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Sudarshana Chakra
Adhyay 10, Shlok 13
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा। असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे

अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं। — VaniSagar

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BengaliIND

সমস্ত ঋষিরা এইভাবে তোমাকে ঘোষণা করেছেন, সেইসাথে দিব্য ঋষি নারদও; অসিতা, দেবাল এবং ব্যাস; এবং এখন আপনি নিজেই আমাকে তাই বলছেন.

TamilIND

தெய்வீக முனிவர் நாரதரைப் போலவே அனைத்து முனிவர்களும் உன்னை இவ்வாறு அறிவித்துள்ளனர்; அதே போல் அசிதா, தேவாலா, மற்றும் வியாசர்; இப்போது நீயே என்னிடம் அப்படிச் சொல்கிறாய்.

KannadaIND

ಎಲ್ಲಾ ಋಷಿಗಳು ನಿನ್ನನ್ನು ಹೀಗೆ ಘೋಷಿಸಿದ್ದಾರೆ, ಹಾಗೆಯೇ ದಿವ್ಯ ಋಷಿ ನಾರದ; ಹಾಗೆಯೇ ಅಸಿತ, ದೇವಲಾ ಮತ್ತು ವ್ಯಾಸ; ಮತ್ತು ಈಗ ನೀವೇ ನನಗೆ ಹಾಗೆ ಹೇಳುತ್ತೀರಿ.

GujaratiIND

બધા ઋષિઓએ આ રીતે તને જાહેર કર્યો છે, તેમજ દૈવી ઋષિ નારદને પણ; તો અસિતા, દેવલા અને વ્યાસ પણ; અને હવે તું પોતે મને આવું કહે છે.

PunjabiIND

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਰਿਸ਼ੀਆਂ ਨੇ ਤੈਨੂੰ, ਬ੍ਰਹਮ ਰਿਸ਼ੀ ਨਾਰਦ ਦਾ ਵੀ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ; ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਸਿਤਾ, ਦੇਵਲਾ ਅਤੇ ਵਿਆਸ ਵੀ; ਅਤੇ ਹੁਣ ਤੂੰ ਆਪ ਹੀ ਮੈਨੂੰ ਅਜਿਹਾ ਆਖਦਾ ਹੈਂ।

MarathiIND

अशा प्रकारे सर्व ऋषींनी तुला, तसेच दिव्य ऋषी नारदांनीही घोषित केले आहे; तसेच असिता, देवल आणि व्यास; आणि आता तूच मला असे म्हणतोस.

SindhiIND

اهڙيءَ طرح سڀني ساڃاهه وندن تنهنجو ذڪر ڪيو آهي، جيئن ته ديوي بابا ناراد به؛ اهڙيءَ طرح آسيتا، ديوالا ۽ وياس پڻ؛ ۽ ھاڻي تون پاڻ مون کي ائين چئي رھيو آھين.

NepaliIND

यसरी सबै ऋषिहरूले तिमीलाई घोषणा गरेका छन्, दिव्य ऋषि नारदले पनि; असिता, देवल र व्यास पनि; र अब तपाईं आफैले मलाई यसो भन्नुहुन्छ।

TeluguIND

ఋషులందరూ నిన్ను ఇలా ప్రకటించారు, అలాగే దివ్యమైన నారదుడు కూడా; అలాగే అసిత, దేవాల, మరియు వ్యాస; మరియు ఇప్పుడు నువ్వే నాతో అలా చెప్పావు.

MalayalamIND

എല്ലാ ഋഷിമാരും അങ്ങയെ ഇപ്രകാരം പ്രഖ്യാപിച്ചു, അതുപോലെ ദിവ്യമായ നാരദൻ; അതുപോലെ അസിത, ദേവാല, വ്യാസൻ എന്നിവരും; ഇപ്പോൾ നീ തന്നേ എന്നോടു പറയുന്നു എന്നു പറഞ്ഞു.

ManipuriIND

ꯔ꯭ꯏꯁꯤ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯅꯥ ꯑꯗꯣꯃꯕꯨ ꯑꯁꯨꯝꯅꯥ ꯂꯥꯑꯣꯊꯣꯀꯈ꯭ꯔꯦ, ꯗꯤꯕ꯭ꯌ ꯔ꯭ꯏꯁꯤ ꯅꯥꯔꯗꯅꯥꯁꯨ; ꯑꯗꯨꯝ ꯑꯣꯏꯅꯃꯛ ꯑꯁꯤꯇꯥ, ꯗꯦꯕꯂꯥ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯕ꯭ꯌꯥꯁꯥꯁꯨ; ꯑꯗꯨꯒꯥ ꯍꯧꯖꯤꯛ ꯅꯍꯥꯛ ꯅꯁꯥꯅꯥ ꯑꯩꯉꯣꯟꯗꯥ ꯍꯥꯌꯕꯤꯔꯤ꯫

KonkaniIND

सगळ्या ऋषींनी तुका अशें जाहीर केलां, तशेंच दिव्य ऋषी नारद; तशेंच असित, देवला आनी व्यास; आनी आतां तूं स्वता म्हाका अशें म्हणटा.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --'परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान्'-- अपने सामने बैठे हुए भगवान्की स्तुति करते हुए अर्जुन कहते हैं कि मेरे पूछनेपर जिसको आपने परम ब्रह्म (गीता 8। 3) कहा है, वह परम ब्रह्म आप ही हैं। जिसमें सब संसार स्थित रहता है, वह परम धाम अर्थात् परम स्थान आप ही हैं (गीता 9। 18)। जिसको पवित्रोंमें भी पवित्र कहते हैं -- 'पवित्राणां पवित्रं यः' वह महान् पवित्र भी आप ही हैं। 'पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं ৷৷. स्वयं चैव ब्रवीषि मे'-- ग्रन्थोंमें ऋषियोंने, देवर्षि नारदने , असित और उनके पुत्र देवल ऋषिने तथा महर्षि व्यासजीने आपको शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु कहा है।आत्माके रूपमें 'शाश्वत' (गीता 2। 20), सगुण-निराकारके रूपमें 'दिव्य पुरुष' (गीता 8। 10), देवताओँ और महर्षियों आदिके रूपमें 'आदिदेव' (गीता 10। 2), मूढ़लोग मेरेको अज नहीं जानते (गीता 7। 25) तथा असम्मूढ़लोग मेरेको अज जानते हैं (गीता 10। 3 ) -- इस रूपमें 'अज' और मैं अव्यक्तरूपसे सारे संसारमें व्यापक हूँ (गीता 9। 4) -- इस रूपमें 'विभु' स्वयं आपने मेरे प्रति कहा है।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

ऐसे --, आपका वसिष्ठादि सब महर्षिगण वर्णन करते हैं तथा असित? देवल? व्यास और देवर्षि नारद भी इसी प्रकार कहते हैं एवं स्वयं आप भी मुझसे ऐसा ही कह रहे हैं।

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Scripture Scholar

Sri Anandgiri

उक्तविशेषणं त्वामृषयः सर्वे यस्मादाहुस्तस्मात्तद्वचनात्तवोक्तं ब्रह्मत्वं युक्तमित्याह -- ईदृशमिति। ऋषिग्रहणेन गृहीतानामपि नारदादीनां विशिष्टत्वात्पृथग्ग्रहणम्। असितो देवलस्य पिता। किमन्यैस्त्वं स्वयमेवात्मानमुक्तरूपं मह्यमुक्तवानित्याह -- स्वयं चेति।

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Scripture Scholar

Sri Dhanpati

ईदृशं त्वामेव ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः सर्व आहुः। नारदादीनां श्रेष्ठ्यद्योतनार्थं पृथग्ग्रहणम्। किमन्यैरिति सूचयन्नाह -- स्वयं चैव ब्रवीषीति।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
āhuḥ(they) declare
tvāmyou
ṛiṣhayaḥsages
sarveall
devaṛiṣhiḥ
tathāalso
asitaḥAsit
devalaḥDeval
vyāsaḥVyās
svayampersonally
chaand
evaeven
bravīṣhīyou are declaring
meto me
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 10.12
अर्जुन उवाच परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान्। पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम्

अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 10.14
सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव। न हि ते भगवन् व्यक्ितं विदुर्देवा न दानवाः

हे केशव ! मेरेसे आप जो कुछ कह रहे हैं, यह सब मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन् ! आपके प्रकट होनेको न तो देवता जानते हैं और न दानव ही जानते हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 10Shlok 13
Bhagavad Gita · Adhyay 10, Shlok 13
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा। असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे

अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 13 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 13 का हिंदी अर्थ: "अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 13?

Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 13 translates to: "All the sages have thus declared Thee, as also the divine sage Narada; so also Asita, Devala, and Vyasa; and now Thou Thyself dost say so to me. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा। असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 10, श्लोक 13 है जो Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga में संकलित है। अर्जुन बोले -- परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं। आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु (व्यापक) हैं -- ऐसा सब-के-सब ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल तथा व्यास कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "āhus tvām ṛiṣhayaḥ sarve devarṣhir nāradas tathā" mean in English?

"āhus tvām ṛiṣhayaḥ sarve devarṣhir nāradas tathā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 13. All the sages have thus declared Thee, as also the divine sage Narada; so also Asita, Devala, and Vyasa; and now Thou Thyself dost say so to me. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.