Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 14, Shlok 15
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते।तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते

रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MarathiIND

राजसात मृत्यूला भेटून, कर्माशी आसक्त असलेल्यांमध्ये तो जन्म घेतो; आणि तामसात मरून, तो विचारहीनांच्या पोटी जन्माला येतो.

PunjabiIND

ਰਾਜਸ ਵਿਚ ਮੌਤ ਨੂੰ ਮਿਲ ਕੇ, ਉਹ ਕਰਮ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਹੋਏ ਲੋਕਾਂ ਵਿਚ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ; ਅਤੇ ਤਾਮਸ ਵਿੱਚ ਮਰ ਕੇ, ਉਹ ਵਿਚਾਰਹੀਣ ਦੀ ਕੁੱਖ ਵਿੱਚ ਜੰਮਦਾ ਹੈ।

TeluguIND

రాజాస్‌లో మృత్యువును కలుసుకుంటూ, అతను చర్యతో ముడిపడి ఉన్నవారిలో జన్మించాడు; మరియు తమస్సులో మరణిస్తూ, ఆలోచన లేనివారి కడుపున జన్మించాడు.

TamilIND

ராஜாக்களில் மரணத்தை சந்தித்த அவர், செயலில் பற்று கொண்டவர்களிடையே பிறந்தார்; மற்றும் தமஸில் இறந்து, அவர் சிந்தனையற்றவர்களின் வயிற்றில் பிறந்தார்.

ManipuriIND

ꯔꯥꯖꯁꯇꯥ ꯁꯤꯕꯒꯥ ꯎꯅꯗꯨꯅꯥ ꯃꯍꯥꯛ ꯊꯕꯛꯇꯥ ꯊꯋꯥꯏ ꯌꯥꯑꯣꯕꯥ ꯃꯤꯑꯣꯏꯁꯤꯡꯒꯤ ꯃꯔꯛꯇꯥ ꯄꯣꯀꯏ; ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯇꯥꯃꯥꯁꯇꯥ ꯁꯤꯔꯒꯥ, ꯃꯍꯥꯛ ꯋꯥꯈꯜ ꯈꯟꯊꯕꯥ ꯉꯃꯗꯕꯥ ꯃꯤꯑꯣꯏꯁꯤꯡꯒꯤ ꯈꯣꯡꯗꯥ ꯄꯣꯀꯏ꯫

MaithiliIND

राजस मे मृत्यु सँ भेंट करैत कर्म मे आसक्त लोक मे जन्म लैत छथि; आ तामस मे मरैत अविचारक गर्भ मे जन्म लैत छथि |

KonkaniIND

राजांत मरण मेळून तो कर्माक आसक्त आशिल्ल्यांमदीं जल्माक येता; आनी तामसांत मरून तो विचारहीनांच्या पोटांत जल्मता.

BengaliIND

রজসে মৃত্যু সাক্ষাত করে, কর্মে অনুরাগীদের মধ্যে তিনি জন্মগ্রহণ করেন; এবং তামসেই মৃত্যুবরণ করে, তিনি চিন্তাহীনের গর্ভে জন্মগ্রহণ করেন।

GujaratiIND

રાજસમાં મૃત્યુને મિલન કરીને, તે ક્રિયા સાથે જોડાયેલા લોકોમાં જન્મે છે; અને તામસમાં મૃત્યુ પામીને, તે વિચારહીનનાં ગર્ભમાં જન્મે છે.

KannadaIND

ರಾಜಸ್ನಲ್ಲಿ ಮರಣವನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗುತ್ತಾ, ಅವನು ಕ್ರಿಯೆಗೆ ಅಂಟಿಕೊಂಡಿರುವವರಲ್ಲಿ ಹುಟ್ಟುತ್ತಾನೆ; ಮತ್ತು ತಮಸ್ಸಿನಲ್ಲಿ ಸಾಯುತ್ತಾ, ಅವನು ಆಲೋಚನೆಯಿಲ್ಲದವರ ಹೊಟ್ಟೆಯಲ್ಲಿ ಹುಟ್ಟುತ್ತಾನೆ.

MalayalamIND

രാജസത്തിൽ മരണത്തെ കണ്ടുമുട്ടി, അവൻ കർമ്മത്തോട് ചേർന്നുനിൽക്കുന്നവരുടെ ഇടയിൽ ജനിക്കുന്നു; തമസ്സിൽ മരിക്കുന്ന അവൻ ചിന്താശൂന്യരുടെ ഉദരത്തിൽ ജനിക്കുന്നു.

NepaliIND

रजसमा मृत्यु भेटेर कर्ममा आसक्त भएकाहरूका बीचमा जन्म लिन्छ। र तामसमा मर्ने, विचारहीनको गर्भमा जन्मन्छ।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते -- अन्तसमयमें जिसकिसी भी मनुष्यमें जिसकिसी कारणसे रजोगुणकी लोभ? प्रवृत्ति? अशान्ति? स्पृहा आदि वृत्तियाँ बढ़ जाती हैं और उसी वृत्तिके चिन्तनमें उसका शरीर छूट जाता है? तो वह मृतात्मा प्राणी कर्मोंमें आसक्ति रखनेवाले मनुष्योंमें जन्म लेता है।जिसने उम्रभर अच्छे काम? आचरण किये हैं? जिसके अच्छे भाव रहे हैं? वह यदि अन्तकालमें रजोगुणके बढ़नेपर मर जाता है? तो मरनेके बाद मनुष्ययोनिमें जन्म लेनेपर भी उसके आचरण? भाव अच्छे ही रहेंगे? वह शुभकर्म करनेवाला ही होगा। जिसका साधारण जीवन रहा है? वह यदि अन्तसमयमें रजोगुणकी लोभ आदि वृत्तियोंके बढ़नेपर मर जाता है? तो वह मनुष्ययोनिमें आकर पदार्थ? व्यक्ति? क्रिया आदिमें आसक्तिवाला ही होगा। जिसके जीवनमें काम? क्रोध आदिकी ही मुख्यता रही है? वह यदि रजोगुणके बढ़नेपर मर जाता है? तो वह मनुष्ययोनिमें जन्म लेनेपर भी विशेषरूपसे आसुरी सम्पत्तिवाला ही होगा। तात्पर्य यह हुआ कि मनुष्यलोकमें जन्म लेनेपर भी गुणोंके तारतम्यसे मनुष्योंके तीन प्रकार हो जाते हैं अर्थात् तीन प्रकारके स्वभाववाले मनुष्य हो जाते हैं। परन्तु इसमें एक विशेष ध्यान देनेकी बात है कि रजोगुणकी वृद्धिपर मरकर मनुष्य बननेवाले प्राणी कैसे ही आचरणोंवाले क्यों न हों? उन सबमें भगवत्प्रदत्त विवेक रहता ही है। अतः प्रत्येक मनुष्य इस विवेकको महत्त्व देकर सत्सङ्ग? स्वाध्याय आदिसे इस विवेकको स्वच्छ करके ऊँचे उठ सकते हैं? परमात्माको प्राप्त कर सकते हैं। इस भगवत्प्रदत्त विवेकके कारण सबकेसब मनुष्य भगवत्प्राप्तिके अधिकारी हो जाते हैं।तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते -- अन्तकालमें? जिसकिसी भी मनुष्यमें? जिसकिसी कारणसे तात्कालिक तमोगुण बढ़ जाता है अर्थात् तमोगुणकी प्रमाद? मोह? अप्रकाश आदि वृत्तियाँ बढ़ जाती हैं और उन वृत्तियोंका चिन्तन करते हुए ही वह मरता है? तो वह मनुष्य पशु? पक्षी? कीट? पतंग? वृक्ष? लता आदि मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है। इन मूढ़योनियोंमें मूढ़ता तो सबमें रहती है? पर वह न्यूनाधिकरूपसे रहती है जैसे -- वृक्ष? लता आदि योनियोंमें जितनी अधिक मूढ़ता होती है? उतनी मूढ़ता पशु? पक्षी आदि योनियोंमें नहीं होती।अच्छे काम करनेवाला मनुष्य यदि अन्तसमयमें तमोगुणकी तात्कालिक वृत्तिके बढ़नेपर मरकर मूढ़योनियोंमें,भी चला जाय? तो वहाँ भी उसके गुण? आचरण अच्छे ही होंगे? उसका स्वभाव अच्छे काम करनेका ही होगा। जैसे? भरत मुनिका अन्तसमयमें तमोगुणकी वृत्तिमें अर्थात् हरिणके चिन्तनमें शरीर छूटा? तो वे मूढ़योनिवाले हरिण बन गये। परन्तु उनका मनुष्यजन्ममें किया हुआ त्याग? तप हरिणके जन्ममें भी वैसा ही बना रहा। वे हरिणयोनिमें भी अपनी माताके साथ नहीं रहे? हरे पत्ते न खाकर सूखे पत्ते ही खाते रहे? आदि। ऐसी सावधानी मनुष्योंमें भी बहुत कम होती है? जो कि भरत मुनिकी हरिणजन्ममें थी। सम्बन्ध -- अन्तकालमें गुणोंके तात्कालिक बढ़नेपर मरनेवाले मनुष्योंकी ऐसी गतियाँ क्यों होती हैं -- इसे आगेके श्लोकमें बताते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

रजोगुणकी वृद्धिके समय मरनेपर कर्मसंगियोंमें अर्थात् कर्मोंमें आसक्त हुए मनुष्योंमें उत्पन्न होता है और वैसे ही तमोगुणके बढ़नेपर मरा हुआ मनुष्य मूढ़योनिमें अर्थात् पशु आदि योनियोंमें उत्पन्न होता है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

रजःसमुद्रेके मृतस्य फलविशेषं दर्शयति -- रजसीति। जायते शरीरं गृह्णातीत्यर्थः। यथा सत्त्वे रजसि च प्रवृद्धे मृतो ब्रह्मलोकादिषु मनुष्यलोके च देवादिषु मनुष्येषु च जायते तथैवेत्याह -- तद्वदिति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

रजःप्रवृद्धिकृतं फलविशेषमाह। रजसि प्रवृद्धे प्रलयं मरणं गत्वा प्राप्य देहभृत् कर्मसङ्गिषु कर्मासक्तियुक्तेषु मनुष्येषु जायते। यथा सत्त्वे रजसि च प्रवृद्धे मृतो देहभृत् ब्रह्मलोकादिषु मनुष्यलोके च देवादिषु मनुष्येषु च जायते। तथा तमसि प्रवृद्धे देही मूढानां पश्चादीनां योनिषु जायते उत्पद्यत इत्यर्थः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
rajasiin the mode of passion
pralayamdeath
gatvāattaining
karmasaṅgiṣhu
jāyateare born
tathālikewise
pralīnaḥdying
tamasiin the mode of ignorance
mūḍhayoniṣhu
jāyatetakes birth
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 14.14
यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्।तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते

जिस समय सत्त्वगुण बढ़ा हो, उस समय यदि देहधारी मनुष्य मर जाता है, तो वह,उत्तमवेत्ताओंके निर्मल लोकोंमें जाता है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 14.16
कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्।रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम्

(विवेकी पुरुषोंने) शुभ-कर्मका तो सात्त्विक निर्मल फल कहा है, राजस कर्मका फल दुःख कहा है और तामस कर्मका फल अज्ञान (मूढ़ता) कहा है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 14Shlok 15
Bhagavad Gita · Adhyay 14, Shlok 15
रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते।तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते

रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 14 श्लोक 15 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 14 श्लोक 15 का हिंदी अर्थ: "रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Gunatraya-Vibhaga Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 14 Verse 15?

Bhagavad Gita Chapter 14 Verse 15 translates to: "Meeting death in Rajas, he is born among those who are attached to action; and dying in Tamas, he is born in the womb of the thoughtless. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते।तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 14, श्लोक 15 है जो Bhagavad Gita के Gunatraya-Vibhaga Yoga में संकलित है। रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "rajasi pralayaṁ gatvā karma-saṅgiṣhu jāyate" mean in English?

"rajasi pralayaṁ gatvā karma-saṅgiṣhu jāyate" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 14 Verse 15. Meeting death in Rajas, he is born among those who are attached to action; and dying in Tamas, he is born in the womb of the thoughtless. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.