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Sudarshana Chakra
Adhyay 8, Shlok 2
अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन। प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः

अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं? — VaniSagar

Global Translations

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SindhiIND

اي مدھو جي ناس ڪندڙ، ھن جسم ۾ ڪير ۽ ڪيئن آڌياج آھي؟ ۽ ڪيئن، موت جي وقت، توهان کي خود سنڀاليندڙ جي طرفان سڃاتو وڃي ٿو؟

MarathiIND

हे मधूच्या संहारका, या शरीरात अधयज्ञ कोण आणि कसा आहे? आणि मृत्यूच्या वेळी, आत्मसंयमाने तुम्हाला कसे ओळखायचे?

GujaratiIND

હે મધુના સંહારક, આ શરીરમાં કોણ અને કેવી રીતે અધિયજ્ઞ છે? અને મૃત્યુ સમયે, તમે સ્વ-નિયંત્રિત દ્વારા કેવી રીતે ઓળખાય છે?

PunjabiIND

ਹੇ ਮਧੁ ਦੇ ਨਾਸ ਕਰਨ ਵਾਲੇ, ਇਸ ਸਰੀਰ ਵਿੱਚ ਅਧਿਆਇਜਨ ਕੌਣ ਅਤੇ ਕਿਵੇਂ ਹੈ? ਅਤੇ ਮੌਤ ਦੇ ਸਮੇਂ, ਤੁਸੀਂ ਸੰਜਮ ਦੁਆਰਾ ਕਿਵੇਂ ਜਾਣੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹੋ?

TamilIND

மதுவை அழிப்பவனே, இந்த உடலில் ஆதியஞன் யார், எப்படி இருக்கிறார்? மேலும், மரணத்தின் போது, ​​சுயக்கட்டுப்பாடு உள்ளவர்களால் நீங்கள் எப்படி அறியப்படுவீர்கள்?

KannadaIND

ಮಧುವಿನಾಶಕನೇ, ಈ ದೇಹದಲ್ಲಿ ಅಧಿಯಜ್ಞ ಯಾರು ಮತ್ತು ಹೇಗೆ? ಮತ್ತು ಸಾವಿನ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ಸ್ವಯಂ ನಿಯಂತ್ರಿತರಿಂದ ನೀವು ಹೇಗೆ ತಿಳಿಯಲ್ಪಡುತ್ತೀರಿ?

NepaliIND

हे मधुको संहारक, यस शरीरमा यहाँ कसले र कसरी अधियज्ञ छ? र, मृत्युको समयमा, तपाईं कसरी आत्मसंयमद्वारा चिन्नु हुन्छ?

TeluguIND

ఓ మధు విధ్వంసకుడా, ఈ శరీరంలో ఆదియజ్ఞ ఎవరు మరియు ఎలా ఉన్నారు? మరియు మరణ సమయంలో, మీరు స్వీయ నియంత్రణలో ఉన్నవారిచే ఎలా గుర్తించబడతారు?

BengaliIND

এই দেহে কে এবং কিভাবে অধিযজ্ঞ, হে মধুর বিনাশকারী? এবং কিভাবে, মৃত্যুর সময়, আপনি আত্মনিয়ন্ত্রিত দ্বারা পরিচিত হবে?

MalayalamIND

ഹേ മധുവിനെ നശിപ്പിക്കുന്നവനേ, ആരാണ്, എങ്ങനെ ഈ ശരീരത്തിൽ ആദിയജ്ഞൻ? മരണസമയത്ത്, ആത്മനിയന്ത്രണമുള്ളവർ നിങ്ങളെ എങ്ങനെ അറിയും?

AssameseIND

এই শৰীৰত ইয়াত অধ্যাজ্ঞা কোন আৰু কেনেকৈ, হে মধুৰ ধ্বংসকাৰী? আৰু মৃত্যুৰ সময়ত আপোনাক কেনেকৈ আত্মনিয়ন্ত্ৰিত লোকে চিনি পাব?

MaithiliIND

एहि देह मे के आ कोना छथि अधियज्ञ हे मधुक नाशक। आ मृत्युक समय अहाँ केँ कोना आत्मसंयमी लोक द्वारा चिन्हल जाय?

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'पुरुषोत्तम किं तद्ब्रह्म'--हे पुरुषोत्तम वह ब्रह्म क्या है अर्थात् ब्रह्म शब्दसे क्या समझना चाहिये

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नम् इत्यादि वचनोंसे ( पूर्वाध्यायमें ) भगवान्ने अर्जुनके लिये प्रश्नके बीजोंका उपदेश किया था अतः उन प्रश्नोंको पूछनेके लिये अर्जुन बोला --, हे पुरुषोत्तम वह ब्रह्मतत्त्व क्या है अध्यात्म क्या है कर्म क्या है अधिभूत किसको कहते हैं अधिदैव किसको कहते हैं हे मधुसूदन इस देहमें अधियज्ञ कौन है और कैसे है तथा संयतचित्तवाले योगियोंद्वारा आप मरणकालमें किस प्रकार जाने जा सकते हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

साधियज्ञं चेत्यत्राधियज्ञशब्देन यज्ञमधिकृतो विज्ञानात्मा वा परदेवता वेति प्रश्नान्तरं प्रकरोति -- अधियज्ञ इति। स च कथं केन प्रकारेण ब्रह्मत्वेन चिन्तनीयः किं तादात्म्येन किं वात्यन्ताभेदेनेत्याह -- कथमिति। सर्वथापि स किमस्मिन्देहे वर्तते ततो बहिर्वा देहे चेत्स कोऽत्र बुद्ध्यादिस्तद्व्यतिरिक्तो वेति जिज्ञासया ब्रूते -- कोऽत्रेति। अधियज्ञः कथं कोऽत्रेति न प्रश्नभेदकः[दः] कथमिति तु प्रकारभेदविवक्षयेति द्रष्टव्यम्। यत्तु समाहितचित्तानामुक्तं यत्प्रयाणकालेऽपि भगवदनुसंधानं सिध्यतीति तदयुक्तमुत्क्रमणदशायां करणग्रामवैयग्र्याच्चित्तसमाधानानुपपत्तिरित्यभिप्रेत्याह -- प्रयाणेति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

अधियज्ञः कथं कोऽत्र यज्ञमधिगतो विज्ञानात्मा परमात्मा वा स च कथं केन प्रकारेण चिन्तनीयः किं तादात्म्येनोताभेदेन। सर्वथापि स किमस्मिन्देहे वर्तते उतास्माद्वहिः देहे चेत्स कोऽत्र बहिश्चेत्स किं कुङ्यादिरुत तद्य्धतिरिक्त इति प्रकारादिजिज्ञासयोक्तं कथं कोत्रेऽति। मधुसूदनेति संबोधयन् मधुसूदनस्य तव मत्संशयसूदनमतिसुकरमिति द्योतयति। यत्तूक्तंप्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः इति तत्र पृच्छति -- प्रयाणेति। प्राणोत्क्रमणदशायां करणग्रामवैयग्र्याच्चित्तसमाधानानुपपत्तेर्नियतात्मभिः प्रयाणकाले कथं ज्ञेयोऽसीति भाष्यटीकानुसारी सप्तमप्रश्नार्थः। भाष्यकृद्भिस्तु सुगमत्वान्न प्रदर्शितः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
adhiyajñaḥthe Lord all sacrificial performances
kathamhow
kaḥwho
atrahere
dehein body
asminthis
madhusūdanaShree Krishna, the killer of the demon named Madhu
prayāṇakāle
chaand
kathamhow
jñeyaḥto be known
asiare (you)
niyataātmabhiḥ
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Bhagavad Gita · 8.1
अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम। अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते

अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अंतःकरण वाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं? — VaniSagar

Bhagavad Gita · 8.3
श्री भगवानुवाच अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते। भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः

श्रीभगवान् बोले -- परम अक्षर ब्रह्म है और जीवका अपना जो होनापन है, उसको अध्यात्म कहते हैं। प्राणियों का उद्भव (सत्ता को प्रकट) करनेवाला जो त्याग है उसको कर्म कहा जाता है। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 8Shlok 2
Bhagavad Gita · Adhyay 8, Shlok 2
अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन। प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः

अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं? — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 8 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 8 श्लोक 2 का हिंदी अर्थ: "अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं? — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Aksara-Parabrahman Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 2?

Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 2 translates to: "Who and how is Adhiyajna here in this body, O destroyer of Madhu? And how, at the time of death, are You to be known by the self-controlled? — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन। प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 8, श्लोक 2 है जो Bhagavad Gita के Aksara-Parabrahman Yoga में संकलित है। अर्जुन बोले -- हे पुरुषोत्तम ! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसको कहा गया है? और अधिदैव किसको कहा जाता है? यहाँ अधियज्ञ कौन है और वह इस देहमें कैसे है? हे मधूसूदन ! नियतात्मा (वशीभूत अन्तःकरणवाले) मनुष्यके द्वारा अन्तकालमें आप कैसे जाननेमें आते हैं? — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "adhiyajñaḥ kathaṁ ko ’tra dehe ’smin madhusūdana" mean in English?

"adhiyajñaḥ kathaṁ ko ’tra dehe ’smin madhusūdana" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 8 Verse 2. Who and how is Adhiyajna here in this body, O destroyer of Madhu? And how, at the time of death, are You to be known by the self-controlled? — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.