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Sudarshana Chakra
Adhyay 4, Shlok 4
अर्जुन उवाच अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः। कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति

आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है; अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था - यह बात मैं कैसे समझूँ? — VaniSagar

Global Translations

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BengaliIND

পরে তোমার জন্ম, এবং তার পূর্বে বিভাসবান (সূর্য) এর জন্ম; আমি কি করে বুঝব যে আপনি শুরু থেকেই এই যোগ শিখিয়েছেন?

TeluguIND

తరువాత నీ జన్మ, దానికి ముందు వివస్వాన్ (సూర్యుడు); నువ్వు ఈ యోగాన్ని మొదటి నుండి నేర్పించావు అని నేను ఎలా అర్థం చేసుకోవాలి?

NepaliIND

पछि तिम्रो जन्म भयो, र त्यसभन्दा अगाडि विवस्वन (सूर्य) को जन्म भएको थियो; यो योग तपाईंले सुरुदेखि नै सिकाउनुभएको हो भनेर मैले कसरी बुझूँ?

TamilIND

பிற்பாடு உனது பிறப்பு, அதற்கு முன் விவஸ்வான் (சூரியன்) பிறந்தது; நீ இந்த யோகத்தை ஆரம்பத்திலிருந்தே கற்றுக் கொடுத்திருக்கிறாய் என்பதை நான் எப்படி புரிந்துகொள்வது?

SindhiIND

تنهنجو جنم بعد ۾ ٿيو، ۽ ان کان اڳ Vivasvan (سج) جو جنم ٿيو. مان ڪيئن سمجھان ته توھان شروع کان وٺي ھي يوگا سيکاريو آھي؟

AssameseIND

পিছত তোমাৰ জন্ম হৈছিল আৰু তাৰ আগতে বিৱস্বন (সূৰ্য্য)ৰ জন্ম হৈছিল; মই কেনেকৈ বুজিম যে তুমি এই যোগক আদিৰে পৰা শিকাইছা?

MaithiliIND

बाद मे अहाँक जन्म भेल, आ ताहि सँ पहिने विवस्वान (सूर्य) केर जन्म भेल; हम कोना बुझब जे अहाँ ई योग शुरूए सँ सिखबैत छी?

KonkaniIND

उपरांत तुजो जल्म जालो आनी ताचे आदीं विवस्वान (सूर्य) चो जल्म जालो; तुवें हो योग सुरवाती सावन शिकयला हें हांव कशें समजूंक जाय?

PunjabiIND

ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਤੇਰਾ ਜਨਮ ਹੋਇਆ, ਅਤੇ ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵਿਵਾਸਵਨ (ਸੂਰਜ) ਦਾ ਜਨਮ ਹੋਇਆ ਸੀ; ਮੈਂ ਕਿਵੇਂ ਸਮਝਾਂ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਇਹ ਯੋਗਾ ਸ਼ੁਰੂ ਤੋਂ ਹੀ ਸਿਖਾਇਆ ਹੈ?

GujaratiIND

પાછળથી તારો જન્મ થયો હતો, અને તે પહેલા વિવાસવન (સૂર્ય) નો જન્મ થયો હતો; હું કેવી રીતે સમજી શકું કે તમે આ યોગ શરૂઆતથી જ શીખવ્યો છે?

MarathiIND

नंतर तुझा जन्म झाला, आणि त्यापूर्वी विवस्वान (सूर्य) चा जन्म झाला; हा योग तू सुरुवातीपासूनच शिकवला आहेस हे मला कसे समजावे?

KannadaIND

ನಂತರ ನಿನ್ನ ಜನ್ಮ, ಮತ್ತು ಅದಕ್ಕೂ ಮೊದಲು ವಿವಸ್ವಾನ್ (ಸೂರ್ಯ) ಜನನ; ನೀನು ಮೊದಲಿನಿಂದಲೂ ಈ ಯೋಗವನ್ನು ಕಲಿಸಿದ್ದೀಯ ಎಂದು ನಾನು ಹೇಗೆ ಅರ್ಥಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಲಿ?

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

4.4।। व्याख्या--'अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः'--आपका जन्म तो अभी कुछ वर्ष पूर्व श्रीवसुदेवजीके घर हुआ है, पर सूर्यका जन्म सृष्टिके आरम्भमें हुआ था। अतः आपने सूर्यको कर्मयोग कैसे कहा था? अर्जुनके इस प्रश्नमें तर्क या आक्षेप नहीं है, प्रत्युत जिज्ञासा है। वे भगवान्के जन्म-सम्बन्धी रहस्यको सुगमतापूर्वक समझनेकी दृष्टिसे ही प्रश्न करते हैं; क्योंकि अपने जन्म-सम्बन्धी रहस्यको प्रकट करनेमें भगवान् ही सर्वथा समर्थ हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

भगवान्ने असङ्गत कहा ऐसी धारणा किसीकी न हो जाय अतः उसको दूर करनेके लिये शङ्का करता हुआसा अर्जुन बोला आपका जन्म तो अर्वाचीन है अर्थात् अभी वसुदेवके घरमें हुआ है और सूर्यकी उत्पत्ति पहले सृष्टिके आदिमें हुई थी। तब मैं इस बातको अविरुद्धार्थयुक्त ( सुसङ्गत ) कैसे समझूँ कि जिन आपने इस योगको आदिकालमें कहा था वही आप मुझसे कह रहे हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

भगवति लोकस्यानीश्वरत्वशङ्कां निवर्तयितुं चोद्यमुद्भावयति भगवतेति। परिहारार्थं भगवतो मनुष्यवदवस्थितस्यानीश्वरत्वमुपेत्य तद्वचने शङ्कितविप्रतिषेधस्येतिशेषः। भगवतो निजरूपमुपेत्य नेदं चोद्यंकिंतु लीलाविग्रहं गृहीत्वेति वक्तुं चोद्यमिवेत्युक्तम्। एतच्छब्दार्थमेव स्फुटयति यस्त्वमिति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

भगवति वासुदेवे मनुष्यवत् स्थिते याऽनीश्वरत्वासर्वज्ञत्वशङ्का मूर्खाणां तत्परिहाराय चोद्यमिव कुर्वन्नर्जुन उवाच। भवतो जन्मापरं अर्वाचीनं वसुदेवग्रहे। विवस्वतो जन्म परं पूर्वं सर्गादौ। तत्तस्मादेतज्ज्ञानं त्वमेवादौ प्रोक्तवानिति कथं विजानीयाम्। यत्तु अपरमतिहीनं न मनुष्यत्वात् परमुत्कृष्टं च देवत्वात् इति तत्तु त्वमादौ प्रोक्तवानिति वाक्यशेषविरोधादुपेक्ष्यम्। भाष्यस्योपलक्षणपरत्वेन तदविरोधेन वा ग्राह्यम्। आदित्यं प्रत्युपदेष्टा सर्वज्ञ ईश्वरस्त्वं तु तदन्यत्वादनीश्वरः। तत एवासर्वज्ञश्चेत्येवं तस्माद्विरुद्धमिदमहमादौ प्रोक्तवानिति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
arjunaḥ uvāchaArjun said
aparamlater
bhavataḥyour
janmabirth
paramprior
janmabirth
vivasvataḥVivasvan, the sun
kathamhow
etatthis
vijānīyāmam I to understand
tvamyou
ādauin the beginning
proktavāntaught
itithus
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 4.3
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः। भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्

तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिये वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है; क्योंकि यह बड़ा उत्तम रहस्य है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 4.5
श्री भगवानुवाच बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन। तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप

श्रीभगवान् बोले -- हे परन्तप अर्जुन ! मेरे और तेरे बहुत-से जन्म हो चुके हैं। उन सबको मैं जानता हूँ, पर तू नहीं जानता। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 4Shlok 4
Bhagavad Gita · Adhyay 4, Shlok 4
अर्जुन उवाच अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः। कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति

आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है; अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था - यह बात मैं कैसे समझूँ? — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 4 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 4 श्लोक 4 का हिंदी अर्थ: "आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है; अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था - यह बात मैं कैसे समझूँ? — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Jnana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 4?

Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 4 translates to: "Later was Thy birth, and prior to it was the birth of Vivasvan (the Sun); how am I to understand that Thou hast taught this Yoga from the beginning? — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अर्जुन उवाच अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः। कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवा" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 4, श्लोक 4 है जो Bhagavad Gita के Jnana Yoga में संकलित है। आपका जन्म तो अभीका है और सूर्यका जन्म बहुत पुराना है; अतः आपने ही सृष्टिके आदिमें सूर्यसे यह योग कहा था - यह बात मैं कैसे समझूँ? — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "arjuna uvācha" mean in English?

"arjuna uvācha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 4 Verse 4. Later was Thy birth, and prior to it was the birth of Vivasvan (the Sun); how am I to understand that Thou hast taught this Yoga from the beginning? — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.