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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 28
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति। तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति

जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्रके सम्मुख दौड़ते हैं, ऐसे ही वे संसारके महान् शूरवीर आपके प्रज्वलित मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं। — VaniSagar

Global Translations

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BengaliIND

সত্যই, নদীগুলির অনেক স্রোত যেমন সাগরের দিকে প্রবাহিত হয়, তেমনি মানুষের জগতের এই বীররাও আপনার জ্বলন্ত মুখে প্রবেশ করে।

OdiaIND

ପ୍ରକୃତରେ, ଯେତିକି ନଦୀ ସ୍ରୋତ ସମୁଦ୍ର ଆଡକୁ ପ୍ରବାହିତ ହୁଏ, ସେହିପରି ମନୁଷ୍ୟ ଜଗତର ଏହି ହିରୋମାନେ ମଧ୍ୟ ତୁମର ଜ୍ୱଳନ୍ତ ପାଟିରେ ପ୍ରବେଶ କରନ୍ତି |

TeluguIND

నిశ్చయంగా, అనేక నదుల ప్రవాహాలు సముద్రం వైపు ప్రవహించినట్లే, మనుష్యుల ప్రపంచంలోని ఈ వీరులు కూడా నీ జ్వలించే నోటిలోకి ప్రవేశిస్తారు.

MalayalamIND

തീർച്ചയായും, അനേകം നദികൾ സമുദ്രത്തിലേക്ക് ഒഴുകുന്നതുപോലെ, മനുഷ്യലോകത്തിലെ ഈ വീരന്മാരും അങ്ങയുടെ ജ്വലിക്കുന്ന വായിൽ പ്രവേശിക്കുന്നു.

TamilIND

மெய்யாகவே, பல ஆறுகள் பெருங்கடலை நோக்கிப் பாய்வது போல, மனிதர்களின் உலகில் இந்த நாயகர்களும் உமது வாயில் நுழைகிறார்கள்.

GujaratiIND

ખરેખર, જેમ નદીઓના ઘણા પ્રવાહો સમુદ્ર તરફ વહે છે, તે જ રીતે પુરુષોની દુનિયાના આ નાયકો પણ તમારા જ્વલંત મુખમાં પ્રવેશ કરે છે.

KannadaIND

ನಿಜವಾಗಿ, ಅನೇಕ ನದಿಗಳ ಧಾರೆಗಳು ಸಮುದ್ರದ ಕಡೆಗೆ ಹರಿಯುವಂತೆಯೇ, ಮನುಷ್ಯರ ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಈ ವೀರರೂ ಸಹ ನಿನ್ನ ಜ್ವಲಂತ ಬಾಯಿಯನ್ನು ಪ್ರವೇಶಿಸುತ್ತಾರೆ.

NepaliIND

निस्सन्देह, जसरी धेरै नदीहरू समुन्द्रतिर बग्छन्, त्यसरी नै मानिसहरूको संसारमा यी वीरहरू तपाईंको ज्वालामुखी मुखमा प्रवेश गर्छन्।

SindhiIND

ڇوته، جهڙيءَ طرح دريائن جا ڪيترائي وهڪرا سمنڊ ڏانهن وهن ٿا، تيئن دنيا جا هي هيرو به تنهنجي ٻرندڙ وات ۾ داخل ٿين ٿا.

MarathiIND

खरेच, ज्याप्रमाणे नद्यांचे अनेक प्रवाह समुद्राकडे वाहतात, त्याचप्रमाणे मनुष्यांच्या जगात हे वीरही तुझ्या ज्वलंत मुखात प्रवेश करतात.

PunjabiIND

ਸੱਚਮੁੱਚ, ਜਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਰਿਆਵਾਂ ਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਝਰਨੇ ਸਮੁੰਦਰ ਵੱਲ ਵਗਦੇ ਹਨ, ਉਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੇ ਸੰਸਾਰ ਵਿੱਚ ਇਹ ਸੂਰਮੇ ਵੀ ਤੇਰੇ ਬਲਦੇ ਮੂੰਹ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਵੇਸ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ।

MizoIND

Dik tak chuan lui luang tam tak tuifinriat lam pan a luang ang bawkin, mihring khawvela heng mi huaisen te pawh hi I hmui alh takah an lut ve bawk a ni.

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति'--मूलमें जलमात्र समुद्रका है। वही जल बादलोंके द्वारा वर्षारूपमें पृथ्वीपर बरसकर झरने, नाले आदिको लेकर नदियोंका रूप धारण करता है। उन नदियोंके जितने वेग हैं, प्रवाह हैं, वे सभी स्वाभाविक ही समुद्रकी तरफ दौड़ते हैं। कारण कि जलका उद्गम स्थान समुद्र ही है। वे सभी जल-प्रवाह समुद्रमें जाकर अपने नाम और रूपको छोड़कर अर्थात् गङ्गा, यमुना, सरस्वती आदि नामोंको और प्रवाहके रूपको छोड़कर समुद्ररूप ही हो जाते हैं। फिर वे जल-प्रवाह समुद्रके सिवाय अपना कोई अलग, स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं रखते। वास्तवमें तो उनका स्वतन्त्र अस्तित्व पहले भी नहीं था? केवल नदियोंके प्रवाहरूपमें होनेके कारण वे अलग दीखते थे।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

वे किस प्रकार मुखोंमें प्रवेश करते हैं? सो कहते हैं --, जैसे चलती हुई नदियोंके बहुतसे जलप्रवाह बड़े वेगसे समुद्रके सम्मुख हुए ही दौड़ते हैं -- समुद्रमें ही प्रवेश करते हैं? वैसे ही यह मनुष्यलोकके शूरवीर भीष्मादि आपके प्रज्वलित प्रकाशमान मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

उभयोरपि सेनयोरवस्थितानां राज्ञां भगवन्मुखप्रवेशं निदर्शनेन विशदयति -- कथमित्यादिना।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

तत्र दृष्टान्तमाह। यथा नदीनां स्त्रवन्तीनां बहवो जलानां वेगाः समुद्रमेवाभिमुखाः प्रतिमुखा द्रवन्ति विशन्ति तथामी नरलोकवीरास्तव मुखान्यभिविज्वन्ति प्रकाशभानानि विशन्ति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
yathāas
nadīnāmof the rivers
bahavaḥmany
ambuvegāḥ
samudramthe ocean
evaindeed
abhimukhāḥtoward
dravantiflowing rapidly
tathāsimilarly
tavayour
amīthese
naraloka
viśhantienter
vaktrāṇimouths
abhivijvalantiblazing
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.27
वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति दंष्ट्राकरालानि भयानकानि। केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु संदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः

हमारे मुख्य योद्धाओंके सहित भीष्म, द्रोण और वह कर्ण भी आपमें प्रविष्ट हो रहे हैं। राजाओंके समुदायोंके सहित धृतराष्ट्रके वे ही सब-के-सब पुत्र आपके विकराल दाढ़ोंके कारण भयंकर मुखोंमें बड़ी तेजीसे प्रविष्ट हो रहे हैं। उनमेंसे कईएक तो चूर्ण हुए सिरोंसहित आपके दाँतोंके बीचमें फँसे हुए दीख रहे हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.29
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः। तथैव नाशाय विशन्ति लोका स्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः

जैसे पतंगे मोहवश अपना नाश करनेके लिये बड़े वेगसे दौड़ते हुए प्रज्वलित अग्निमें प्रविष्ट होते हैं, ऐसे ही ये सब लोग भी मोहवश अपना नाश करनेके लिये बड़े वेगसे दौड़ते हुए आपके मुखोंमें प्रविष्ट हो रहे हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 28
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 28
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति। तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति

जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्रके सम्मुख दौड़ते हैं, ऐसे ही वे संसारके महान् शूरवीर आपके प्रज्वलित मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 28 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 28 का हिंदी अर्थ: "जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्रके सम्मुख दौड़ते हैं, ऐसे ही वे संसारके महान् शूरवीर आपके प्रज्वलित मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 28?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 28 translates to: "Verily, just as many torrents of rivers flow towards the ocean, so too these heroes in the world of men enter Thy flaming mouths. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति। तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 28 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। जैसे नदियोंके बहुत-से जलके प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्रके सम्मुख दौड़ते हैं, ऐसे ही वे संसारके महान् शूरवीर आपके प्रज्वलित मुखोंमें प्रवेश कर रहे हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "yathā nadīnāṁ bahavo ’mbu-vegāḥ" mean in English?

"yathā nadīnāṁ bahavo ’mbu-vegāḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 28. Verily, just as many torrents of rivers flow towards the ocean, so too these heroes in the world of men enter Thy flaming mouths. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.