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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 12
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता। यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः

अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो। — VaniSagar

Global Translations

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MarathiIND

आकाशात एकाच वेळी हजार सूर्यांचे तेज प्रज्वलित झाले तर तेच त्या पराक्रमी अस्तित्वाचे तेज असेल.

TeluguIND

వెయ్యి సూర్యుల తేజస్సు ఆకాశంలో ఏకకాలంలో ప్రజ్వరిల్లితే, అది ఆ మహాబలవంతుడి వైభవం.

KannadaIND

ಸಹಸ್ರ ಸೂರ್ಯರ ತೇಜಸ್ಸು ಏಕಕಾಲದಲ್ಲಿ ಆಕಾಶದಲ್ಲಿ ಪ್ರಜ್ವಲಿಸಿದರೆ ಅದು ಆ ಪರಾಕ್ರಮಿಯ ತೇಜಸ್ಸು.

GujaratiIND

જો આકાશમાં એકસાથે હજારો સૂર્યનો તેજ પ્રગટે તો તે તે પરાક્રમી જીવનો વૈભવ ગણાય.

MalayalamIND

ആയിരം സൂര്യന്മാരുടെ തേജസ്സ് ഒരേസമയം ആകാശത്ത് ജ്വലിച്ചാൽ അത് ആ മഹാശക്തിയുടെ തേജസ്സായിരിക്കും.

PunjabiIND

ਜੇਕਰ ਅਸਮਾਨ ਵਿੱਚ ਇੱਕੋ ਸਮੇਂ ਇੱਕ ਹਜ਼ਾਰ ਸੂਰਜਾਂ ਦੀ ਰੌਣਕ ਆ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਇਹ ਉਸ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਹਸਤੀ ਦੀ ਸ਼ਾਨ ਹੋਵੇਗੀ।

BengaliIND

যদি আকাশে এক সাথে হাজার সূর্যের তেজ ফুটে ওঠে, তবে সেটাই হবে সেই পরাক্রমশালী সত্তার মহিমা।

NepaliIND

आकाशमा एकैसाथ हजार सूर्यको तेज प्रज्वलित हुने हो भने त्यो पराक्रमी प्राणीको महिमा हुनेछ।

OdiaIND

ଯଦି ଏକ ହଜାର ସୂର୍ଯ୍ୟର ମହିମା ଏକାସାଙ୍ଗରେ ଆକାଶରେ ଜଳିବ, ତେବେ ତାହା ସେହି ଶକ୍ତିଶାଳୀ ସ of ନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ ହେବ |

TamilIND

ஆயிரம் சூரியன்களின் மகிமை ஒரே நேரத்தில் வானத்தில் பிரகாசித்தால், அதுவே அந்த வல்லமையின் மகத்துவமாக இருக்கும்.

SindhiIND

جيڪڏهن آسمان ۾ هڪ ئي وقت هزارين سج جا چمڪاٽ پکڙجي وڃن ته اهو ئي ان عظيم وجود جو شان هوندو.

DogriIND

जेकर आसमान च इक गै समें च हज़ार सूरजें दी शान धुंधली होई जंदी तां ओह् उस पराक्रमी प्राणी दी शान होग।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'दिवि सूर्यसहस्रस्य ৷৷. तस्य महात्मनः'--जैसे आकाशमें हजारों तारे एक साथ उदित होनेपर भी उन सबका मिला हुआ प्रकाश एक चन्द्रमाके प्रकाशके सदृश नहीं हो सकता और हजारों चन्द्रमाओंका मिला हुआ प्रकाश एक सूर्यके प्रकाशके सदृश नहीं हो सकता, ऐसे ही आकाशमें हजारों सूर्य एक साथ उदित होनेपर भी उन सबका मिला हुआ प्रकाश विराट् भगवान्के प्रकाशके सदृश नहीं हो सकता। तात्पर्य यह हुआ कि हजारों सूर्योंका प्रकाश भी विराट् भगवान्के प्रकाशका उपमेय नहीं हो सकता। इस प्रकर जब हजारों सूर्योंके प्रकाशको उपमेय बनानेमें भी दिव्यदृष्टिवाले सञ्जयको संकोच होता है, तब वह प्रकाश विराट्रूप भगवान्के प्रकाशका उपमान हो ही कैसे सकता है! कारण कि सूर्यका प्रकाश भौतिक है, जब कि विराट् भगवान्का प्रकाश दिव्य है। भौतिक प्रकाश कितना ही बड़ा क्यों न हो,,दिव्य प्रकाशके सामने वह तुच्छ ही है। भौतिक प्रकाश और दिव्य प्रकाशकी जाति अलग-अलग होनेसे उनकी आपसमें तुलना नहीं की जा सकती। हाँ, अङ्गुलिनिर्देशकी तरह भौतिक प्रकाशसे दिव्य प्रकाशका संकेत किया जा सकता है। यहाँ सञ्जय भी हजारों सूर्योंके भौतिक प्रकाशकी कल्पना करके विराट्रूप भगवान्के प्रकाश-(तेज-) का लक्ष्य कराते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

भगवान्के विराट्रूपकी जो प्रभा -- प्रकाश है? उसकी उपमा कहते हैं --, द्युलोकमें अर्थात् आकाशमें या तीसरे स्वर्गलोकमें एक साथ उदय हुए हजारों सूर्योंका जो एक साथ उत्पन्न हुआ प्रकाश हो? वह प्रकाश उस महात्मन् -- विश्वरूपके प्रकाशके सदृश कदाचित् हो तो हो? अथवा सम्भव है कि न भी हो अर्थात् उससे भी विश्वरूपका प्रकाश ही अधिक हो सकता है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

ननु प्रकृष्टस्य भगवतो रूपस्य दीप्तिरस्ति न वा? न चेत्काष्ठादिसाम्यं? यद्यस्ति कीदृशी सेत्याशङ्क्याह -- या पुनरिति। सा यदि स्यात्तद्भासः सदृशी सेति योजना। असंभाविताभ्युपगमार्थो यदिशब्दः। स्याच्छब्दो निश्चयार्थः। सा कथंचित्सदृशी संभवति ननु भवत्येवेति विवक्षित्वाह -- यदि वेति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

तत्र दृष्टान्ताकाङ्क्षयामाह। दिवि अन्तरिक्षे स्वर्गे वा सूर्याणआं सहस्त्रस्य युगपदुत्थितस्य युगपदुत्थिता भा यदि भवेत् सा तस्य महात्मनो विश्वरुपस्य भासः दीप्तेः सदृशी तुल्या स्यात् यदि वा न स्यादिति विश्वरुपस्य भा अतिरित्यत इत्याशयः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
diviin the sky
sūryasuns
sahasrasyathousand
bhavetwere
yugapatsimultaneously
utthitārising
yadiif
bhāḥsplendor
sadṛiśhīlike
that
syātwould be
bhāsaḥsplendor
tasyaof them
mahāātmanaḥ
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.11
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्। सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्

जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.13
तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा। अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा

उस समय अर्जुनने देवोंके देव भगवान् के उस शरीरमें एक जगह स्थित अनेक प्रकारके विभागोंमें विभक्त सम्पूर्ण जगत् को देखा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 12
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 12
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता। यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः

अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 12 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 12 का हिंदी अर्थ: "अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 12?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 12 translates to: "If the splendour of a thousand suns were to blaze out simultaneously in the sky, that would be the splendour of that mighty being. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता। यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 12 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "divi sūrya-sahasrasya bhaved yugapad utthitā" mean in English?

"divi sūrya-sahasrasya bhaved yugapad utthitā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 12. If the splendour of a thousand suns were to blaze out simultaneously in the sky, that would be the splendour of that mighty being. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.