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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 37
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः

अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। — VaniSagar

Global Translations

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TeluguIND

చంపబడ్డావు, నీకు స్వర్గం లభిస్తుంది; విజేత, మీరు భూమిని ఆనందిస్తారు; కాబట్టి, ఓ కుంతీ కుమారుడా, పోరాడాలని నిశ్చయించుకున్నాను.

MarathiIND

मारले, तुला स्वर्ग मिळेल; विजयी, तुम्ही पृथ्वीचा आनंद घ्याल; म्हणून हे कुंतीपुत्र, युद्धाचा निश्चय करून उभा राहा.

GujaratiIND

માર્યા ગયા, તમે સ્વર્ગ મેળવશો; વિજયી, તમે પૃથ્વીનો આનંદ માણશો; તેથી, હે કુંતી પુત્ર, લડવાનો સંકલ્પ કરીને ઉભા થાઓ.

BengaliIND

নিহত, আপনি স্বর্গ পাবেন; বিজয়ী, আপনি পৃথিবী উপভোগ করবেন; অতএব, হে কুন্তী পুত্র, যুদ্ধের সংকল্প করে দাঁড়াও।

TamilIND

கொல்லப்பட்டு, சொர்க்கம் பெறுவாய்; வெற்றி, நீங்கள் பூமியை அனுபவிப்பீர்கள்; எனவே, குந்தியின் மகனே, எழுந்து நில்லுங்கள், போரிடத் தீர்மானித்தேன்.

MalayalamIND

നിഹതൻ, നിനക്ക് സ്വർഗ്ഗം ലഭിക്കും; വിജയി, നിങ്ങൾ ഭൂമി ആസ്വദിക്കും; അതിനാൽ, കുന്തിപുത്രാ, യുദ്ധം ചെയ്യാൻ തീരുമാനിച്ചു.

KannadaIND

ಕೊಲ್ಲಲ್ಪಟ್ಟರೆ, ನೀವು ಸ್ವರ್ಗವನ್ನು ಪಡೆಯುವಿರಿ; ವಿಜಯಿ, ನೀವು ಭೂಮಿಯನ್ನು ಆನಂದಿಸುವಿರಿ; ಆದುದರಿಂದ, ಓ ಕುಂತಿಯ ಪುತ್ರನೇ, ಯುದ್ಧಮಾಡಲು ನಿಶ್ಚಯಿಸಿದನು.

PunjabiIND

ਮਾਰੇ ਗਏ, ਤੁਸੀਂ ਸਵਰਗ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰੋਗੇ; ਜੇਤੂ, ਤੁਸੀਂ ਧਰਤੀ ਦਾ ਆਨੰਦ ਮਾਣੋਗੇ; ਇਸ ਲਈ, ਹੇ ਕੁੰਤੀ ਦੇ ਪੁੱਤਰ, ਖੜੇ ਹੋਵੋ, ਲੜਨ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਲਿਆ ਹੈ।

NepaliIND

मार, तिमीले स्वर्ग प्राप्त गर्नेछौ; विजयी, तपाईं पृथ्वीको आनन्द उठाउनुहुनेछ; त्यसैले हे कुन्तीपुत्र, लड्ने संकल्प लिएर उठ ।

SindhiIND

مقتول، توهان کي جنت ملندي؛ فتح مند، توهان زمين مان لطف اندوز ڪنداسين. تنهن ڪري، اي ڪنٽي جا پٽ، اٿي بيهڻ جو ارادو ڪيو.

KonkaniIND

मारून गेल्यार स्वर्ग मेळटलो; जैतिवंत जावन, तुका धर्तरेचो आस्वाद घेतलो; देखून उबो राव, हे कुंतीच्या पूत, झुजपाचो संकल्प केल्लो.

AssameseIND

বধ হ’লে আপুনি স্বৰ্গ লাভ কৰিব; বিজয়ী, তুমি পৃথিৱী উপভোগ কৰিবা; সেয়ে থিয় হ’ব, হে কুন্তীৰ পুত্ৰ, যুদ্ধ কৰিবলৈ সংকল্প লোৱা।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

2.37।। व्याख्या-- 'हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्'-- इसी अध्यायके छठे श्लोकमें अर्जुनने कहा था कि हमलोगोंको इसका भी पता नहीं है कि युद्धमें हम उनको जीतेंगे यह वे हमको जीतेंगे। अर्जुनके इस सन्देहको लेकर भगवान् यहाँ स्पष्ट कहते हैं कि अगर युद्धमें तुम कर्ण आदिके द्वारा मारे भी जाओगे तो स्वर्गको चले जाओगे और अगर युद्धमें तुम्हारी जीत हो जायगी तो यहां पृथ्वीका राज्य भोगोगे। इस तरह तुम्हारे तो दोनों ही हाथोंमें लड्डू हैं। तात्पर्य है कि युद्ध करनेसे तो तुम्हारा दोनों तरफ से लाभ-ही-लाभ है और युद्ध न करनेसे दोनों तरफसे हानि-ही-हानि है। अतः तुम्हें युद्धमें प्रवृत्त हो जाना चाहिये।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

पक्षान्तरमें कर्ण आदि शूरवीरोंके साथ युद्ध करने पर या तो उनके द्वारा मारा जाकर ( तू ) स्वर्गको प्राप्त करेगा अथवा कर्णादि शूरवीरोंको जीतकर पृथिवीका राज्य भोगेगा। अभिप्राय यह कि दोनों तरहसे तेरा लाभ ही है। जब कि यह बात है इसलिये हे कौन्तेय युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा अर्थात् मैं या तो शत्रुओंको जीतूँगा या मर ही जाऊँगा ऐसा निश्चय करके खड़ा हो जा।

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Scripture Scholar

Sri Anandgiri

तर्हि युद्धे गुर्वादिवधवशान्मध्यस्थनिन्दा ततो निवृत्तौ शत्रुनिन्देत्युभयतःपाशा रज्जुरित्याशङ्क्याह युद्धे पुनरिति। जये पराजये च लाभध्रौव्याद्युद्धार्थादुत्थानमावश्यकमित्याह तस्मादिति। नहि परिशुद्धकुलस्य श्रत्रियस्य युद्धायोद्युक्तस्य तस्मादुपरमः साधीयानित्याह कौन्तेयेति। जये पराजये चेत्येतदुभयथेत्युच्यते जयादिनियमाभावेऽपि लाभनियमे फलितमाह यत इति। कृतनिश्चयत्वमेव विशदयति जेष्यामीति।

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Sri Dhanpati

विपक्षे दोषमुक्त्वा युद्धप्रवृत्तौ सर्वथा लाभ एवेत्याशयेनाह हत इति। हतः कर्णादिभिः जित्वा कर्णादीन् यत एवं तस्मात् शत्रूञ्जेष्यामि मरिष्यामिति निश्चयं कृत्वोत्तिष्ठ। कौन्तेयेति संबोधन्शत्रूञ्जित्वा राज्यलाभेनावश्यं त्वया कुन्तयै सुखं प्रदेयमिति द्योतयति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
hataḥslain
or
prāpsyasiyou will attain
swargamcelestial abodes
jitvāby achieving victory
or
bhokṣhyaseyou shall enjoy
mahīmthe kingdom on earth
tasmāttherefore
uttiṣhṭhaarise
kaunteyaArjun, the son of Kunti
yuddhāyafor fight
kṛitaniśhchayaḥ
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Bhagavad Gita · 2.36
अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः। निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्

तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी? — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.38
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ। ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि

जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःखको समान करके फिर युद्धमें लग जा। इस प्रकार युद्ध करनेसे तू पापको प्राप्त नहीं होगा। — VaniSagar

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Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 37
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः

अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 37 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 37 का हिंदी अर्थ: "अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 37?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 37 translates to: "Slain, you will obtain heaven; victorious, you will enjoy the earth; therefore, stand up, O son of Kunti, resolved to fight. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 37 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "hato vā prāpsyasi swargaṁ jitvā vā bhokṣhyase mahīm" mean in English?

"hato vā prāpsyasi swargaṁ jitvā vā bhokṣhyase mahīm" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 37. Slain, you will obtain heaven; victorious, you will enjoy the earth; therefore, stand up, O son of Kunti, resolved to fight. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.