Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 18
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते। सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TeluguIND

ద్రుపదుడు మరియు ద్రౌపది కుమారులు, ఓ భూలోక ప్రభువు, మరియు సుభద్ర కుమారుడు, బలవంతుడు, వారి శంఖాలను విడివిడిగా ఊదారు.

MarathiIND

हे पृथ्वीचे स्वामी, द्रुपद आणि द्रौपदीचे पुत्र आणि पराक्रमी सुभद्राच्या पुत्राने प्रत्येकाने आपापले शंख स्वतंत्रपणे फुंकले.

MalayalamIND

ദ്രുപദനും ഭൂമിയുടെ അധിപനായ ദ്രൗപതിയുടെ പുത്രന്മാരും ശക്തനായ സുഭദ്രയുടെ പുത്രനും തങ്ങളുടെ ശംഖുകൾ ഓരോന്നായി വീശി.

SindhiIND

دروپد ۽ دروپدي جا پٽ، اي ڌرتيءَ جا پالڻھار، ۽ سُبھادرا جو پٽ، طاقتور هٿيارن سان، ھر ھڪ جدا جدا شنج وڄايو.

NepaliIND

द्रुपद र द्रौपदीका छोराहरू, हे पृथ्वीका स्वामी, र पराक्रमी सुभद्राका पुत्रले अलग-अलग शंख बजाए।

PunjabiIND

ਦ੍ਰੁਪਦ ਅਤੇ ਦ੍ਰੋਪਦੀ ਦੇ ਪੁੱਤਰਾਂ, ਹੇ ਧਰਤੀ ਦੇ ਮਾਲਕ, ਅਤੇ ਸੁਭਦਰਾ ਦੇ ਪੁੱਤਰ, ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਹਥਿਆਰਾਂ ਨਾਲ ਲੈਸ, ਹਰੇਕ ਨੇ ਆਪਣੇ-ਆਪਣੇ ਸ਼ੰਖ ਵਜਾਏ।

BengaliIND

হে পৃথিবীর অধিপতি দ্রুপদ ও দ্রৌপদীর পুত্রগণ এবং পরাক্রমশালী সুভদ্রার পুত্র পৃথক পৃথকভাবে শঙ্খ বাজালেন।

TamilIND

துருபதாவும், பூமியின் அதிபதியான திரௌபதியின் மகன்களும், சுபத்திரையின் மகனும், வலிமைமிக்க ஆயுதங்களும், தனித்தனியாக தங்கள் சங்குகளை ஊதினார்கள்.

GujaratiIND

દ્રુપદ અને દ્રૌપદીના પુત્રો, હે પૃથ્વીના ભગવાન, અને સુભદ્રાના પુત્ર, શક્તિશાળી હથિયારોથી સજ્જ, દરેકે અલગ-અલગ શંખ વગાડ્યા.

KannadaIND

ದ್ರುಪದ ಮತ್ತು ದ್ರೌಪದಿಯ ಮಕ್ಕಳು, ಓ ಪೃಥ್ವಿಯ ಪ್ರಭು ಮತ್ತು ಸುಭದ್ರೆಯ ಮಗ, ಬಲಿಷ್ಠ ತೋಳುಗಳು, ತಮ್ಮ ಶಂಖಗಳನ್ನು ಪ್ರತ್ಯೇಕವಾಗಿ ಊದಿದರು.

DogriIND

द्रुपद ते द्रौपदी दे पुत्र हे धरती दे स्वामी ते सुभद्रा दे पुत्तर पराक्रमी बाहों ने हर इक अलग-अलग शंख उड़ाया।

MizoIND

Drupada leh Draupadi fapate, Aw Lei Lalpa leh Subhadra fapa, ralthuam chak tak takte chuan an conch chu a hranin an vawm a.

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'काश्यश्च परमेष्वासः৷৷.शङ्खान् दध्मुः पृथक्पृथक्'--महारथी शिखण्डी बहुत शूरवीर था। यह पहले जन्ममें स्त्री (काशिराजकी कन्या अम्बा) था और इस जन्ममें भी राजा द्रुपदको पुत्रीरूपसे प्राप्त हुआ था। आगे चलकर यही शिखण्डी स्थूणाकर्ण नामक यक्षसे पुरुषत्व प्राप्त करके पुरुष बना। भीष्मजी इन सब बातोंको जानते थे और शिखण्डीको स्त्री ही समझते थे। इस कारण वे इसपर बाण नहीं चलाते थे। अर्जुनने युद्धके समय इसीको आगे करके भीष्मजीपर बाण चलाये और उनको रथसे नीचे गिरा दिया। अर्जुनका पुत्र अभिमन्यु बहुत शूरवीर था। युद्धके समय इसने द्रोणनिर्मित चक्रव्यूहमें घुसकर अपने पराक्रमसे बहुत-से वीरोंका संहार किया। अन्तमें कौरवसेनाके छः महारथियोंने इसको अन्यायपूर्वक घेरकर इसपर शस्त्रअस्त्र चलाये। दुःशासनपुत्रके द्वारा सिरपर गदाका प्रहार होनेसे इसकी मृत्यु हो गयी। सञ्जयने शंखवादनके वर्णनमें कौरवसेनाके शूरवीरोंमेंसे केवल भीष्मजीका ही नाम लिया और पाण्डवसेनाके शूरवीरोंमेंसे भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन, भीम आदि अठारह वीरोंके नाम लिये। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सञ्जयके मनमें अधर्मके पक्ष-(कौरवसेना-) का आदर नहीं है। इसलिये वे अधर्मके पक्षका अधिक वर्णन करना उचित नहीं समझते। परन्तु उनके मनमें धर्मके पक्ष-(पाण्डवसेना-) का आदर होनेसे और भगवान् श्रीकृष्ण तथा पाण्डवोंके प्रति आदरभाव होनेसे वे उनके पक्षका ही अधिक वर्णन करना उचित समझते हैं और उनके पक्षका वर्णन करनेमें ही उनको आनन्द आ रहा है। सम्बन्ध--पाण्डवसेनाके शंखवादनका कौरवसेनापर क्या असर हुआ--इसको आगेके श्लोकमें कहते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

द्रुपद इति। परमेष्वासादिविशेषणचतुष्टयं प्रत्येकं संबध्यते।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

सौभद्रोऽभिमन्युश्च महाबाहुः। परमेष्वासादिविशेषणचतुष्टयं प्रत्येकं संबध्यत इत्येके। पृथिवीपतित्वेन पृथिवीवद्दुःखं सोढुं योग्योऽसीति सूचितम्। पृथिवीपते धृतराष्ट्र स्थिरो भूत्वा शृण्वित्यभिप्राय इति केचित्।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
drupadaḥDrupad
draupadeyāḥthe five sons of Draupadi
chaand
sarvaśhaḥall
pṛithivīpate
saubhadraḥAbhimanyu, the son of Subhadra
chaalso
mahābāhuḥ
śhaṅkhānconch shells
dadhmuḥblew
pṛithak pṛithakindividually
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.17
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः। धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.19
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्। नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्

पाण्डव-सेना के शंखों के उस भयंकर शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुँजाते हुए अन्यायपूर्वक राज्य हड़पनेवाले दुर्योधन आदि के हृदय विदीर्ण कर दिये। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 18
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 18
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते। सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्

हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 18 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 18 का हिंदी अर्थ: "हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 18?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 18 translates to: "Drupada and the sons of Draupadi, O Lord of the Earth, and the son of Subhadra, the mighty-armed, blew their conches each separately. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते। सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथ" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 18 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। हे राजन्! श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद और द्रौपदी के पाँचों पुत्र तथा लम्बी-लम्बी भुजाओंवाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु - इन सभी ने सब ओर से अलग-अलग (अपने-अपने) शंख बजाये। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "drupado draupadeyāśhcha sarvaśhaḥ pṛithivī-pate" mean in English?

"drupado draupadeyāśhcha sarvaśhaḥ pṛithivī-pate" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 18. Drupada and the sons of Draupadi, O Lord of the Earth, and the son of Subhadra, the mighty-armed, blew their conches each separately. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.