Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 49
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्। व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य

यह इस प्रकारका मेरा घोररूप देखकर तेरेको व्यथा नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव भी नहीं होना चाहिये। अब निर्भय और प्रसन्न मनवाला होकर तू फिर उसी मेरे इस (चतुर्भुज) रूपको अच्छी तरह देख ले। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MalayalamIND

എൻ്റെ ഇത്രയും ഭയാനകമായ ഒരു രൂപം കണ്ട് ഭയപ്പെടരുത്, പരിഭ്രാന്തരാകരുത്; നിങ്ങളുടെ ഭയം ദൂരീകരിച്ച് സന്തോഷമുള്ള ഹൃദയത്തോടെ, ഇപ്പോൾ വീണ്ടും എൻ്റെ ഈ പഴയ രൂപം കാണുക.

PunjabiIND

ਮੇਰਾ ਐਸਾ ਭਿਆਨਕ ਰੂਪ ਦੇਖ ਕੇ ਨਾ ਡਰੋ, ਨਾ ਘਬਰਾਓ; ਤੇਰਾ ਡਰ ਦੂਰ ਹੋ ਗਿਆ ਅਤੇ ਪ੍ਰਸੰਨ ਹਿਰਦੇ ਨਾਲ, ਹੁਣ ਮੇਰੇ ਇਸ ਪੁਰਾਣੇ ਸਰੂਪ ਨੂੰ ਮੁੜ ਵੇਖੋ।

BengaliIND

আমার এমন ভয়ঙ্কর রূপ দেখে ভয় পেয়ো না, বিচলিতও হবে না; তোমার ভয় দূর করে এবং আনন্দিত চিত্তে, এখন আমার এই পূর্বের রূপটি আবার দেখ।

KannadaIND

ನನ್ನ ಅಂತಹ ಭಯಾನಕ ರೂಪವನ್ನು ನೋಡಿ ಭಯಪಡಬೇಡ, ಅಥವಾ ದಿಗ್ಭ್ರಮೆಗೊಳ್ಳಬೇಡ; ನಿಮ್ಮ ಭಯವನ್ನು ಹೋಗಲಾಡಿಸಿ ಮತ್ತು ಸಂತೋಷದ ಹೃದಯದಿಂದ, ಈಗ ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನನ್ನ ಈ ಹಿಂದಿನ ರೂಪವನ್ನು ನೋಡಿ.

TamilIND

என்னுடைய இத்தகைய பயங்கரமான வடிவத்தைக் கண்டு பயப்படாதீர்கள், திகைக்காதீர்கள்; உங்கள் பயம் நீங்கி, மகிழ்ச்சியான இதயத்துடன், இப்போது என்னுடைய இந்த முந்தைய வடிவத்தைப் பாருங்கள்.

NepaliIND

मेरो यस्तो डरलाग्दो रूप देखेर नडराऊ, न विचलित हो; तिम्रो डर हटाएर र प्रफुल्लित हृदयले, अब फेरि मेरो यो पुरानो रूप हेर।

TeluguIND

నా యొక్క అటువంటి భయంకరమైన రూపాన్ని చూసి భయపడవద్దు, కలవరపడవద్దు; మీ భయం తొలగిపోయి, సంతోషించిన హృదయంతో, ఇప్పుడు మళ్లీ ఈ నా పూర్వ రూపాన్ని చూడండి.

SindhiIND

منهنجي اهڙي خوفناڪ صورت کي ڏسي نه ڊڄو ۽ نه ئي حيران ٿي وڃو. تنهنجو خوف دور ٿي ويو ۽ دل خوشيءَ سان، هاڻي منهنجي هن اڳوڻي شڪل کي ٻيهر ڏسو.

GujaratiIND

મારા આવા ભયંકર રૂપને જોઈને ડરશો નહિ, અને વિચલિત થશો નહિ; તમારો ભય દૂર થઈ ગયો અને આનંદિત હૃદય સાથે, હવે ફરીથી મારું આ ભૂતપૂર્વ સ્વરૂપ જુઓ.

MarathiIND

माझे असे भयंकर रूप पाहून घाबरू नकोस, घाबरू नकोस; तुमची भीती नाहीशी झाली आणि आनंदित अंतःकरणाने, आता माझे हे पूर्वीचे रूप पुन्हा पहा.

KonkaniIND

म्हजें अशें भयानक रूप पळोवन भियेवंक नाका, आनी भ्रम जावंक नाका; तुजो भंय पयस करून आनी खोशी जाल्ल्या काळजान आतां परत पळय म्हजें हें आदलें रूप.

BhojpuriIND

माईन के अइसन भयानक रूप देख के मत डेराईं, ना भ्रमित हो जाईं; आपन डर दूर आ प्रसन्न दिल से अब फेरु देखऽ हमार ई पहिले के रूप।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्'--विकराल दाढ़ोंके कारण भयभीत करनेवाले मेरे मुखोंमें योद्धालोग बड़ी तेजीसे जा रहे हैं, उनमेंसे कई चूर्ण हुए सिरोंसहित दाँतोंके बीचमें फँसे हुए दीख रहे हैं और मैं प्रलयकालकी अग्निके समान प्रज्वलित मुखोंद्वारा सम्पूर्ण लोगोंका ग्रसन करते हुए उनको चारों ओरसे चाट रहा हूँ -- इस प्रकारके मेरे घोर रूपको देखकर तेरेको व्यथा नहीं होनी चाहिये, प्रत्युत प्रसन्नता होनी चाहिये। तात्पर्य है कि पहले (11। 45 में) तू जो मेरी कृपाको देखकर हर्षित हुआ था, तो मेरी कृपाकी तरफ दृष्टि होनेसे तेरा हर्षित होना ठीक ही था, पर यह व्यथित होना ठीक नहीं है। अर्जुनने जो पहले कहा है --'प्रव्यथितास्तथाहम्' (11। 23) और 'प्रव्यथितान्तरात्मा' (11। 24)। उसीके उत्तरमें भगवान् यहाँ कहते हैं -- 'मा ते व्यथा।',मैं कृपा करके ही ऐसा रूप दिखा रहा हूँ। इसको देखकर तेरेको मोहित नहीं होना चाहिये -- 'मा च विमूढभावः'। दूसरी बात? मैं तो प्रसन्न ही हूँ और अपनी प्रसन्नतासे ही तेरेको यह रूप दिखा रहा हूँ; परन्तु तू जो बार-बार यह कह रहा है कि 'प्रसन्न हो जाओ; प्रसन्न हो जाओ', यही तेरा विमूढ़भाव है। तू इसको छोड़ दे। तीसरी बात, पहले तूने कहा था कि मेरा मोह चला गया (11। 1), पर वास्तवमें तेरा मोह अभी नहीं गया है। तेरेको इस मोहको छोड़ देना चाहिये और निर्भय तथा प्रसन्न मनवाला होकर मेरा वह देवरूप देखना चाहिये। तेरा और मेरा जो संवाद है, यह तो प्रसन्नतासे, आनन्दरूपसे, लीलारूपसे होना चाहिये। इसमें भय और मोह बिलकुल नहीं होने चाहिये। मैं तेरे कहे अनुसार घोड़े हाँकता हूँ, बातें करता हूँ, विश्वरूप दिखाता हूँ आदि सब कुछ करनेपर भी तूने मेरेमें कोई विकृति देखी है क्या मेरेमें कुछ अन्तर आया है क्या? ऐसे ही मेरे विश्वरूपको देखकर तेरेमें भी कोई विकृति नहीं आनी चाहिये।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

जैसा पहले दिखाया जा चुका है? वैसे मेरे इस घोर रूपको देखकर तुझे भय न होना चाहिये और विमूढभाव अर्थात् चित्तकी मूढावस्था भी नहीं होनी चाहिये। तू भयरहित और प्रसन्नमन हुआ वही अपना इष्ट यह शङ्खचक्रगदाधारी चतुर्भुजरूप फिर भी देख।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

विश्वरूपदर्शनमेवं स्तुत्वा यद्यस्माद्दृश्यमानाद्बिभेषि तर्हि तदुपसंहरामीत्याह -- मा ते व्यथेति। बहुविधमनुभूतत्वमभिप्रेत्येदृगित्युक्तमिदमिति प्रत्यक्षयोग्यत्वम्। तदेवेत्युक्तं इदमिति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

तव प्रसन्नतायै प्रदर्शितेन विश्वरुपेण तव व्यथादिकं चेत्तर्हि तदेव मे रुपं पश्येत्याह -- मा त इति। ईदृक् घोरं ममेदं रुपं दृष्ट्वा तव व्यथा भयं माभूत। मा च विमूढभावो व्याकुलचित्तता। तथाच व्यपेतभीः व्यथारहितः प्रीतमनाश्च सन् तदेव स्वेष्टं चतुर्भुजं शङ्खचक्रगदापद्मधरं शयामघनं मम रुपमिदं मया प्रत्यक्षीकृतं प्रकर्षेण विश्वरुपदर्शनजनितव्यथादिनिवृत्त्यर्थं पश्य।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
mā teyou shout not be
vyathāafraid
not
chaand
vimūḍhabhāvaḥ
dṛiṣhṭvāon seeing
rūpamform
ghoramterrible
īdṛiksuch
mamaof mine
idamthis
vyapetabhīḥ
prītamanāḥ
punaḥagain
tvamyou
tat evathat very
memy
rūpamform
idamthis
prapaśhyabehold
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.48
न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानै र्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः। एवंरूपः शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर

हे कुरुप्रवीर! मनुष्यलोकमें इस प्रकारके विश्वरूपवाला मैं न वेदोंके पढ़नेसे, न यज्ञोंके अनुष्ठानसे, न दानसे, न उग्र तपोंसे और न मात्र क्रियाओंसे तेरे (कृपापात्रके) सिवाय और किसीके द्वारा देखा जाना शक्य हूँ। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.50
सञ्जय उवाच इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः। आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा

सञ्जय बोले -- वासुदेवभगवान् ने अर्जुनसे ऐसा कहकर फिर उसी प्रकारसे अपना रूप (देवरूप) दिखाया और महात्मा श्रीकृष्णने पुनः सौम्यवपु (द्विभुजरूप) होकर इस भयभीत अर्जुनको आश्वासन दिया। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 49
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 49
मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्। व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य

यह इस प्रकारका मेरा घोररूप देखकर तेरेको व्यथा नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव भी नहीं होना चाहिये। अब निर्भय और प्रसन्न मनवाला होकर तू फिर उसी मेरे इस (चतुर्भुज) रूपको अच्छी तरह देख ले। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 49 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 49 का हिंदी अर्थ: "यह इस प्रकारका मेरा घोररूप देखकर तेरेको व्यथा नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव भी नहीं होना चाहिये। अब निर्भय और प्रसन्न मनवाला होकर तू फिर उसी मेरे इस (चतुर्भुज) रूपको अच्छी तरह देख ले। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 49?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 49 translates to: "Do not be afraid, nor be bewildered on seeing such a terrible form of Mine; with your fear dispelled and with a gladdened heart, now behold again this former form of Mine. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"मा ते व्यथा मा च विमूढभावो दृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम्। व्यपेतभीः प्रीतमनाः पु" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 49 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। यह इस प्रकारका मेरा घोररूप देखकर तेरेको व्यथा नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव भी नहीं होना चाहिये। अब निर्भय और प्रसन्न मनवाला होकर तू फिर उसी मेरे इस (चतुर्भुज) रूपको अच्छी तरह देख ले। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "mā te vyathā mā cha vimūḍha-bhāvo" mean in English?

"mā te vyathā mā cha vimūḍha-bhāvo" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 49. Do not be afraid, nor be bewildered on seeing such a terrible form of Mine; with your fear dispelled and with a gladdened heart, now behold again this former form of Mine. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.