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Sudarshana Chakra
Adhyay 8, Shlok 7
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्

इसलिये तू सब समयमें मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। मेरेमें मन और बुद्धि अर्पित करनेवाला तू निःसन्देह मेरेको ही प्राप्त होगा। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

BhojpuriIND

एह से हर समय खाली हमरा के याद करीं आ लड़ीं। मन आ बुद्धि हमरा पर टिकल होके निस्संदेह अकेले हमरा लगे आ जाईब।

DogriIND

इस करिए हर समें सिर्फ मिगी याद करो ते लड़ो। मन ते बुद्धि मेरे उप्पर टिकी दी होई, निस्संदेह मेरे कोल अकेले गै औगे।

ManipuriIND

ꯃꯔꯝ ꯑꯗꯨꯅꯥ ꯃꯇꯝ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯇꯥ ꯑꯩꯕꯨ ꯅꯤꯡꯁꯤꯡꯕꯤꯌꯨ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯂꯥꯟꯊꯦꯡꯅꯕꯤꯌꯨ꯫ ꯅꯉꯒꯤ ꯋꯥꯈꯜ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯋꯥꯈꯜ ꯑꯗꯨ ꯑꯩꯉꯣꯟꯗꯥ ꯂꯦꯞꯂꯒꯥ ꯅꯉꯅꯥ ꯑꯩꯒꯤ ꯃꯅꯥꯛꯇꯥ ꯂꯥꯛꯀꯅꯤ ꯍꯥꯌꯕꯁꯤꯗꯥ ꯆꯤꯡꯅꯕꯥ ꯂꯩꯇꯦ꯫

AssameseIND

গতিকে সকলো সময়তে কেৱল মোক স্মৰণ কৰি যুদ্ধ কৰক। মন আৰু বুদ্ধি মোৰ ওপৰত নিবদ্ধ কৰি নিঃসন্দেহে অকল মোৰ ওচৰলৈ আহিবা।

GujaratiIND

તેથી, દરેક સમયે ફક્ત મને જ યાદ કરો અને યુદ્ધ કરો. તમારા મન અને બુદ્ધિને મારા પર સ્થિર કરીને, તમે નિઃશંકપણે મારી પાસે એકલા આવશો.

BengaliIND

অতএব, সর্বাবস্থায় আমাকে স্মরণ কর এবং যুদ্ধ কর। আপনার মন এবং বুদ্ধি আমার উপর স্থির থাকলে, আপনি নিঃসন্দেহে আমার কাছে একা আসবেন।

MarathiIND

म्हणून सदैव फक्त माझेच स्मरण करून युद्ध करा. तुमचे मन आणि बुद्धी माझ्यावर स्थिर ठेवून तुम्ही निःसंशयपणे माझ्याकडे एकट्याने याल.

SindhiIND

تنهن ڪري، هر وقت صرف مون کي ياد ڪريو ۽ وڙهندا. توهان جي عقل ۽ عقل مون تي قائم آهي، توهان بلاشبہ مون وٽ اڪيلو ايندا.

MalayalamIND

അതിനാൽ, എല്ലായ്‌പ്പോഴും എന്നെ മാത്രം ഓർത്ത് യുദ്ധം ചെയ്യുക. നിങ്ങളുടെ മനസ്സും ബുദ്ധിയും എന്നിൽ ഉറപ്പിച്ചാൽ, നിങ്ങൾ സംശയമില്ലാതെ എന്നിലേക്ക് വരും.

TamilIND

எனவே, எப்பொழுதும் என்னை மட்டும் நினைத்துக்கொண்டு போரிடுங்கள். உனது மனமும் புத்தியும் என்னிடமே நிலைத்திருந்தால், சந்தேகமில்லாமல் என்னிடமே வருவீர்கள்.

KannadaIND

ಆದ್ದರಿಂದ, ಎಲ್ಲಾ ಸಮಯದಲ್ಲೂ, ನನ್ನನ್ನು ಮಾತ್ರ ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳಿ ಮತ್ತು ಹೋರಾಡಿ. ನಿಮ್ಮ ಮನಸ್ಸು ಮತ್ತು ಬುದ್ಧಿಯು ನನ್ನ ಮೇಲೆ ನೆಲೆಗೊಂಡರೆ, ನೀವು ನಿಸ್ಸಂದೇಹವಾಗಿ ನನ್ನ ಬಳಿಗೆ ಬರುತ್ತೀರಿ.

NepaliIND

त्यसैले सदा मलाई याद गरेर लड। आफ्नो मन र बुद्धिले ममा स्थिर भएर निस्सन्देह ममा एक्लै आउने छौ।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --'तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च'--यहाँ 'सर्वेषु कालेषु' पदोंका सम्बन्ध केवल स्मरणसे ही है युद्धसे नहीं क्योंकि युद्ध सब समयमें निरन्तर हो ही नहीं सकता। कोई भी क्रिया निरन्तर नहीं हो सकती प्रत्युत समयसमयपर ही हो सकती है। कारण कि प्रत्येक क्रियाका आरम्भ और समाप्ति होती है -- यह बात सबके अनुभवकी है। परन्तु भगवत्प्राप्तिका उद्देश्य होनेसे भगवान्का स्मरण सब समयमें होता है क्योंकि उद्देश्यकी जागृति हरदम रहती है।सब समयमें स्मरण करनेके लिये कहनेका तात्पर्य है कि प्रत्येक कार्यमें समयका विभाग होता है जैसे -- यह समय सोनेका और यह समय जगनेका है यह समय नित्यकर्मका है यह समय जीविकाके लिये कामधंधा करनेका है यह समय भोजनका है आदिआदि। परन्तु भगवान्के स्मरणमें समयका विभाग नहीं होना चाहिये। भगवान्को तो सब समयमें ही याद रखना चाहिये।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

क्योंकि इस प्रकार अन्तकालकी भावना ही अन्य शरीरकी प्राप्तिका कारण है --, इसलिये तू हर समय मेरा स्मरण कर और शास्त्राज्ञानुसार स्वधर्मरूप युद्ध भी कर। इस प्रकार मुझ वासुदेवमें जिसके मनबुद्धि अर्पित हैं ऐसा तू मुझमें अर्पित किये हुए मनबुद्धिवाला होकर मुझको ही अर्थात् मेरे यथाचिन्तित स्वरूपको ही प्राप्त हो जायगा इसमें संशय नहीं है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

सततभावना प्रतिनियतफलप्राप्तिनिमित्तान्त्यप्रत्ययहेतुरित्यङ्गीकृत्यानन्तरश्लोकमवतारयति -- तस्मादिति। विशेषणत्रयवतो भगवदनुस्मरणस्य भगवत्प्राप्तिहेतुत्वं तस्मादित्युच्यते। सर्वेषु कालेष्वादरनैरन्तर्याभ्यां सहेति यावत्। भगवदनुस्मरणे विशेषणत्रयसाहित्यं यथाशास्त्रमिति द्योत्यते। भगवदनुसंधानं कर्तव्यमुक्त्वा तेन सह स्वधर्ममपि कुरु युद्धमित्युपदिशता भगवता समुच्चयो ज्ञानकर्मणोरङ्गीकृतो भातीत्याशङ्क्याह -- मयीति। मनोबुद्धिगोचरं क्रियाकारकफलजातं सकलमपि ब्रह्मैवेति भावयन्युध्यस्वेति ब्रुवता क्रियादिकलापस्य ब्रह्मातिरिक्तस्याभावाभिलापान्नात्र समुच्चयो विवक्षित इत्यर्थः। उक्तरीत्या स्वधर्ममनुवर्तमानस्य प्रयोजनमाह -- मामेवेति। उक्तसाधनवशात्फलप्राप्तौ प्रतिबन्धाभावं सूचयति -- असंशय इति।

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Sri Dhanpati

यस्मादेवं सदाभ्यस्ता भावनान्तकालेऽपि सैवोद्भूता स्वविषयप्राप्तिकरी तस्मात् सर्वेषु कालेषु आदरनैरन्तर्याभ्यां मां सगुणं निर्गुणं वा यथाशास्त्रमनुस्मर यध्य च युध्यस्व स्ववर्णधर्मयुद्धं च कुरु।न चलति निजवर्णधर्मतो यः सममतिरात्मसुहृद्विपक्षपक्षे। न हरति न च हन्ति किंचिदुच्चैः सितमनसं तमवेहि विषणुभक्तम् इति विष्णुपुराणे निजवर्णधर्मतोऽजलनं विष्णुभक्तलक्षणमुक्तम्। भगवता च युध्य चेत्युक्तं तेनोपासनाकर्मसमुच्चयः। मयि अर्पिते मनोबुद्धी यस्य तव स त्वमेतादृशः सन्मामेवैष्यसि आगमिष्यसि अत्र संशयो न विद्यते।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
tasmāttherefore
sarveṣhuin all
kāleṣhutimes
māmme
anusmararemember
yudhyafight
chaand
mayito me
arpitasurrender
manaḥmind
buddhiḥintellect
māmto me
evasurely
eṣhyasiyou shall attain
asanśhayaḥwithout a doubt
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Bhagavad Gita · 8.6
यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्। तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः

हे कुन्तीपुत्र अर्जुन ! मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भावका स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है वह उस (अन्तकालके) भावसे सदा भावित होता हुआ उस-उसको ही प्राप्त होता है अर्थात् उस-उस योनिमें ही चला जाता है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 8.8
अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना। परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन्

हे पृथानन्दन ! अभ्यासयोगसे युक्त और अन्यका चिन्तन न करनेवाले चित्तसे परम दिव्य पुरुषका चिन्तन करता हुआ (शरीर छोड़नेवाला मनुष्य) उसीको प्राप्त हो जाता है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 8Shlok 7
Bhagavad Gita · Adhyay 8, Shlok 7
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्

इसलिये तू सब समयमें मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। मेरेमें मन और बुद्धि अर्पित करनेवाला तू निःसन्देह मेरेको ही प्राप्त होगा। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 8 श्लोक 7 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 8 श्लोक 7 का हिंदी अर्थ: "इसलिये तू सब समयमें मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। मेरेमें मन और बुद्धि अर्पित करनेवाला तू निःसन्देह मेरेको ही प्राप्त होगा। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Aksara-Parabrahman Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 7?

Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 7 translates to: "Therefore, at all times, remember Me only and fight. With your mind and intellect fixed on Me, you will undoubtedly come to Me alone. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 8, श्लोक 7 है जो Bhagavad Gita के Aksara-Parabrahman Yoga में संकलित है। इसलिये तू सब समयमें मेरा स्मरण कर और युद्ध भी कर। मेरेमें मन और बुद्धि अर्पित करनेवाला तू निःसन्देह मेरेको ही प्राप्त होगा। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "tasmāt sarveṣhu kāleṣhu mām anusmara yudhya cha" mean in English?

"tasmāt sarveṣhu kāleṣhu mām anusmara yudhya cha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 7. Therefore, at all times, remember Me only and fight. With your mind and intellect fixed on Me, you will undoubtedly come to Me alone. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.