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Sudarshana Chakra
Adhyay 18, Shlok 4
निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम।त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः संप्रकीर्तितः

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है। — VaniSagar

Global Translations

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TamilIND

பாரதங்களில் சிறந்தவனே, இந்தக் கைவிடுதல் பற்றிய முடிவை அல்லது இறுதி உண்மையை என்னிடமிருந்து கேள்; கைவிடுதல், உண்மையில், மனிதர்களில் சிறந்தவரே, மூன்று வகையானதாக அறிவிக்கப்பட்டுள்ளது.

MarathiIND

माझ्याकडून या त्यागाचे निष्कर्ष किंवा अंतिम सत्य ऐका, हे भरतांनो; त्याग, खरोखर, हे सर्वोत्कृष्ट पुरुष, तीन प्रकारचे असल्याचे घोषित केले आहे.

SindhiIND

مون کان ٻڌاءِ ته اِنهيءَ تَتِگيءَ جو نتيجو يا آخري سچ، اي ڀَرتَن جا ڀَلَ. اي ڀلوڙ انسانن کي ڇڏي ڏيڻ کي ٽن قسمن جو قرار ڏنو ويو آهي.

TeluguIND

ఈ పరిత్యాగానికి సంబంధించిన ముగింపు లేదా చివరి సత్యాన్ని నా నుండి వినండి, ఓ భరతులలో ఉత్తముడా; పరిత్యాగం, నిజానికి, ఓ ఉత్తమ పురుషుల, మూడు రకాలుగా ప్రకటించబడింది.

BengaliIND

আমার কাছ থেকে এই বিসর্জন সম্পর্কে উপসংহার বা চূড়ান্ত সত্য শুনুন, হে ভারতবাসীর সেরা; পরিত্যাগ, প্রকৃতপক্ষে, হে শ্রেষ্ঠ মানব, তিন প্রকারের বলে ঘোষণা করা হয়েছে।

MalayalamIND

ഭരതന്മാരിൽ ശ്രേഷ്ഠരേ, ഈ ഉപേക്ഷിക്കലിനെക്കുറിച്ചുള്ള നിഗമനമോ അന്തിമ സത്യമോ എന്നിൽ നിന്ന് കേൾക്കുക. മനുഷ്യരിൽ ശ്രേഷ്ഠരേ, ഉപേക്ഷിക്കൽ മൂന്ന് തരത്തിലാണെന്ന് പ്രഖ്യാപിക്കപ്പെട്ടിരിക്കുന്നു.

KannadaIND

ಭರತರಲ್ಲಿ ಶ್ರೇಷ್ಠನೇ, ಈ ಪರಿತ್ಯಾಗದ ಕುರಿತಾದ ತೀರ್ಮಾನ ಅಥವಾ ಅಂತಿಮ ಸತ್ಯವನ್ನು ನನ್ನಿಂದ ಕೇಳು; ತ್ಯಜಿಸುವಿಕೆ, ವಾಸ್ತವವಾಗಿ, ಓ ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಪುರುಷರೇ, ಮೂರು ವಿಧವೆಂದು ಘೋಷಿಸಲಾಗಿದೆ.

GujaratiIND

મારા તરફથી આ ત્યાગ વિશે નિષ્કર્ષ અથવા અંતિમ સત્ય સાંભળો, હે ભરતના શ્રેષ્ઠીઓ; ત્યાગ, ખરેખર, હે શ્રેષ્ઠ પુરુષો, ત્રણ પ્રકારના હોવાનું જાહેર કરવામાં આવ્યું છે.

NepaliIND

यस त्यागको निष्कर्ष वा अन्तिम सत्य मबाट सुन्नुहोस्, हे भरतहरूका सर्वश्रेष्ठ! परित्याग, वास्तवमा, हे सर्वश्रेष्ठ पुरुषहरू, तीन प्रकारका घोषित गरिएको छ।

PunjabiIND

ਇਸ ਤਿਆਗ ਬਾਰੇ ਸਿੱਟਾ ਜਾਂ ਅੰਤਮ ਸੱਚ ਮੇਰੇ ਕੋਲੋਂ ਸੁਣੋ, ਹੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਸ੍ਰੇਸ਼ਟ; ਤਿਆਗ, ਸੱਚਮੁੱਚ, ਹੇ ਸਰਬੋਤਮ ਮਨੁੱਖ, ਤਿੰਨ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਐਲਾਨਿਆ ਗਿਆ ਹੈ।

AssameseIND

এই পৰিত্যাগ সম্পৰ্কে সিদ্ধান্ত বা চূড়ান্ত সত্য মোৰ পৰা শুনা হে ভাৰত শ্ৰেষ্ঠ; পৰিত্যাগ, সঁচাকৈয়ে, হে পুৰুষ শ্ৰেষ্ঠ, তিনিবিধ বুলি ঘোষণা কৰা হৈছে।

MizoIND

He kalsan chungchangah hian thutawp emaw, thudik hnuhnung ber emaw chu Ka hnen atangin ngaithla rawh, Aw Bharata tha ber; kalsan chu, a dik tak chuan, Aw mihring tha ber ber, chi thum a nih thu puan a ni tawh.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम -- हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन अब मैं संन्यास और त्याग -- दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें अपना मत कहता हूँ? उसको तुम सुनो।त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः संप्रकीर्तितः -- हे पुरुषव्याघ्र त्याग तीन तरहका कहा गया है -- सात्त्विक? राजस और तामस। वास्तवमें भगवान्के मतमें सात्त्विक त्याग ही त्याग है परन्तु उसके साथ राजस और तामस त्यागका भी वर्णन करनेका तात्पर्य यह है कि उसके बिना भगवान्के अभीष्ट सात्त्विक त्यागकी श्रेष्ठता स्पष्ट नहीं होती क्योंकि परीक्षा या तुलना करके किसी भी वस्तुकी श्रेष्ठता सिद्ध करनेके लिये दूसरी वस्तुएँ सामने रखनी ही पड़ती हैं।तीन प्रकारका त्याग बतानेका तात्पर्य यह भी है कि साधक सात्त्विक त्यागको ग्रहण करे और राजस तथा तामस त्यागका त्याग करे।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

इन विकल्पभेदोंमें --, हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठतम अर्जुन उस पूर्वदर्शित त्यागके विषयमें? अर्थात् त्यागसंन्यास सम्बन्धी विकल्पोंके विषयमें? तू मेरा निश्चय सुन? अर्थात् मेरे वचनोंसे कहा हुआ तत्त्व भली प्रकार समझ। त्याग और संन्यासशब्दका जो वाच्यार्थ है वह एक ही है? इस अभिप्रायसे केवल त्यागके नामसे ही,( प्रश्नका ) उत्तर देते हैं। हे पुरुषसिंह ( उस ) त्यागका शास्त्रोंमें तामस आदि तीन प्रकारके भेदोंसे भली प्रकार निरूपण किया गया है। जिससे कि आत्मज्ञानरहित कर्माधिकारी -- कर्मी पुरुषका ही त्यागसंन्यासशब्दका वाच्यार्थ ( संन्यास ) तामस आदि भेदोंसे तीन प्रकारका होना सम्भव है? परमार्थज्ञानी नहीं यह अभिप्राय समझमें आना बड़ा कठिन है? इसलिये इस विषयमें यथार्थ तत्त्व बतलानेको दूसरा कोई समर्थ नहीं है? अतः तू मुझ ईश्वरका शास्त्रोंके यथार्थ अभिप्रायसे युक्त निश्चय सुन।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

कर्माधिकृतान्प्रत्येवोक्तविकल्पप्रवृत्तावपि कुतो निर्धारणसिद्धिस्तत्राह -- तत्रेति। तमेव निश्चयं दर्शयितुमादौ त्यागगतमवान्तरविभागमाह -- त्यागो हीति। ननु त्यागसंन्यासयोरुभयोरपि प्रकृतत्वाविशेषे त्यागस्यैवावान्तरविभागाभिधाने संन्यासस्योपेक्षितत्वमापद्येत नेत्याह -- त्यागेति। सात्त्विको राजसस्तामसश्चेत्युक्तेऽर्थे त्रैविध्येऽपि स्वयमेव निश्चयासंभवात्किमत्र भागवतेन निश्चयेनेत्याशङ्क्याह -- यस्मादिति। भगवतोऽन्येनोक्तविभागे तत्त्वानिश्चयाद्भागवतनिश्चयस्य श्रोतव्यतेति निगमयति -- तस्मादिति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

एवं मतभेदेन संन्यासत्यागशब्दार्थयोस्तत्त्वं पृथगुक्त्वा स्वाभिमतं तयोरैक्यं दर्शियितुमाह -- निश्चयमिति। तत्र त्यागे त्यागसंन्यासविकल्पे मे मम वचनान्निश्चयं श्रृण्ववधारय। त्यागसंन्यासवाच्यो योर्थः स एकएवेत्यभिप्रेत्याह। त्यागस्त्रिविधः त्रिप्रकारः तामसादिप्रकारैः संप्रकीर्तितः सम्यक्शास्त्रेषु कथितः हि चस्मात्त्यागसंन्यासशब्दवाच्योऽर्थोधिकृतस्य कर्मिणोऽनात्मज्ञस्य तामसादिभेदेन त्रिविधः शास्त्रेषु संप्रकीर्तितः सर्वशास्त्र्ज्ञादीश्वरादन्येन वक्तुमशक्यः। तस्मादत्र दुर्विज्ञानेऽर्थे परमार्थशास्त्रार्थविषयमैश्वरं निश्चयमध्वसायं श्रुणु। भरतानां क्षत्रियवराणां मध्ये सत्तम साधुतमेति संबोधयन् क्षत्रियवरैः कर्तव्ये त्यागे संन्यासे च मयोत्यमानं निश्चयं श्रृण्विति ध्वनयति। न केवलं क्षत्रियवरैरेव कर्तव्ये त्यागसंन्याससश्ब्दार्थे निश्चयो मयोच्यतेऽपितु पुरुषश्रेष्ठैरन्यैपरि कर्माधिकृतैरज्ञैः कर्तव्ये तस्मन्निति ध्वनयन् संबोधयति पुरुषव्याघ्रेति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
niśhchayamconclusion
śhṛiṇuhear
memy
tatrathere
tyāgeabout renunciation of desires for enjoying the fruits of actions
bharatasat
tyāgaḥrenunciation of desires for enjoying the fruits of actions
hiindeed
puruṣhavyāghra
trividhaḥ
samprakīrtitaḥdeclared
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 18.3
त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणः। यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे

श्रीभगवान् बोले -- कई विद्वान् काम्य-कर्मोंके त्यागको संन्यास कहते हैं और कई विद्वान् सम्पूर्ण कर्मोंके फलके त्यागको त्याग कहते हैं। कई विद्वान् कहते हैं कि कर्मोंको दोषकी तरह छोड़ देना चाहिये और कई विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ, दान और तप-रूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 18.5
यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्

यज्ञ, दान और तपरूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये, प्रत्युत उनको तो करना ही चाहिये क्योंकि यज्ञ, दान और तप -- ये तीनों ही कर्म मनीषियोंको पवित्र करनेवाले हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 18Shlok 4
Bhagavad Gita · Adhyay 18, Shlok 4
निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम।त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः संप्रकीर्तितः

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ: "हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 4?

Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 4 translates to: "Hear from Me the conclusion or the final truth about this abandonment, O best of the Bharatas; abandonment, indeed, O best of men, has been declared to be of three kinds. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम।त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः संप्रकीर्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 18, श्लोक 4 है जो Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga में संकलित है। हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "niśhchayaṁ śhṛiṇu me tatra tyāge bharata-sattama" mean in English?

"niśhchayaṁ śhṛiṇu me tatra tyāge bharata-sattama" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 4. Hear from Me the conclusion or the final truth about this abandonment, O best of the Bharatas; abandonment, indeed, O best of men, has been declared to be of three kinds. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.