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Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 6
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्। सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

Global Translations

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SindhiIND

مضبوط يُودامنيو ۽ بهادر اُتماجس، سُڀدرا جو پٽ (اڀيمنيو، سبھادرا ۽ ارجن جو پُٽ) ۽ دروپدي جا پٽ، اهي سڀئي عظيم رتن وارا (عظيم هيرو) هئا.

BengaliIND

শক্তিশালী যুধামন্যু এবং সাহসী উত্তমৌজ, সুভদ্রার পুত্র (অভিমন্যু, সুভদ্রা ও অর্জুনের পুত্র), এবং দ্রৌপদীর পুত্র, তারা সকলেই মহান সারথি (মহানায়ক)।

GujaratiIND

મજબૂત યુધામન્યુ અને બહાદુર ઉત્તમૌજ, સુભદ્રાનો પુત્ર (અભિમન્યુ, સુભદ્રા અને અર્જુનનો પુત્ર), અને દ્રૌપદીના પુત્રો, તે બધા મહાન સારથિઓ (મહાન નાયકો) હતા.

KannadaIND

ಬಲಿಷ್ಠ ಯುಧಾಮನ್ಯು ಮತ್ತು ವೀರ ಉತ್ತಮೌಜರು, ಸುಭದ್ರೆಯ ಮಗ (ಅಭಿಮನ್ಯು, ಸುಭದ್ರ ಮತ್ತು ಅರ್ಜುನನ ಮಗ), ಮತ್ತು ದ್ರೌಪದಿಯ ಮಕ್ಕಳು, ಅವರೆಲ್ಲರೂ ಮಹಾನ್ ಸಾರಥಿಗಳು (ಮಹಾ ವೀರರು).

TeluguIND

బలమైన యుధామన్యుడు మరియు ధైర్యవంతులైన ఉత్తమౌజులు, సుభద్ర (అభిమన్యుడు, సుభద్ర మరియు అర్జునుల కుమారుడు) మరియు ద్రౌపది కుమారులు, వారందరూ గొప్ప రథసారధులు (గొప్ప వీరులు).

MizoIND

Yudhamanyu chak tak leh huaisen Uttamaujas te, Subhadra fapa (Abhimanyu, Subhadra leh Arjuna fapa), leh Draupadi fapate, an vai hian tawlailir khalhtu ropui (mi huaisen ropui) an ni.

DogriIND

बलवान युधमन्यु ते वीर उत्तमौज, सुभद्रा (अभिमन्यु, सुभद्रा ते अर्जुन दा पुत्तर) दा पुत्तर, ते द्रौपदी दे पुत्तर, सारे महान सारथी (महान वीर)।

MalayalamIND

ശക്തരായ യുധാമന്യുവും ധീരരായ ഉത്തമൗജസും, സുഭദ്രയുടെ പുത്രനും (സുഭദ്രയുടെയും അർജ്ജുനൻ്റെയും മകൻ അഭിമന്യു), ദ്രൗപതിയുടെ പുത്രന്മാരും, അവരെല്ലാം മഹാനായ സാരഥികൾ (മഹാ വീരന്മാർ).

PunjabiIND

ਬਲਵਾਨ ਯੁਧਮਨਿਊ ਅਤੇ ਬਹਾਦਰ ਉਤਮਉਜਸ, ਸੁਭਦਰਾ (ਅਭਿਮਨਿਊ, ਸੁਭਦਰਾ ਅਤੇ ਅਰਜੁਨ ਦਾ ਪੁੱਤਰ), ਅਤੇ ਦ੍ਰੌਪਦੀ ਦੇ ਪੁੱਤਰ, ਇਹ ਸਾਰੇ ਮਹਾਨ ਰਥੀ (ਮਹਾਨ ਨਾਇਕ) ਸਨ।

MarathiIND

बलवान युधामन्यू आणि शूर उत्तमौज, सुभद्राचा मुलगा (अभिमन्यू, सुभद्रा आणि अर्जुनाचा मुलगा), आणि द्रौपदीचे पुत्र, हे सर्व महान सारथी (महान वीर).

TamilIND

வலிமையான யுதாமன்யு மற்றும் துணிச்சலான உத்தமௌஜஸ், சுபத்ராவின் மகன் (அபிமன்யு, சுபத்ரா மற்றும் அர்ஜுனனின் மகன்), மற்றும் திரௌபதியின் மகன்கள், அவர்கள் அனைவரும் சிறந்த தேரோட்டிகள் (பெரிய ஹீரோக்கள்).

NepaliIND

बलियो युधामन्यु र बहादुर उत्तमौजहरू, सुभद्राका छोरा (अभिमन्यु, सुभद्रा र अर्जुनका छोरा), र द्रौपदीका छोराहरू, तिनीहरू सबै महान् सारथीहरू (महान वीरहरू) थिए।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या-- 'अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि'-- जिनसे बाण चलाये जाते हैं, फेंके जाते हैं, उनका नाम 'इष्वास' अर्थात् धनुष है। ऐसे बड़े-बड़े इष्वास (धनुष) जिनसे पास हैं, वे सभी 'महेष्वास' हैं। तात्पर्य है कि बड़े धनुषोंपर बाण चढ़ाने एवं प्रत्यञ्चा खींचनेमें बहुत बल लगता है। जोरसे खींचकर छोड़ा गया बाण विशेष मार करता है। ऐसे बड़े-बड़े धनुष पासमें होनेके कारण ये सभी बहुत बलवान् और शूरवीर हैं। ये मामूली योद्धा नहीं हैं। युद्धमें ये भीम और अर्जुनके समान हैं अर्थात् बलमें ये भीमके समान और अस्त्र-शस्त्रकी कलामें ये अर्जुनके समान हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

तेषां सर्वेषामपि महाबलपराक्रमभाक्त्वादनुपेक्ष्यत्वं पुनर्विवक्षति सर्व एवेति ।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

सौभद्राः सुभद्रापुत्रोऽभिमन्युः। द्रौपदेयाः द्रोपदीपुत्राः प्रतिविन्ध्यादयः पञ्च। द्रुपदश्च महारथ इत्युक्तमयुक्तं यतोऽन्येऽपि महारथा भीष्मप्रोक्ताः सन्तीत्याशङ्क्य तदङ्गीकरोति सर्व एवेति। निर्दिष्टाश्चकारपरिगृहीताश्च महारथाः। एतल्लक्षणं तुएको दशसहस्त्राणि योधयेद्यस्तु धन्विनाम्। शस्त्रशास्त्रप्रवीणश्च स वै प्रोक्तो महारथः। अमितान्योधयेद्यस्तु संप्रोक्तोऽतिरथस्तु सः। रथस्त्वेकेन यो युध्येत्तन्न्यूनोऽर्धरथः स्मृतः।। इति। यद्यपि परपक्षेऽतिरथादयोऽपि सन्ति तथापि तत्तिरोधानं तवातिरथस्य महारथानां निवारणे सामर्थ्यम्। नत्वन्येषामतिरथादीनामित्याचार्यस्योत्साहजननार्थम्। सर्वेऽपि महारथा एव नत्वेकोऽपि रथोऽर्धरथो वा। महारथा इत्यतिरथस्याप्युपलक्षणमिति केचित्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
saubhadraḥthe son of Subhadra
draupadeyāḥthe sons of Draupadi
chaand
sarveall
evaindeed
mahārathāḥ
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.5
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.7
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम। नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते

हे द्विजोत्तम! हमारे पक्ष में भी जो मुख्य हैं, उनपर भी आप ध्यान दीजिये। आपको याद दिलाने के लिये मेरी सेना के जो नायक हैं, उनको मैं कहता हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 6
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 6
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्। सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 6 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 6 का हिंदी अर्थ: "यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 6?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 6 translates to: "The strong Yudhamanyu and the brave Uttamaujas, the son of Subhadra (Abhimanyu, the son of Subhadra and Arjuna), and the sons of Draupadi, all of them great charioteers (great heroes). — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्। सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथ" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 6 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "saubhadro draupadeyāśhcha sarva eva mahā-rathāḥ" mean in English?

"saubhadro draupadeyāśhcha sarva eva mahā-rathāḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 6. The strong Yudhamanyu and the brave Uttamaujas, the son of Subhadra (Abhimanyu, the son of Subhadra and Arjuna), and the sons of Draupadi, all of them great charioteers (great heroes). — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.