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Sudarshana Chakra
Adhyay 6, Shlok 47
योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना। श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः

सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है। — VaniSagar

Global Translations

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TeluguIND

మరియు యోగులందరిలో, విశ్వాసముతో నిండిన మరియు తన అంతరంగముతో నాలో విలీనమై, నన్ను ఆరాధించేవాడు నాచే అత్యంత భక్తిపరుడుగా పరిగణించబడతాడు.

KannadaIND

ಮತ್ತು ಎಲ್ಲಾ ಯೋಗಿಗಳಲ್ಲಿ, ಯಾರು ನಂಬಿಕೆಯಿಂದ ತುಂಬಿದ ಮತ್ತು ನನ್ನಲ್ಲಿ ವಿಲೀನಗೊಂಡರು, ನನ್ನನ್ನು ಆರಾಧಿಸುತ್ತಾರೋ ಅವರನ್ನು ನಾನು ಅತ್ಯಂತ ಶ್ರದ್ಧಾವಂತ ಎಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಾನೆ.

NepaliIND

र सबै योगीहरूमध्ये, जसले आस्थाले भरिएको र ममा विलीन भई मेरो आराधना गर्छ, उसलाई म सबैभन्दा भक्त मानिन्छ।

SindhiIND

۽ سڀني يوگين جي وچ ۾، جيڪو ايمان سان پورو ٿيو ۽ پنهنجي باطن سان مون ۾ ضم ٿي، منهنجي پوڄا ڪري ٿو، مون کي سڀ کان وڌيڪ عقيدتمند سمجهي ٿو.

BengaliIND

এবং সমস্ত যোগীদের মধ্যে, যিনি বিশ্বাসে পূর্ণ এবং নিজের অন্তরের সাথে আমার মধ্যে মিশেছেন, আমার উপাসনা করেন, তিনিই আমাকে সবচেয়ে ভক্ত বলে মনে করেন।

MarathiIND

आणि सर्व योगींमध्ये, जो श्रद्धेने आणि स्वतःच्या अंतर्मनाने माझ्यात विलीन होऊन माझी उपासना करतो, तो मी सर्वात भक्त मानतो.

MalayalamIND

എല്ലാ യോഗിമാരിലും, വിശ്വാസത്താൽ നിറഞ്ഞവനും, തൻ്റെ ഉള്ളംകൊണ്ട് എന്നിൽ ലയിച്ചും, എന്നെ ആരാധിക്കുന്നവനും ഞാൻ ഏറ്റവും സമർപ്പിതനായി കണക്കാക്കുന്നു.

TamilIND

எல்லா யோகிகளிலும், நம்பிக்கை நிரம்பியவனாகவும், தன் உள்ளத்துடன் என்னில் லயித்து, என்னை வழிபடுகிறவனே, என்னை மிகவும் பக்தி கொண்டவனாகக் கருதுகிறான்.

ManipuriIND

ꯑꯗꯨꯒꯥ ꯌꯣꯒꯤ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯀꯤ ꯃꯔꯛꯇꯥ ꯊꯥꯖꯕꯅꯥ ꯊꯜꯂꯕꯥ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯃꯍꯥꯛꯀꯤ ꯅꯨꯡꯒꯤ ꯑꯣꯏꯕꯥ ꯃꯁꯥꯒꯥ ꯂꯣꯌꯅꯅꯥ ꯑꯩꯉꯣꯟꯗꯥ ꯌꯥꯑꯣꯔꯀꯄꯥ ꯃꯤꯑꯣꯏ ꯑꯗꯨꯅꯥ ꯑꯩꯕꯨ ꯈꯨꯔꯨꯃꯖꯔꯤꯕꯥ ꯑꯗꯨ ꯑꯩꯅꯥ ꯈ꯭ꯕꯥꯏꯗꯒꯤ ꯀꯠꯊꯣꯀꯄꯥ ꯃꯤꯅꯤ ꯍꯥꯌꯅꯥ ꯂꯧꯏ |

AssameseIND

আৰু সকলো যোগীসকলৰ ভিতৰত যিজনে বিশ্বাসেৰে পৰিপূৰ্ণ আৰু অন্তৰ্নিহিত আত্মাৰ সৈতে মোত বিলীন হৈ মোক পূজা কৰে, তেওঁক মোৰ দ্বাৰা আটাইতকৈ ভক্ত বুলি গণ্য কৰা হয়।

DogriIND

ते सारे योगियें च जेह्ड़ा विश्वास कन्नै भरोचे दा ते अपने अंदरूनी आत्म कन्नै मेरे च विलीन होई गेदा ऐ, ओह् मेरी भक्ति करदा ऐ, उसी मैं सारें कोला भक्त समझदा ऐ।

GujaratiIND

અને બધા યોગીઓમાં, જે શ્રદ્ધાથી ભરપૂર અને પોતાના અંતરમનથી મારામાં ભળી જાય છે, મારી ભક્તિ કરે છે, તે મારા દ્વારા સૌથી વધુ ભક્ત માનવામાં આવે છે.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'योगिनामपि सर्वेषाम्'--जिनमें जडतासे सम्बन्ध-विच्छेद करनेकी मुख्यता है, जो कर्मयोग, सांख्ययोग, हठयोग, मन्त्रयोग, लययोग आदि साधनोंके द्वारा अपने स्वरूपकी प्राप्ति-(अनुभव-) में ही लगे हुए हैं, वे योगी सकाम तपस्वियों, ज्ञानियों और कर्मियोंसे श्रेष्ठ हैं। परन्तु उन सम्पूर्ण योगियोंमें भी केवल मेरे साथ सम्बन्ध जोड़नेवाला भक्तियोगी सर्वश्रेष्ठ है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

रुद्र आदित्य आदि देवोंके ध्यानमें लगे हुए समस्त योगियोंसे भी जो योगी श्रद्धायुक्त हुआ मुझ वासुदेवमें अच्छी प्रकार स्थित किये हुए अन्तःकरणसे मुझे ही भजता है उसे मैं युक्ततम अर्थात् अतिशय श्रेष्ठ योगी मानता हूँ।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

नन्वादित्यो विराडात्मा सूत्रं कारणमक्षरमित्येतेषामुपासका भूयांसो योगिनो गम्यन्ते तेषां कतमः श्रेयानिष्यते तत्राह योगिनामिति। यो भगवन्तं सगुणं निर्गुणं वा यथोक्तेन चेतसा श्रद्दधानः सन्ननवरतमनुसंधत्ते स युक्तानां मध्येऽतिशयेन युक्तः श्रेयानीश्वरस्याभिप्रेतो नहि तदीयोऽभिप्रायोऽन्यथा भवितुमर्हतीत्यर्थः। तदनेनाध्यायेन कर्मयोगस्य संन्यासहेतोर्मर्यादां दर्शयता साङ्गं च योगं विवृण्वता मनोनिग्रहोपायोपदेशेन योगभ्रष्टस्यात्यन्तिकनाशशङ्कावकाशं शिथिलयता त्वंपदार्थाभिज्ञस्य ज्ञाननिष्ठत्वोक्त्या वाक्यार्थज्ञानान्मुक्तिरिति साधितम्।इत्यानन्दगिरिकृतगीताभाष्यटीकायां षष्ठोऽध्यायः

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

योगिनामन्यदेवताध्यानयुक्तानामपि सर्वेषां मध्ये मद्गतेन मयि वासुदेवे समाहितेनान्तरात्मनान्तःकरणेन श्रद्धावान्वासुदेवान्न परं किंचिदिति श्रद्दधानः सन् यो मां भजते सेवते स मेऽतिशयेन यक्तो युक्ततमः सर्वोत्तमो ध्यानयोगी मतोऽभिप्रेतः। अतस्त्वमेतादृशो ध्यानयोगी भवेत्याशयः। तदनेने षष्ठाध्यायेन कर्मयोगस्य संन्यासहेतोर्मर्यादारुपं साङ्ग ध्यानयोगं मनोनिग्रहोपायं योगभ्रष्टस्य दुर्गत्यभावेन सुगत्या मोक्षाप्तिं वासुदेवभजनस्य श्रैष्ठ्यं च दर्शयताऽनेन साधनेन शुद्धत्वंपदार्थोभिज्ञस्य वाक्यार्थज्ञानान्मोक्ष िति प्रसाधितम्।।ईशाराधनतत्परेण मनसा कर्मादिसंतन्वता कर्तृत्वादिविवर्जितेन निगमैर्लब्धा विशुद्धात्मता। येनाप्तं परमैकतां सुखधनां स्वं नौमि तं शाश्वतं प्रत्यञ्चं परमार्थतो भ्रमवशाज्जीवं स्वरुपाच्च्युतम्।इति श्रीपरमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीबालस्वामिश्रीपादशिष्यदत्तवंशावतंसरामकुमारसुनुधनपतिविदुषा विरचितायां श्रीगीताभाष्योत्कर्षदीपिकायां षष्ठोऽध्यायः समाप्तः

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
yogināmof all yogis
apihowever
sarveṣhāmall types of
matgatena
antaḥinner
ātmanāwith the mind
śhraddhāvān
bhajateengage in devotion
yaḥwho
māmto me
saḥhe
meby me
yuktatamaḥ
mataḥis considered
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 6.46
तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः। कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन

(सकामभाववाले) तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है -- ऐसा मेरा मत है। अतः हे अर्जुन ! तू योगी हो जा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 6Shlok 47
Bhagavad Gita · Adhyay 6, Shlok 47
योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना। श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः

सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 6 श्लोक 47 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 6 श्लोक 47 का हिंदी अर्थ: "सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Abhyasa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 47?

Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 47 translates to: "And among all the Yogis, he who, full of faith and with his inner self merged in Me, worships Me is deemed by Me to be the most devoted. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना। श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 6, श्लोक 47 है जो Bhagavad Gita के Abhyasa Yoga में संकलित है। सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "yoginām api sarveṣhāṁ mad-gatenāntar-ātmanā" mean in English?

"yoginām api sarveṣhāṁ mad-gatenāntar-ātmanā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 6 Verse 47. And among all the Yogis, he who, full of faith and with his inner self merged in Me, worships Me is deemed by Me to be the most devoted. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.