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Adhyay 9, Shlok 2
राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्। प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम्

यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है। यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है। यह धर्ममय है, अविनाशी है और करनेमें बहुत सुगम है अर्थात् इसको प्राप्त करना बहुत सुगम है। — VaniSagar

Global Translations

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TamilIND

இதுவே அரச விஞ்ஞானம், அரச இரகசியம், உன்னதமான சுத்திகரிப்பு, நேரடி உள்ளுணர்வு அறிவால் உணரக்கூடியது, நேர்மையின்படி, செயல்படுத்த மிகவும் எளிதானது மற்றும் அழியாதது.

MalayalamIND

ഇതാണ് രാജകീയ ശാസ്ത്രം, രാജകീയ രഹസ്യം, പരമോന്നത ശുദ്ധീകരണം, നേരിട്ടുള്ള അവബോധജന്യമായ ജ്ഞാനത്താൽ സാക്ഷാത്കരിക്കാവുന്നതും, നീതിയനുസരിച്ച്, വളരെ എളുപ്പമുള്ളതും, അനുഷ്ഠിക്കാൻ എളുപ്പമുള്ളതും, നശിക്കാത്തതുമാണ്.

PunjabiIND

ਇਹ ਸ਼ਾਹੀ ਵਿਗਿਆਨ, ਸ਼ਾਹੀ ਭੇਤ, ਪਰਮ ਸ਼ੁੱਧੀਕਰਣ ਹੈ, ਸਿੱਧੇ ਅਨੁਭਵੀ ਗਿਆਨ ਦੁਆਰਾ ਅਨੁਭਵ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਧਾਰਮਿਕਤਾ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਆਸਾਨ ਅਤੇ ਅਵਿਨਾਸ਼ੀ ਹੈ।

NepaliIND

यो राजविज्ञान हो, शाही रहस्य, परम शुद्धिकरण, प्रत्यक्ष सहज ज्ञानद्वारा प्राप्त हुने, धार्मिकता अनुसार गर्न सकिने, गर्न अत्यन्त सहज र अविनाशी।

TeluguIND

ఇది రాజ శాస్త్రం, రాజ రహస్యం, సర్వోత్కృష్టమైన శుద్ధి, ప్రత్యక్ష అంతర్ దృష్టి జ్ఞానం ద్వారా గ్రహించదగినది, నీతి ప్రకారం, నిర్వహించడం చాలా సులభం మరియు నశించనిది.

KannadaIND

ಇದು ರಾಜಶಾಸ್ತ್ರ, ರಾಜ ರಹಸ್ಯ, ಪರಮ ಶುದ್ಧಿ, ನೇರ ಅರ್ಥಗರ್ಭಿತ ಜ್ಞಾನದಿಂದ ಸಾಕ್ಷಾತ್ಕಾರ, ಸದಾಚಾರದ ಪ್ರಕಾರ, ನಿರ್ವಹಿಸಲು ತುಂಬಾ ಸುಲಭ ಮತ್ತು ನಾಶವಾಗುವುದಿಲ್ಲ.

MarathiIND

हे राजशास्त्र आहे, राजेशाही रहस्य आहे, सर्वोच्च शुद्धीकारक आहे, प्रत्यक्ष अंतर्ज्ञानी ज्ञानाने साकार होणारे, धार्मिकतेनुसार, कार्य करण्यास अतिशय सोपे आणि अविनाशी आहे.

BengaliIND

ইহাই রাজকীয় বিজ্ঞান, রাজকীয় রহস্য, পরম শুদ্ধকারী, প্রত্যক্ষ স্বজ্ঞাত জ্ঞান দ্বারা উপলব্ধি করা যায়, ধার্মিকতা অনুসারে, সম্পাদন করা খুবই সহজ এবং অবিনশ্বর।

SindhiIND

هي آهي شاهي علم، شاهي راز، اعليٰ پاڪيزگي وارو، جيڪو سڌيءَ طرح وجدان جي علم سان، سچائيءَ جي مطابق، انجام ڏيڻ ۾ بلڪل آسان ۽ لافاني آهي.

GujaratiIND

આ શાહી વિજ્ઞાન છે, રાજસી રહસ્ય છે, સર્વોચ્ચ શુદ્ધિકરણ છે, જે પ્રત્યક્ષ સાહજિક જ્ઞાન દ્વારા સાકાર થઈ શકે છે, સદાચાર અનુસાર, કરવા માટે ખૂબ જ સરળ અને અવિનાશી છે.

MizoIND

Hei hi lal science, lal thuruk, tithianghlimtu sang ber, direct intuitive knowledge hmanga tihhlawhtlin theih, felna ang chuan, tih awlsam tak leh boral thei lo a ni.

DogriIND

एह् राज विज्ञान ऐ, शाही रहस्य ऐ, परम शुद्ध करने आह्ला ऐ, जेह्ड़ा प्रत्यक्ष सहज ज्ञान कन्नै साकार होंदा ऐ, धर्म दे मताबक, करने च बड़ा सौखा ते अविनाशी।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'राजविद्या'--यह विज्ञानसहित ज्ञान सम्पूर्ण विद्याओंका राजा है; क्योंकि इसको ठीक तरहसे जान लेनेके बाद कुछ भी जानना बाकी नहीं रहता।भगवान्ने सातवें अध्यायके आरम्भमें कहा है कि 'मेरे समग्ररूपको जाननेके बाद जानना कुछ बाकी नहीं रहता।' पन्द्रहवें अध्यायके अन्तमें कहा है कि 'जो असम्मूढ़ पुरुष मेरेको क्षरसे अतीत और अक्षरसे उत्तम जानता है, वह सर्ववित् हो जाता है अर्थात् उसको जानना कुछ बाकी नहीं रहता', इससे ऐसा मालूम होता है कि भगवान्के सगुण-निर्गुण, साकार-निराकार, व्यक्त-अव्यक्त आदि जितने स्वरूप हैं, उन सब स्वरूपोंमें भगवान्के सगुण-साकार स्वरूपकी बहुत विशेष महिमा है।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

वह ज्ञान --, अतिशय प्रकाशयुक्त होनेके कारण समस्त विद्याओंका राजा है। ब्रह्मविद्या सब विद्याओंमें अतिशय देदीप्यमान है यह प्रसिद्ध ही है। तथा ( यह ज्ञान ) समस्त गुप्त रखनेयोग्य भावोंका भी राजा है। एवं यह बड़ा पवित्र और उत्तम भी है? अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र करनेवालोंको पवित्र करनेवाला यह ब्रह्मज्ञान सबसे उत्कृष्ट है। जो अनेक सहस्र जन्मोंमें इकट्ठे हुए पुण्य पापादि कर्मोंको क्षणमात्रमें मूलसहित भस्म कर देता है उसकी पवित्रताका क्या कहना है साथ ही यह ज्ञान प्रत्यक्ष अनुभवमें आनेवाला है? अर्थात् सुख आदिकी भाँति जिसका प्रत्यक्ष अनुभव हो सके? ऐसा है। अनेक गुणोंसे युक्त वस्तुका भी धर्मसे विरोध देखा जाता है? परंतु आत्मज्ञान उनकी तरह धर्मविरोधी नहीं है बल्कि धर्म्य -- धर्ममय है अर्थात् धर्मसे युक्त है। ऐसा पदार्थ भी दुःसम्पाद्य ( प्राप्त करनेमें बड़ा कठिन ) हो सकता है। इसलिये कहते हैं कि वह ज्ञान रत्नोंके विवेकविज्ञानकी भाँति समझनेमें बड़ा सुगम है। परंतु संसारमें अल्प परिश्रमसे सुखपूर्वक सम्पन्न होनेवाले कर्मोंका अल्प फल और कठिनतासे सम्पन्न होनेवाले कर्मोंका महान् फल देखा गया है? अतः यह ज्ञान भी सुगमतासे सम्पन्न होनेवाला होनेके कारण अपने फलका क्षय होनेपर क्षीण हो जायगा? ऐसी शङ्का प्राप्त होनेपर कहते हैं -- यह ज्ञान अव्यय है अर्थात् कर्मोंकी भाँति फलनाशके द्वारा इसका नाश नहीं होता। अतः यह आत्मज्ञान श्रद्धा करने योग्य है।

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Sri Anandgiri

तदाभिमुख्यसिद्धये तज्ज्ञानं स्तौति -- तच्चेति। ब्रह्मविद्या विद्यानां राजा श्रेष्ठेत्यत्र हेतुमाह -- दीप्तीति। कुतो ब्रह्मविद्याया विद्यान्तरेभ्यो दीप्त्यतिशयवत्त्वं तदाह -- दीप्यते हीति। दृश्यते हि विद्वदन्तरेभ्यो लोके पूजातिरेको ब्रह्मविदामिति भावः। उत्कृष्टतमं शुद्धिकारणं ब्रह्मज्ञानमित्येतदुपपादयति -- अनेकेति। तत्र च श्रुतिस्मृती प्रमाणयितव्ये। न शास्त्रैकगम्यमिदं ज्ञानं किंतु प्रत्यक्षप्रमेयमित्याह -- किञ्चेति। प्रत्यक्षमवगमो मानमस्मिन्निति तथा? यद्वावगम्यत इत्यवगमः फलं प्रत्यक्षोऽवगमोऽस्येति दृष्टफलत्वं ज्ञानस्योच्यते। धर्म्यमित्येतद्व्याकरोति -- अनपेतमिति। धर्मस्येव तस्य क्लेशसाध्यत्वमाशङ्क्याह -- एवमपीति। तत्र रत्नविषयं विवेकज्ञानं संप्रयोगादुपदेशापेक्षादनायासेन दृष्टं तथेदं ब्रह्मज्ञानमित्याह -- तथेति। अव्ययमिति विशेषणमाशङ्कापूर्वकं विवृणोति -- तत्रेत्यादिना। व्यवहारभूमिः सप्तम्यर्थः। ज्ञानस्याक्षयफलत्वे फलितमाह -- अत इति।

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Sri Dhanpati

तज्ज्ञानं स्तौति राजेति। राजविद्या विद्यानां सर्वासां राजा। ब्रह्मविद्यावतः पूजातिशयदर्शयेन तस्या अतिशयेन देदीप्यमानत्वात्। तथाच श्रुतिःतस्मादात्मज्ञमर्चयेद्भूतिकामः इति। भगवद्ववचनं चनिरपेक्षं मुनिं शान्तं निर्वैरं समदर्शनम्। अनुब्रजाभ्यहं नित्यं पूयेयेत्यङ्गिरेणुभिः।। इति। तथा सर्वेषां गुह्यानामुत्कर्षवत्त्वेन गोप्यानां राजाऽत्यत्कर्षत्वात्राजदन्तादिषु परम् इत्युपासर्जनस्य परनिपातः। इदं ब्रह्मज्ञानमुत्तमं पवित्रं सर्वेषां पावनानामपि शुद्धिकत्वात्। अन्यद्धि प्रायश्चित्तादिरुपं पवित्रं यथाकथंचित्किंचित्पापं नाशयति। इदं तु सर्वै धर्माधर्मादिलक्षणं अनेकजन्मसंचितं समूलं कर्म नाशयति। क्रियमाणं चाश्चलष्टं करोति। तथाच व्याससूत्रेतदधिगम उत्तरपूर्वाधयोरश्लेषविनाशौ तद्य्वपदेशात्इतरस्याप्येवमसंश्लेषः पाते तु इति। तस्मात्किं तस्य ब्रह्मज्ञानस्य परमपावनत्वं वक्तव्यमेतल्लवसदृशस्यान्यस्य पावन स्यानिरुपणात्। किंच न केवलं धर्मवच्छास्त्रगम्यं परोक्षमेवापितु प्रत्यक्षावगमं प्रत्यक्षेण सुखादेरिवावगमो यस्येति भाष्यम्। प्रत्यक्षोऽवगमो मानमस्मिमन्निति तथा। यद्वावगम्यत इत्यवगमः फलं प्रत्यक्षोऽवगमोऽस्येति दृष्टफलत्वं ज्ञानस्योच्यत इति तट्टीका। प्रथमपक्षेऽवगम्येतऽनेनेत्यवगमो मानं प्रत्यक्षं तदस्मिन्निति स्वरुपतः साक्षिप्रत्यक्षत्वं। द्वितीयपक्षे फलतः तत्प्रत्यक्षत्वं मयेदं विदतमतो नष्टमिदानीं ममात्राज्ञानमिति सार्वजनीनः साक्ष्यनुभवः इति तदर्थः। प्रत्यक्षं नित्यापरोक्षं यत्प्रत्यगात्मवस्तु तदेव याथात्म्येनावगम्येऽनेनेत्यपि केचित्तदेतत्पक्षत्रयमपि भाष्यस्योपलक्षणार्थत्वेनोपादेयम्। नन्वनेकगुणवतोऽपि मांसभक्षणादेर्धर्मविरुद्धत्वं दृष्टम्? तथा आत्मज्ञानमपि किं न स्यादिति तत्राह। धर्म्यं धर्मादनपेतम्। अनेकजन्मार्जितसुकृतसाध्यत्वात्। नन्वेमपि दुःसंपाद्यं स्यादिति तत्राह। सुसुखं कर्ते गुरुपदिष्टवेदान्तवाक्यैरज्ञाननिवृत्त्या सुखेनैव संपादयितुं शक्यं न देशकालऋत्विगाद्यपेक्षास्तीति। ननु लोके यन्महत्फलं तद्वह्वायाससाध्यकर्मसाध्यम्। अल्पं त्वल्पायाससाध्यकर्मसाध्यं दृष्टम्। तद्वज्ज्ञानमपि कर्तुं सुखं अल्पफलं भविष्यतीत्याशङ्क्य रत्नविवेकज्ञानस्याल्पायाससाध्यस्यापि महाफलदर्शनान्नेत्याह। अव्ययं नास्य ज्ञानस्य लोकवत्फलतो व्ययो नाशोस्तीऽत्यव्ययम्। अतः श्रद्धयावश्यं संपाद्यमिति भावः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
rājavidyā
rājaguhyam
pavitrampure
idamthis
uttamamhighest
pratyakṣhadirectly perceptible
avagamamdirectly realizable
dharmyamvirtuous
susukham
kartumto practice
avyayameverlasting
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हे परंतप! इस धर्मकी महिमापर श्रद्धा न रखनेवाले मनुष्य मेरे प्राप्त न होकर मृत्युरूप संसारके मार्गमें लौटते रहते हैं अर्थात् बार-बार जन्मते-मरते रहते हैं। — VaniSagar

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राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्। प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम्

यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है। यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है। यह धर्ममय है, अविनाशी है और करनेमें बहुत सुगम है अर्थात् इसको प्राप्त करना बहुत सुगम है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ: "यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है। यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है। यह धर्ममय है, अविनाशी है और करनेमें बहुत सुगम है अर्थात् इसको प्राप्त करना बहुत सुगम है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 2?

Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 2 translates to: "This is the royal science, the royal secret, the supreme purifier, realizable by direct intuitive knowledge, according to righteousness, very easy to perform and imperishable. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्। प्रत्यक्षावगमं धर्म्यं सुसुखं कर्तुमव्ययम" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 9, श्लोक 2 है जो Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga में संकलित है। यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है। यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है। यह धर्ममय है, अविनाशी है और करनेमें बहुत सुगम है अर्थात् इसको प्राप्त करना बहुत सुगम है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "rāja-vidyā rāja-guhyaṁ pavitram idam uttamam" mean in English?

"rāja-vidyā rāja-guhyaṁ pavitram idam uttamam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 2. This is the royal science, the royal secret, the supreme purifier, realizable by direct intuitive knowledge, according to righteousness, very easy to perform and imperishable. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.