Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 9, Shlok 17
पिताऽहमस्य जगतो माता धाता पितामहः। वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक् साम यजुरेव च

क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत् का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MalayalamIND

ഞാൻ ഈ ലോകത്തിൻ്റെ പിതാവും മാതാവും കർമ്മഫലങ്ങൾ നൽകുന്നവനും പിതാമഹനുമാണ്; അറിയേണ്ട ഒരു കാര്യം, ശുദ്ധി, വിശുദ്ധ ഏകാക്ഷരം (ഓം), കൂടാതെ ഋക്, സാമ, യജുർ വേദങ്ങൾ.

PunjabiIND

ਮੈਂ ਇਸ ਸੰਸਾਰ ਦਾ ਪਿਤਾ ਹਾਂ, ਮਾਤਾ ਹਾਂ, ਕਰਮਾਂ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਵੰਡ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਅਤੇ ਦਾਦਾ ਹਾਂ; ਜਾਣੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਇੱਕ ਚੀਜ਼, ਸ਼ੁੱਧ ਕਰਨ ਵਾਲਾ, ਪਵਿੱਤਰ ਮੋਨੋਸੀਲੇਬਲ (ਓਮ), ਅਤੇ ਰਿਕ, ਸਮਾ ਅਤੇ ਯਜੁਰ ਵੇਦ ਵੀ।

BengaliIND

আমি এই জগতের পিতা, মাতা, কর্মের ফল প্রদানকারী এবং পিতামহ; একটি জিনিস জানা উচিত, শুদ্ধকারী, পবিত্র একবর্ণ (ওম), এবং এছাড়াও রিক, সাম এবং যজুর বেদ।

TeluguIND

నేను ఈ ప్రపంచానికి తండ్రిని, తల్లిని, కర్మల ఫలాలను పంచేవాడిని మరియు తాతని; తెలుసుకోవలసిన ఒక విషయం, శుద్ధి, పవిత్రమైన ఏకాక్షరము (ఓం), మరియు ఋక్, సామ మరియు యజుర్ వేదాలు కూడా.

MarathiIND

मी या जगाचा पिता आहे, माता आहे, कर्मांचे फळ देणारा आहे आणि आजोबा आहे; एक गोष्ट जाणून घेतली पाहिजे, शुद्ध करणारा, पवित्र एक अक्षर (ओम), आणि रिक, साम आणि यजुर्वेद देखील.

KannadaIND

ನಾನು ಈ ಪ್ರಪಂಚದ ತಂದೆ, ತಾಯಿ, ಕಾರ್ಯಗಳ ಫಲವನ್ನು ವಿತರಿಸುವವನು ಮತ್ತು ಅಜ್ಜ; ತಿಳಿಯಬೇಕಾದ ಒಂದು ವಿಷಯವೆಂದರೆ, ಶುದ್ಧಿಕಾರಕ, ಪವಿತ್ರ ಏಕಾಕ್ಷರ (ಓಂ) ಮತ್ತು ಋಕ್, ಸಾಮ ಮತ್ತು ಯಜುರ್ ವೇದಗಳು.

TamilIND

நான் இவ்வுலகின் தந்தை, தாய், செயல்களின் பலன்களை வழங்குபவர், தாத்தா; அறியப்பட வேண்டிய ஒன்று, சுத்திகரிப்பு, புனிதமான ஓரிசை (ஓம்), மேலும் ரிக், சாமம் மற்றும் யஜுர் வேதங்கள்.

SindhiIND

مان هن دنيا جو پيءُ آهيان، مان آهيان، ماءُ آهيان، عملن جي ميوي ڏيان ٿو ۽ ڏاڏو آهيان. هڪ ئي شيءِ جنهن کي سڃاتو وڃي ٿو، پاڪائيندڙ، مقدس مونوسليبل (اوم) ۽ پڻ رڪ، سما ۽ يجور ويد.

GujaratiIND

હું આ જગતનો પિતા છું, માતા છું, કર્મોના ફળનો વિતરક છું અને પિતામહ છું; એક વાત જાણી લેવી જોઈએ, શુદ્ધિકર્તા, પવિત્ર એકાક્ષર (ઓમ), અને રિક, સમા અને યજુર્વેદ પણ.

MaithiliIND

हम एहि संसारक पिता, माता, कर्मफलक वितरक, आ दादा छी; एकटा बात ज्ञात करबाक चाही, शुद्धिकर्ता, पवित्र एकाक्षर (ॐ), आ रिक, साम, आ यजुर्वेद सेहो |

AssameseIND

মই এই জগতৰ পিতৃ, মাতৃ, কৰ্মৰ ফলৰ বিতৰণকাৰী আৰু দাদা; এটা কথা জনা উচিত, শুদ্ধিকৰ, পবিত্ৰ একবৰ্ণ (অম), আৰু লগতে ৰিক, সাম আৰু যজুৰ বেদ।

KonkaniIND

हांव ह्या संसाराचो बापूय, आवय, कर्मांच्या फळांचो वितरक आनी आजो; एक गजाल वळखूंक जाय ती म्हळ्यार शुध्द करपी, पवित्र एकाक्षर (ॐ) आनी तशेंच रिक, साम आनी यजुर्वेद.

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--[अपनी रुचि, श्रद्धा-विश्वासके अनुसार किसीको भी साक्षात् परमात्माका स्वरूप मानकर उसके साथ सम्बन्ध जोड़ा जाय तो वास्तवमें यह सम्बन्ध सत्के साथ ही है। केवल अपने मन-बुद्धिमें किञ्चिन्मात्र भी संदेह न हो। जैसे ज्ञानके द्वारा मनुष्य सब देश, काल, वस्तु, व्यक्ति आदिमें एक परमात्मतत्त्वको ही जानता है। परमात्माके सिवाय दूसरी किसी वस्तु, व्यक्ति, घटना, परिस्थिति, क्रिया,आदिकी किञ्चिन्मात्र भी स्वतन्त्र सत्ता नहीं है -- इसमें उसको किञ्चिन्मात्र भी संदेह नहीं होता। ऐसे ही भगवान् विराट्रूपसे अनेक रूपोंमें प्रकट हो रहे हैं; अतः सब कुछ भगवान्-ही-भगवान् हैं-- इसमें अपनेको किञ्चिन्मात्र भी संदेह नहीं होना चाहिये। कारण कि 'यह सब भगवान् कैसे हो सकते हैं?' यह संदेह साधकको वास्तविक तत्त्वसे, मुक्तिसे वञ्चित कर देता है और महान् आफतमें फँसा देता है। अतः यह बात दृढ़तासे मान लें कि कार्य-कारणरूपे स्थूल-सूक्ष्मरूप जो कुछ देखने, सुनने, समझने और माननेमें आता है, वह सब केवल भगवान् ही हैं। इसी कार्यकारणरूपसे भगवान्की सर्वव्यापकताका वर्णन सोलहवेंसे उन्नीसवें श्लोकतक किया गया है।]

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, मैं ही इस जगत्को उत्पन्न करनेवाला पिता और उसकी जन्मदात्री माता हूँ तथा मैं ही प्राणियोंके कर्मफलका विधान करनेवाला विधाता और पितामह अर्थात् पिताका पिता हूँ तथा जाननेके योग्य? पवित्र करनेवाला? ओंकार? ऋग्वेद? सामवेद और यजुर्वेद सब कुछ मैं ही हूँ।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

इतश्च भगवतः सर्वात्मकत्वमनुमन्तव्यमित्याह -- किञ्चेति। पवित्रं पूयतेऽनेनेति व्युत्पत्त्या परिशुद्धिकारणं पुण्यं कर्मेत्याह -- पावनमिति। वेदितव्ये ब्रह्मणि वेदनसाधनमोङ्कारस्तत्र प्रमाणमृगादि। चकारादथर्वाङ्गिरसो गृह्यन्ते।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

किंचास्य प्रत्यक्षादिसन्निधापितस्य जगतः स्थावरजंगमात्मकस्याहं पितोत्पादयिता माता जनयित्री घाता कर्मफलस्य प्राणिभ्यो विधाता पितुः पुता पितामहः वेद्यं वेदितव्यं ब्रह्मादि तद्वेदनसाधनमपि अहमेवेत्याह -- पवित्रमित्यादि। पूयतेऽनेनेति पवित्रं पावनं यज्ञदानादि। ऊँकारः प्रणवः। ऋक् ऋग्वेदः एवमग्रेऽपि। चकारादथर्वाङ्गिरसो गृह्यन्ते।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
pitāFather
ahamI
asyaof this
jagataḥuniverse
mātāMother
dhātāSustainer
pitāmahaḥGrandsire
vedyamthe goal of knowledge
pavitramthe purifier
omkāra
ṛikthe Rig Veda
sāmathe Sama Veda
yajuḥthe Yajur Veda
evaalso
chaand
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 9.16
अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाऽहमहमौषधम्। मंत्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम्

क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 9.18
गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्। प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम्

क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 9Shlok 17
Bhagavad Gita · Adhyay 9, Shlok 17
पिताऽहमस्य जगतो माता धाता पितामहः। वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक् साम यजुरेव च

क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत् का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 17 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 9 श्लोक 17 का हिंदी अर्थ: "क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत् का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 17?

Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 17 translates to: "I am the father of this world, the mother, the dispenser of the fruits of actions, and the grandfather; the one thing to be known, the purifier, the sacred monosyllable (Om), and also the Rik, Sama, and Yajur Vedas. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"पिताऽहमस्य जगतो माता धाता पितामहः। वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक् साम यजुरेव च" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 9, श्लोक 17 है जो Bhagavad Gita के Raja-Vidya-Raja-Guhya Yoga में संकलित है। क्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत् का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ" mean in English?

"pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 9 Verse 17. I am the father of this world, the mother, the dispenser of the fruits of actions, and the grandfather; the one thing to be known, the purifier, the sacred monosyllable (Om), and also the Rik, Sama, and Yajur Vedas. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.