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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 3
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप

हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ। — VaniSagar

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TeluguIND

పృథుని కుమారుడా, ఓ అర్జునా, నపుంసకత్వానికి లొంగకు. అది నీకు తగదు. గుండె యొక్క ఈ అర్ధ బలహీనతను వదిలించుకోండి! లేచి నిలబడు, ఓ శత్రువులను జయించినవాడా!

MarathiIND

हे पृथाच्या पुत्र अर्जुना, नपुंसकत्वाला बळी पडू नकोस. ते तुम्हाला शोभत नाही. हृदयाची ही दुर्बलता दूर करा! हे शत्रूंवर विजय मिळवणाऱ्या, उभे राहा!

BengaliIND

হে পৃথার পুত্র অর্জুন, পুরুষত্বের কাছে নতি স্বীকার করো না। এটা আপনার শোভা পায় না. হার্টের এই গড় দুর্বলতা দূর করুন! দাঁড়াও, হে শত্রুদের বিজয়ী!

GujaratiIND

હે પૃથાના પુત્ર અર્જુન, નપુંસકતાનો ભોગ ન થા. તે તમને શોભતું નથી. હૃદયની આ અર્થપૂર્ણ નબળાઇને દૂર કરો! હે શત્રુઓના વિજેતા, ઉભા થાઓ!

PunjabiIND

ਹੇ ਪ੍ਰਿਥ ਦੇ ਪੁੱਤਰ ਅਰਜੁਨ, ਨਿਰਬਲਤਾ ਦੇ ਅੱਗੇ ਨਾ ਝੁਕ। ਇਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਦਿਲ ਦੀ ਇਸ ਘਟੀਆ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰੋ! ਉੱਠ ਖਲੋ, ਹੇ ਵੈਰੀਆਂ ਦੇ ਜਿੱਤਣ ਵਾਲੇ!

MalayalamIND

പൃഥ്വിയുടെ പുത്രനായ അർജുനാ, ബലഹീനതയ്ക്ക് വഴങ്ങരുത്. അത് നിങ്ങൾക്ക് യോജിച്ചതല്ല. ഹൃദയത്തിൻ്റെ ഈ ദൗർബല്യം തള്ളിക്കളയുക! ശത്രുക്കളെ ജയിക്കുന്നവനേ, എഴുന്നേറ്റു നിൽക്കൂ!

KannadaIND

ಓ ಅರ್ಜುನಾ, ಪೃಥೆಯ ಪುತ್ರನೇ, ಶಕ್ತಿಹೀನತೆಗೆ ಮಣಿಯಬೇಡ. ಇದು ನಿಮಗೆ ಸರಿಹೊಂದುವುದಿಲ್ಲ. ಹೃದಯದ ಈ ದೌರ್ಬಲ್ಯವನ್ನು ತೊಡೆದುಹಾಕಿ! ಎದ್ದೇಳು, ಓ ಶತ್ರುಗಳ ವಿಜಯಿ!

NepaliIND

हे पृथपुत्र अर्जुन, नपुंसकतालाई नझुक। यो तपाईलाई मिल्दैन। मुटुको यो मतलबी कमजोरी हटाउनुहोस्! खडा हुनुहोस्, हे शत्रुहरूका विजयी!

SindhiIND

اي ارجن، پرٿا جا پٽ، نامرديءَ کي نه مڃ. اهو توهان کي مناسب ناهي. دل جي هن ڪمزوري کي ختم ڪر! اٿي بيٺو، اي دشمنن جا فاتح!

TamilIND

பிருதையின் மகனான அர்ஜுனா, ஆண்மைக்குறைவுக்கு அடிபணியாதே. அது உங்களுக்கு பொருந்தாது. இதயத்தின் இந்த மோசமான பலவீனத்தை தூக்கி எறியுங்கள்! எதிரிகளை வென்றவரே, எழுந்து நில்லுங்கள்!

BhojpuriIND

नपुंसकता के आगे ना झुके हे पृथ्वी के पुत्र अर्जुन। ई रउरा सोझा नइखे. दिल के एह मतलबी कमजोरी के फेंक दीं! खड़ा हो जा, हे दुश्मनन के विजेता!

AssameseIND

হে পৃথৰ পুত্ৰ অৰ্জুন নপুংসকতাৰ ওচৰত নমস্কাৰ নকৰিবা। আপোনাৰ লগত খাপ নাখায়। হৃদয়ৰ এই নীচ দুৰ্বলতাক পেলাই দিয়ক! থিয় হওক, হে শত্ৰুৰ বিজয়ী!

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

2.3।। व्याख्या --'पार्थ'-- माता पृथा-(कुन्ती-) के सन्देशकी याद दिलाकर अर्जुनके अन्तःकरणमें क्षत्रियोचित वीरताका भाव जाग्रत् करनेके लिये भगवान् अर्जुनको पार्थ नामसे सम्बोधित करते हैं । तात्पर्य है कि अपनेमें कायरता लाकर तुम्हें माताकी आज्ञाका उल्लंघन नहीं करना चाहिये। 'क्लैब्यं मा स्म गमः'-- अर्जुन कायरताके कारण युद्ध करनेमें अधर्म और युद्ध न करनेमें धर्म मान रहे थे। अतः अर्जुनको चेतानेके लिये भगवान् कहते हैं कि युद्ध न करना धर्मकी बात नहीं है, यह तो नपुंसकता (हिजड़ापन) है। इसलिये तुम इस नपुंसकताको छोड़ दो। 'नैतत्त्वय्युपपद्यते'-- तुम्हारेमें यह हिजड़ापन नहीं आना चाहिये था; क्योंकि तुम कुन्ती-जैसी वीर क्षत्राणी माताके पुत्र हो और स्वयं भी शूरवीर हो। तात्पर्य है कि जन्मसे और अपनी प्रकृतिसे भी यह नपुंसकता तुम्हारेमें सर्वथा अनुचित है। 'परंतप'-- तुम स्वयं 'परंतप' हो अर्थात् शत्रुओंको तपानेवाले, भगानेवाले हो, तो क्या तुम इस समय युद्धसे विमुख होकर अपने शत्रुओंको हर्षित करोगे? 'क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ'-- यहाँ 'क्षुद्रम्' पदके दो अर्थ होते हैं--(1) यह हृदयकी दुर्बलता तुच्छताको प्राप्त करानेवाली है अर्थात् मुक्ति, स्वर्ग अथवा कीर्तिको देनेवाली नहीं है। अगर तुम इस तुच्छताका त्याग नहीं करोगे तो स्वयं तुच्छ हो जाओगे; और (2) यह हृदयकी दुर्बलता तुच्छ चीज है। तुम्हारे-जैसे शूरवीरके लिये ऐसी तुच्छ चीजका त्याग करना कोई कठिन काम नहीं है। तुम जो ऐसा मानते हो कि मैं धर्मात्मा हूँ और युद्धरूपी पाप नहीं करना चाहता, तो यह तुम्हारे हृदयकी दुर्बलता है कमजोरी है। इसका त्याग करके तुम युद्धके लिये खड़े हो जाओ अर्थात् अपने प्राप्त कर्तव्यका पालन करो। यहाँ अर्जुनके सामने युद्धरूप कर्तव्य-कर्म है। इसलिये भगवान् कहते हैं कि 'उठो, खड़े हो जाओ और युद्धरूप कर्तव्यका पालन करो'। भगवान्के मनमें अर्जुनके कर्तव्यके विषयमें जरा-सा भी सन्देह नहीं है। वे जानते हैं कि सभी दृष्टियोंसे अर्जुनके लिये युद्ध करना ही कर्तव्य है। अतः अर्जुनकी थोथी युक्तियोंकी परवाह न करके उनको अपने कर्तव्यका पालन करनेके लिये चट आज्ञा देते हैं कि पूरी तैयारीके साथ युद्ध करनेके लिये खड़े हो जाओ। सम्बन्ध-- पहले अध्यायमें अर्जुनने युद्ध न करनेके विषयमें बहुतसी युक्तियाँ (दलीलें) दी थीं। उन युक्तियोंका कुछ भी आदर न करके भगवान्ने एकाएक अर्जुनको कायरतारूप दोषके लिये जोरसे फटकारा और युद्धके लिये खड़े हो जानेकी आज्ञा दे दी। इस बातको लेकर अर्जुन भी अपनी युक्तियोंका समाधान न पाकर एकाएक उत्तेजित होकर बोल उठे--

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Sri Harikrishnadas Goenka

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Sri Anandgiri

पुनरपि भगवार्जुनं प्रत्याह क्लैब्यमिति। क्लैब्यं क्लीबभावमधैर्यं मा स्म गमः मा गाः। हे पार्थ पृथातनय नहि त्वयि महेश्वरेणापि कृताहवे प्रख्यातपौरुषे महामहिमन्येतदुपपद्यते। क्षुद्रं क्षुद्रत्वकारणं हृदयदौर्बल्यं मनसो दुर्बलत्वमधैर्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ युद्धायोपक्रमं कुरु। हे परंतप परं शत्रुं तापयतीति तथा संबोध्यते।

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Sri Dhanpati

एवं श्रुत्वापि क्लैब्यमत्यजन्तमर्जुनं पुनराह क्लैब्यमिति। क्लैब्यंदृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्णं इत्यादिना प्रदर्शितमधैर्यं मा स्म गमः मा गाः। नैवाङ्गीकुर्वित्यर्थः। यत एतत्क्लैब्यं त्वयि प्रथितप्रभावेऽर्जुने नोपपद्यते उपपन्नं न भवति। तस्मात्क्षुद्रं क्षुद्रताया लधुतायाः संपादकं हृदयस्य दौर्बल्यं दुर्बलभावं निर्वीर्यत्वं त्यक्त्वोत्तिष्ठ युद्धायोद्युक्तो भव। मत्पितृष्वसृपृथातनये त्वयि मत्स्वभाव उचित इति ध्वनयन्नाह हे पार्थेति। पृथया देवप्रसादलब्धे तत्तनयमात्रे त्वयि वीर्यातिशयस्य प्रसिद्धत्वात्। पृथातनयत्वेन त्वं क्लैब्यायोग्य इति केचित्। शत्रूंस्तापय न स्वजनान्स्वहितकर्तृ़निति कथयितुं परंतपेति।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
klaibyamunmanliness
mā smado not
gamaḥyield to
pārthaArjun, the son of Pritha
nanot
etatthis
tvayito you
upapadyatebefitting
kṣhudrampetty
hṛidayaheart
daurbalyamweakness
tyaktvāgiving up
uttiṣhṭhaarise
paramtapa
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 2.2
श्री भगवानुवाच कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्। अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन

श्रीभगवान् बोले - हे अर्जुन! इस विषम अवसरपर तुम्हें यह कायरता कहाँसे प्राप्त हुई, जिसका कि श्रेष्ठ पुरुष सेवन नहीं करते, जो स्वर्गको देनेवाली नहीं है और कीर्ति करनेवाली भी नहीं है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.4
अर्जुन उवाच कथं भीष्ममहं संख्ये द्रोणं च मधुसूदन। इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन

हे मधुसूदन! मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ? क्योंकि हे अरिसूदन! ये दोनों ही पूजाके योग्य हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 2Shlok 3
Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 3
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप

हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 3 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 3 का हिंदी अर्थ: "हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 3?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 3 translates to: "Do not yield to impotence, O Arjuna, son of Pritha. It does not befit you. Cast off this mean weakness of the heart! Stand up, O conqueror of foes! — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते। क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 3 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। हे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayyupapadyate" mean in English?

"klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayyupapadyate" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 3. Do not yield to impotence, O Arjuna, son of Pritha. It does not befit you. Cast off this mean weakness of the heart! Stand up, O conqueror of foes! — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.