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Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 5
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

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BengaliIND

ধৃষ্টকেতু, চেকিতনা, কাশীর বীর রাজা, পুরুজিৎ, কুন্তিভোজ এবং শৈব্য—পুরুষদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ।

TeluguIND

ధృష్టకేతువు, చెకితన, కాశీకి పరాక్రమవంతుడు, పురుజిత్, కుంతిభోజుడు మరియు సాయిబ్యుడు- పురుషులలో ఉత్తముడు.

MalayalamIND

ധൃഷ്ടകേതു, കാശിയിലെ വീരനായ രാജാവായ ചേകിതന, പുരുജിത്ത്, കുന്തിഭോജൻ, സൈബ്യൻ-മനുഷ്യരിൽ ഏറ്റവും ഉത്തമൻ.

MarathiIND

धृष्टकेतू, चेकितान, काशीचा शूर राजा, पुरुजित, कुंतीभोज आणि सैब्य - पुरुषांमध्ये श्रेष्ठ.

BhojpuriIND

धृष्टकेतु, चेकितान, कासी, पुरुजीत, कुंतीभोज, आ सैब्या के वीर राजा-पुरुषन के श्रेष्ठ।

AssameseIND

ধৃষ্টকেতু, চেকিতান, কাছি, পুৰুজিত, কুন্তীভোজ আৰু শৈব্যৰ বীৰ ৰজা—মানুহৰ শ্ৰেষ্ঠ।

KonkaniIND

धृष्टकेतु, चेकिताण, काशी, पुरुजीत, कुंतीभोज आनी सैब्याचो वीर राजा-मनशांतलो श्रेश्ठ.

MaithiliIND

धृष्टकेतु, चेकितान, कासी, पुरुजित, कुंतिभोज, आ सैब्य के वीर राजा—पुरुषों में श्रेष्ठ |

KannadaIND

ಧೃಷ್ಟಕೇತು, ಚೇಕಿತಾನ, ಕಾಶಿಯ ಧೀರ ರಾಜ, ಪುರುಜಿತ್, ಕುಂತಿಭೋಜ ಮತ್ತು ಸಾಯಿಬ್ಯ-ಪುರುಷರಲ್ಲಿ ಉತ್ತಮರು.

NepaliIND

धृष्टकेतु, चेकितान, काशीका वीर राजा, पुरुजित, कुन्तिभोज, र शैब्य—पुरुषहरूमा श्रेष्ठ।

TamilIND

திருஷ்டகேது, காசியின் வீரம் மிக்க மன்னன் சேகிதனன், புருஜித், குந்திபோஜன், சைப்யன் - மனிதர்களில் சிறந்தவர்.

PunjabiIND

ਧ੍ਰਿਸ਼ਟਕੇਤੂ, ਚੇਕਿਤਾਨ, ਕਾਸ਼ੀ ਦਾ ਬਹਾਦਰ ਰਾਜਾ, ਪੁਰੁਜੀਤ, ਕੁੰਤੀਭੋਜ ਅਤੇ ਸੈਬਯ - ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਤਮ ਪੁਰਸ਼।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि'-- जिनसे बाण चलाये जाते हैं, फेंके जाते हैं, उनका नाम 'इष्वास' अर्थात् धनुष है। ऐसे बड़े-बड़े इष्वास (धनुष) जिनसे पास हैं, वे सभी 'महेष्वास' हैं। तात्पर्य है कि बड़े धनुषोंपर बाण चढ़ाने एवं प्रत्यञ्चा खींचनेमें बहुत बल लगता है। जोरसे खींचकर छोड़ा गया बाण विशेष मार करता है। ऐसे बड़े-बड़े धनुष पासमें होनेके कारण ये सभी बहुत बलवान् और शूरवीर हैं। ये मामूली योद्धा नहीं हैं। युद्धमें ये भीम और अर्जुनके समान हैं अर्थात् बलमें ये भीमके समान और अस्त्र-शस्त्रकी कलामें ये अर्जुनके समान हैं।

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Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

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Sri Anandgiri

किञ्च धृष्टकेतुरिति। स्पष्टम्।

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Sri Dhanpati

शत्रुसैन्ये प्रसिद्धाञ्शूरान्दर्शयन्नुपेक्षणीयत्वं वारयति अत्रेति। महान्त इष्वासा धनूंषि येषां ते। तेषां युद्धाकुशलतां निरस्याति युधीति। युद्धे भीमार्जुनसमा इति। भीमार्जुनाभ्यां तुल्याः। युयुधानः सात्यकिः। महारथ इति संनिहितस्य द्रुपदस्यैव विशेषणम् एकवचनस्वारस्यात्। एवमग्रेऽपि बोध्यम्। एतेन युयुधानादीनां महारथ इति विशेषणं धृष्टकेत्वादीनां वीर्यवानिति पुरुजिदादीनां नरपुंगव इति पक्षान्तरं प्रत्युक्तम्। आवृत्तेश्च प्रयोजनशून्यगौरवग्रस्तत्वेनाङ्गीकारायोगात्। यदपि अथवा सर्वाणि विशेषणानि समुच्चित्य सर्वत्र योजनीयानीति। तदपि न। महारथ इत्यस्य वीर्यवानित्यस्य च पौनरुक्त्यापत्तेः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
dhṛiṣhṭaketuḥDhrishtaketu
chekitānaḥChekitan
kāśhirājaḥKashiraj
chaand
vīryavān
purujitPurujit
kuntibhojaḥKuntibhoj
chaand
śhaibyaḥShaibya
chaand
narapuṅgavaḥ
yudhāmanyuḥYudhamanyu
chaand
vikrāntaḥcourageous
uttamaujāḥUttamauja
chaand
vīryavān
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.4
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि। युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.6
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्। सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 5
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 5
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 5 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 5 का हिंदी अर्थ: "यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 5?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 5 translates to: "Dhrishtaketu, Chekitana, the valiant king of Kasi, Purujit, Kuntibhoja, and Saibya—the best of men. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गव" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 5 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "dhṛiṣhṭaketuśhchekitānaḥ kāśhirājaśhcha vīryavān" mean in English?

"dhṛiṣhṭaketuśhchekitānaḥ kāśhirājaśhcha vīryavān" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 5. Dhrishtaketu, Chekitana, the valiant king of Kasi, Purujit, Kuntibhoja, and Saibya—the best of men. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.