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Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 22
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्। कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे

अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है। — VaniSagar

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BengaliIND

হে কৃষ্ণ, আমার রথটি দুই বাহিনীর মাঝখানে রাখুন, যাতে আমি যুদ্ধ করতে আগ্রহী যারা এখানে দাঁড়িয়ে আছে তাদের দেখতে পারি এবং যুদ্ধ শুরু হওয়ার সময় আমাকে কার সাথে যুদ্ধ করতে হবে তা জানতে পারি।

TeluguIND

ఓ కృష్ణా, నా రథాన్ని రెండు సేనల మధ్యలో ఉంచు, నేను ఇక్కడ నిలబడి పోరాడాలని కోరుకునే వారిని చూస్తాను మరియు యుద్ధం ప్రారంభం కాబోతున్నప్పుడు నేను ఎవరితో యుద్ధం చేయాలో తెలుసుకుంటాను.

TamilIND

ஓ கிருஷ்ணா, இரு சேனைகளுக்கு நடுவில் என் தேரை நிறுத்து, அதனால் நான் இங்கு நின்று, போரிட விரும்புவோரைப் பார்த்து, போர் தொடங்கும் போது யாருடன் போரிட வேண்டும் என்பதை அறியலாம்.

MalayalamIND

കൃഷ്ണാ, എൻ്റെ രഥം രണ്ട് സൈന്യങ്ങളുടെ നടുവിൽ സ്ഥാപിക്കുക, അങ്ങനെ ഞാൻ ഇവിടെ നിൽക്കുന്നവരെ കാണാനും യുദ്ധം ആരംഭിക്കാൻ പോകുമ്പോൾ ആരുമായി യുദ്ധം ചെയ്യണമെന്ന് അറിയാനും കഴിയും.

MarathiIND

हे कृष्णा, माझा रथ दोन्ही सैन्यांच्या मध्यभागी ठेवा, जेणेकरून मी येथे उभे असलेले, युद्ध करण्यास इच्छुक असलेल्या लोकांना पाहू शकेन आणि जेव्हा युद्ध सुरू होणार आहे तेव्हा मला कोणाशी युद्ध करायचे आहे.

GujaratiIND

હે કૃષ્ણ, મારા રથને બે સેનાઓની મધ્યમાં મૂકો, જેથી હું યુદ્ધ કરવા ઇચ્છુક અહીં ઊભા રહેલા લોકોને જોઈ શકું અને જ્યારે યુદ્ધ શરૂ થવાનું હોય ત્યારે મારે કોની સાથે લડવું જોઈએ તે જાણું.

BhojpuriIND

हे कृष्ण, दुनो सेना के बीच में हमार रथ रख, ताकि हम ओहिजा खड़ा लोग के देख सकीले, जवन लड़ाई करे के इच्छुक बाड़े अवुरी जान सकी कि जब युद्ध शुरू होखे वाला बा त हमरा केकरा संगे लड़ाई करे के होई।

OdiaIND

ହେ କୃଷ୍ଣ, ମୋର ରଥକୁ ଦୁଇ ସ ies ନ୍ୟ ମ between ିରେ ରଖ, ଯାହାଫଳରେ ମୁଁ ଏଠାରେ ଠିଆ ହୋଇଥିବା, ଯୁଦ୍ଧ କରିବାକୁ ଇଚ୍ଛା କରୁଥିବା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଦେଖିବି ଏବଂ ଯୁଦ୍ଧ ଆରମ୍ଭ ହେବାକୁ ଥିବାବେଳେ ମୁଁ କାହା ସହିତ ଲ fight ିବାକୁ ହେବ ଜାଣିବି |

PunjabiIND

ਹੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ਨ, ਮੇਰੇ ਰੱਥ ਨੂੰ ਦੋਹਾਂ ਸੈਨਾਵਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰ ਰੱਖੋ, ਤਾਂ ਜੋ ਮੈਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੇਖ ਸਕਾਂ ਜੋ ਇੱਥੇ ਖੜੇ ਹਨ, ਲੜਨ ਦੇ ਇੱਛੁਕ ਹਨ, ਅਤੇ ਜਾਣ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਜਦੋਂ ਲੜਾਈ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਹੈ ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਕਿਸ ਨਾਲ ਲੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

AssameseIND

হে কৃষ্ণ, মোৰ ৰথ দুই সৈন্যৰ মাজত ৰাখক, যাতে মই ইয়াত থিয় হৈ থকাসকলক দেখা পাওঁ, যুদ্ধ কৰিবলৈ ইচ্ছুক, আৰু যুদ্ধ আৰম্ভ হ’বলৈ ওলোৱাৰ সময়ত মই কাৰ লগত যুঁজিব লাগিব।

KonkaniIND

हे कृष्ण, म्हजें रथ दोनूय सैन्या मदीं दवर, जाका लागून हांगा उबे रावपी, झुजपाची इत्सा आशिल्ल्यांक पळोवंक मेळटलें आनी झुज सुरू जावपाचें आसतना कोणा वांगडा झुजचें पडटलें तें कळटलें.

MaithiliIND

हे कृष्ण, हमर रथ केँ दुनू सेनाक बीच मे राखू, जाहि सँ हम एतय ठाढ़ लोक केँ देखि सकब, जे युद्ध करबाक इच्छा रखैत छथि, आ जानि सकब जे जखन युद्ध शुरू होमय बला अछि तखन हमरा केकरा संग लड़य पड़त।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

1.22।। व्याख्या--'अच्युत सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय'-- दोनों सेनाएँ जहाँ युद्ध करनेके लिये एक-दूसरेके सामने खड़ी थीं, वहाँ उन दोनों सेनाओंमें इतनी दूरी थी कि एक सेना दूसरी सेनापर बाण आदि मार सके। उन दोनों सेनाओं-का मध्यभाग दो तरफसे मध्य था-- (1) सेनाएँ जितनी चौड़ी खड़ी थीं, उस चौड़ाईका मध्यभाग और (2) दोनों सेनाओंका मध्यभाग, जहाँसे कौरव-सेना जितनी दूरीपर खड़ी थी, उतनी ही दूरीपर पाण्डव-सेना खड़ी थी। ऐसे मध्यभागमें रथ खड़ा करनेके लिये अर्जुन भगवान्से कहते हैं, जिससे दोनों सेनाओंको आसानीसे देखा जा सके। 'सेनयोरुभयोर्मध्ये' पद गीतामें तीन बार आया है यहाँ (1। 21 में), इसी अध्यायके चौबीसवें श्लोकमें और दूसरे अध्यायके दसवें श्लोकमें। तीन बार आनेका तात्पर्य है कि पहले अर्जुन शूरवीरताके साथ अपने रथको दोनों सेनाओंके बीचमें खड़ा करनेकी आज्ञा देते हैं (1। 21), फिर भगवान् दोनों सेनाओंके बीचमें रथको खड़ा करके कुरुवंशियोंको देखनेके लिये कहते हैं (1। 24) और अन्तमें दोनों सेनाओंके बीचमें ही विषादमग्न अर्जुनको गीताका उपदेश देते हैं (2। 10)। इस प्रकार पहले अर्जुनमें शूरवीरता थी, बीचमें कुटुम्बियोंको देखनेसे मोहके कारण उनकी युद्धसे उपरति हो गयी और अन्तमें उनको भगवान्से गीताका महान् उपदेश प्राप्त हुआ, जिससे उनका मोह दूर हो गया। इससे यह भाव निकलता है कि मनुष्य जहाँ-कहीं और जिस-किसी परिस्थितिमें स्थित है, वहीं रहकर वह प्राप्त परिस्थितिका सदुपयोग करके निष्काम हो सकता है और वहीं उसको परमात्माकी प्राप्ति हो सकती है। कारण कि परमात्मा सम्पूर्ण परिस्थितियोंमें सदा एकरूपसे रहते हैं। 'यावदेतान्निरीक्षेऽहं ৷৷. रणसमुद्यमे'-- दोनों सेनाओंके बीचमें रथ कबतक खड़ा करें? इसपर अर्जुन कहते हैं कि युद्धकी इच्छाको लेकर कौरव-सेनामें आये हुए सेनासहित जितने भी राजालोग खड़े हैं, उन सबको जबतक मैं देख न लूँ, तबतक आप रथको वहीं खड़ा रखिये। इस युद्धके उद्योगमें मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना है? उनमें कौन मेरे समान बलवाले हैं? कौन मेरे से कम बलवाले हैं? और कौन मेरेसे अधिक बलवाले हैं? उन सबको मैं जरा देख लूँ। यहाँ 'योद्धुकामान्' पदसे अर्जुन कह रहे हैं कि हमने तो सन्धिकी बात ही सोची थी, पर उन्होंने सन्धिकी बात स्वीकार नहीं की; क्योंकि उनके मनमें युद्ध करनेकी ज्यादा इच्छा है। अतः उनको मैं देखूँ कि कितने बलको लेकर वे युद्ध करनेकी इच्छा रखते हैं।

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Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

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Sri Anandgiri

मध्ये रथं स्थापयेत्युक्तं तदेव रथस्थापनस्थानं निर्धारयति यावदिति। एतान्प्रतिपक्षे प्रतिष्ठितान्भीष्मद्रोणादीनस्माभिः सार्धं योद्धुमपेक्षावतो यावद्गत्वा निरीक्षितुमहं क्षमः स्यां तावति प्रदेशे रथस्य स्थापनं कर्तव्यमित्यर्थः। किञ्च प्रवृत्ते युद्धप्रारम्भे बहवो राजानोऽमुष्यां युद्धभूमावुपलभ्यन्ते तेषां मध्ये कैः सह मया योद्धव्यं नहि क्वचिदपि मम गतिप्रतिहतिरस्तीत्याह कैर्मयेति।

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Sri Dhanpati

सेनयोरुभयोर्मध्येऽपि क्व स्थापनीय इत्यपेक्षायामाह यावदिति। एतान्योद्धुकामानवस्थितान्यावद्यस्मिन्स्थाने स्थित्वाहं निरीक्षे द्रष्टुं समर्थः स्यां तस्मिन्स्थाने रथं स्थापयेत्यर्थः। यावदिति कालपरं वा। निरीक्षणप्रयोजनमाह कैरिति। अस्मिभ्रणसमुद्यमे युद्धोद्योगे बहूनां शूराणां मध्ये कैः सह मया योद्धव्यम्। मया सह च कैर्योद्धव्यमित्यालोचनार्थमित्यर्थः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
yāvatas many as
etānthese
nirīkṣhelook
ahamI
yoddhukāmān
avasthitānarrayed
kaiḥwith whom
mayāby me
sahatogether
yoddhavyammust fight
asminin this
raṇasamudyame
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.21
अर्जुन उवाच हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते। सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत

अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.23
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः। धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः

दुष्टबुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय करने की इच्छावाले जो ये राजालोग इस सेना में आये हुए हैं, युद्ध करने को उतावले हुए इन सबको मैं देख लूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 22
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 22
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्। कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे

अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 22 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 22 का हिंदी अर्थ: "अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 22?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 22 translates to: "O Krishna, place my chariot in the middle between the two armies, so that I may behold those who stand here, desirous to fight, and know with whom I must fight when the battle is about to commence. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्। कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 22 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "yāvadetān nirīkṣhe ’haṁ yoddhu-kāmān avasthitān" mean in English?

"yāvadetān nirīkṣhe ’haṁ yoddhu-kāmān avasthitān" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 22. O Krishna, place my chariot in the middle between the two armies, so that I may behold those who stand here, desirous to fight, and know with whom I must fight when the battle is about to commence. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.