Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 10, Shlok 6
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः

सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु -- ये सब-के-सब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव (श्रद्धाभक्ति) रखनेवाले हैं, जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TeluguIND

ఏడుగురు గొప్ప ఋషులు, ప్రాచీన నలుగురు, మరియు మునులు, నా వంటి శక్తులను కలిగి ఉన్నారు (వారి మనస్సు నాపై స్థిరంగా ఉండటం వలన), నా మనస్సు నుండి జన్మించారు; వారి నుండి, ఈ జీవులు ఈ ప్రపంచంలో జన్మించాయి.

GujaratiIND

સાત મહાન ઋષિઓ, પ્રાચીન ચાર, અને માનુષો, મારા જેવી શક્તિઓ ધરાવતા (તેમના મન મારા પર સ્થિર હોવાને કારણે), મારા મનમાંથી જન્મ્યા હતા; તેમની પાસેથી, આ જીવો આ દુનિયામાં જન્મ્યા છે.

TamilIND

ஏழு பெரிய முனிவர்களும், பழங்கால நால்வரும், மனுக்களும், என்னுடையதைப் போன்ற சக்திகளைக் கொண்டவர்கள் (அவர்களின் மனம் என்மீது நிலைத்திருப்பதால்), என் மனதில் இருந்து பிறந்தவர்கள்; அவர்களிடமிருந்து, இந்த உயிரினங்கள் இந்த உலகில் பிறந்தன.

PunjabiIND

ਮੇਰੇ ਮਨ ਵਰਗੀਆਂ ਸ਼ਕਤੀਆਂ ਵਾਲੇ ਸੱਤ ਮਹਾਨ ਰਿਸ਼ੀ, ਪੁਰਾਤਨ ਚਾਰ, ਅਤੇ ਮਾਨੁਸ (ਮੇਰੇ ਉੱਤੇ ਮਨ ਟਿਕੇ ਹੋਣ ਕਰਕੇ) ਮੇਰੇ ਮਨ ਤੋਂ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਹਨ; ਉਨ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਇਹ ਜੀਵ ਇਸ ਸੰਸਾਰ ਵਿਚ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਹਨ।

MarathiIND

सात महान ऋषी, प्राचीन चार, आणि मानुस, माझ्या सारख्या शक्तींचे (त्यांच्या मनाचा माझ्यावर दृढ निश्चय झाल्यामुळे), माझ्या मनापासून जन्म झाला; त्यांच्यापासून हे प्राणी या जगात जन्माला आले आहेत.

BengaliIND

সাত মহান ঋষি, প্রাচীন চার, এবং মনুস, আমার মত ক্ষমতার অধিকারী (তাদের মন আমার উপর স্থির থাকার কারণে), আমার মন থেকে জন্মগ্রহণ করেছিলেন; তাদের থেকেই এই পৃথিবীতে এই প্রাণীর জন্ম হয়েছে।

NepaliIND

सात महान् ऋषिहरू, प्राचीन चार, र मनुहरू, मेरा जस्तै शक्तिहरू भएका (तिनीहरूको मन ममा स्थिर भएको कारणले), मेरो मनबाट जन्मेका थिए; तिनीहरूबाट यी प्राणीहरू यस संसारमा जन्मिएका छन्।

MalayalamIND

എൻ്റേത് പോലെയുള്ള ശക്തികളുള്ള സപ്ത മഹാമുനികളും, മനുക്കളും (അവരുടെ മനസ്സ് എന്നിൽ ഉറപ്പിച്ചതിനാൽ) ജനിച്ചത് എൻ്റെ മനസ്സിൽ നിന്നാണ്; അവരിൽ നിന്നാണ് ഈ ജീവികൾ ഈ ലോകത്ത് ജനിച്ചത്.

SindhiIND

ست عظيم بابا، قديم چار، ۽ مانوس، جن وٽ مون جهڙيون طاقتون آهن (انهن جو ذهن مون تي لڳل هجڻ سبب)، منهنجي ذهن مان پيدا ٿيا هئا. انهن مان هي مخلوق هن دنيا ۾ پيدا ٿي آهي.

KannadaIND

ಏಳು ಮಹಾನ್ ಋಷಿಗಳು, ಪುರಾತನ ನಾಲ್ವರು ಮತ್ತು ಮನುಗಳು, ನನ್ನಂತಹ ಶಕ್ತಿಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವವರು (ಅವರ ಮನಸ್ಸು ನನ್ನ ಮೇಲೆ ನೆಲೆಗೊಂಡಿದ್ದರಿಂದ), ನನ್ನ ಮನಸ್ಸಿನಿಂದ ಜನಿಸಿದರು; ಅವರಿಂದ, ಈ ಜೀವಿಗಳು ಈ ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಹುಟ್ಟಿವೆ.

OdiaIND

ସାତଜଣ ମହାନ ସାଧକ, ପ୍ରାଚୀନ ଚାରି, ଏବଂ ମନୁସ୍, ମୋର ପରି ଶକ୍ତି ଧାରଣ କରିଥିଲେ (ସେମାନଙ୍କ ମନ ମୋ ଉପରେ ସ୍ଥିର ହୋଇଥିବାରୁ), ମୋ ମନରୁ ଜନ୍ମ ହେଲା; ସେମାନଙ୍କଠାରୁ, ଏହି ଜୀବମାନେ ଏହି ଜଗତରେ ଜନ୍ମଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି |

AssameseIND

মোৰ দৰে শক্তিৰ অধিকাৰী সাতজন মহান ঋষি, প্ৰাচীন চাৰিজন আৰু মনুৰ জন্ম মোৰ মনৰ পৰা হৈছিল; তেওঁলোকৰ পৰা এই জীৱবোৰৰ জন্ম হৈছে এই জগতত।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --[पीछेके दो श्लोकोंमें भगवान्ने प्राणियोंके भाव-रूपसे बीस विभूतियाँ बतायीं। अब इस श्लोकमें व्यक्ति-रूपसे पचीस विभूतियाँ बता रहे हैं, जो कि प्राणियोंमें विशेष प्रभावशाली और जगत्के कारण हैं।] 'महर्षयः सप्त'-- जो दीर्घ आयुवाले; मन्त्रोंको प्रकट करनेवाले; ऐश्वर्यवान्; दिव्य दृष्टिवाले; गुण, विद्या; आदिसे वृद्ध धर्मका साक्षात् करनेवाले; और गोत्रोंके प्रवर्तक हैं -- ऐसे सातों गुणोंसे युक्त ऋषि सप्तर्षि कहे जाते हैं । मरीचि, अङ्गिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और वसिष्ठ -- ये सातों ऋषि उपर्युक्त सातों ही गुणोंसे युक्त हैं। ये सातों ही वेदवेत्ता हैं, वेदोंके आचार्य माने गये हैं, प्रवृत्ति-धर्मका संचालन करनेवाले हैं और प्रजापतिके कार्यमें नियुक्त किये गये हैं । इन्हीं सात ऋषियोंको यहाँ 'महर्षि' कहा गया है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, भृगु आदि सप्त महर्षि और पहले होनेवाले चार मनु जिनका अतीत कालसे सम्बन्ध है और जो सावर्ण इस नामसे पुराणोंमें प्रसिद्ध हैं? ये सभी मुझमें भावनावाले -- ईश्वरीय सामर्थ्यसे युक्त और मेरे द्वारा मनसे उत्पन्न किये हुए हैं? जिस मनु और महर्षियोंकी रची हुई ये चर और अचररूप सब प्रजाएँ लोकमें प्रसिद्ध हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

न केवलं भगवतः सर्वप्रकृतित्वमेव किंतु सर्वज्ञत्वसर्वेश्वरत्वरूपमधिष्ठातृत्वमपीत्याह -- किञ्चेति। आद्या भृग्वादयो वसिष्ठान्ताः सर्वज्ञा विद्यासंप्रदायप्रवर्तकाः। तथेति मनूनामपि पूर्वत्वेनाद्यत्वमनुकृष्यते। के ते मनवस्तत्राह -- सावर्णा इतीति। प्रसिद्धाः पुराणेषु प्रजानां पालकाः स्वयमीश्वराश्चेति शेषः। महर्षीणां मनूनां च तुल्यं विशेषणं -- ते चेति। मयि सर्वज्ञे सर्वेश्वरे गता भावना येषां ते तथा। भावनाफलमाह -- वैष्णवेनेति। वैष्णव्या शक्त्याधिष्ठितत्वेन ज्ञानैश्वर्यवन्त इत्यर्थः। तेषां जन्मनो वैशिष्ट्यमाचष्टे -- मानसा इति। मन्वादीनेव विशिनष्टि -- येषामिति। विद्यया जन्मना च संततिभूता मन्वादीनामस्मिंल्लोके सर्वाः प्रजा इत्यर्थः।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

स्वसामर्थ्यंयुक्तानां स्वेनोत्पादितानां भृग्वादीनामपि लोकेश्वरत्वं प्रसिद्धं किं वक्त्वयं मम लोकमहेश्वरत्वमित्याह -- महर्षय इति। महर्षयः सप्त भृग्वादयः पूर्वेऽतीतकालसंबन्धिनोभृगु मरीचिमत्रिं च पुलस्त्यं पुलहं क्रतुं। वसिष्ठं च महातेजाः सोऽसृजन्मनसा सुतान् इत्युक्ताःचत्वारो मनवस्तथा? सावर्णिस्तु मनुर्योऽसौ मैत्रेय भविता ततः। नवमो दक्ष्सावर्णिर्मैत्रेय भविता मनुः। एकादशश्र्च भविता धर्मसावर्णिको मनुः। रुद्रपुत्रस्तु सावर्णो भविता द्वादशो मनुः।। इति विष्णुपुराणादौ सावर्णा इति प्रसिद्धाः। महर्षयः सप्त भृग्वादयः। तेभ्योऽपि पूर्वे प्रथमाश्चत्वारः सन्काद्या महर्षयः मनवस्तथा स्वयंभुवाद्याश्चतुर्दशेति वा। अस्मिन्पक्षे सनकाद्याश्र्चतुर्दशेत्यध्याहारदोषमभिप्रेत्याचार्यैरयं पक्षो न प्रदर्शितः। ते च मद्भावा मद्भतभावना मयि परमात्मनि भावना येषामतो वैष्णवेन सामर्थ्येन युक्ता मानसा मया मनसैवोत्पादिताः सन्तो जाताः उत्पन्ना यथायथं योनितोऽयोनितश्च येषां महर्षीणां मनूनां च लोके इमा विद्यया च जन्मना च सन्ततिभूताः प्रजाः स्थावरजंगमलक्षणाः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
mahāṛiṣhayaḥ
saptaseven
pūrvebefore
chatvāraḥfour
manavaḥManus
tathāalso
mat bhāvāḥare born from me
mānasāḥmind
jātāḥborn
yeṣhāmfrom them
lokein the world
imāḥall these
prajāḥpeople
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 10.5
अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः। भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 10.7
एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः। सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः

जो मनुष्य मेरी इस विभूतिको और योगको तत्त्वसे जानता है अर्थात् दृढ़तापूर्वक मानता है, वह अविचल भक्तियोगसे युक्त हो जाता है; इसमें कुछ भी संशय नहीं है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 10Shlok 6
Bhagavad Gita · Adhyay 10, Shlok 6
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः

सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु -- ये सब-के-सब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव (श्रद्धाभक्ति) रखनेवाले हैं, जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 6 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 6 का हिंदी अर्थ: "सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु -- ये सब-के-सब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव (श्रद्धाभक्ति) रखनेवाले हैं, जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 6?

Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 6 translates to: "The seven great sages, the ancient four, and the Manus, possessing powers like Mine (due to their minds being fixed on Me), were born from My mind; from them, these creatures have been born in this world. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 10, श्लोक 6 है जो Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga में संकलित है। सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु -- ये सब-के-सब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव (श्रद्धाभक्ति) रखनेवाले हैं, जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "maharṣhayaḥ sapta pūrve chatvāro manavas tathā" mean in English?

"maharṣhayaḥ sapta pūrve chatvāro manavas tathā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 6. The seven great sages, the ancient four, and the Manus, possessing powers like Mine (due to their minds being fixed on Me), were born from My mind; from them, these creatures have been born in this world. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.