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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 36
अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः। निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्

तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी? — VaniSagar

Global Translations

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TeluguIND

మీ శత్రువులు, మీ శక్తిని అపహాస్యం చేస్తూ, చాలా దుర్భాషలాడుతారు-ఇంతకంటే బాధాకరమైనది ఏముంటుంది?

MarathiIND

तुझे शत्रू, तुझ्या सामर्थ्याची थट्टा उडवून, अनेक अपमानास्पद शब्द बोलतील - यापेक्षा वेदनादायक काय असू शकते?

GujaratiIND

તમારા દુશ્મનો, તમારી શક્તિની મજાક ઉડાવતા, ઘણા અપમાનજનક શબ્દો બોલશે - આનાથી વધુ પીડાદાયક શું હોઈ શકે?

KannadaIND

ನಿಮ್ಮ ಶತ್ರುಗಳು, ನಿಮ್ಮ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಅಪಹಾಸ್ಯ ಮಾಡುತ್ತಾರೆ, ಅನೇಕ ನಿಂದನೀಯ ಪದಗಳನ್ನು ಮಾತನಾಡುತ್ತಾರೆ - ಇದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ನೋವಿನ ಸಂಗತಿ ಏನು?

MalayalamIND

നിങ്ങളുടെ ശക്തിയെ പരിഹസിച്ചുകൊണ്ട് നിങ്ങളുടെ ശത്രുക്കൾ അധിക്ഷേപകരമായ നിരവധി വാക്കുകൾ സംസാരിക്കും-ഇതിനേക്കാൾ വേദനാജനകമായ മറ്റെന്താണ്?

BhojpuriIND

राउर दुश्मन, राउर सत्ता के मजाक उड़ावत, कई गो गाली-गलौज वाला शब्द बोलिहें-एहसे बेसी दर्दनाक का हो सकेला?

MaithiliIND

अहाँक दुश्मन, अहाँक शक्तिक उपहास करैत, कतेको गारि-गरौबलि बजत-एहि सँ बेसी कष्टदायक की भ' सकैत अछि?

DogriIND

तुहाडे दुश्मन, तुहाडी ताकत दा मजाक उड़ांदे होए, कई गाली दे शब्द बोलनगे-इस तों वी ज्यादा दर्दनाक की हो सकदा है?

ManipuriIND

ꯅꯍꯥꯛꯀꯤ ꯁꯛꯇꯤꯕꯨ ꯂꯥꯟꯅꯥ ꯂꯃꯖꯤꯡꯗꯨꯅꯥ ꯅꯍꯥꯛꯀꯤ ꯌꯦꯛꯅꯕꯁꯤꯡꯅꯥ ꯑꯔꯥꯅꯕꯥ ꯋꯥꯍꯩ ꯀꯌꯥ ꯉꯥꯡꯒꯅꯤ—ꯃꯁꯤꯗꯒꯤ ꯍꯦꯟꯅꯥ ꯑꯋꯥꯕꯥ ꯀꯔꯤ ꯂꯩꯒꯅꯤ?

BengaliIND

তোমার শত্রুরা তোমার ক্ষমতাকে উপহাস করে অনেক গালিগালাজ করবে—এর চেয়ে বেদনাদায়ক আর কী হতে পারে?

SindhiIND

توهان جا دشمن، توهان جي طاقت تي ٺٺوليون ڪندي، ڪيترائي گاريون ڳالهائيندا، ان کان وڌيڪ دردناڪ ٻيو ڇا ٿي سگهي ٿو؟

TamilIND

உனது சக்தியைப் பார்த்து ஏளனமாகப் பேசும் உன் எதிரிகள் பல அசிங்கமான வார்த்தைகளைப் பேசுவார்கள் - இதைவிட வேதனையான விஷயம் என்ன?

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

2.36।। व्याख्या -- अवाच्यवादांश्च ৷৷. निन्दन्तस्तव सामर्थ्यम् अहित नाम शत्रुका है, अहित करनेवालेका है। तेरे जो दुर्योधन, दुःशासन, कर्ण आदि शत्रु हैं, तेरे वैर न रखनेपर भी वे स्वयं तेरे साथ वैर रखकर तेरा अहित करनेवाले हैं। वे तेरी सामर्थ्यको जानते हैं कि यह बड़ा भारी शूरवीर है। ऐसा जानते हुए भी वे तेरी सामर्थ्यकी निन्दा करेंगे कि यह तो हिजड़ा है। देखो! यह युद्धके मौकेपर हो गया न अलग! क्या यह हमारे सामने टिक सकता है? क्या यह हमारे साथ युद्ध कर सकता है? इस प्रकार तुझे दुःखी करनेके लिये तेरे भीतर जलन पैदा करनेके लिये न जाने कितने न कहनेलायक वचन कहेंगे। उनके वचनोंको तू कैसे सहेगा?

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा वे तेरे शत्रुगण निवातकवचादिके साथ युद्ध करनेमें दिखलाये हुए तेरे सामर्थ्यकी निन्दा करते हुए बहुतसे अनेक प्रकारके न कहने योग्य वाक्य भी तुझे कहेंगे। उस निन्दाजनित दुःखसे अधिक बड़ा दुःख क्या है अर्थात् उससे अधिक कष्टकर कोई भी दुःख नहीं है।

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Sri Anandgiri

इतश्च मा त्वं युद्धादुपरमं कार्षीरित्याह किञ्चेति। ननु भीष्मद्रोणादिवधप्रयुक्तं कष्टतरं दुःखमसहमानो युद्धान्निवृत्तः स्वसामर्थ्यनिन्दनादि शत्रुकृतं सोढुं शक्ष्यामीत्याशङ्क्याह तत इति।

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Sri Dhanpati

न केवलमेतावदेव मंस्यन्ते अपि तु षण्ढतिल इत्यादिरुपानवाच्यवादानपि वदिष्यन्ति यतोऽहितो इत्याह अवाच्येति। वक्तुमयोग्यान्वादान्वचनानि। अहिताः शत्रवः। ततो निन्दाप्राप्तेर्दुःखात्कष्टतरं दुःखं नास्तीत्यर्थः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
avāchyavādān
chaand
bahūnmany
vadiṣhyantiwill say
tavayour
ahitāḥenemies
nindantaḥdefame
tavayour
sāmarthyammight
tataḥthan that
duḥkhataram
nuindeed
kimwhat
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 2.35
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः। येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम्

महारथीलोग तुझे भयके कारण युद्धसे उपरत (हटा) हुआ मानेंगे। जिनकी धारणामें तू बहुमान्य हो चुका है, उनकी दृष्टिमें तू लघुताको प्राप्त हो जायगा। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.37
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः

अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 2Shlok 36
Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 36
अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः। निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्

तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी? — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 36 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 36 का हिंदी अर्थ: "तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी? — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 36?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 36 translates to: "Your enemies, scoffing at your power, will speak many abusive words—what could be more painful than this? — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अवाच्यवादांश्च बहून् वदिष्यन्ति तवाहिताः। निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु " — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 36 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुत-से वचन भी कहेंगे। उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी? — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "avāchya-vādānśh cha bahūn vadiṣhyanti tavāhitāḥ" mean in English?

"avāchya-vādānśh cha bahūn vadiṣhyanti tavāhitāḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 36. Your enemies, scoffing at your power, will speak many abusive words—what could be more painful than this? — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.