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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 11
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्। सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्

जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया। — VaniSagar

Global Translations

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KannadaIND

ದಿವ್ಯವಾದ ಮಾಲೆಗಳನ್ನು ಮತ್ತು ವಸ್ತ್ರಗಳನ್ನು ಧರಿಸಿ, ದೈವಿಕ ವಸ್ತ್ರಗಳಿಂದ ಅಭಿಷೇಕಿಸಲ್ಪಟ್ಟ, ಎಲ್ಲಾ ಅದ್ಭುತವಾದ, ಪ್ರಕಾಶಮಾನವಾಗಿರುವ ಜೀವಿಯು ಎಲ್ಲಾ ಕಡೆಗಳಲ್ಲಿ ಮುಖಗಳೊಂದಿಗೆ ಅಂತ್ಯವಿಲ್ಲ.

NepaliIND

दिव्य माला र पहिरन लगाएर, दिव्य अगुवाहरूले अभिषेक गरिएको, सर्व-अद्भुत, तेजस्वी प्राणी सबै पक्षहरूमा अनुहारहरू सहित अनन्त छ।

SindhiIND

ديوي مالا ۽ پوشاڪ پائڻ، خدائي غيرتمندن سان مسح ٿيل، تمام شاندار، شاندار، سڀني طرفن جي منهن سان بيشمار آهي.

MalayalamIND

ദിവ്യമായ മാലകളും വസ്ത്രങ്ങളും ധരിച്ച്, ദിവ്യമായ പദാർഥങ്ങളാൽ അഭിഷേകം ചെയ്യപ്പെട്ടവനായി, എല്ലാ വശങ്ങളിലും മുഖങ്ങളോടെ, അതിമനോഹരവും, ശോഭയുള്ളതുമായ സത്ത.

MaithiliIND

दिव्य माला आ परिधान पहिरने, दिव्य उंगली सँ अभिषिक्त, सर्व-अद्भुत, तेजस्वी जीव चारू कात चेहराक संग अंतहीन अछि |

MizoIND

Pathian puan leh thawmhnaw ha, Pathian unguent-a hriak thih, thil mak zawng zawng, eng chhuak Being chu a sir zawng zawnga hmel neiin tawp chin nei lo a ni.

AssameseIND

ঐশ্বৰিক মালা আৰু পোছাক পিন্ধি, ঐশ্বৰিক ৰসেৰে অভিষিক্ত, সৰ্ববিস্ময়কৰ, উজ্জ্বল সত্তাটো চাৰিওফালে মুখৰ সৈতে অন্তহীন।

ManipuriIND

ꯗꯤꯕ꯭ꯌ ꯃꯥꯂꯥ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯄꯣꯠꯆꯩꯁꯤꯡ ꯁꯤꯖꯤꯟꯅꯗꯨꯅꯥ, ꯗꯤꯕ꯭ꯌ ꯑꯉ꯭ꯒꯨꯌꯦꯟꯇꯁꯤꯡꯅꯥ ꯁꯦꯡꯗꯣꯀꯄꯥ, ꯄꯨꯝꯅꯃꯛ ꯑꯉꯀꯄꯥ, ꯃꯉꯥꯜ ꯌꯥꯑꯣꯕꯥ ꯖꯤꯕ ꯑꯁꯤ ꯃꯥꯌꯀꯩ ꯈꯨꯗꯤꯡꯗꯥ ꯃꯥꯌꯊꯣꯡꯁꯤꯡꯒꯥ ꯂꯣꯌꯅꯅꯥ ꯂꯣꯏꯕꯥ ꯅꯥꯏꯗꯦ꯫

TamilIND

தெய்வீக மாலைகள் மற்றும் ஆடைகளை அணிந்து, தெய்வீகப் பொருட்களால் அபிஷேகம் செய்யப்பட்ட, அனைத்து அற்புதமான, பிரகாசம் கொண்டவர் எல்லா பக்கங்களிலும் முகங்களுடன் முடிவில்லாதவர்.

DogriIND

दिव्य माला ते परिधान पहिने दा, दिव्य उंगली कन्नै अभिषिक्त, सर्व-अद्भुत, तेजस्वी जीव चारों पासे चेहरे कन्नै अंतहीन ऐ।

BhojpuriIND

दिव्य माला आ परिधान पहिनले, दिव्य उंगली से अभिषिक्त, सर्व-अद्भुत, तेजस्वी जीव चारो ओर चेहरा वाला अंतहीन बा।

MarathiIND

दिव्य माला आणि पोशाख परिधान केलेले, दैवी अप्रतिमांनी अभिषेक केलेले, सर्व बाजूंनी चेहऱ्यांसह सर्व-अद्भुत, तेजस्वी अस्तित्व आहे.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'अनेकवक्त्रनयनम्'--विराट्रूपसे प्रकट हुए भगवान्के जितने मुख और नेत्र दीख रहे हैं, वे सब-के-सब दिव्य हैं। विराट्रूपमें जितने प्राणी दीख रहे हैं, उनके मुख, नेत्र, हाथ, पैर आदि सब-के-सब अङ्ग विराट्रूप भगवान्के हैं। कारण कि भगवान् स्वयं ही विराट्रूपसे प्रकट हुए हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, जिस ईश्वरने दिव्य पुष्पमालाओं और वस्त्रोंको धारण कर रक्खा है? जिसने दिव्य गन्धका अनुलेपन कर रक्खा है? जो समस्त आश्चर्यमय दृश्योंसे युक्त है? जो सब भूतोंका आत्मा होनेके कारण सब ओर मुखवाला है तथा जिसका अन्त नहीं है ऐसा अनन्त और दिव्य विराट्रूप भगवान्ने अर्जुनको दिखलाया? इस प्रकार पूर्वश्लोकसे अन्वय कर लेना चाहिये अथवा अर्जुनने ऐसा रूप देखा इस प्रकार अध्याहार कर लेना चाहिये।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

उक्तरूपवन्तं भगवन्तं प्रकारान्तरेण विशिनष्टि -- किञ्चेति।अर्जुन इति अध्याहारेऽपि पदसंघटनासंभवात्।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

उक्तरुपवन्तं भगवन्तं विशिनष्टि। दिव्यानि पुष्पाणि वस्त्राणि ध्रियन्ते येन तं दिव्यगन्धस्यानुलेपनं यस्य तं सर्वाश्चर्यप्रायं देवमनन्तं सर्वभूतात्मकत्वात्सर्वतोमुखं दर्शयामासार्जुनो ददर्शेत्यध्याहाहो वा। अत्र यद्यप्येतानि रुपविशेषणानि प्रतिभान्ति तथापि देवशब्दस्येश्वरवाचकस्य विशेष्यत्वभिप्रेत्याचार्यैरित्थं व्याख्यातम्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
divyadivine
mālyagarlands
āmbaragarments
dharamwearing
divyadivine
gandhafragrances
anulepanamanointed with
sarvaall
āśhcharyamayam
devamLord
anantamunlimited
viśhwataḥall sides
mukhamface
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.10
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम्। अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम्

जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्तरूपवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.12
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता। यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः

अगर आकाशमें एक साथ हजारों सूर्य उदित हो जायँ, तो भी उन सबका प्रकाश मिलकर उस महात्मा-(विराट् रूप परमात्मा-) के प्रकाशके समान शायद ही हो। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 11
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 11
दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्। सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्

जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 11 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 11 का हिंदी अर्थ: "जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 11?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 11 translates to: "Wearing divine garlands and apparel, anointed with divine unguents, the all-wonderful, resplendent Being is endless with faces on all sides. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम्। सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 11 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्त रूपोंवाले तथा चारों तरफ मुखव Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "divya-mālyāmbara-dharaṁ divya-gandhānulepanam" mean in English?

"divya-mālyāmbara-dharaṁ divya-gandhānulepanam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 11. Wearing divine garlands and apparel, anointed with divine unguents, the all-wonderful, resplendent Being is endless with faces on all sides. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.