৰ বিৰুদ্ধে মই কেনেকৈ শৰেৰে যুদ্ধ কৰিম?

GujaratiIND

હે મધુસુદન, હે શત્રુઓના સંહારક, પૂજન કરવા યોગ્ય એવા ભીષ્મ અને દ્રોણ સામે હું બાણ વડે યુદ્ધ કેવી રીતે કરી શકું?

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'मधुसूदन' और 'अरिसूदन'--ये दो सम्बोधन देनेका तात्पर्य है कि आप दैत्योंको और शत्रुओंको मारनेवाले हैं अर्थात् जो दुष्ट स्वभाववाले, अधर्ममय आचरण करनेवाले और दुनियाको कष्ट देनेवाले मधु-कैटभ आदि दैत्य हैं, उनको भी आपने मारा है; और जो बिना कारण द्वेष रखते हैं, अनिष्ट करते हैं ,ऐसे शत्रुओंको भी आपने मारा है। परन्तु मेरे सामने तो पितामह भीष्म और आचार्य द्रोण खड़े हैं, जो आचरणोंमें सर्वथा श्रेष्ठ हैं, मेरेपर अत्यधिक स्नेह रखनेवाले हैं और प्यारपूर्वक मेरेको शिक्षा देनेवाले हैं। ऐसे मेरे परम हितैषी दादाजी और विद्यागुरुको मैं कैसे मारूँ?

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

No such translation is available. Translation starts from 2.10

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Sri Anandgiri

एवं भगवता प्रतिबोध्यमानोऽपि शोकाभिभूतचेतस्त्वादप्रतिबुध्यमानः सन्नर्जुनः स्वाभिप्रायमेव प्रकृतं भगवन्तं प्रत्युक्तवान् कथमित्यादिना। भीष्मं पितामहं द्रोणं चाचार्यं संख्ये रणे हे मधुसूदन इषुभिर्यत्र वाचापि योत्स्यामीति वक्तुमनुचितं तत्र कथं बाणैर्योत्स्ये इति भावः। सायकैस्तौ कथं प्रतियोत्स्यामि प्रतियोत्स्ये तौ हि पूजार्हौ कुसुमादिभिरर्चनयोग्यौ हे अरिसूदन सर्वानेवारीनयत्नेन सूदितवानिति भगवानेवं संबोध्यते।

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Scripture Scholar

Sri Dhanpati

ननु शत्रवस्तापनीया नतु गुरव इत्याशयेनाह कथमिति। भीष्मं पितामहं द्रोणं च धनुर्विद्याचार्यं गुरुं संख्ये संग्रामभूमौ इषुभिः सह कथं प्रतियोत्स्यामि प्रतीपो भूत्वा कथं करिष्यामि। यतः पूजार्हो पूजायोग्यौ भीष्मद्रोणौ। पुष्पादिभिः पूजार्हयोस्तयोरिषुभिर्हननं मया कथं कर्तव्यमित्यर्थः। मधुसूदनारिसूदनेति संबोधयंस्त्वमपि दुष्टानेव तापयसीत्यतो गुरु अदुष्टौ च भीष्मद्रोणौ जहीति प्रेरयितुं नार्हसीति सूचयति। मधुसूदनारिसूदनेति संबोधनद्वयं शोकव्याकुलत्वेन पूर्वापरपरामर्शवैकल्यात्। अतो न मधुसूदनेत्यस्यार्थस्य पुनरुक्तत्वदोष इति केचित्।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
arjunaḥ uvāchaArjun said
kathamhow
bhīṣhmamBheeshma
ahamI
sankhyein battle
droṇamDronacharya
chaand
madhusūdana
iṣhubhiḥwith arrows
pratiyotsyāmishall I shoot
pūjāarhau
arisūdana
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Bhagavad Gita · 2.3
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप

हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.5
गुरूनहत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके। हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान्

महानुभाव गुरुजनोंको न मारकर इस लोकमें मैं भिक्षाका अन्न खाना भी श्रेष्ठ समझता हूँ। क्योंकि गुरुजनोंको मारकर यहाँ रक्तसे सने हुए तथा धनकी कामनाकी मुख्यतावाले भोगोंको ही तो भोगूँगा! — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 2Shlok 4
Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 4
अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन। इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन

हे मधुसूदन! मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ? क्योंकि हे अरिसूदन! ये दोनों ही पूजाके योग्य हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ: "हे मधुसूदन! मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ? क्योंकि हे अरिसूदन! ये दोनों ही पूजाके योग्य हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 4?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 4 translates to: "O Madhusudana, how can I fight in battle with arrows against Bhishma and Drona, who are worthy of being worshipped, O destroyer of enemies? — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन। इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्ह" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 4 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। हे मधुसूदन! मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ? क्योंकि हे अरिसूदन! ये दोनों ही पूजाके योग्य हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "arjuna uvācha" mean in English?

"arjuna uvācha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 4. O Madhusudana, how can I fight in battle with arrows against Bhishma and Drona, who are worthy of being worshipped, O destroyer of enemies? — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.