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Sudarshana Chakra
Adhyay 10, Shlok 9
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्। कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च

। मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए ही नित्य-निरन्तर सन्तुष्ट रहते हैं और मेरेमें प्रेम करते हैं। — VaniSagar

Global Translations

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MarathiIND

त्यांचे मन आणि जीवन माझ्यामध्ये पूर्णपणे लीन होऊन, ते एकमेकांना ज्ञान देतात आणि नेहमी माझ्याबद्दल बोलतात, समाधानी आणि आनंदित असतात.

MalayalamIND

അവരുടെ മനസ്സും ജീവിതവും എന്നിൽ പൂർണ്ണമായി ലയിച്ചുകൊണ്ട്, അവർ പരസ്‌പരം പ്രകാശിപ്പിക്കുകയും സംതൃപ്തിയും സന്തോഷവാനും ആയി എന്നെക്കുറിച്ച് എപ്പോഴും സംസാരിക്കുകയും ചെയ്യുന്നു.

PunjabiIND

ਆਪਣੇ ਮਨਾਂ ਅਤੇ ਜੀਵਨਾਂ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮੇਰੇ ਵਿੱਚ ਲੀਨ ਕਰਕੇ, ਉਹ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਮਾਨ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸੰਤੁਸ਼ਟ ਅਤੇ ਪ੍ਰਸੰਨ ਹੋ ਕੇ, ਮੇਰੇ ਬਾਰੇ ਬੋਲਦੇ ਹਨ।

GujaratiIND

તેમના મન અને જીવન સંપૂર્ણપણે મારામાં સમાઈ જાય છે, તેઓ એકબીજાને પ્રકાશિત કરે છે અને હંમેશા મારા વિશે બોલે છે, સંતુષ્ટ અને આનંદિત છે.

BengaliIND

তাদের মন এবং জীবন সম্পূর্ণরূপে আমার মধ্যে নিমগ্ন, তারা একে অপরকে আলোকিত করে এবং সন্তুষ্ট এবং আনন্দিত হয়ে আমার সম্পর্কে কথা বলে।

SindhiIND

انهن جي ذهنن ۽ زندگين سان مڪمل طور تي مون ۾ جذب ​​ٿي ويا آهن، اهي هڪ ٻئي کي روشن ڪندا آهن ۽ ڪڏهن به منهنجي باري ۾ ڳالهائيندا آهن، مطمئن ۽ خوش ٿي.

AssameseIND

মোৰ মাজত সম্পূৰ্ণৰূপে নিমগ্ন হৈ থকা মন আৰু জীৱন তেওঁলোকে ইজনে সিজনক আলোকিত কৰে আৰু সদায় মোৰ কথা কয়, সন্তুষ্ট আৰু আনন্দিত হৈ।

KonkaniIND

मन आनी जिवीत पुरायपणान म्हजे कडेन लीन करून ते एकामेकांक प्रबुध्द करतात आनी सदांच म्हजे विशीं उलयतात, समाधान आनी खोशी जातात.

MizoIND

An rilru leh nun chu Keimahah an inhmang vek a, an inhriatthiam tawn a, Ka chanchin an sawi fo thin a, an lungawi a, an lawm hle bawk.

BhojpuriIND

अपना मन आ जीवन के पूरा तरह से हमरा में लीन होके ऊ लोग एक दोसरा के प्रबुद्ध करेला आ कबो हमरा बारे में बात करेला, संतुष्ट आ आनन्दित होके.

ManipuriIND

ꯃꯈꯣꯌꯒꯤ ꯋꯥꯈꯜ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯄꯨꯟꯁꯤ ꯃꯄꯨꯡ ꯐꯥꯅꯥ ꯑꯩꯉꯣꯟꯗꯥ ꯌꯥꯑꯣꯁꯤꯟꯗꯨꯅꯥ ꯃꯈꯣꯌꯅꯥ ꯑꯃꯅꯥ ꯑꯃꯕꯨ ꯃꯉꯥꯜ ꯄꯤꯔꯤ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯃꯇꯝ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯇꯥ ꯑꯩꯒꯤ ꯃꯔꯃꯗꯥ ꯋꯥꯔꯤ ꯁꯥꯅꯩ, ꯅꯨꯡꯉꯥꯏꯕꯥ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯍꯔꯥꯑꯣꯕꯥ ꯄꯣꯀꯏ꯫

TamilIND

அவர்களின் மனதாலும் வாழ்க்கையாலும் என்னில் முழுமையாக உள்வாங்கப்பட்டதால், அவர்கள் ஒருவரையொருவர் அறிவூட்டுகிறார்கள், எப்போதும் என்னைப் பற்றி பேசுகிறார்கள், திருப்தியுடனும் மகிழ்ச்சியுடனும் இருக்கிறார்கள்.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--[भगवान्से ही सब उत्पन्न हुए हैं और भगवान्से ही सबकी चेष्टा हो रही है अर्थात् सबके मूलमें परमात्मा है -- यह बात जिनको दृढ़तासे और निःसन्देहपूर्वक जँच गयी है, उनके लिये कुछ भी करना, जानना और पाना बाकी नहीं रहता। बस, उनका एक ही काम रहता है -- सब प्रकारसे भगवान्में ही लगे रहना। यही बात इस श्लोकमें बतायी गयी है।]

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, मुझमें ही जिनका चित्त है वे मच्चित्त हैं तथा मुझमें ही जिनके चक्षु आदि इन्द्रियरूप प्राण लगे रहते हैं -- मुझमें ही जिन्होंने समस्त करणोंका उपसंहार कर दिया है वे मद्गतप्राण हैं अथवा जिन्होंने मेरे लिये ही अपना जीवन अर्पण कर दिया है वे मद्गतप्राण हैं। ऐसे मेरे भक्त आपसमें एक दूसरेको ( मेरा तत्त्व ) समझाते हुए एवं ज्ञान? बल और सामर्थ्य आदि गुणोंसे युक्त मुझ परमेश्वरके स्वरूपका वर्णन करते हुए सदा संतुष्ट रहते हैं अर्थात् संतोषको प्राप्त होते हैं और रमण करते हैं अर्थात् मानो कोई अपना अत्यन्त प्यारा मिल गया हो उसी तरह रतिको प्राप्त होते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

न केवमुक्तमेव भगवद्भजने साधनां साधनान्तरं चास्तीत्याह -- किञ्चेति। ईश्वरात्प्रतीचः प्रागुक्तादन्यत्र चित्तप्रचारराहित्यं भगवद्भजनोपायमाह -- मयीति। चक्षुरादीनां भगवत्यप्राप्तिस्तदगोचरत्वात्तस्येत्याशङ्क्याह -- मय्युपसंहृतेति। भगवदतिरेकेण जीवनेऽपि नादरस्तदपि मय्येवार्पितं भक्तानामित्याह -- अथवेति। आचार्येभ्यः श्रुत्वा वादकथया परस्परं भगवन्तं सब्रह्मचारिणो बोधयन्ति तदपि भगवद्भजनसाधनमित्याह -- बोधयन्त इति। आगमोपपत्तिभ्यां भगवन्तमेव विशिष्टधर्माणं शिष्येभ्यो गुरवो व्यपदिशन्ति तदपि भगवद्भजनमेवेत्याह -- कथयन्त इति। भक्तानां तुष्टिरती स्वरसतः स्यातामित्याह -- तुष्यन्तीति। मनोरथपूर्त्या रतिप्राप्तौ कामुकसंमतमुदाहरणमाह -- प्रियेति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

किं चैवं भजन्तीत्याह -- मच्चित्ता मयि वासुदेवे चित्तं येषां ते मा गताः प्राप्ताः प्राणाश्र्चक्षुरादयो येषां ते मय्युपसंहृतसर्वकरणाः? सद्गतजीवना इति वा। आचार्यात् श्रुत्वा वादकथया समानेषु परस्परं बोधयन्तः मां ज्ञानबलादियुक्तं शिष्येभ्यः कथयन्तः मद्भजनेनैव तुष्यन्ति संतोषमुपयान्ति तेनैव च रमन्ति रतिं प्राप्नुवन्ति न स्त्र्यादिना।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
matchittāḥ
matgata
bodhayantaḥenlightening (with divine knowledge of God)
parasparamone another
kathayantaḥspeaking
chaand
māmabout me
nityamcontinously
tuṣhyantisatisfaction
chaand
ramanti(they) delight
chaalso
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 10.8
अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते। इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः

मैं संसारमात्रका प्रभव (मूलकारण) हूँ, और मुझसे ही सारा संसार प्रवृत्त हो रहा है अर्थात् चेष्टा कर रहा है -- ऐसा मेरेको मानकर मेरेमें ही श्रद्धा-प्रेम रखते हुए बुद्धिमान् भक्त मेरा ही भजन करते हैं -- सब प्रकारसे मेरे ही शरण होते हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 10.10
तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्। ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते

उन नित्य-निरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्राप्ति हो जाती है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 10Shlok 9
Bhagavad Gita · Adhyay 10, Shlok 9
मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्। कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च

। मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए ही नित्य-निरन्तर सन्तुष्ट रहते हैं और मेरेमें प्रेम करते हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 9 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 10 श्लोक 9 का हिंदी अर्थ: "। मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए ही नित्य-निरन्तर सन्तुष्ट रहते हैं और मेरेमें प्रेम करते हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 9?

Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 9 translates to: "With their minds and lives wholly absorbed in Me, they enlighten each other and ever speak of Me, being satisfied and delighted. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम्। कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 10, श्लोक 9 है जो Bhagavad Gita के Vibhuti-Vistara-Yoga में संकलित है। । मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए ही नित्य-निरन्तर सन्तुष्ट रहते हैं और मेरेमें प्रेम करते हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "mach-chittā mad-gata-prāṇā bodhayantaḥ parasparam" mean in English?

"mach-chittā mad-gata-prāṇā bodhayantaḥ parasparam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 10 Verse 9. With their minds and lives wholly absorbed in Me, they enlighten each other and ever speak of Me, being satisfied and delighted. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.