Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 2
सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्

उस समय वज्रव्यूह-से खड़ी हुई पाण्डव-सेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

GujaratiIND

: પાંડવોની સેનાને યુદ્ધની હારમાળામાં જોયા બાદ, રાજા દુર્યોધન તેના શિક્ષક દ્રોણ પાસે ગયો અને આ શબ્દો બોલ્યા.

NepaliIND

: पाण्डवहरूको सेना युद्धमा तयार भएको देखेर, राजा दुर्योधनले आफ्ना गुरु द्रोणलाई भेटेर यी शब्दहरू भने।

KannadaIND

: ಪಾಂಡವರ ಸೈನ್ಯವನ್ನು ಯುದ್ಧದಲ್ಲಿ ರಚಿಸಿರುವುದನ್ನು ನೋಡಿದ ರಾಜ ದುರ್ಯೋಧನನು ತನ್ನ ಗುರುವಾದ ದ್ರೋಣರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸಿ ಈ ಮಾತುಗಳನ್ನು ಹೇಳಿದನು.

PunjabiIND

: ਪਾਂਡਵਾਂ ਦੀ ਫੌਜ ਨੂੰ ਯੁੱਧ ਦੇ ਮੈਦਾਨ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਦੇਖ ਕੇ, ਰਾਜਾ ਦੁਰਯੋਧਨ ਆਪਣੇ ਗੁਰੂ ਦ੍ਰੋਣ ਕੋਲ ਆਇਆ ਅਤੇ ਇਹ ਸ਼ਬਦ ਕਹੇ।

MizoIND

: Pandava-ho sipaite indona hmuna an insiam lai a hmuh chuan Lal Duryodhana chuan a zirtirtu Drona chu a pan a, heng thute hi a sawi ta a ni.

BhojpuriIND

: पांडव के सेना के युद्ध के सरणी में खड़ा देख के राजा दुर्योधन अपना गुरु द्रोण के लगे पहुंचले अवुरी इ बात कहले।

MarathiIND

: पांडवांचे सैन्य युद्धात तयार झालेले पाहून, राजा दुर्योधनाने आपला गुरु द्रोण यांच्याकडे जाऊन हे शब्द बोलले.

BengaliIND

: পাণ্ডবদের বাহিনীকে যুদ্ধের সারিতে সাজানো দেখে রাজা দুর্যোধন তাঁর শিক্ষক দ্রোণের কাছে গিয়ে এই কথাগুলো বললেন।

SindhiIND

: پانڊاوَن جي لشڪر کي جنگ جي صف ۾ بيٺو ڏسي، بادشاهه دريوڌن پنهنجي استاد، درون وٽ آيو، ۽ اهي لفظ چيا.

TeluguIND

: యుద్ధ శ్రేణిలో పాండవుల సైన్యాన్ని చూసిన రాజు దుర్యోధనుడు తన గురువు ద్రోణుడి వద్దకు వెళ్లి ఈ మాటలు చెప్పాడు.

KonkaniIND

: पांडवांचें सैन्य झुजाच्या मांडयेंत उबें जाल्लें पळोवन राजा दुर्योधनान आपल्या गुरू द्रोणाकडेन वचून हीं उतरां उलयलीं.

ManipuriIND

: ꯂꯥꯅꯒꯤ ꯊꯧꯔꯥꯡꯗꯥ ꯄꯥꯟꯗꯕꯁꯤꯡꯒꯤ ꯂꯥꯟꯃꯤꯁꯤꯡ ꯁꯦꯃꯈꯤꯕꯥ ꯎꯔꯒꯥ ꯅꯤꯡꯊꯧ ꯗꯨꯔꯌꯣꯙꯟꯅꯥ ꯃꯍꯥꯛꯀꯤ ꯑꯣꯖꯥ ꯗ꯭ꯔꯣꯅꯒꯤ ꯃꯅꯥꯛꯇꯥ ꯂꯥꯀꯈꯤ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯋꯥꯍꯩꯁꯤꯡ ꯑꯁꯤ ꯐꯣꯡꯗꯣꯀꯈꯤ |

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या-- 'तदा'-- जिस समय दोनों सेनाएँ युद्धके लिये खड़ी हुई थीं, उस समयकी बात सञ्जय यहाँ 'तदा' पदसे कहते हैं। कारण कि धृतराष्ट्रका प्रश्न 'युद्धकी इच्छावाले मेरे और पाण्डुके पुत्रोंने क्या किया'-- इस विषयको सुननेके लिये ही है। 'तु'--धृतराष्ट्रने अपने और पाण्डुके पुत्रोंके विषयमें पूछा है। अतः सञ्जय भी पहले धृतराष्ट्रके पुत्रों की बात बतानेके लिये यहाँ 'तु' पदका प्रयोग करते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

किमस्मदीयं प्रबलं बलं प्रतिलभ्य धीरपुरुषैर्भीष्मादिभिरधिष्ठितं परेषां भयमाविरभूत् यद्वा पक्षद्वयहिंसानिमित्ताधर्मभयमासीद्येनैते युद्धादुपरमेरन्नित्येवं पुत्रपरवशस्य पुत्रस्नेहाभिनिविष्टस्य धृतराष्ट्रस्य प्रश्ने संजयस्य प्रतिवचनं दृष्ट्वेत्यादि। पाण्डवानां भयप्रसङ्गो नास्तीत्येतत्तुशब्देन द्योत्यते प्रत्युत दुर्योधनस्यैव राज्ञो भयं प्रभूतं प्रादुर्बभूव। पाण्डवानां पाण्डुसुतानां युधिष्ठिरादीनामनीकं सैन्यं धृष्टद्युम्नादिभिरतिधृष्टैर्व्यूहाधिष्ठितं दृष्ट्वा प्रत्यक्षेण प्रतीत्य त्रस्तहृदयो दुर्योधनो राजा तदा तस्यां संग्रामोद्योगावस्थायामाचार्यं द्रोणनामानमात्मनः शिक्षितारं रक्षितारं च श्लाघयन्नुपसंगम्य तदीयं समीपं विनयेन प्राप्य भयोद्विग्नहृदयत्वेऽपि तेजस्वित्वादेव वचनमर्थसहितं वाक्यमुक्तवानित्यर्थः।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

एवं पृष्टः संजयःअर्जुनो वीरशिरोमणिरतिकारुणिको युद्धाद्धिंसाप्रधानान्निवृत्तः पुनर्भूभारसंजिहीर्षुणा श्रीकृष्णेनोपदिष्टो युद्धं कृतवान्। युद्धिष्ठिरादयस्तुआततायिनमायान्तं हन्यादेवाविचारयन् इत्यादिक्षात्रधर्मविदस्तत्कृतवन्तः। त्वदीयास्तु क्रूरस्वभावादेवेत्याशयेनाक्षेपं प्रतिक्षिपन् प्रश्नस्योत्तरमाह दृष्ट्वेत्यादि। तुशब्द आक्षेपनिरासार्थः। पाण्डवानां सैन्यं व्यूहरचनया व्यवस्थितमवलोक्य दुर्योधनो द्रोणाचार्यसमीपं प्रणिपातादिपुरःसरं गत्वा राजनीतिगर्भं वाक्यमब्रवीत्। नन्वाचार्यं स्वसमीप आहूय कुतो नोक्तवानित्यत आह राजेति। वीरपुरुषा अत्यादरेण युद्धे प्रवर्त्याः इति राजनीतिकुशल इत्यर्थः। आचार्यमुपसंगम्येत्यनेन दुर्योधनस्य भयोद्विग्नता सूचिता। भयोद्विग्रहृदयत्वेऽपि वचनमर्थसहितं वाक्यमुक्तवानिति सूचनार्थं राजेत्येके। यत्तु तत्र पाण्डवानां दृष्टभयसंभावना नास्ति अदृष्टभयं तु भ्रान्त्या अर्जुनस्योत्पन्नं भगवतोपशमितमिति पाण्डवानामुत्कर्षस्तुशब्देन द्योत्यते। स्वपुत्रकृतराज्यसमर्पणशङ्क्या तु माग्लासीरिति राजानं तोषयितुं दुर्योधनदौष्ट्यमेव प्रथमतो वर्णयति दृष्ट्वेतीति केचित्। तत्तु पूर्वोक्तग्रन्थविरोधादुपेक्ष्यम्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
sanjayaḥ uvāchaSanjay said
dṛiṣhṭvāon observing
tubut
pāṇḍavaanīkam
vyūḍhamstanding in a military formation
duryodhanaḥKing Duryodhan
tadāthen
āchāryamteacher
upasaṅgamyaapproached
rājāthe king
vachanamwords
abravītspoke
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.1
धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय

हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुए मेरेे और पाण्डु के पुत्रों ने भी क्या किया? — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.3
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता

हे आचार्य! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के द्वारा व्यूहरचना से खड़ी की हुई पाण्डवों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 2
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 2
सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्

उस समय वज्रव्यूह-से खड़ी हुई पाण्डव-सेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ: "उस समय वज्रव्यूह-से खड़ी हुई पाण्डव-सेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 2?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 2 translates to: ": Having seen the army of the Pandavas drawn up in battle array, King Duryodhana approached his teacher, Drona, and spoke these words. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा व" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 2 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। उस समय वज्रव्यूह-से खड़ी हुई पाण्डव-सेना को देखकर राजा दुर्योधन द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन बोला। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "sañjaya uvācha" mean in English?

"sañjaya uvācha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 2. : Having seen the army of the Pandavas drawn up in battle array, King Duryodhana approached his teacher, Drona, and spoke these words. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.