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Sudarshana Chakra
Adhyay 18, Shlok 76
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्।केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः

हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। — VaniSagar

Global Translations

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TamilIND

அரசரே, கிருஷ்ணருக்கும் அர்ஜுனனுக்கும் இடையே நடந்த இந்த அற்புதமான மற்றும் புனிதமான உரையாடலை நினைத்து நான் தொடர்ந்து மகிழ்ச்சி அடைகிறேன்.

BengaliIND

হে মহারাজ, কৃষ্ণ ও অর্জুনের মধ্যে এই অপূর্ব ও পবিত্র কথোপকথনের কথা স্মরণ করে আমি নিরন্তর আনন্দিত হই।

NepaliIND

हे राजा, कृष्ण र अर्जुन बीचको यो अद्भुत र पवित्र संवादलाई सम्झेर, म निरन्तर आनन्दित हुन्छु।

KannadaIND

ಓ ರಾಜನೇ, ಕೃಷ್ಣ ಮತ್ತು ಅರ್ಜುನನ ಈ ಅದ್ಭುತ ಮತ್ತು ಪವಿತ್ರ ಸಂವಾದವನ್ನು ನೆನಪಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾ, ನಾನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಸಂತೋಷಪಡುತ್ತೇನೆ.

AssameseIND

হে ৰজা, কৃষ্ণ আৰু অৰ্জুনৰ এই আচৰিত আৰু পবিত্ৰ সংলাপক স্মৰণ কৰি মই অহৰহ আনন্দিত হৈছো।

ManipuriIND

ꯍꯦ ꯅꯤꯡꯊꯧ, ꯀ꯭ꯔ꯭ꯏꯁ꯭ꯟ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯑꯔꯖꯨꯅꯒꯤ ꯃꯔꯛꯇꯥ ꯑꯉꯀꯄꯥ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯁꯦꯡꯂꯕꯥ ꯋꯥꯔꯤ ꯁꯥꯅꯕꯥ ꯑꯁꯤꯕꯨ ꯅꯤꯡꯁꯤꯡꯂꯗꯨꯅꯥ ꯑꯩꯍꯥꯛ ꯂꯦꯞꯄꯥ ꯂꯩꯇꯅꯥ ꯍꯔꯥꯑꯣꯏ꯫

BhojpuriIND

हे राजा, कृष्ण आ अर्जुन के एह अद्भुत आ पवित्र संवाद के याद करत हम लगातार आनन्दित बानी।

MizoIND

Aw Lal, Krishna leh Arjuna inbiakna mak leh thianghlim tak hi ka hre reng a, ka lawm reng a ni.

KonkaniIND

हे राजा, कृष्ण आनी अर्जुन हांचे मदलो हो अद्भुत पवित्र संवाद याद करून हांव सतत खोशी जातां.

DogriIND

हे राजा, कृष्ण ते अर्जुन दे इस अद्भुत ते पवित्र संवाद गी याद करदे होई मैं निरंतर आनन्दित रौंह्ना।

MaithiliIND

हे राजा, कृष्ण आ अर्जुनक एहि अद्भुत आ पवित्र संवाद केँ स्मरण करैत हम निरंतर आनन्दित होइत छी |

PunjabiIND

ਹੇ ਰਾਜਾ, ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ ਅਤੇ ਅਰਜੁਨ ਦੇ ਇਸ ਅਦਭੁਤ ਅਤੇ ਪਵਿੱਤਰ ਸੰਵਾਦ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਕੇ, ਮੈਂ ਨਿਰੰਤਰ ਪ੍ਰਸੰਨ ਹੁੰਦਾ ਹਾਂ।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- राजन्संस्मृत्य ৷৷. मुहुर्मुहुः -- सञ्जय कहते हैं कि हे महाराज भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनका यह बहुत अलौकिक? विलक्षण संवाद हुआ है। इसमें कितना रहस्य भरा हुआ है कि घोरसेघोर युद्धरूप क्रिया करते हुए भी ऊँचीसेऊँची पारमार्थिक सिद्धि हो सकती है मनुष्यमात्र हरेक परिस्थितिमें अपना उद्धार कर सकता है। इस प्रकारके संवादको याद करकरके मैं बड़ा हर्षित हो रहा हूँ? प्रसन्न हो रहा हूँ।श्रीभगवान् और अर्जुनके इस अद्भुत संवादकी महिमा भी बहुत विलक्षण है। भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन सदा साथमें रहनेपर भी इन दोनोंका ऐसा संवाद कभी नहीं हुआ। युद्धके समय अर्जुन घबरा गये क्योंकि एक तरफ तो उनको कुटुम्बका मोह तंग कर रहा था और दूसरी तरफ वे क्षात्रधर्मकी दृष्टिसे युद्ध करना अवश्य कर्तव्य समझते थे। मनुष्यकी जब किसी एक सिद्धान्तपर? एक मतपर स्थिति नहीं होती? तब उसकी व्याकुलता बड़ी विचित्र होती है । अर्जुन भीयुद्ध करना श्रेष्ठ है या युद्ध न करना श्रेष्ठ है -- इन दोनोंमेंसे एक निश्चित निर्णय नहीं कर सके। इसी व्याकुलताके कारण अर्जुन भगवान्की तरफ खिंच गये? उनके सम्मुख हो गये। सम्मुख होनेसे भगवान्की कृपा उनको विशेषतासे प्राप्त हुई। अर्जुनकी अनन्य भावना? उत्कण्ठाके कारण भगवान् योगमें स्थित हो गये अर्थात् ऐश्वर्य आदिमें स्थित न रहकर केवल अपने प्रेमतत्त्वमें सराबोर हो गये और उसी स्थितिमें अर्जुनको समझाया। इस प्रकार उत्कट अभिलषासम्पन्न अर्जुन और अलौकिक अटलयोगमें स्थित भगवान्के संवादका क्या महिमा कहें उसकी महिमाको कहनेमें कोई भी समर्थ नहीं है।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

हे राजन् धृतराष्ट्र केशव और अर्जुनके इस ( परम ) पवित्र -- सुननेमात्रसे पापोंका नाश करनेवाले? अद्भुत संवादको सुनकर और बारम्बार स्मरण करके? मैं प्रतिक्षण बारम्बार हर्षित हो रहा हूँ।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

यथोक्तं संवादं भगवतः श्रुत्वा किमुपेक्षसे नेत्याह -- राजन्निति। पुण्यत्वं साधयति -- श्रवणादपीति।

VaniSagar Research Vault
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Sri Dhanpati

किंचेममेव केशवार्जुनयोः संवादमद्भुतं पुण्यं श्रवणमात्रेणापि पापहरं श्रुत्वा संस्मृत्य संस्मृत्य पुनः पुनः स्मृत्वा,मुहुर्मुहुः प्रतिक्षणं हृष्यामि रोमाञ्चितो भवामि हर्षं प्राप्नोमीति वा। तयोः संवादं श्रुतवान् त्वमपि वैरं विहाय कृष्णभक्तिमत्यादरेणाङ्गीकुर्वन्नत्यन्तदीप्तिमानत्यन्तहृष्टो वास्तवो राजा भवेति बोधयन् संबोधयति हे राजन्निति।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
rājanKing
sansmṛitya saṁsmṛityarepeatedly recalling
saṁvādamdialogue
imamthis
adbhutamastonishing
keśhavaarjunayoḥ
puṇyampious
hṛiṣhyāmiI rejoice
chaand
muhuḥ muhuḥrepeatedly
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 18.75
व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्।योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्

व्यासजीकी कृपासे मैंने स्वयं इस परम गोपनीय योग (गीता-ग्रन्थ) को कहते हुए साक्षात् योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्णसे सुना है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 18.77
तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः। विस्मयो मे महान् राजन् हृष्यामि च पुनः पुनः

हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्णके उस अत्यन्त अद्भुत विराट्रूपको याद कर-करके मेरेको बड़ा भारी आश्चर्य हो रहा है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 18Shlok 76
Bhagavad Gita · Adhyay 18, Shlok 76
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्।केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः

हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 76 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 76 का हिंदी अर्थ: "हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 76?

Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 76 translates to: "O King, remembering this wonderful and holy dialogue between Krishna and Arjuna, I continually rejoice. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम्।केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 18, श्लोक 76 है जो Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga में संकलित है। हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "rājan sansmṛitya sansmṛitya saṁvādam imam adbhutam" mean in English?

"rājan sansmṛitya sansmṛitya saṁvādam imam adbhutam" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 76. O King, remembering this wonderful and holy dialogue between Krishna and Arjuna, I continually rejoice. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.