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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 1
अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्। यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम

केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है। — VaniSagar

Global Translations

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KannadaIND

ನೀನು ಹೇಳಿದ ಆತ್ಮಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅತ್ಯುನ್ನತ ರಹಸ್ಯದ ಈ ವಿವರಣೆಯಿಂದ, ನನ್ನನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸುವುದಕ್ಕಾಗಿ, ನನ್ನ ಭ್ರಮೆಯನ್ನು ತೊಡೆದುಹಾಕಲಾಗಿದೆ.

BengaliIND

আশীর্বাদের জন্য আপনি যে আত্মা সম্বন্ধে উচ্চতম গোপন কথা বলেছেন, তার এই ব্যাখ্যার দ্বারা আমার ভ্রম দূর হয়েছে।

PunjabiIND

ਇਸ ਪਰਮ ਭੇਦ ਦੀ ਵਿਆਖਿਆ ਕਰਨ ਦੁਆਰਾ, ਜੋ ਤੂੰ ਮੈਨੂੰ ਬਖਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਬੋਲਿਆ ਹੈ, ਮੇਰਾ ਭਰਮ ਦੂਰ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ।

MalayalamIND

എന്നെ അനുഗ്രഹിക്കുവാൻ വേണ്ടി നീ പറഞ്ഞ ആത്മരഹസ്യത്തിൻ്റെ ഈ വിശദീകരണത്താൽ എൻ്റെ ഭ്രമം നീങ്ങി.

SindhiIND

هن ذات جي اعليٰ ترين راز جي وضاحت سان، جيڪو تو ٻڌايو، منهنجي برڪت خاطر، منهنجو وهم دور ٿي ويو.

NepaliIND

आशीर्वादको लागि तपाईले बोल्नु भएको परमात्माको सर्वोच्च रहस्यको यस व्याख्याले मेरो भ्रम हटेको छ।

MarathiIND

माझ्यावर आशीर्वाद देण्यासाठी तू बोललेल्या आत्म्याविषयीच्या सर्वोच्च रहस्याच्या या स्पष्टीकरणाने माझा भ्रम दूर झाला आहे.

GujaratiIND

તમે જે આત્માને લગતા સર્વોચ્ચ રહસ્યની વાત કરી છે તેના આ ખુલાસાથી, મને આશીર્વાદ આપવા માટે, મારી ભ્રમણા દૂર થઈ ગઈ છે.

TamilIND

என்னை ஆசீர்வதிப்பதற்காக, நீ கூறிய சுயத்தைப் பற்றிய மிக உயர்ந்த ரகசியத்தின் இந்த விளக்கத்தால், என் மாயை விலகியது.

TeluguIND

నన్ను ఆశీర్వదించడం కోసం నువ్వు చెప్పిన ఆత్మకు సంబంధించిన అత్యున్నత రహస్యాన్ని ఈ విధంగా వివరించడం ద్వారా నా మాయ తొలగిపోయింది.

BhojpuriIND

हमरा के आशीर्वाद खातिर जवन आत्म के बारे में उच्चतम रहस्य कहले बानी ओकर एह व्याख्या से हमार भ्रम दूर हो गइल बा।

MaithiliIND

अहाँ हमरा आशीर्वादक लेल जे आत्म संबंधी सर्वोच्च रहस्य बाजल छी ओकर एहि व्याख्या सँ हमर भ्रम दूर भ' गेल अछि ।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'मदनुग्रहाय'--मेरा भजन करनेवालोंपर कृपा करके मैं स्वयं उनके अज्ञानजन्य अन्धकारका नाश कर देता हूँ (गीता 10। 11) -- यह बात भगवान्ने केवल कृपा-परवश होकर कही। इस बातका अर्जुनपर बड़ा प्रभाव प़ड़ा, जिससे अर्जुन भगवान्की स्तुति करने लगे (10। 12 -- 15)। ऐसी स्तुति उन्होंने पहले गीतामें कहीं नहीं की। उसीका लक्ष्य करके अर्जुन यहाँ कहते हैं कि केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने ऐसी बात कही है ।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

( पूर्वाध्यायमें जो ) भगवान्की विभूतियोंका वर्णन किया गया है उसमें भगवान्से कहे हुए मैं इस सारे जगत्को एक अंशसे व्याप्त करके स्थित हूँ इन वचनोंको सुनकर ईश्वरका जो जगदात्मक आदि स्वरूप है उसका प्रत्यक्ष दर्शन करनेकी इच्छासे अर्जुन बोला --, मुझपर अनुग्रह करनेके लिये आपने जो परम -- अत्यन्त श्रेष्ठ? गुह्य -- गोपनीय? अध्यात्य नामक अर्थात् आत्माअनात्माके विवेचनविषयक वाक्य कहे हैं? उन आपके वचनोंसे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है अर्थात् मेरी अविवेकबुद्धि नष्ट हो गयी है।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

तेन तेनात्मना भगवदनुसंधानार्थमुक्ता विभूतीरनुवदति -- भगवत इति। परस्य सोपाधिकं निरुपाधिकं च चिद्रूपं ध्येयत्वेन ज्ञेयत्वेन चोक्तमित्यर्थः। सोपाधिकमैश्वरं रूपमशेषजगदात्मकं विश्वरूपाख्यमधिकृत्याध्यायन्तरमवतारयन्ननन्तरप्रश्नोपयोगित्वेन वृत्तं कीर्तयति -- तत्र चेति। यदेतदशेषप्रपञ्चात्मकमखिलस्यैतस्य जगतः कारणं सर्वज्ञं सर्वैश्वर्यवद्रूपमुक्तं तदिदं श्रुत्वा तस्य साक्षात्कारं यियाचिषुरादौ पृष्टवानित्याह -- श्रुत्वेति। मयि करुणां निमित्तीकृत्योपकारोऽनुग्रहस्तदर्थमिति वचसो विशेषणम्। निरतिशयत्वं परमपुरुषार्थसाधनत्वम्। अशोच्यानित्यादित्वंपदार्थप्रधानं वाक्यम्। मोहस्यायमित्यात्मसाक्षिकत्वं दर्शयति। अविवेकबुद्धिरज्ञानविपर्यासात्मिका।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

एवं विभूतीर्निरतिशयैश्वर्य च श्रुत्वा साक्षात्कर्तुमिच्छन्नर्जुन उवाच मदनुग्रहार्थ परममुत्कृष्टं परमपुरुषार्थसाधनत्वात् गोप्यमध्यात्मसंक्षितं वजस्त्वंपदार्थप्रधानमशोच्यानित्यादि यत्त्वयोक्तं तेन ममायं मोहोऽहंममेतिप्रत्ययजनकः कर्तृत्वादिहहितात्मस्वरुपावरको विगतो विशेषेण निवृत्तः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
arjunaḥ uvāchaArjun said
matanugrahāya
paramamsupreme
guhyamconfidential
adhyātmasanjñitam
yatwhich
tvayāby you
uktamspoken
vachaḥwords
tenaby that
mohaḥillusion
ayamthis
vigataḥis dispelled
mamamy
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.2
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष माहात्म्यमपि चाव्ययम्

हे कमलनयन ! सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति और प्रलय मैंने विस्तारपूर्वक आपसे ही सुना है और आपका अविनाशी माहात्म्य भी सुना है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 1
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 1
अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्। यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम

केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 1 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 1 का हिंदी अर्थ: "केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 1?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 1 translates to: "By this explanation of the highest secret concerning the Self which Thou hast spoken, for the sake of blessing me, my delusion has been dispelled. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम्। यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 1 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। केवल मेरेपर कृपा करनेके लिये ही आपने जो परम गोपनीय अध्यात्मतत्तव जाननेका वचन कहा, उससे मेरा यह मोह नष्ट हो गया है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "arjuna uvācha" mean in English?

"arjuna uvācha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 1. By this explanation of the highest secret concerning the Self which Thou hast spoken, for the sake of blessing me, my delusion has been dispelled. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.