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Sudarshana Chakra
Adhyay 10, Shlok 10
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते

उन नित्य-निरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्राप्ति हो जाती है। — VaniSagar

Global Translations

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BengaliIND

যাঁরা নিত্য অবিচল, প্রেমের সহিত আমার আরাধনা করেন, তাহাদিগকে আমি বৈষম্যের যোগ দান করি, যাহা দ্বারা তাহারা আমার কাছে আসে।

TamilIND

என்னை அன்புடன் வணங்கி எப்போதும் உறுதியுடன் இருப்பவர்களுக்கு, நான் பாகுபாடு யோகத்தை அளிக்கிறேன், அதன் மூலம் அவர்கள் என்னிடம் வருகிறார்கள்.

KannadaIND

ಯಾರು ಸದಾ ಸ್ಥೈರ್ಯದಿಂದ ನನ್ನನ್ನು ಪೂಜಿಸುತ್ತಾರೋ ಅವರಿಗೆ ನಾನು ತಾರತಮ್ಯದ ಯೋಗವನ್ನು ನೀಡುತ್ತೇನೆ, ಅದರ ಮೂಲಕ ಅವರು ನನ್ನ ಬಳಿಗೆ ಬರುತ್ತಾರೆ.

PunjabiIND

ਜੋ ਸਦਾ ਅਡੋਲ ਹਨ, ਪ੍ਰੇਮ ਨਾਲ ਮੇਰੀ ਭਗਤੀ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਮੈਂ ਵਿਤਕਰੇ ਦਾ ਯੋਗ ਬਖ਼ਸ਼ਦਾ ਹਾਂ, ਜਿਸ ਦੁਆਰਾ ਉਹ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਆਉਂਦੇ ਹਨ।

NepaliIND

जो नित्य अटल छन्, मलाई प्रेमपूर्वक भजन गर्छन्, उनीहरूलाई म भेदभावको योग दिन्छु, जसद्वारा तिनीहरू ममा आउँछन्।

MalayalamIND

എന്നെ സ്‌നേഹത്തോടെ ആരാധിക്കുന്ന, സ്ഥിരതയുള്ളവർക്ക് ഞാൻ വിവേചനയോഗം നൽകുന്നു, അതിലൂടെ അവർ എന്നിലേക്ക് വരുന്നു.

TeluguIND

ఎవరైతే ఎప్పుడూ దృఢంగా ఉంటారో, ప్రేమతో నన్ను పూజిస్తారో, వారికి నేను తారతమ్య యోగాన్ని ఇస్తాను, దాని ద్వారా వారు నా వద్దకు వస్తారు.

OdiaIND

ଯେଉଁମାନେ ସର୍ବଦା ସ୍ଥିର, ମୋତେ ପ୍ରେମ ସହିତ ଉପାସନା କରନ୍ତି, ମୁଁ ଭେଦଭାବର ଯୋଗ ଦେଇଥାଏ, ଯାହା ଦ୍ୱାରା ସେମାନେ ମୋ ପାଖକୁ ଆସନ୍ତି |

SindhiIND

جيڪي سدا ثابت قدم آهن، محبت سان منهنجي پوڄا ڪن ٿا، تن کي مان تفاوت جو يوگ ڏيان ٿو، جنهن سان اهي مون وٽ اچن ٿا.

GujaratiIND

જેઓ નિત્ય સ્થિર છે, પ્રેમથી મારી પૂજા કરે છે, તેમને હું ભેદભાવનો યોગ આપું છું, જેનાથી તેઓ મારી પાસે આવે છે.

BhojpuriIND

जे सदा अडिग रहेला, हमरा के प्रेम से पूजत रहेला, ओकरा के हम भेदभाव के योग देनी, जवना से उ लोग हमरा लगे आवेले।

KonkaniIND

जे सदांच स्थिर आसतात, मोगान म्हाका उपासना करतात, तांकां हांव भेदभावाचो योग दितां, जाचे वरवीं ते म्हजे कडेन येतात.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --[भगवन्निष्ठ भक्त भगवान्को छोड़कर न तो समता चाहते हैं, न तत्त्वज्ञान चाहते हैं तथा न और ही कुछ चाहते हैं । उनका तो एक ही काम है-- हरदम भगवान्में लगे रहना। भगवान्में लगे रहनेके सिवाय उनके लिये और कोई काम ही नहीं है। अब सारा-का-सारा काम, सारी जिम्मेवारी भगवान्की ही है अर्थात् उन भक्तोंसे जो कुछ कराना है, उनको जो कुछ देना है आदि सब काम भगवान्का ही रह जाता है। इसलिये भगवान् यहाँ (दो श्लोकोंमें) उन भक्तोंको समता और तत्त्वज्ञान देनेकी बात कह रहे हैं।]

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

जो पुरुष मुझमें प्रेम रखते हुए उपर्युक्त प्रकारसे मेरा भजन करते हैं --, उन समस्त बाह्य तृष्णाओंसे रहित निरन्तर तत्पर होकर भजन -- सेवन करनेवाले पुरुषोंको? किसी वस्तुकी इच्छा आदि कारणोंसे भजनेवालोंको नहीं? किंतु प्रीतिपूर्वक भजनेवालोंको यानी प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवालोंको? मैं वह बुद्धियोग देता हूँ। मेरे तत्त्वके यथार्थ ज्ञानका नाम बुद्धि है? उससे युक्त होना ही बुद्धियोग है। वह ऐसा बुद्धियोग मैं ( उनको ) देता हूँ कि जिस पूर्णज्ञानरूप बुद्धियोगसे वे मुझ आत्मरूप परमेश्वरको आत्मरूपसे समझ लेते हैं। वे कौन हैं जो मच्चित्ताः आदि ऊपर कहे हुए प्रकारोंसे मेरा भजन करते हैं।,

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Scripture Scholar

Sri Anandgiri

यदुक्तं सोऽविकम्पेनेत्यादि तदर्थं भूमिकां कृत्वा तदिदानीमुदाहरति -- ये यथोक्तेति। नित्याभियुक्तानामनवरतं भगवत्यैकाग्र्यसंपन्नानामित्यर्थः। पुत्रादिलोकत्रयहेत्वर्थित्वेन वा गर्भदासत्वेन वा प्रत्यहं जीवनोपायसिद्धये वा भजनमिति शङ्कित्वा दूषयति -- किमित्यादिना। प्रागुक्तां ज्ञानाख्यां भक्तिं स्नेहेन कुर्वतामित्यर्थः। तेभ्योऽहं तत्त्वज्ञानं प्रयच्छामीत्याह -- ददामीति। उक्तबुद्धिसंबन्धस्य फलमाह -- येनेति। ध्यानजन्यप्रकर्षकाष्ठागतान्तःकरणपरिणामे निरस्ताशेषविशेषभगवद्रूपप्राप्तिहेतौ बुद्धियोगे प्रश्नपूर्वकमुक्तानधिकारिणो दर्शयति -- के त इति।

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Sri Dhanpati

तेषां सततयुक्तानां सततं निरन्तरमभियुक्तानाम्। किमर्थित्वादिपूर्वकं नेत्याह। प्रीतिः स्नेहस्तपूर्वकं भजताम्। प्रेमलक्षणभक्तिमतामित्यर्थः। तं सम्यग्ज्ञानलक्षणमविकल्पबुद्धियोगं ददामि। येन बुद्धियोगेन मां परमात्मानमात्मत्वेपयान्ति प्रतिपद्यन्ते। साक्षात्कुर्वन्तीत्यर्थः। ते ये मां मच्चित्तत्वादिप्रकारैर्भजन्ते।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
teṣhāmto them
satatayuktānām
bhajatāmwho engage in devotion
prītipūrvakam
dadāmiI give
buddhiyogam
tamthat
yenaby which
māmto me
upayānticome
tethey
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 10.9
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्। कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च

। मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए ही नित्य-निरन्तर सन्तुष्ट रहते हैं और मेरेमें प्रेम करते हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 10.11
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता

उन भक्तोंपर कृपा करनेके लिये ही उनके स्वरूप (होनेपन) में रहनेवाला मैं उनके अज्ञानजन्य अन्धकारको देदीप्यमान ज्ञानरूप दीपकके द्वारा सर्वथा नष्ट कर देता हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 10Shlok 10
Bhagavad Gita · Adhyay 10, Shlok 10
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते

उन नित्य-निरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्राप्ति हो जाती है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 10 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 10 का हिंदी अर्थ: "उन नित्य-निरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्राप्ति हो जाती है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 10?

Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 10 translates to: "To those who are ever steadfast, worshipping me with love, I give the yoga of discrimination, by which they come to me. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 10, श्लोक 10 है जो Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga में संकलित है। उन नित्य-निरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्राप्ति हो जाती है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "teṣhāṁ satata-yuktānāṁ bhajatāṁ prīti-pūrvakam" mean in English?

"teṣhāṁ satata-yuktānāṁ bhajatāṁ prīti-pūrvakam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 10. To those who are ever steadfast, worshipping me with love, I give the yoga of discrimination, by which they come to me. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.