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Sudarshana Chakra
Adhyay 17, Shlok 26
सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते।प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते

हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है। — VaniSagar

Global Translations

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BengaliIND

"শনি" শব্দটি বাস্তবতা এবং কল্যাণ বোঝাতে ব্যবহৃত হয়; একইভাবে, হে অর্জুন, "শনি" শব্দটি একটি শুভ কাজ বোঝাতে ব্যবহৃত হয়।

MarathiIND

"सत्" हा शब्द वास्तव आणि चांगुलपणाचा संदर्भ देण्यासाठी वापरला जातो; त्याचप्रमाणे, हे अर्जुना, "सत्" हा शब्द शुभ कृतीसाठी वापरला जातो.

SindhiIND

لفظ ”ست“ حقيقت ۽ چڱائيءَ لاءِ استعمال ٿئي ٿو. ساڳيءَ طرح اي ارجن، لفظ ”ست“ ڪنهن نيڪ عمل لاءِ استعمال ٿئي ٿو.

PunjabiIND

"ਸਤਿ" ਸ਼ਬਦ ਅਸਲੀਅਤ ਅਤੇ ਚੰਗਿਆਈ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਣ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ; ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੇ ਅਰਜੁਨ, ਸ਼ਬਦ "ਸਤਿ" ਕਿਸੇ ਸ਼ੁਭ ਕਰਮ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।

OdiaIND

ବାସ୍ତବତା ଏବଂ ଉତ୍ତମତାକୁ ବୁ to ାଇବା ପାଇଁ “ଶନି” ଶବ୍ଦ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ; ସେହିପରି, ହେ ଅର୍ଜୁନ, ଏକ ଶୁଭ କାର୍ଯ୍ୟକୁ ବୁ to ାଇବା ପାଇଁ “ଶନି” ଶବ୍ଦ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ |

TamilIND

"சத்" என்ற சொல் உண்மை மற்றும் நன்மையைக் குறிக்கப் பயன்படுத்தப்படுகிறது; அதேபோல், அர்ஜுனா, "சத்" என்ற சொல் ஒரு மங்களகரமான செயலைக் குறிக்கப் பயன்படுத்தப்படுகிறது.

MalayalamIND

"സത്" എന്ന വാക്ക് യാഥാർത്ഥ്യത്തെയും നന്മയെയും സൂചിപ്പിക്കാൻ ഉപയോഗിക്കുന്നു; അതുപോലെ, ഹേ അർജ്ജുനാ, "സത്" എന്ന പദം ഒരു ശുഭപ്രവൃത്തിയെ സൂചിപ്പിക്കാൻ ഉപയോഗിക്കുന്നു.

GujaratiIND

"સત" શબ્દનો ઉપયોગ વાસ્તવિકતા અને ભલાઈ માટે થાય છે; તેવી જ રીતે, હે અર્જુન, "સત" શબ્દનો ઉપયોગ શુભ કાર્ય માટે થાય છે.

TeluguIND

"సత్" అనే పదాన్ని వాస్తవికత మరియు మంచితనాన్ని సూచించడానికి ఉపయోగిస్తారు; అదే విధంగా, ఓ అర్జునా, "సత్" అనే పదాన్ని శుభ కార్యాన్ని సూచించడానికి ఉపయోగిస్తారు.

KannadaIND

"ಸತ್" ಎಂಬ ಪದವನ್ನು ವಾಸ್ತವ ಮತ್ತು ಒಳ್ಳೆಯತನವನ್ನು ಸೂಚಿಸಲು ಬಳಸಲಾಗುತ್ತದೆ; ಅಂತೆಯೇ, ಓ ಅರ್ಜುನ, "ಸತ್" ಎಂಬ ಪದವನ್ನು ಮಂಗಳಕರ ಕಾರ್ಯವನ್ನು ಸೂಚಿಸಲು ಬಳಸಲಾಗುತ್ತದೆ.

NepaliIND

"शनि" शब्द वास्तविकता र भलाइलाई बुझाउन प्रयोग गरिन्छ; त्यसैगरी, हे अर्जुन, शुभ कर्मका लागि "शनि" शब्दको प्रयोग गरिन्छ।

BhojpuriIND

"सत" शब्द के इस्तेमाल वास्तविकता आ भलाई के संदर्भ देवे खातिर कइल जाला; ओइसहीं हे अर्जुन, "सत" शब्द के प्रयोग कवनो शुभ काम के संदर्भ में कइल जाला।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- सद्भावे -- परमत्मा हैं इस प्रकार परमात्माकी सत्ता(होनेपन) का नाम सद्भाव है। उस परमात्माके सगुणनिर्गुण? साकारनिराकार आदि जितने रूप हैं और सगुणसाकारमें भी उसके विष्णु? राम? कृष्ण? शिव? शक्ति? गणेश? सूर्य आदि जितने अवतार हैं? वे सबकेसब सद्भाव के अन्तर्गत हैं। इस प्रकार जिसका किसी देश? काल? वस्तु आदिमें कभी अभाव नहीं होता? ऐसे परमात्माके जो अनेक रूप हैं? अनेक नाम हैं? अनेक तरहकी लीलाएँ हैं? वे सबकेसब सद्भाव के अन्तर्गत हैं।साधुभावे -- परमात्मप्राप्तिके लिये अलगअलग सम्प्रदायोंमें अलगअलग जितने साधन बताये गये हैं? उनमें हृदयके जो दया? क्षमा आदि श्रेष्ठ? उत्तम भाव हैं? वे सबकेसब साधुभाव के अन्तर्गत हैं।सदित्येतत्प्रयुज्यते -- सत्तामें और श्रेष्ठतामें सत् शब्दका प्रयोग किया जाता है अर्थात् जो सदा है? जिसमें,कभी किञ्चिन्मात्र भी कमी और अभाव नहीं होता -- ऐसे परमात्माके लिये और उस परमात्माकी प्राप्तिके लिये दैवीसम्पत्तिके जो सत्य? क्षमा? उदारता? त्याग आदि श्रेष्ठ गुण हैं? उनके लिये सत् शब्दका प्रयोग किया जाता है जैसे -- सत्तत्त्व? सद्गुण? सद्भाव आदि।प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते -- परमात्मप्राप्तिके लिये अलगअलग सम्प्रदायोंमें अलगअलग जितने साधन बताये गये हैं? उनमें क्रियारूपसे जितने श्रेष्ठ आचरण हैं? वे सबकेसब प्रशस्ते कर्मणि के अन्तर्गत हैं। इसी प्रकार शास्त्रविधिके अनुसार यज्ञोपवीत? विवाह आदि संस्कार अन्नदान? भूमिदान? गोदान आदि दान और कुआँबावड़ी खुदवाना? धर्मशाला बनवाना? मन्दिर बनवाना? बगीचा लगवाना आदि श्रेष्ठ कर्म भी प्रशस्ते कर्मणि के अन्तर्गत आते हैं। इन सब श्रेष्ठ आचरणोंमें? श्रेष्ठ कर्मोंमें सत् शब्दका प्रयोग किया जाता है जैसे -- सदाचार? सत्कर्म? सत्सेवा? सद्व्यवहार आदि।

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Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

ओम् और तत्शब्दका प्रयोग तो कहा गया अब सत्शब्दका प्रयोग कहा जाता है --, अविद्यमान वस्तुके सद्भावमें यानी जैसे अविद्यमान पुत्रादिके उत्पन्न होनेमें? तथा साधुभावमें अर्थात् बुरे आचरणोंवाले असाधु पुरुषका जो सदाचारयुक्त हो जाना है? उसमें? सत् ऐसे इस ब्रह्मके नामका प्रयोग किया जाता है अर्थात् वहाँ सत् शब्द कहा जाता है तथा हे पार्थ विवाह आदि माङ्गलिक कर्मोंमें भी सत् शब्द प्रयुक्त होता अर्थात् ( उनमें भी ) सत् शब्दका प्रयोग किया जाता है।

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Sri Anandgiri

वृत्तमनूद्यानन्तरश्लोकतात्पर्यमाह -- तच्छब्दयोरिति।

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Sri Dhanpati

तृतीयनाम्नो विनियोगमाह द्वाभ्यां -- सदिति। सतः सद्भावे यथाऽविद्यमानस्य पुत्रस्य जन्म तथा साधुभावेऽसदृत्तस्यासाधोः सदृत्तिता साधुमावस्तस्मिन्साधुभावे च सदित्येतत् ब्रह्मणोऽभिधानं प्रयुज्यतेऽभिधीयते। तथा प्रश्ते कर्मणि विवाहादौ च स सच्छब्दः प्रयुज्यते? पृथापुत्रे पार्थशब्दो यथेति सचयन्नाह -- पार्थेति।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
satbhāve
sādhubhāve
chaalso
satthe syllable Sat
itithus
etatthis
prayujyateis used
praśhasteauspicious
karmaṇiaction
tathāalso
satśhabdaḥ
pārthaArjun, the son of Pritha
yujyateis used
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 17.25
तदित्यनभिसन्धाय फलं यज्ञतपःक्रियाः। दानक्रियाश्च विविधाः क्रियन्ते मोक्षकाङ्क्षिभि:

तत्' नामसे कहे जानेवाले परमात्माके लिये ही सब कुछ है -- ऐसा मानकर मुक्ति चाहनेवाले मनुष्योंद्वारा फलकी इच्छासे रहित होकर अनेक प्रकारकी यज्ञ और तपरूप क्रियाएँ तथा दानरूप क्रियाएँ की जाती हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 17.27
यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते।कर्म चैव तदर्थीयं सदित्येवाभिधीयते

यज्ञ, तप और दानरूप क्रियामें जो स्थिति (निष्ठा) है, वह भी 'सत्' -- ऐसे कही जाती है और उस परमात्माके निमित्त किया जानेवाला कर्म भी 'सत्' -- ऐसा ही कहा जाता है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 17Shlok 26
Bhagavad Gita · Adhyay 17, Shlok 26
सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते।प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते

हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 17 श्लोक 26 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 17 श्लोक 26 का हिंदी अर्थ: "हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sraddha-Traya-Vibhaga Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 17 Verse 26?

Bhagavad Gita Chapter 17 Verse 26 translates to: "The word "Sat" is used to refer to reality and goodness; likewise, O Arjuna, the word "Sat" is used to refer to an auspicious act. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते।प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्य" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 17, श्लोक 26 है जो Bhagavad Gita के Sraddha-Traya-Vibhaga Yoga में संकलित है। हे पार्थ ! परमात्माके 'सत्'--इस नामका सत्तामात्रमें और श्रेष्ठ भावमें प्रयोग किया जाता है तथा प्रशंसनीय कर्मके साथ 'सत्' शब्द जोड़ा जाता है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "sad-bhāve sādhu-bhāve cha sad ity etat prayujyate" mean in English?

"sad-bhāve sādhu-bhāve cha sad ity etat prayujyate" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 17 Verse 26. The word "Sat" is used to refer to reality and goodness; likewise, O Arjuna, the word "Sat" is used to refer to an auspicious act. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.