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Sudarshana Chakra
Adhyay 1, Shlok 11
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः। भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि

आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें। — VaniSagar

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MalayalamIND

അതിനാൽ, സൈന്യത്തിൻ്റെ വിവിധ വിഭാഗങ്ങളിൽ അതാത് സ്ഥാനങ്ങളിൽ നിലയുറപ്പിച്ചിരിക്കുന്ന നിങ്ങളെല്ലാവരും ഭീഷ്മരെ മാത്രം സംരക്ഷിക്കുക.

TamilIND

எனவே, நீங்கள் அனைவரும், பல படைப் பிரிவுகளில் அந்தந்த நிலைகளில் நிலை கொண்டு, பீஷ்மரை மட்டும் பாதுகாக்கவும்.

TeluguIND

కావున, మీరందరూ సైన్యంలోని అనేక విభాగాలలో తమ స్థానాల్లో నిలిచి భీష్ముని మాత్రమే రక్షించండి.

SindhiIND

تنهن ڪري، توهان سڀ، فوج جي ڪيترن ئي حصن ۾ پنهنجي پنهنجي عهدي تي بيٺو، اڪيلي ڀشم جي حفاظت ڪريو.

MarathiIND

म्हणून सैन्याच्या अनेक तुकड्यांमध्ये आपापल्या स्थानावर असलेले तुम्ही सर्वजण एकट्या भीष्मांचे रक्षण करा.

NepaliIND

तसर्थ सेनाका विभिन्न दलमा आ-आफ्नो स्थानमा बसेर भीष्मको मात्र रक्षा गर।

GujaratiIND

તેથી, તમે બધા, સૈન્યના વિવિધ વિભાગોમાં પોતપોતાના સ્થાને તૈનાત, એકલા ભીષ્મની રક્ષા કરો.

BengaliIND

অতএব, সৈন্যবাহিনীর বিভিন্ন বিভাগে নিজ নিজ পদে অবস্থান করে তোমরা সবাই একা ভীষ্মকে রক্ষা কর।

PunjabiIND

ਇਸ ਲਈ, ਤੁਸੀਂ ਸਾਰੇ, ਫੌਜ ਦੀਆਂ ਕਈ ਡਿਵੀਜ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ-ਆਪਣੇ ਅਹੁਦਿਆਂ 'ਤੇ ਤਾਇਨਾਤ ਹੋ, ਇਕੱਲੇ ਭੀਸ਼ਮ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰੋ।

KannadaIND

ಆದುದರಿಂದ, ನೀವೆಲ್ಲರೂ ಸೈನ್ಯದ ಹಲವಾರು ವಿಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ಆಯಾ ಸ್ಥಾನಗಳಲ್ಲಿ ನೆಲೆಸಿದ್ದು, ಭೀಷ್ಮನನ್ನು ಮಾತ್ರ ರಕ್ಷಿಸಿ.

BhojpuriIND

एह से सेना के कई गो डिवीजन में अपना-अपना पद पर तैनात रउरा सभे लोग अकेले भीष्म के रक्षा करीं।

ManipuriIND

ꯃꯔꯝ ꯑꯗꯨꯅꯥ ꯂꯥꯟꯃꯤꯒꯤ ꯗꯤꯕꯤꯖꯟ ꯀꯌꯥꯗꯥ ꯑꯗꯣꯃꯒꯤ ꯃꯁꯥꯒꯤ ꯑꯣꯏꯕꯥ ꯄꯣꯖꯤꯁꯅꯁꯤꯡꯗꯥ ꯂꯩꯔꯤꯕꯥ ꯑꯗꯣꯝ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯅꯥ ꯚꯤꯁ꯭ꯝ ꯈꯛꯇꯕꯨ ꯉꯥꯀꯄꯤꯌꯨ |

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

1.11।। व्याख्या--'अयनेषु च सर्वेषु ৷৷. भवन्तः सर्व एव हि'--जिन-जिन मोर्चोंपर आपकी नियुक्ति कर दी गयी है, आप सभी योद्धालोग उन्हीं मोर्चोंपर दृढ़तासे स्थित रहते हुए सब तरफसे, सब प्रकारसे भीष्मजीकी रक्षा करें। भीष्मजीकी सब ओरसे रक्षा करें--यह कहकर दुर्योधन भीष्मजीको भीतरसे अपने पक्षमें लाना चाहता है। ऐसा कहनेका दूसरा भाव यह है कि जब भीष्मजी युद्ध करें, तब किसी भी व्यूहद्वारसे शिखण्डी उनके सामने न आ जाय--इसका आपलोग खयाल रखें। अगर शिखण्डी उनके सामने आ जायगा, तो भीष्मजी उसपर शस्त्रास्त्र नहीं चलायेंगे। कारण कि शिखण्डी पहले जन्ममें भी स्त्री था, और इस जन्ममें भी पहले स्त्री था पीछे पुरुष बना है। इसलिये भीष्मजी इसको स्त्री ही समझते हैं और उन्होंने शिखण्डीसे युद्ध न करनेकी प्रतिज्ञा कर रखी है। यह शिखण्डी शङ्करके वरदानसे भीष्मजीको मारनेके लिये ही पैदा हुआ है। अतः जब शिखण्डीसे भीष्मजीकी रक्षा हो जायगी, तो फिर वे सबको मार देंगे, जिससे निश्चित ही हमारी विजय होगी। इस बातको लेकर दुर्योधन सभी महारथियोंसे भीष्मजीकी रक्षा करनेके लिये कह रहा है।

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Sri Harikrishnadas Goenka

Sri Sankaracharya did not comment on this sloka.

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Sri Anandgiri

स्वकीयबलस्य भीष्माधिष्ठितत्वेन बलिष्ठत्वमुक्त्वा भीष्मशेषत्वेन तदनुगुणत्वं द्रोणादीनां प्रार्थयते अयनेष्विति। कर्तव्यविशेषद्योती चशब्दः। समरसमारम्भसमये योधानां यथाप्रधानं युद्धभूमौ पूर्वापरादिदिग्विभागेनावस्थितिस्थानानि नियम्यन्ते तान्यत्रायनान्युच्यन्ते सेनापतिश्च सर्वसैन्यमधिष्ठाय मध्ये तिष्ठति तेषु सर्वेषु प्रक्लृप्तं प्रविभागमप्रत्याख्याय भवानश्वत्थामा कर्णश्चेत्येवमादयो भवन्तः सर्वेऽवस्थिताः सन्तो भीष्ममेव सेनापतिं सर्वतो रक्षन्तु तस्य हि रक्षणे सर्वमस्मदीयं बलं रक्षितं स्यात् परबलनिवृत्त्यर्थत्वेन तस्यास्माभी रक्षितत्वादित्यर्थः।

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Sri Dhanpati

तस्माद्भीष्ममेव सेनापतिं गुणभूता भवन्तो रक्षन्त्विति प्रार्थयते अयनेष्विति। संग्रामप्रारम्भे योधानां यथाप्रधानं संख्ये पूर्वपरादिविभागेन नियतेष्ववस्थितिस्थानेष्वयनेषु। तुना कर्तव्यविशेषो द्योत्यते। यथाभागं विभागेन प्राप्तं स्वस्थानमवस्थिताः सावधानतया स्थिताः सर्व एव भवन्तः सर्वसैन्यमधिष्ठाय मध्ये स्थितं युद्धे व्यग्रं सेनापतिं भीष्ममेवाभि समन्ताद्रक्षन्तु परबलनिवृत्त्यर्थमस्माभिस्तस्मिन्नक्षिते सर्वमस्मदीयं रक्षितं स्यादित्यर्थः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
ayaneṣhuat the strategic points
chaalso
sarveṣhuall
yathābhāgam
avasthitāḥsituated
bhīṣhmamto Grandsire Bheeshma
evaonly
abhirakṣhantudefend
bhavantaḥyou
sarveall
eva hieven as
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 1.10
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्। पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्

वह हमारी सेना पाण्डवों पर विजय करने में अपर्याप्त है, असमर्थ है; क्योंकि उसके संरक्षक (उभयपक्षपाती) भीष्म हैं। परन्तु इन पाण्डवों की सेना हमारे पर विजय करने में पर्याप्त है, समर्थ है; क्योंकि इसके संरक्षक (निजसेनापक्षपाती) भीमसेन हैं। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 1.12
तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः। सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्

दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्म ने सिंह के समान गरज कर जोर से शंख बजाया। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 1Shlok 11
Bhagavad Gita · Adhyay 1, Shlok 11
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः। भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि

आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 11 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 1 श्लोक 11 का हिंदी अर्थ: "आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 11?

Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 11 translates to: "Therefore, do all of you, stationed in your respective positions in the several divisions of the army, protect Bhishma alone. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः। भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 1, श्लोक 11 है जो Bhagavad Gita के Arjuna Vishada Yoga में संकलित है। आप सब-के-सब लोग सभी मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "ayaneṣhu cha sarveṣhu yathā-bhāgamavasthitāḥ" mean in English?

"ayaneṣhu cha sarveṣhu yathā-bhāgamavasthitāḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 1 Verse 11. Therefore, do all of you, stationed in your respective positions in the several divisions of the army, protect Bhishma alone. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.