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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 34
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्। संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते

और सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे। वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है। — VaniSagar

Global Translations

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MarathiIND

लोक तुझा सार्वकालिक अपमान देखील सांगतील; आणि ज्याला सन्मानित करण्यात आले आहे त्याच्यासाठी अपमान मृत्यूपेक्षा वाईट आहे.

TeluguIND

ప్రజలు మీ శాశ్వతమైన అవమానాన్ని కూడా వివరిస్తారు; మరియు గౌరవం పొందిన వ్యక్తికి, అవమానం మరణం కంటే ఘోరమైనది.

GujaratiIND

લોકો તમારા સદાકાળના અપમાનને પણ ગણાવશે; અને જેનું સન્માન કરવામાં આવ્યું છે તેના માટે અપમાન મૃત્યુ કરતાં પણ ખરાબ છે.

SindhiIND

ماڻهو به توهان جي هميشه جي بي عزتي کي ياد ڪندا؛ ۽ جنهن کي عزت ڏني وئي آهي، بي عزتي موت کان به بدتر آهي.

TamilIND

ஜனங்களும் உமது நித்திய அவமதிப்பைக் கூறுவார்கள்; மற்றும் மரியாதை பெற்ற ஒருவருக்கு, அவமதிப்பு மரணத்தை விட மோசமானது.

PunjabiIND

ਲੋਕ ਤੁਹਾਡੀ ਸਦੀਵੀ ਬੇਇੱਜ਼ਤੀ ਨੂੰ ਵੀ ਬਿਆਨ ਕਰਨਗੇ; ਅਤੇ ਜਿਸ ਨੂੰ ਸਨਮਾਨ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਉਸ ਲਈ ਬੇਇੱਜ਼ਤੀ ਮੌਤ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਭੈੜੀ ਹੈ।

NepaliIND

मानिसहरूले तपाईंको अनन्त अपमान पनि बताउनेछन्। र जसलाई सम्मान गरिएको छ, अनादर मृत्यु भन्दा पनि खराब छ।

MalayalamIND

നിങ്ങളുടെ നിത്യമായ അപമാനവും ആളുകൾ വിവരിക്കും; ബഹുമാനിക്കപ്പെടുന്നവനെ സംബന്ധിച്ചിടത്തോളം അപമാനം മരണത്തേക്കാൾ മോശമാണ്.

BengaliIND

লোকেরা আপনার চিরস্থায়ী অসম্মানের কথাও বলবে; আর যাকে সম্মান করা হয়েছে তার জন্য অসম্মান মৃত্যুর চেয়েও খারাপ।

BhojpuriIND

लोग भी राउर अनन्त बेइज्जती के बखान करी; आ जेकरा के सम्मान मिलल बा ओकरा खातिर बेइज्जती मौत से भी बुरा होला।

KonkaniIND

लोक तुमचो सासणाचो बेइज्जतीय सांगतले; आनी मान मेळिल्ल्या मनशाक बेइज्जती मरणापरस वायट.

KannadaIND

ಜನರು ನಿಮ್ಮ ಶಾಶ್ವತ ಅವಮಾನವನ್ನು ಸಹ ವಿವರಿಸುತ್ತಾರೆ; ಮತ್ತು ಗೌರವವನ್ನು ಪಡೆದ ಒಬ್ಬನಿಗೆ, ಅವಮಾನವು ಮರಣಕ್ಕಿಂತ ಕೆಟ್ಟದಾಗಿದೆ.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

2.34।। व्याख्या--'अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्' -- मनुष्य, देवता, यक्ष, राक्षस आदि जिन प्राणियोंका तेरे साथ कोई सम्बन्ध नहीं है अर्थात् जिनकी तेरे साथ न मित्रता है और न शत्रुता, ऐसे साधारण प्राणी भी तेरी अपकीर्ति, अपयशका कथन करेंगे कि देखो ! अर्जुन कैसा भीरू था, जो कि अपने क्षात्र-धर्मसे विमुख हो गया। वह कितना शूरवीर था, पर युद्धके मौकेपर उसकी कायरता प्रकट हो गयी, जिसका कि दूसरोंको पता ही नहीं था; आदि-आदि। 'ते' कहनेका भाव है कि स्वर्ग, मृत्यु और पाताल-लोकमें भी जिसकी धाक जमी हुई है, ऐसे तेरी अपकीर्ति होगी। अव्ययाम् कहनेका तात्पर्य है कि जो आदमी श्रेष्ठताको लेकर जितना अधिक प्रसिद्ध होता है, उसकी कीर्ति और अपकीर्ति भी उतनी ही अधिक स्थायी रहनेवाली होती है। 'सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते'-- इस श्लोकके पूर्वार्धमें भगवान्ने साधारण प्राणियोंद्वारा अर्जुनकी निन्दा किये जानेकी बात बतायी। अब श्लोकके उत्तार्धमें सबके लिये लागू होनेवाली सामान्य बात बताते हैं। संसारकी दृष्टिमें जो श्रेष्ठ माना जाता है, जिसको लोग बड़ी ऊँची दृष्टिसे देखते हैं, ऐसे मनुष्यकी जब अपकीर्ति होती है, तब वह अपकीर्ति उसके लिये मरणसे भी अधिक भयंकर दुःखदायी होती है। कारण कि मरनेमें तो आयु समाप्त हुई है, उसने कोई अपराध तो किया नहीं है, परन्तु अपकीर्ति होनेमें तो वह खुद धर्म-मर्यादासे ,कर्तव्यसे च्युत हुआ है। तात्पर्य है कि लोगोंमें श्रेष्ठ माना जानेवाला मनुष्य अगर अपने कर्तव्यसे च्युत होता है, तो उसका बड़ा भयंकर अपयश होता है।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

केवल स्वधर्म और कीर्तिका त्याग होगा इतना ही नहीं सब लोग तेरी बहुत दिनोंतक स्थायी रहनेवाली अपकीर्ति ( निन्दा ) भी किया करेंगे। धर्मात्मा शूरवीर इत्यादि गुणोंसे प्रतिष्ठा पाये हुए पुरुषके लिये अपकीर्ति मरणसे भी अधिक होती है। अभिप्राय यह है कि संभावित ( इज्जतदार ) पुरुषके लिये अपकीर्तिकी अपेक्षा मरना अच्छा है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

युद्धाकरणे क्षत्रियस्य प्रत्यवायमामुष्मिकमापाद्य शिष्टगर्हालक्षणं दीर्घकालभाविनमैहिकमपि प्रत्यवायं प्रतिलम्भयति न केवलमिति। युद्धे स्वस्मरणसंदेहात्तत्परिहारार्थमकीर्तिरपि सोढव्या आत्मसंरक्षणस्य श्रेयस्करत्वादित्याशङ्क्याह धर्मात्मेति। मान्यानामकीर्तिर्भवति मरणादपि दुःसहेति तात्पर्यार्थमाह संभावितस्येति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

किंच अकीर्तिमव्ययां दीर्घकालां धर्मात्मा शूर इत्येवमादिभिर्गुणैः संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते तस्याकीर्तेर्मरणं वरमित्यर्थः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
akīrtiminfamy
chaand
apialso
bhūtānipeople
kathayiṣhyantiwill speak
teof your
avyayāmeverlasting
sambhāvitasyaof a respectable person
chaand
akīrtiḥinfamy
maraṇātthan death
atirichyateis greater
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 2.33
अथ चैत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि। ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि

अब अगर तू यह धर्ममय युद्ध नहीं करेगा, तो अपने धर्म और कीर्तिका त्याग करके पापको प्राप्त होगा। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.35
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः। येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम्

महारथीलोग तुझे भयके कारण युद्धसे उपरत (हटा) हुआ मानेंगे। जिनकी धारणामें तू बहुमान्य हो चुका है, उनकी दृष्टिमें तू लघुताको प्राप्त हो जायगा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 2Shlok 34
Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 34
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्। संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते

और सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे। वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 34 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 34 का हिंदी अर्थ: "और सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे। वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 34?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 34 translates to: "People will also recount your everlasting dishonor; and for one who has been honored, dishonor is worse than death. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्। संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 34 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। और सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे। वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "akīrtiṁ chāpi bhūtāni" mean in English?

"akīrtiṁ chāpi bhūtāni" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 34. People will also recount your everlasting dishonor; and for one who has been honored, dishonor is worse than death. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.