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Sudarshana Chakra
Adhyay 2, Shlok 12
न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्

किसी कालमें मैं नहीं था और तू नहीं था तथा ये राजालोग नहीं थे, यह बात भी नहीं है; और इसके बाद (भविष्य में) मैं, तू और राजलोग - हम सभी नहीं रहेंगे, यह बात भी नहीं है। — VaniSagar

Global Translations

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GujaratiIND

કે, કોઈપણ સમયે, હું ન હતો, ન તું, કે ન આ માણસોના શાસકો; કે, ખરેખર, આપણે ક્યારેય પછીથી રહેવાનું બંધ કરીશું.

TeluguIND

లేదా, ఏ సమయంలోనైనా, నేను కాదు, నీవు లేదా ఈ మనుష్యుల పాలకులు కాదు; లేదా, నిశ్చయంగా, మనం ఇకమీదట ఎప్పటికీ నిలిచిపోము.

MarathiIND

किंवा, कधीही, मी किंवा तू किंवा हे मनुष्यांचे राज्यकर्ते नव्हते; किंवा, खरंच, आम्ही यापुढे कधीही थांबणार नाही.

KannadaIND

ಅಥವಾ, ಯಾವುದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ನಾನು ಅಲ್ಲ, ಅಥವಾ ನೀವು ಅಥವಾ ಈ ಮನುಷ್ಯರ ಆಡಳಿತಗಾರರು; ಅಥವಾ, ನಿಜವಾಗಿ, ನಾವು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ಇರುವುದನ್ನು ನಿಲ್ಲಿಸುವುದಿಲ್ಲ.

NepaliIND

न त, कुनै पनि समयमा, म, न त तपाईं, न त यी मानिसहरूका शासकहरू थिए। न त, साँच्चै, हामी कहिल्यै पछि हुन बन्द हुनेछ।

SindhiIND

نه، ڪنهن به وقت، مان نه هو، نه تون، نه اهي انسانن جا حڪمران؛ ۽ نڪي، بيشڪ، اسين آخرت ۾ ڪڏھن به نه رھنداسين.

PunjabiIND

ਨਾ ਹੀ, ਕਿਸੇ ਸਮੇਂ, ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਨਾ ਤੁਸੀਂ, ਨਾ ਹੀ ਇਹ ਮਨੁੱਖਾਂ ਦੇ ਹਾਕਮ ਸਨ; ਨਾ ਹੀ, ਸੱਚਮੁੱਚ, ਅਸੀਂ ਕਦੇ ਵੀ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਨਹੀਂ ਰੁਕਾਂਗੇ।

BengaliIND

বা, কোন সময়ে, আমি, না আপনি, না এই মানুষের শাসক; অথবা, সত্যই, আমরা কি পরকাল থেকে বিরত হব না।

MalayalamIND

ഒരു കാലത്തും ഞാനോ നീയോ മനുഷ്യരുടെ ഈ ഭരണാധികാരികളോ ആയിരുന്നില്ല. അല്ലെങ്കിൽ, തീർച്ചയായും, നാം ഇനി ഒരിക്കലും അവസാനിക്കുകയുമില്ല.

TamilIND

அல்லது, எந்த நேரத்திலும், நானோ, நீயோ, இந்த மனிதர்களின் ஆட்சியாளர்களோ அல்ல; அல்லது, நிச்சயமாக, நாம் இனிமேல் இருக்க மாட்டோம்.

ManipuriIND

ꯅꯠꯔꯒꯥ, ꯃꯇꯝ ꯑꯃꯠꯇꯗꯥ, ꯑꯩꯍꯥꯛ, ꯅꯍꯥꯛ, ꯅꯠꯔꯒꯥ ꯃꯤꯑꯣꯏꯕꯒꯤ ꯁꯥꯁꯟ ꯇꯧꯔꯤꯕꯁꯤꯡ ꯑꯁꯤ ꯑꯣꯏꯈꯤꯗꯦ; ꯅꯠꯔꯒꯥ, ꯇꯁꯦꯡꯅꯃꯛ, ꯑꯩꯈꯣꯌꯅꯥ ꯀꯩꯗꯧꯉꯩꯗꯁꯨ ꯇꯨꯡꯗꯥ ꯂꯩꯕꯥ ꯂꯦꯄꯂꯣꯏ꯫

BhojpuriIND

ना, कवनो समय, हम ना रहनी, ना तू, ना ई आदमी के शासक; ना ही, साँचहू, हमनी के परलोक में कबो ना रहब जा।

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या-- [मात्र संसारमें दो ही वस्तुएँ हैं--शरीरी (सत्) और शरीर (असत्)। ये दोनों ही अशोच्य हैं अर्थात् शोक न शरीरी-(शरीरमें रहनेवाले-) को लेकर हो सकता है और न शरीरको लेकर ही हो सकता है। कारण कि शरीरीका कभी अभाव होता ही नहीं और शरीर कभी रह सकता ही नहीं। इन दोनोंके लिये पूर्वश्लोकमें जो 'अशोच्यान्' पद आया है, उसकी व्याख्या अब शरीरीकी नित्यता और शरीरकी अनित्यताके रूपमें करते हैं।] 'न त्वेहाहं जातु ৷৷. जनाधिपाः'-- लोगोंकी दृष्टिसे मैंने जबतक अवतार नहीं लिया था, तबतक मैं इस रूपसे (कृष्णरूपसे) सबके सामने प्रकट नहीं था और तेरा जबतक जन्म नहीं हुआ था, तबतक तू भी इस रूपसे (अर्जुनरूपसे) सबके सामने प्रकट नहीं था तथा इन राजाओंका भी जबतक जन्म नहीं हुआ था, तबतक ये भी इस रूपसे (राजारूपसे) सबके सामने प्रकट नहीं थे। परन्तु मैं, तू और ये राजालोग इस रूपसे प्रकट न होनेपर भी पहले नहीं थे--ऐसी बात नहीं है। यहाँ 'मैं, तू और ये राजालोग पहले थे--ऐसा कहनेसे ही काम चल सकता था, पर ऐसा न कहकर 'मैं, तू और ये राजालोग पहले नहीं थे, ऐसी बात नहीं' ऐसा कहा गया है। इसका कारण यह है कि 'पहले नहीं थे' ऐसी बात नहीं' ऐसा कहनेसे 'पहले हम सब जरूर थे'--यह बात दृढ़ हो जाती है। तात्पर्य यह हुआ कि नित्य-तत्त्व सदा ही नित्य है। इसका कभी अभाव था ही नहीं। 'जातु' कहनेका तात्पर्य है कि भूत, भविष्य और वर्तमान-कालमें तथा किसी भी देश, परिस्थिति, अवस्था, घटना, वस्तु आदिमें नित्यतत्त्वका किञ्चिन्मात्र भी अभाव नहीं हो सकता।

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Sri Harikrishnadas Goenka

वे भीष्मादि अशोच्य क्यों है इसलिये कि वे नित्य हैं। नित्य कैसे हैं किसी कालमें मैं नहीं था ऐसा नहीं किंतु अवश्य था अर्थात् भूतपूर्व शरीरोंकी उत्पत्ति और विनाश होते हुए भी मैं सदा ही था। वैसे ही तू नहीं था सो नहीं किंतु अवश्य था ये राजागण नहीं थे सो नहीं किंतु ये भी अवश्य थे। इसके बाद अर्थात् इन शरीरोंका नाश होनेके बाद भी हम सब नहीं रहेंगे सो नहीं किन्तु अवश्य रहेंगे। अभिप्राय यह है कि तीनों कालोंमें ही आत्मरूपसे सब नित्य हैं। यहाँ बहुवचनका प्रयोग देहभेदके विचारसे किया गया है आत्मभेदके अभिप्रायसे नहीं।

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Sri Anandgiri

नित्यत्वमशोच्यत्वे कारणमिति सूचितं विवेचयितुं प्रश्नपूर्वकं प्रतिजानीते कुत इत्यादिना। नित्यत्वमसिद्धं प्रमाणाभावादिति चोदयति कथमिति। आत्मा न जायते प्रागभावशून्यत्वान्नरविषाणवदिति परिहरति नत्वेवेति। किंचात्मा नित्यो भावत्वे सत्यजातत्वाद्व्यतिरेके घटवदित्यनुमानान्तरमाह नचैवेति। यत्तु कैश्चिदात्मयाथात्म्यं जिज्ञासितं भगवानुपदिशति नत्वित्यादिना श्लोकचतुष्टयेनेत्यादिष्टं तदसत् विशेषवचने हेत्वभावात् सर्वत्रैवात्मयाथात्म्यप्रतिपादनाविशेषादित्याशयेनपदच्छेदः पदार्थोक्तिर्विग्रहो वाक्ययोजना इति त्रितयमपि व्याख्यानाङ्गं प्रतिपादयति नत्वित्यादिना। नन्वात्मनो देहोत्पत्तिविनाशयोरुत्पत्तिर्विनाशप्रसिद्धेरुक्तमनुमानद्वयं प्रसिद्धिविरुद्धतया कालात्ययापदिष्टमिष्टमिति नेत्याह अतीतेष्विति। चराचरव्यपाश्रयस्तु स्यात् इति न्यायेनात्मनो जन्मविनाशप्रसिद्धेरौपाधिकजन्माविनाशाविषयत्वान्निरुपाधिकस्य तस्य जन्मादिराहित्यमिति भावः। यद्यपि तवेश्वरस्य जन्मराहित्यं तथापि कथं ममेत्याशङ्क्याह तथेति। तथापि भीष्मादीनां कथं जन्माभावस्तत्राह तथाच नेम इति। द्वितीयमनुमानं प्रपञ्चयन्नुत्तरार्धं व्याचष्टे तथेत्यादिना। ननु देहोत्पत्तिविनाशयोरात्मनो जन्मनाशाभावेऽपि महास्वर्गमहाप्रलययोस्तस्याग्निविस्फुलिङ्गदृष्टान्तश्रुत्या जन्मविनाशावेष्टव्यावित्याशङ्क्यनात्मा श्रुतेः इति न्यायेन परिहरति त्रिष्वपीति। यावद्विकारं तु विभागो लोकवत् इति न्यायेन भिन्नत्वाद्विकारित्वमात्मनामनुमीयते भिन्नत्वं च बहुवचनप्रयोगप्रमितमित्याशङ्क्याह देहेति।

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Sri Dhanpati

तेषां नित्यत्वाच्छोकानर्हतामाह नेति। जातु कदाचिदहं नासमिति न किंत्वासमेव। तथा त्वं नासीरिति न अपित्वासीरेव। तथेमे जनाधिपाः नासन्निति न किंत्वासन्नेव। तथा नच भविष्याम इति न किंतु भविष्याम एव। अतोऽस्माद्देहविनाशादुत्तरकालेऽपि त्रिष्वपि कालेषु नित्यः। आत्मस्वरुपेणेत्यर्थः। स्वस्य मध्ये गणनमात्मैक्याभिप्रायं बुहवचनं तु जीवमेदाभिप्रायेण देहभेदानुवृत्त्या तत्तद्देहाभिमानिनां जीवानामपि भेदान्नतु परमार्थत आत्मभेदाभिप्रायेणेति। तथाच शारीरकभाष्यंभेदस्तुपाधिनिमित्तकः मिथ्याज्ञानकल्पितो न पारमार्थिकः इति बोध्यम्।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
nanever
tuhowever
evacertainly
ahamI
jātuat any time
nanor
āsamexist
nanor
tvamyou
nanor
imethese
janaadhipāḥ
nanever
chaalso
evaindeed
na bhaviṣhyāmaḥshall not exist
sarve vayamall of us
ataḥfrom now
paramafter
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 2.11
श्री भगवानुवाच अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे। गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः

श्रीभगवान् बोले - तुमने शोक न करनेयोग्यका शोक किया है और पण्डिताईकी बातें कह रहे हो; परन्तु जिनके प्राण चले गये हैं, उनके लिये और जिनके प्राण नहीं गये हैं, उनके लिये पण्डितलोग शोक नहीं करते। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 2.13
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा। तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति

देहधारीके इस मनुष्यशरीरमें जैसे बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, ऐसे ही देहान्तरकी प्राप्ति होती है। उस विषयमें धीर मनुष्य मोहित नहीं होता। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 2Shlok 12
Bhagavad Gita · Adhyay 2, Shlok 12
न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्

किसी कालमें मैं नहीं था और तू नहीं था तथा ये राजालोग नहीं थे, यह बात भी नहीं है; और इसके बाद (भविष्य में) मैं, तू और राजलोग - हम सभी नहीं रहेंगे, यह बात भी नहीं है। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 12 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 2 श्लोक 12 का हिंदी अर्थ: "किसी कालमें मैं नहीं था और तू नहीं था तथा ये राजालोग नहीं थे, यह बात भी नहीं है; और इसके बाद (भविष्य में) मैं, तू और राजलोग - हम सभी नहीं रहेंगे, यह बात भी नहीं है। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Sankhya Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 12?

Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 12 translates to: "Nor, at any time, was I not, nor thou, nor these rulers of men; nor, verily, shall we ever cease to be hereafter. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः। न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 2, श्लोक 12 है जो Bhagavad Gita के Sankhya Yoga में संकलित है। किसी कालमें मैं नहीं था और तू नहीं था तथा ये राजालोग नहीं थे, यह बात भी नहीं है; और इसके बाद (भविष्य में) मैं, तू और राजलोग - हम सभी नहीं रहेंगे, यह बात भी नहीं है। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "na tvevāhaṁ jātu nāsaṁ na tvaṁ neme janādhipāḥ" mean in English?

"na tvevāhaṁ jātu nāsaṁ na tvaṁ neme janādhipāḥ" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 12. Nor, at any time, was I not, nor thou, nor these rulers of men; nor, verily, shall we ever cease to be hereafter. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.