Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 3
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता

हे आचार्य! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TamilIND

இதோ, ஆசிரியரே! உன்னுடைய ஞான சீடனான துருபதனின் மகனால் அணிவகுக்கப்பட்ட பாண்டுவின் மகன்களின் இந்த வலிமைமிக்கப் படை.

GujaratiIND

જુઓ, ઓ શિક્ષક! તમારા જ્ઞાની શિષ્ય દ્રુપદના પુત્ર દ્વારા સજ્જ પાંડુના પુત્રોની આ પરાક્રમી સેના.

PunjabiIND

ਵੇਖੋ, ਹੇ ਗੁਰੂ! ਪਾਂਡੂ ਦੇ ਪੁੱਤਰਾਂ ਦੀ ਇਹ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਸੈਨਾ, ਤੁਹਾਡੇ ਬੁੱਧੀਮਾਨ ਚੇਲੇ ਦ੍ਰੁਪਦ ਦੇ ਪੁੱਤਰ ਦੁਆਰਾ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ।

TeluguIND

ఇదిగో, ఓ గురువు! నీ తెలివైన శిష్యుడైన ద్రుపదుని కుమారునిచే ఏర్పాటు చేయబడిన పాండు కుమారుల ఈ శక్తివంతమైన సైన్యం.

MarathiIND

पाहा, हे गुरू! पांडुपुत्रांचे हे पराक्रमी सैन्य, द्रुपदाच्या पुत्राने, तुझा ज्ञानी शिष्य सज्ज केला आहे.

MaithiliIND

देखू हे गुरु! पाण्डु पुत्रक ई पराक्रमी सेना द्रुपदक पुत्र अहाँक ज्ञानी शिष्य द्वारा सजल |

AssameseIND

চোৱা, হে গুৰু! তোমাৰ জ্ঞানী শিষ্য দ্ৰুপদ পুত্ৰই সজ্জিত পাণ্ডু পুত্ৰৰ এই মহান সৈন্য।

KonkaniIND

पळय, हे गुरू! पांडुपुत्रांचें हें पराक्रमी सैन्य, द्रुपदाच्या पुतान, तुज्या ज्ञानी शिश्यान सजयल्लें.

MizoIND

Ngai teh, Aw Zirtirtu! He Pandu fapate sipai chak tak, i zirtir fing Drupada fapain a inthuam hi.

MalayalamIND

ഇതാ, ഗുരു! നിൻ്റെ ജ്ഞാനിയായ ശിഷ്യനായ ദ്രുപദൻ്റെ പുത്രൻ അണിനിരന്ന പാണ്ഡുപുത്രന്മാരുടെ ഈ ശക്തമായ സൈന്യം.

NepaliIND

हेर, हे गुरु ! पाण्डुका छोराहरूको यो शक्तिशाली सेना, द्रुपदका पुत्र, तपाईंको ज्ञानी शिष्यद्वारा सजिएको।

DogriIND

देखो हे गुरु! पांडु दे पुत्रां दी ये पराक्रमी सेना, द्रुपद दे पुत्र तेरे ज्ञानी शिष्य।

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

1.3।। व्याख्या--'आचार्य' द्रोणके लिये 'आचार्य' सम्बोधन देनेमें दुर्योधनका यह भाव मालूम देता है कि आप हम सबके--कौरवों और पाण्डवों के आचार्य हैं। शस्त्रविद्या सिखानेवाले होनेसे आप सबके गुरु हैं। इसलिये आपके मनमें किसीका पक्ष या आग्रह नहीं होना चाहिये। 'तव शिष्येण धीमता'--इन पदोंका प्रयोग करनेमें दुर्योधनका भाव यह है कि आप इतने सरल हैं कि अपने मारनेके लिये पैदा होनेवाले धृष्टद्युम्नको भी आपने अस्त्र-शस्त्रकी विद्या सिखायी है; और वह आपका शिष्य धृष्टद्युम्न इतना बुद्धिमान है कि उसने आपको मारनेके लिये आपसे ही अस्त्र-शस्त्रकी विद्या सीखी है।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

तदेव वचनमुदाहरति पश्येति। एतामस्मदभ्याशे महापुरुषानपि भवत्प्रमुखानपरिगणय्य भयलेशशून्यामवस्थितां चमूमिमां सेनां पाण्डुपुत्रैर्युधिष्ठिरादिभिरानीतां महतीमनेकाक्षौहिणीसहितामक्षोभ्यां पश्येत्याचार्यं दुर्योधनो नियुङ्क्ते नियोगद्वारा च तस्मिन्परेषामवज्ञां विज्ञापयन्क्रोधातिरेकमुत्पादयितुमुत्सहते। परकीयसेनाया वैशिष्ट्याभिधानद्वारा परापरपक्षेऽपि त्वदीयमेव बलमिति सूचयन्नाचार्यस्य तन्निरसनं सुकरमिति मन्वानः सन्नाह व्यूढामिति। राज्ञो द्रुपदस्य पुत्रस्तव शिष्यो धृष्टद्युम्नो लोके ख्यातिमुपगतः स्वयं च शस्त्रास्त्रविद्यासंपन्नो महामहिमा तेन व्यूहमापाद्याधिष्ठितामिमां चमूं किमिति न प्रतिपद्यसे किमिति वा मृष्यसीत्यर्थः।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

तदेवोदाहरति पश्येत्यादिना। एतां भवदादीनतिरथानपरिगणय्य संमुखे स्थितां पाण्डुपुत्राणां युधिष्ठिरादीनां चमूं सेनां महतीमनेकाक्षौहिणीयुक्तामक्षोभ्यां द्रुपदस्य पुत्रेण धृष्टद्युम्नेन तव शिष्येण बुद्धिमतां व्यूढां व्यूहरचनया स्थापितां पश्य। हे आचार्य उभयेषामाचार्यस्यापि तव पाण्डवेषु प्रीतिर्न युक्ता यतस्त्वामपरिगणय्य तव संमुखे महती सेना तैः स्थापितेत्याशयः। द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येणेति पदद्वयेन द्रुपदपुत्रस्य स्वमृत्योरपि त्वया शिक्षणं कृतमिति मृत्योरपि तव भयं नास्तीति सूचितम्। एतेन स्वमृत्युना सह मया कथं योद्धव्यमिति शङ्कापि परिहृता। शिक्षितमपि मूर्खेण विस्मर्यते इति शङ्कानिरासाय धीमतेत्युक्तम्। परपक्षेऽपि त्वदीयमेव बलमिति सूचयन्नाचार्यस्य तन्निरसनभतिसुकरमिति मन्वानः सन्नाह व्यूढामित्यादिनेत्येके। द्रुपदपुत्रेणेति कथनं द्रुपदपूर्ववैरसूचनेन क्रोधाद्दीपनार्थम्। धीमतेत्यनुपेक्षणीयत्वसूचनार्थम्। पश्येति व्यासङ्गान्तरनिराकरणेन त्वरातिशयार्थम्। अन्यच्च राजा अवचनमब्रवीत्। हे पाण्डुपुत्राणामाचार्य नतु मम। तेषु स्नेहाधिक्यात्। द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येणेति त्वद्वधार्थमुत्पन्नोऽपि त्वयाध्यापित इति तव मौढ्यमेव ममानर्थकारणमिति सूचयति। शत्रोरपि सकाशात्तद्वधोपायभूता विद्या गृहीतेति तस्य धीमत्त्वमतएव तच्चमूदर्शनेनानन्दस्तवैव भविष्यति भ्रान्तत्वान्नान्यस्य कस्यचिदपि। यं प्रतीयं प्रदर्शनीयेति त्वमेवैतां पश्येत्याचार्यं प्रति निगूढं द्वेषं द्योतयति। एवंच यस्य धर्मक्षेत्रेऽपीदृक् दुष्टबुद्धिस्तस्य काऽनुतापशङ्केति भाव इति केचित्। अन्येच्चेत्यारभ्य युद्धार्थं प्रार्थनां कुर्वतो दुर्योधनस्य प्रणिपातादिपुरःसरं आचार्यसमीपं गतस्यात्मनः शिक्षितारं रक्षितारं च प्रत्येवमभिप्रायवर्णनं प्रकृतासंगतं नवेति विद्वद्भिर्निर्मत्सरैः पक्षपातवर्जितौर्विचार्यम्। अनुतापशङ्का मूलविरुद्धेति तु पूर्वमुक्तमेव। नन्वनेन कृतं प्रतारणं बुद्ध्वैवाचार्येणोत्तरं न दत्तमिति चेत्। न। आचार्याभाषणस्य प्रकृतविरुद्धार्थकल्पनांविनैव वक्ष्यमाणरीत्योपपत्तौ तत्कल्पनाया अन्याय्यत्वात्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
paśhyabehold
etāmthis
pāṇḍuputrāṇām
āchāryarespected teacher
mahatīmmighty
chamūmarmy
vyūḍhāmarrayed in a military formation
drupadaputreṇa
tavaby your
śhiṣhyeṇadisciple
dhīmatā
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.2
सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्

उस समय वज्रव्यूह-से खड़ी हुई पाण्डव-सेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.4
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि। युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः

यहाँ (पाण्डवों की सेना में) बड़े-बड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़े-बड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं। उनमें युयुधान (सात्यकि), राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं। पुरुजित् और कुन्तिभोज--ये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं। पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं। सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं। ये सब-के-सब महारथी हैं। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 3
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 3
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता

हे आचार्य! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 3 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 3 का हिंदी अर्थ: "हे आचार्य! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 3?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 3 translates to: "Behold, O Teacher! This mighty army of the sons of Pandu, arrayed by the son of Drupada, thy wise disciple. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीम" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 3 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। हे आचार्य! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "paśhyaitāṁ pāṇḍu-putrāṇām āchārya mahatīṁ chamūm" mean in English?

"paśhyaitāṁ pāṇḍu-putrāṇām āchārya mahatīṁ chamūm" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 3. Behold, O Teacher! This mighty army of the sons of Pandu, arrayed by the son of Drupada, thy wise disciple. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.