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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 2
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्

हे कमलनयन ! सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलय मैंने विस्तारपूर्वक आपसे ही सुना है और आपका अविनाशी माहात्म्य भी सुना है। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

SindhiIND

مخلوقات جي پيدائش ۽ تباهي توکان تفصيل سان ٻڌو ويو آهي، اي لوٽس-اکين رب، ۽ پڻ توهان جي ناقابل فراموش عظمت.

TamilIND

தாமரைக் கண்களையுடைய இறைவனே, உன்னிடம் இருந்து உயிரினங்களின் தோற்றம் மற்றும் அழிவு விரிவாகக் கேட்கப்பட்டது, மேலும் உனது வற்றாத பெருந்தன்மையும்.

TeluguIND

ఓ తామర కన్నుల ప్రభూ, మరియు తరగని నీ గొప్పతనం నుండి జీవుల మూలం మరియు విధ్వంసం వివరంగా వినబడింది.

KannadaIND

ಜೀವಿಗಳ ಉಗಮ ಮತ್ತು ವಿನಾಶವನ್ನು ನಿಮ್ಮಿಂದ ವಿವರವಾಗಿ ಕೇಳಲಾಗಿದೆ, ಓ ಕಮಲದ ಕಣ್ಣುಗಳು, ಮತ್ತು ನಿಮ್ಮ ಅಕ್ಷಯ ಶ್ರೇಷ್ಠತೆ.

NepaliIND

हे कमल-नेत्र भगवान, तपाईंबाट प्राणीहरूको उत्पत्ति र विनाशको बारेमा विस्तृत रूपमा सुनिएको छ, र तपाईंको अपार महानता पनि।

MarathiIND

हे कमळरूपी देवा, प्राणिमात्रांची उत्पत्ती आणि नाश ही तुझ्याकडून सविस्तरपणे ऐकली गेली आहे आणि तुझी अतुलनीय महानताही ऐकली आहे.

MalayalamIND

താമരക്കണ്ണുള്ള ഭഗവാനേ, ജീവികളുടെ ഉത്ഭവവും നാശവും അങ്ങയിൽ നിന്ന് വിശദമായി കേട്ടിട്ടുണ്ട്, കൂടാതെ നിങ്ങളുടെ അക്ഷയമായ മഹത്വവും.

PunjabiIND

ਜੀਵਾਂ ਦੀ ਉਤਪੱਤੀ ਅਤੇ ਨਾਸ਼, ਹੇ ਕੰਵਲ-ਅੱਖਾਂ ਵਾਲੇ ਪ੍ਰਭੂ, ਤੇਰੇ ਪਾਸੋਂ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਸੁਣੀ ਗਈ ਹੈ ਅਤੇ ਤੇਰੀ ਅਮੁੱਕ ਮਹਾਨਤਾ ਵੀ।

GujaratiIND

હે કમળની આંખોવાળા ભગવાન, તમારી પાસેથી જીવોની ઉત્પત્તિ અને વિનાશ વિશે વિગતવાર સાંભળવામાં આવ્યું છે, અને તમારી અખૂટ મહાનતા પણ.

AssameseIND

সত্তাৰ উৎপত্তি আৰু ধ্বংস আপোনাৰ পৰা বিতংভাৱে শুনা গৈছে, হে পদ্ম চকুৰ প্ৰভু, লগতে আপোনাৰ অক্ষয় মহত্ত্বও।

KonkaniIND

प्राण्यांची उत्पत्ती आनी नाश तुजे कडल्यान सविस्तरपणान आयकला, हे कमळनेत्र प्रभु, तशेंच तुजें अक्षय व्हडपण.

ManipuriIND

ꯖꯤꯕꯁꯤꯡꯒꯤ ꯍꯧꯔꯀꯐꯝ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯃꯥꯡꯍꯟ ꯇꯥꯀꯍꯅꯕꯒꯤ ꯃꯇꯥꯡꯗꯥ ꯑꯗꯣꯃꯗꯒꯤ ꯑꯀꯨꯞꯄꯥ ꯃꯔꯣꯜ ꯇꯥꯕꯥ ꯐꯪꯂꯦ, ꯍꯦ ꯄꯗ꯭ꯝꯃꯤꯠꯀꯤ ꯄ꯭ꯔꯚꯨ, ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯅꯍꯥꯛꯀꯤ ꯂꯣꯏꯕꯥ ꯅꯥꯏꯗꯕꯥ ꯑꯊꯣꯏꯕꯥ ꯑꯗꯨꯁꯨ꯫

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --भवाप्ययौ हि भूतानां त्वत्तः श्रुतौ विस्तरशो मया -- भगवान्ने पहले कहा था-- मैं सम्पूर्ण जगत्का प्रभव और प्रलय हूँ, मेरे सिवाय अन्य कोई कारण नहीं है (7। 6 7); सात्त्विक, राजस और तामस भाव मेरेसे ही होते हैं (7। 12); प्राणियोंके अलग-अलग अनेक तरहके भाव मेरेसे ही होते हैं (10। 4 5); सम्पूर्ण प्राणी मेरेसे ही होते हैं और मेरेसे ही सब चेष्टा करते हैं (10। 8); प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें मैं ही हूँ (10। 20); और सम्पूर्ण सृष्टियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें मैं ही हूँ (10। 32)। इसीको लेकर अर्जुन यहाँ कहते हैं कि मैंने आपसे प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलयका वर्णन विस्तारसे सुना है। इसका तात्पर्य प्राणियोंकी उत्पत्ति और विनाश सुननेसे नहीं है, प्रत्युत इसका तात्पर्य यह सुननेसे है कि सभी प्राणी आपसे ही उत्पन्न होते हैं, आपमें ही रहते हैं और आपमें ही लीन हो जाते हैं अर्थात् सब कुछ आप ही हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, मैंने आपसे प्राणियोंके भव -- उत्पत्ति और अप्यय -- प्रलय? ये दोनों संक्षेपसे नहीं? विस्तारपूर्वक सुने हैं और हे कमलपत्राक्ष अर्थात् कमलपत्रके सदृश नेत्रोंवाले कृष्ण आपका अविनाशी -- अक्षय माहात्म्य भी मैं सुन चुका हूँ। श्रुतम् यह क्रियापद पूर्ववाक्यसे लिया गया है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

सप्तमादारभ्य तत्पदार्थनिर्णयार्थमपि भगवदुक्तं वचो मया श्रुतमित्याह -- किञ्चेति। त्वत्तो भूतानामुत्पत्तिप्रलयौ त्वत्तः श्रुतावित्याभ्यां संबध्यते? महात्मनस्तव भावो माहात्म्यं पारमार्थिकं सोपाधिकं वा सर्वात्मत्वादिरूपं श्रुतमिति परिणम्यानुवृत्तिं द्योतयितुमपिचेत्युक्तम्।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

किंचायं वासुदेवो मम मातुलेय इति त्वयि मनुष्यत्वप्रतीत्युत्पादकल्येश्वरस्वरुपावरकस्य मोहस्य निवर्तकमपि वचो मया श्रुतमित्याशयवानाह। भवाप्ययौ उत्पत्तिप्रलयौ भूतानां त्वत्तो भवति इति त्वत्तो मया श्रुतौ।अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते इत्यादिना तदपि न संक्षेपतोऽपि त्वसकृदित्याह -- विस्तरश इति। कमलपत्रे इव विशाले रक्तान्ते अक्षिणी यस्य सः कमपपत्राक्ष इत्यङ्गीकृतकमलपत्राक्षरुपात्त्वत्तएव भूतानां पालनमिति द्योतनाय तथा संबोधयनम्। महात्मो भावो माहात्म्यमपि त्वदीयमव्ययमपक्षयरहितमैश्वर्यं मया श्रुतमिति विपरिणोमेनानुषज्जाते।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
bhavaappearance
apyayaudisappearance
hiindeed
bhūtānāmof all living beings
śhrutauhave heard
vistaraśhaḥin detail
mayāby me
tvattaḥfrom you
kamalapatra
māhātmyamgreatness
apialso
chaand
avyayameternal
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Bhagavad Gita · 11.1
अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्। यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम

केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.3
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर। द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम

हे पुरुषोत्तम ! आप अपने-आपको जैसा कहते हैं, यह वास्तवमें ऐसा ही है। हे परमेश्वर ! आपके ईश्वर-सम्बन्धी रूपको मैं देखना चाहता हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 2
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 2
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्

हे कमलनयन ! सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलय मैंने विस्तारपूर्वक आपसे ही सुना है और आपका अविनाशी माहात्म्य भी सुना है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ: "हे कमलनयन ! सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलय मैंने विस्तारपूर्वक आपसे ही सुना है और आपका अविनाशी माहात्म्य भी सुना है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 2?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 2 translates to: "The origin and destruction of beings have been heard in detail from You, O lotus-eyed Lord, and also Your inexhaustible greatness. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्यय" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 2 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। हे कमलनयन ! सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलय मैंने विस्तारपूर्वक आपसे ही सुना है और आपका अविनाशी माहात्म्य भी सुना है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "bhavāpyayau hi bhūtānāṁ śhrutau vistaraśho mayā" mean in English?

"bhavāpyayau hi bhūtānāṁ śhrutau vistaraśho mayā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 2. The origin and destruction of beings have been heard in detail from You, O lotus-eyed Lord, and also Your inexhaustible greatness. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.