Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 18, Shlok 25
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते

जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TamilIND

விளைவுகள், இழப்பு, காயம் மற்றும் ஒருவரின் சொந்த திறன் ஆகியவற்றைப் பொருட்படுத்தாமல், மாயையிலிருந்து மேற்கொள்ளப்படும் அந்த செயல் தாமசி (இருண்டது) என்று அறிவிக்கப்படுகிறது.

BengaliIND

পরিণতি, ক্ষতি, আঘাত এবং নিজের যোগ্যতার তোয়াক্কা না করে যে কাজটি ভ্রম থেকে করা হয় তাকে তামসিক (অন্ধকার) বলে ঘোষণা করা হয়।

KannadaIND

ಪರಿಣಾಮಗಳು, ನಷ್ಟ, ಗಾಯ ಮತ್ತು ಸ್ವಂತ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಲೆಕ್ಕಿಸದೆ ಭ್ರಮೆಯಿಂದ ಕೈಗೊಳ್ಳುವ ಕ್ರಿಯೆಯನ್ನು ತಾಮಸಿಕ (ಕತ್ತಲೆ) ಎಂದು ಘೋಷಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ.

NepaliIND

परिणाम, हानि, चोट र आफ्नो क्षमताको परवाह नगरी भ्रमबाट गरिने कर्मलाई तामसिक (अन्धकार) भनिन्छ।

SindhiIND

اهو عمل جيڪو فريب مان ڪيو وڃي ٿو، بغير نتيجن، نقصان، زخم ۽ ڪنهن جي پنهنجي قابليت جي پرواهه ڪرڻ کان سواء، "تاماس" سڏيو ويندو آهي.

MarathiIND

परिणाम, नुकसान, इजा आणि स्वतःच्या क्षमतेची पर्वा न करता भ्रमातून जी कृती केली जाते, ती तामसिक (अंधार) असल्याचे घोषित केले जाते.

TeluguIND

పర్యవసానాలు, నష్టం, గాయం మరియు ఒకరి స్వంత సామర్థ్యంతో సంబంధం లేకుండా మాయ నుండి చేపట్టే ఆ చర్య తామసిక్ (చీకటి)గా ప్రకటించబడింది.

GujaratiIND

પરિણામ, નુકસાન, ઈજા અને પોતાની ક્ષમતાની પરવા કર્યા વિના, ભ્રમણાથી કરવામાં આવતી ક્રિયાને તામસિક (અંધારું) જાહેર કરવામાં આવે છે.

PunjabiIND

ਉਹ ਕਿਰਿਆ ਜੋ ਭੁਲੇਖੇ ਤੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਨਤੀਜੇ, ਨੁਕਸਾਨ, ਸੱਟ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਯੋਗਤਾ ਦੀ ਪਰਵਾਹ ਕੀਤੇ ਬਿਨਾਂ, ਤਾਮਸਿਕ (ਹਨੇਰਾ) ਘੋਸ਼ਿਤ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

AssameseIND

যিটো কাৰ্য্য মোহৰ পৰা কৰা হয়, তাৰ পৰিণতি, ক্ষতি, আঘাত আৰু নিজৰ সামৰ্থ্যক গুৰুত্ব নিদিয়াকৈ, সেইটোক তামাচিক (আন্ধাৰ) বুলি ঘোষণা কৰা হয়।

ManipuriIND

ꯃꯗꯨꯒꯤ ꯃꯍꯩ, ꯃꯥꯡꯈꯤꯕꯥ, ꯑꯁꯣꯛ-ꯑꯄꯟ, ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯃꯁꯥꯒꯤ ꯇꯧꯕꯥ ꯉꯝꯕꯁꯤꯡ ꯑꯗꯨ ꯌꯦꯡꯂꯒꯥ ꯃꯤꯄꯥꯏꯕꯥ ꯄꯣꯀꯄꯗꯒꯤ ꯄꯥꯡꯊꯣꯀꯄꯥ ꯊꯕꯛ ꯑꯗꯨꯕꯨ ꯇꯥꯃꯥꯁꯤꯛ (ꯑꯟꯙ꯭ꯔ) ꯍꯥꯌꯅꯥ ꯂꯥꯑꯣꯊꯣꯀꯏ꯫

BhojpuriIND

जवन क्रिया भ्रम से कइल जाला, बिना परिणाम, हानि, चोट, आ अपना क्षमता के परवाह कइले, ओकरा के तामस (अंधेरा) घोषित कइल जाला।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- अनुबन्धम् -- जिसको फलकी कामना होती है? वह मनुष्य तो फलप्राप्तिके लिये विचारपूर्वक कर्म करता है? परन्तु तामस मनुष्यमें मूढ़ताकी प्रधानता होनेसे वह कर्म करनेमें विचार करता ही नहीं। इस कार्यको करनेसे मेरा तथा दूसरे प्राणियोंका अभी और परिणाममें कितना नुकसान होगा? कितना अहित होगा -- इस अनुबन्ध अर्थात् परिणामको न देखकर वह कार्य आरम्भ कर देता है।क्षयम् -- इस कार्यको करनेसे अपने और दूसरोंके शरीरोंकी कितनी हानि होगी धन और समयका कितना खर्चा होगा इससे दुनियामें मेरा कितना अपमान? निन्दा? तिरस्कार आदि होगा? मेरा लोकपरलोक बिगड़ जायगा आदि नुकसानको न देखकर ही वह कार्य आरम्भ कर देता है।हिंसाम् -- इस कर्मसे कितने जीवोंकी हत्या होगी कितने श्रेष्ठ व्यक्तियोंके सिद्धान्तों और मान्यताओंकी हत्या हो जायगी दूसरे मनुष्योंकी मनुष्यताकी कितनी भारी हिंसा हो जायगी अभीके और भावी जीवोंके शुद्ध भाव? आचरण? वेशभूषा? खानपान आदिकी कितनी भारी हिंसा हो जायगी इससे मेरा और दुनियाका कितना अधःपतन होगा आदि हिंसाको न देखकर ही वह कार्य आरम्भ कर देता है।अनवेक्ष्य च पौरुषम् -- इस कामको करनेकी मेरेमें कितनी योग्यता है? कितना बल? सामर्थ्य है मेरे पास कितना समय है? कितनी बुद्धि है? कितनी कला है? कितना ज्ञान है आदि अपने पौरुष(पुरुषार्थ) को न,देखकर ही वह कार्य आरम्भ कर देता है।मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते -- तामस मनुष्य कर्म करते समय उसके परिणाम? उससे होनेवाले नुकसान? हिंसा और अपनी सामर्थ्यका कुछ भी विचार न करके? जब जैसा मनमें भाव आया? उसी समय बिना विवेकविचारके वैसा ही कर बैठता है। इस प्रकार किया गया कर्म तामस कहलाता है। सम्बन्ध -- अब भगवान् सात्त्विक कर्ताके लक्षण बताते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

अनुबन्धको -- अन्तमें होनेवाला जो परिणाम है उसे अनुबन्ध कहते हैं? उसको? क्षयकोकर्मके करनेमें जो शक्तिका या धनका क्षय होता है उसको? हिंसाकोप्राणियोंकी पीड़ाको और पौरुषको -- अमुक कर्मको मैं समाप्त कर सकता हूँ ऐसी अपनी सामर्थ्यको? इस प्रकार अनुबन्धसे लेकर पौरुषतकके इन समस्त भावोंकी अपेक्षा न करके -- इनकी परवा न करके? जो धर्म मोहसे -- अज्ञानसे आरम्भ किया जाता है? वह तामस -- तमोगुणपूर्वक किया हुआ कहा जाता है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

संप्रति तामसं कर्मोदाहरति -- अनुबन्धमित्यादिना।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

राजसं कर्मोदाहृत्य कर्मोदाहृत्य तामसं तदाह -- अनुबन्धमिति। अनुबध्यत इत्यनुबन्धः पश्चाद्भाविस्तु तं क्षयं शक्त्यर्थादेर्नाशं हिंसां प्राणिपीडां च पौरुषं पुरुषकारमारब्धसमाप्तिसामर्थ्यमित्येतान्यनुबन्धादीन्यनवेक्ष्यापर्यालोच्य मोहादविवेकाद्यत्कर्म प्रारभ्यते तत्तामसमुदाहृतम्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
anubandhamconsequences
kṣhayamloss
hinsāminjury
anapekṣhyaby disregarding
chaand
pauruṣhamone’s own ability
mohātout of delusion
ārabhyateis begun
karmaaction
yatwhich
tatthat
tāmasamin the mode of ignorance
uchyateis declared to be
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 18.24
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः।क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम्

परन्तु जो कर्म भोगोंको चाहनेवाले मनुष्यके द्वारा अहंकार अथवा परिश्रमपूर्वक किया जाता है, वह राजस कहा गया है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 18.26
मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितः।सिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते

जो कर्ता रागरहित, अनहंवादी, धैर्य और उत्साहयुक्त तथा सिद्धि और असिद्धिमें निर्विकार है, वह सात्त्विक कहा जाता है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 18Shlok 25
Bhagavad Gita · Adhyay 18, Shlok 25
अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते

जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 25 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 25 का हिंदी अर्थ: "जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 25?

Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 25 translates to: "That action which is undertaken from delusion, without regard for the consequences, loss, injury, and one's own ability, is declared to be Tamasic (dark). — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 18, श्लोक 25 है जो Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga में संकलित है। जो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣham" mean in English?

"anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣham" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 25. That action which is undertaken from delusion, without regard for the consequences, loss, injury, and one's own ability, is declared to be Tamasic (dark). — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.