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Sudarshana Chakra
Adhyay 3, Shlok 23
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः

हे पार्थ! अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय; क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ, तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं वर्णसंकरताको करनेवाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

BengaliIND

হে অর্জুন, আমি যদি কখনও কর্মে নিজেকে নিয়োজিত না করি, পরিশ্রান্ত না হই, লোকেরা সর্বতোভাবে আমার পথ অনুসরণ করবে।

KannadaIND

ಯಾಕಂದರೆ, ನಾನು ಎಂದಿಗೂ ಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ತೊಡಗಿಸಿಕೊಳ್ಳದಿದ್ದರೆ, ದಣಿದಿಲ್ಲ, ಓ ಅರ್ಜುನಾ, ಜನರು ಎಲ್ಲಾ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಮಾರ್ಗವನ್ನು ಅನುಸರಿಸುತ್ತಾರೆ.

TeluguIND

ఎందుకంటే, నేను ఎప్పుడూ పనిలో నిమగ్నమై ఉండకపోతే, అలసిపోకుండా, ప్రజలు అన్ని విధాలుగా నా మార్గాన్ని అనుసరిస్తారు, ఓ అర్జునా.

NepaliIND

किनकि, हे अर्जुन, मैले कहिल्यै पनि अथक नभई कर्ममा संलग्न भइनँ भने, मानिसहरूले सबै तरिकाले मेरो मार्ग अनुसरण गर्नेछन्।

PunjabiIND

ਹੇ ਅਰਜੁਨ, ਜੇ ਮੈਂ ਕਦੇ ਵੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਰਮ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਰੁੱਝਦਾ, ਬਿਨਾਂ ਥੱਕੇ, ਲੋਕ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਮੇਰੇ ਮਾਰਗ ਦੀ ਪਾਲਣਾ ਕਰਨਗੇ, ਹੇ ਅਰਜੁਨ.

TamilIND

ஏனென்றால், நான் எப்பொழுதும் செயலில் ஈடுபடாமல் இருந்தால், மக்கள் எல்லா வகையிலும் என் வழியைப் பின்பற்றுவார்கள், அர்ஜுனா.

GujaratiIND

કારણ કે, જો હું ક્યારેય અકળાયા વિના મારી જાતને ક્રિયામાં વ્યસ્ત ન રાખું, તો લોકો દરેક રીતે મારા માર્ગને અનુસરશે, હે અર્જુન.

MalayalamIND

എന്തെന്നാൽ, തളർച്ചയില്ലാതെ ഞാൻ ഒരിക്കലും പ്രവർത്തനത്തിൽ ഏർപ്പെട്ടില്ലെങ്കിൽ, ഹേ അർജുനാ, ആളുകൾ എല്ലാവിധത്തിലും എൻ്റെ പാത പിന്തുടരും.

SindhiIND

ڇو ته، اي ارجن، مون کي ڪڏهن به ڪم ۾ مشغول نه ڪرڻ گهرجي، بي لباس، ماڻهو هر طريقي سان منهنجي رستي تي هلندا، اي ارجن.

MarathiIND

कारण, हे अर्जुना, मी कधीही न थकता, कृतीत गुंतून राहू नये, तर लोक सर्व प्रकारे माझ्या मार्गाचे अनुसरण करतील.

ManipuriIND

ꯃꯔꯃꯗꯤ, ꯑꯩꯅꯥ ꯀꯩꯗꯧꯉꯩꯗꯁꯨ ꯊꯕꯛꯇꯥ ꯌꯥꯑꯣꯗ꯭ꯔꯕꯗꯤ, ꯋꯥꯈꯜ ꯋꯥꯕꯥ ꯂꯩꯇꯅꯥ, ꯃꯤꯌꯥꯝꯅꯥ ꯃꯑꯣꯡ ꯈꯨꯗꯤꯡꯃꯛꯇꯥ ꯑꯩꯒꯤ ꯂꯝꯕꯤꯗꯥ ꯆꯠꯂꯃꯒꯅꯤ, ꯍꯦ ꯑꯔꯖꯨꯟ |

DogriIND

कीजे, जेकर मैं कदें बी अपने आप गी कर्म च नेईं लाना, अथक, लोक हर चाल्ली मेरे रस्ते पर चलदे हे अर्जुन।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

3.23।। व्याख्या-- [बाईसवें श्लोकमें भगवान्ने अन्वय-रीतिसे कर्तव्य-पालनकी आवश्यकताका प्रतिपादन किया और इन श्लोकोंमें भगवान् व्यतिरेक-रीतिसे कर्तव्य-पालन न करनेसे होनेवाली हानिका प्रतिपादन करते हैं।]

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

यदि मैं कदाचित् आलस्यरहित सावधान होकर कर्मोंमें न बरतूँ तो हे पार्थ ये मनुष्य सब प्रकारसे मुझ श्रेष्ठके मार्गका अनुकरण कर रहे हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

लोकसंग्रहोऽपि न ते कर्तव्यो विफलत्वादित्याशङ्क्याह यदि हीति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

यद्यमतन्द्रितोऽनलसः सन् कर्मणि कदाचिन्न वर्तेयं मम श्रेष्ठस्य वर्त्म भार्गमनुवर्तन्ते सर्वे मनुष्या अनुवर्तेरन्। इतरे जना अपि मम मार्गमनुवर्तन्ते त्वं संबन्धी नानुवर्तस इत्यत्याश्चर्यमिति द्योतयन्संबोधयति पार्थेति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
yadiif
hicertainly
ahamI
nanot
varteyamthus engage
jātuever
karmaṇiin the performance of prescribed duties
atandritaḥcarefully
mamamy
vartmapath
anuvartantefollow
manuṣhyāḥall men
pārthaArjun, the son of Pritha
sarvaśhaḥin all respects
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 3.22
न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन। नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि

हे पार्थ! मुझे तीनों लोकोंमें न तो कुछ कर्तव्य है और न कोई प्राप्त करनेयोग्य वस्तु अप्राप्त है, फिर भी मैं कर्तव्यकर्ममें ही लगा रहता हूँ। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 3.24
उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम्। सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः

हे पार्थ ! अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्य-कर्म न करूँ (तो बड़ी हानि हो जाय; क्योंकि) मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ, तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं वर्णसंकरताको करनेवाला तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 3Shlok 23
Bhagavad Gita · Adhyay 3, Shlok 23
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः

हे पार्थ! अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय; क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ, तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं वर्णसंकरताको करनेवाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 3 श्लोक 23 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 3 श्लोक 23 का हिंदी अर्थ: "हे पार्थ! अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय; क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ, तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं वर्णसंकरताको करनेवाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Karma Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 23?

Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 23 translates to: "For, should I not ever engage myself in action, unwearied, people would in every way follow my path, O Arjuna. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ स" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 3, श्लोक 23 है जो Bhagavad Gita के Karma Yoga में संकलित है। हे पार्थ! अगर मैं किसी समय सावधान होकर कर्तव्यकर्म न करूँ तो बड़ी हानि हो जाय; क्योंकि मनुष्य सब प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं। यदि मैं कर्म न करूँ, तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं वर्णसंकरताको करनेवाला होऊँ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "yadi hyahaṁ na varteyaṁ jātu karmaṇyatandritaḥ" mean in English?

"yadi hyahaṁ na varteyaṁ jātu karmaṇyatandritaḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 3 Verse 23. For, should I not ever engage myself in action, unwearied, people would in every way follow my path, O Arjuna. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.