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Sudarshana Chakra
Adhyay 16, Shlok 14
असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी

वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TamilIND

நான் அந்த எதிரியைக் கொன்றுவிட்டேன், மற்றவர்களையும் கொல்வேன். நான் இறைவன்; நான் மகிழ்ச்சியாக இருக்கிறேன், நான் சரியானவன், சக்தி வாய்ந்தவன், மகிழ்ச்சியாக இருக்கிறேன்.

TeluguIND

నేను ఆ శత్రువును చంపాను, ఇతరులను కూడా చంపుతాను. నేను ప్రభువును; నేను ఆనందిస్తున్నాను, నేను పరిపూర్ణంగా, శక్తివంతంగా మరియు సంతోషంగా ఉన్నాను.

PunjabiIND

ਮੈਂ ਉਸ ਵੈਰੀ ਨੂੰ ਮਾਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹੋਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਮਾਰਾਂਗਾ। ਮੈਂ ਪ੍ਰਭੂ ਹਾਂ; ਮੈਂ ਆਨੰਦ ਮਾਣਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਂ ਸੰਪੂਰਨ, ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਅਤੇ ਖੁਸ਼ ਹਾਂ।

MarathiIND

मी त्या शत्रूचा वध केला आहे आणि इतरांनाही मारीन. मी परमेश्वर आहे; मी आनंदी आहे, मी परिपूर्ण, शक्तिशाली आणि आनंदी आहे.

BengaliIND

আমি সেই শত্রুকে হত্যা করেছি এবং অন্যদেরও হত্যা করব। আমি প্রভু; আমি উপভোগ করি, আমি নিখুঁত, শক্তিশালী এবং সুখী।

MalayalamIND

ഞാൻ ആ ശത്രുവിനെ കൊന്നു, മറ്റുള്ളവരെയും ഞാൻ കൊല്ലും. ഞാൻ കർത്താവാണ്; ഞാൻ ആസ്വദിക്കുന്നു, ഞാൻ തികഞ്ഞവനും ശക്തനും സന്തുഷ്ടനുമാണ്.

NepaliIND

मैले त्यो शत्रुलाई मारेको छु, अरूलाई पनि मार्नेछु। म परमप्रभु हुँ; म रमाइलो गर्छु, म सिद्ध, शक्तिशाली र खुसी छु।

KannadaIND

ನಾನು ಆ ಶತ್ರುವನ್ನು ಕೊಂದಿದ್ದೇನೆ ಮತ್ತು ನಾನು ಇತರರನ್ನು ಸಹ ಕೊಲ್ಲುತ್ತೇನೆ. ನಾನು ಭಗವಂತ; ನಾನು ಆನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ, ನಾನು ಪರಿಪೂರ್ಣ, ಶಕ್ತಿಯುತ ಮತ್ತು ಸಂತೋಷವಾಗಿರುತ್ತೇನೆ.

SindhiIND

مون ان دشمن کي ماريو آهي، ۽ ٻين کي به ماريندس. مان رب آهيان؛ مان لطف اندوز آهيان، مان مڪمل، طاقتور ۽ خوش آهيان.

OdiaIND

ମୁଁ ସେହି ଶତ୍ରୁକୁ ହତ୍ୟା କରିଛି, ଏବଂ ମୁଁ ଅନ୍ୟମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ହତ୍ୟା କରିବି। ମୁଁ ପ୍ରଭୁ; ମୁଁ ଉପଭୋଗ କରେ, ମୁଁ ସିଦ୍ଧ, ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଏବଂ ଖୁସି ଅଟେ |

GujaratiIND

મેં તે દુશ્મનને મારી નાખ્યો છે, અને હું બીજાને પણ મારીશ. હું પ્રભુ છું; હું આનંદ કરું છું, હું સંપૂર્ણ, શક્તિશાળી અને ખુશ છું.

AssameseIND

মই সেই শত্ৰুক বধ কৰিলোঁ, আনকো বধ কৰিম। মই প্ৰভু; মই উপভোগ কৰো, মই নিখুঁত, শক্তিশালী আৰু সুখী।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- आसुरीसम्पदावाले व्यक्ति क्रोधके परायण होकर इस प्रकारके मनोरथ करते हैं -- असौ मया हतः शत्रुः -- वह हमारे विपरीत चलता था? हमारे साथ वैर रखता था? उसको तो हमने मार दिया है और हनिष्ये चापरानपि -- दूसरे जो भी हमारे विपरीत चलते हैं? हमारे साथ वैर रखते हैं? हमारा अनिष्ट सोचते हैं? उनको भी हम मजा चखा देंगे? मार डालेंगे। ईश्वरोऽहम् -- हम धन? बल? बुद्धि आदिमें सब तरहसे समर्थ हैं। हमारे पास क्या नहीं है हमारी बराबरी कोई कर सकता है क्या अहं भोगी -- हम भोग भोगनेवाले हैं। हमारे पास स्त्री? मकान? कार आदि कितनी भोग सामग्री है सिद्धोऽहम् -- हम सब तरहसे सिद्ध हैं। हमने तो पहले ही कह दिया था न वैसे हो गया कि नहीं हमारेको तो पहलेसे ही ऐसा दीखता है ये जो लोग भजन? स्मरण? जप? ध्यान आदि करते हैं? ये सभी किसीके बहकावेमें आये हुए हैं। अतः इनकी क्या दशा होगी? उसको हम जानते हैं। हमारे समान सिद्ध और कोई है संसारमें हमारे पास अणिमा? गरिमा आदि सभी सिद्धियाँ हैं। हम एक फूँकमें सबको भस्म कर सकते हैं। बलवान् -- हम बड़े बलवान् हैं। अमुक आदमीने हमारेसे टक्कर लेनी चाही? तो उसका क्या नतीजा हुआ आदि। परन्तु जहाँ स्वयं हार जाते हैं? वह बात दूसरोंको नहीं कहते? जिससे कि कोई हमें कमजोर न समझ ले। उन्हें अपने हारनेकी बात तो याद भी नहीं रहती? पर अभिमानकी बात उन्हें याद रहती है। सुखी -- हमारे पास कितना सुख है? आराम है। हमारे समान सुखी संसारमें कौन हैऐसे व्यक्तियोंके भीतर तो जलन होती रहती है? पर ऊपरसे इस प्रकारकी डींग हाँकते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

अमुक देवदत्त नामक दुर्जय शत्रु तो मेरे द्वारा मारा जा चुका? अब दूसरे पामर निर्बल शत्रुओंको भी मैं मार डालूँगा? यह बेचारे गरीब मेरा क्या करेंगे जो किसी तरह भी मेरे समान नहीं हैं। मैं ईश्वर हूँ? भोगी हूँ? सब प्रकारसे सिद्ध हूँ तथा पुत्रपौत्र और नातियोंसे सम्पन्न हूँ। मैं केवल साधारण मनुष्य ही नहीं हूँ? बल्कि बड़ा बलवान् और सुखी भी मैं ही हूँ? दूसरे सब तो भूमिपर भाररूप ही उत्पन्न हुए हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

यथोक्ते मदभिप्राये प्रतिबन्धकः शत्रुरपि न संभवतीत्याह -- असाविति। त्वत्तो विहीनानां त्वया परिभवेऽपि त्वत्तुल्यानां शत्रूणां परिभवो निश्चितो न भवतीत्याशङ्क्याह -- सर्वथेति। ऐश्वर्यातिरेकेऽपि कुतस्ते भोगसामर्थ्यमित्याशङ्क्याह -- अहमिति। सिद्धत्वमेव स्फुटयति -- संपन्न इति। बलवानोजस्वी? सुखी रोगरहितः।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

यथोक्ते मदभिप्राये प्रतिबन्धकः शत्रुरपिन संभवतीत्याह। असौ देवदत्तो दुर्जयः शत्रुर्मया हतः हनिष्ये चापरानन्यान्वराकान्। ननु तपस्विनां सत्त्वे खतं सर्वेषां पराभवे तव सामर्थ्यमित्याशह्क्य किमते करिष्यन्ति तपस्विनो यतः सर्वथापि मत्तुल्यो नास्तीत्याह। ईश्वरऽहम्। ऐश्वर्यातिरेकमेव प्रकटयति। भोगी सर्वभोगो परकणवानहम्। सिद्धोऽहं पुत्रादिभिः संपन्नः। बलवान् न केवलं मानुषबलवान्सुखी चाहमेव।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
asauthat
mayāby me
hataḥhas been destroyed
śhatruḥenemy
haniṣhyeI shall destroy
chaand
aparānothers
apialso
īśhvaraḥGod
ahamI
ahamI
bhogīthe enjoyer
siddhaḥpowerful
ahamI
balavān
sukhīhappy
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 16.13
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम्।इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्

इतनी वस्तुएँ तो हमने आज प्राप्त कर लीं और अब इस मनोरथको प्राप्त (पूरा) कर लेंगे।,इतना धन तो हमारे पास है ही, इतना धन फिर हो जायगा। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 16.15
आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया।यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः

हम धनवान् हैं, बहुत-से मनुष्य हमारे पास हैं, हमारे समान और कौन है? हम खूब यज्ञ करेंगे, दान देंगे और मौज करेंगे -- इस तरह वे अज्ञानसे मोहित रहते हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 16Shlok 14
Bhagavad Gita · Adhyay 16, Shlok 14
असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी

वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 16 श्लोक 14 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 16 श्लोक 14 का हिंदी अर्थ: "वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Daivaasura-Sampad-Vibhaga Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 16 Verse 14?

Bhagavad Gita Chapter 16 Verse 14 translates to: "I have slain that enemy, and I shall slay others too. I am the Lord; I enjoy, I am perfect, powerful, and happy. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 16, श्लोक 14 है जो Bhagavad Gita के Daivaasura-Sampad-Vibhaga Yoga में संकलित है। वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे। हम सर्वसमर्थ हैं। हमारे पास भोग-सामग्री बहुत है। हम सिद्ध हैं। हम बड़े बलवान् और सुखी हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "asau mayā hataḥ śhatrur haniṣhye chāparān api" mean in English?

"asau mayā hataḥ śhatrur haniṣhye chāparān api" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 16 Verse 14. I have slain that enemy, and I shall slay others too. I am the Lord; I enjoy, I am perfect, powerful, and happy. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.