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Sudarshana Chakra
Adhyay 18, Shlok 63
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु

यह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TamilIND

எனவே, இரகசியத்தை விட ஞானம் மிக இரகசியமானது என்னால் உங்களுக்கு அறிவிக்கப்பட்டது. அதை முழுமையாகப் பிரதிபலிக்கவும், பின்னர் நீங்கள் விரும்பியபடி செயல்படவும்.

MarathiIND

अशा प्रकारे, गुप्ततेपेक्षा ज्ञान अधिक गुप्त आहे हे मी तुम्हाला घोषित केले आहे. त्यावर पूर्ण चिंतन करा, मग तुमच्या इच्छेनुसार वागा.

NepaliIND

तसर्थ, गोप्यताभन्दा पनि धेरै गोप्य ज्ञान तिमीलाई मद्वारा घोषणा गरिएको छ। यसलाई पूर्ण रूपमा प्रतिबिम्बित गर्नुहोस्, त्यसपछि तपाईंको इच्छा अनुसार कार्य गर्नुहोस्।

GujaratiIND

આમ, ગુપ્તતા કરતાં જ્ઞાન વધુ ગુપ્ત મારા દ્વારા તમને જાહેર કરવામાં આવ્યું છે. તેના પર સંપૂર્ણ રીતે ચિંતન કરો, પછી તમારી ઈચ્છા પ્રમાણે કાર્ય કરો.

SindhiIND

اهڙيءَ طرح، عقل کان وڌيڪ راز راز کان به وڌيڪ راز خود مون توهان کي ٻڌايو آهي. ان تي مڪمل غور ڪريو، پوءِ جيئن توھان چاھيو ڪم ڪريو.

AssameseIND

এইদৰে গোপনীয়তাতকৈও অধিক গোপনীয় প্ৰজ্ঞা মোৰ দ্বাৰা আপোনালোকৰ আগত ঘোষণা কৰা হৈছে। ইয়াৰ ওপৰত সম্পূৰ্ণৰূপে চিন্তা কৰক, তাৰ পিছত নিজৰ ইচ্ছামতে কাম কৰক।

MalayalamIND

അങ്ങനെ, രഹസ്യത്തേക്കാൾ രഹസ്യമായ ജ്ഞാനം ഞാൻ നിങ്ങളോട് പ്രഖ്യാപിച്ചിരിക്കുന്നു. അതിനെ പൂർണ്ണമായി പ്രതിഫലിപ്പിക്കുക, തുടർന്ന് നിങ്ങൾ ആഗ്രഹിക്കുന്നതുപോലെ പ്രവർത്തിക്കുക.

PunjabiIND

ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ, ਭੇਤ ਨਾਲੋਂ ਵਧੇਰੇ ਭੇਤ ਬੁੱਧੀ ਮੇਰੇ ਦੁਆਰਾ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਘੋਸ਼ਿਤ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ. ਇਸ 'ਤੇ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਿਚਾਰ ਕਰੋ, ਫਿਰ ਆਪਣੀ ਮਰਜ਼ੀ ਅਨੁਸਾਰ ਕੰਮ ਕਰੋ।

KannadaIND

ಹೀಗಾಗಿ, ರಹಸ್ಯಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ರಹಸ್ಯವಾದ ಬುದ್ಧಿವಂತಿಕೆಯು ನನ್ನಿಂದ ನಿಮಗೆ ಘೋಷಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿದೆ. ಅದನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸಿ, ನಂತರ ನೀವು ಬಯಸಿದಂತೆ ವರ್ತಿಸಿ.

BengaliIND

এইভাবে, গোপনীয়তার চেয়ে প্রজ্ঞা আরও গোপনীয়তা নিজেই আমার দ্বারা আপনার কাছে ঘোষণা করা হয়েছে। এটি সম্পূর্ণরূপে প্রতিফলিত করুন, তারপর আপনার ইচ্ছা মত কাজ করুন.

TeluguIND

ఆ విధంగా, గోప్యత కంటే జ్ఞానమే ఎక్కువ రహస్యం నా ద్వారా మీకు తెలియజేయబడింది. దాన్ని పూర్తిగా ప్రతిబింబించండి, ఆపై మీరు కోరుకున్నట్లు వ్యవహరించండి.

KonkaniIND

अशे तरेन गुप्तताये परस चड गुपीत बुद्धी तुमकां म्हजे कडल्यान जाहीर केल्या. ताचेर पुरायपणान चिंतन करात, मागीर तुमकां जाय तशें वागचें.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या -- इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया -- पूर्वश्लोकमें सर्वव्यापक अन्तर्यामी परमात्माकी जो शरणागति बतायी गयी है? उसीका लक्ष्य यहाँ इति पदसे कराया गया है। भगवान् कहते हैं कि यह गुह्यसे भी गुह्यतर शरणागतिरूप ज्ञान मैंने तेरे लिये कह दिया है। कर्मयोग गुह्य है और अन्तर्यामी निराकार परमात्माकी शरणागतिगुह्यतर है ।विमृश्यैतदशेषेण -- गुह्यसेगुह्यतर शरणागतिरूप ज्ञान बताकर भगवान् अर्जुनसे कहते हैं कि मैंने पहले जो भक्तिकी बातें कही हैं? उनपर तुम अच्छी तरहसे विचार कर लेना। भगवान्ने इसी अध्यायके सत्तावनवेंअट्ठावनवें श्लोकोंमें अपनी भक्ति(शरणागति) की जो बातें कही हैं? उन्हें एतत् पदसे लेना चाहिये। गीतामें जहाँजहाँ भक्तिकी बातें आयी हैं? उन्हें अशेषेण पदसे लेना चाहिये ।विमृश्यैतदशेषेण कहनेमें भगवान्की अत्यधिक कृपालुताकी एक गुढ़ाभिसन्धि है कि कहीं अर्जुन मेरेसे विमुख न हो जाय? इसलिये यदि यह मेरी कही हुई बातोंकी तरफ विशेषतासे खयाल करेगा तो असली बात अवश्य ही इसकी समझमें आ जायगी और फिर यह मेरेसे विमुख नहीं होगा।यथेच्छसि तथा कुरु -- पहले कही सब बातोंपर पूरापूरा विचार करके फिर तेरी जैसी मरजी आये? वैसा कर। तू जैसा करना चाहता है? वैसा कर -- ऐसा कहनेमें भी भगवान्की आत्मीयता? कृपालुता और हितैषिता ही प्रत्यक्ष दीख रही है।पहले वक्ष्याम्यशेषतः (7। 2)? इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे (9। 1) वक्ष्यामि हितकाम्यया (10। 1) आदि श्लोकोंमें भगवान् अर्जुनके हितकी बात कहते आये हैं? पर इन वाक्योंमें भगवान्की अर्जुनपर सामान्य कृपा है।न श्रोष्यति विनङ्क्ष्यसि (18। 58) -- इस श्लोकमें अर्जुनको धमकानेमें भगवान्की विशेष कृपा और अपनेपनका भाव टपकता है।यहाँ यथेच्छसि तथा कुरु कहकर भगवान् जो अपनेपनका त्याग कर रहे हैं? इसमें तो भगवान्कीअध्यधिक कृपा और आत्मीयता भरी हुई है। कारण कि भक्त भगवान्का धमकाया जाना तो सह सकता है? पर भगवान्का त्याग नहीं सह सकता। इसलिये न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि आदि कहनेपर भी अर्जुनपर इतना असर नहीं पड़ा जितना यथेच्छसि तथा कुरु कहनेपर पड़ा। इसे सुनकर अर्जुन घबरा गये कि भगवान् तो मेरा त्याग कर रहे हैं क्योंकि मैंने यह बड़ी भारी गलती की कि भगवान्के द्वारा प्यारसे समझाने? अपनेपनसे धमकाने और अन्तर्यामीकी शरणागतिकी बात कहनेपर भी मैं कुछ बोला नहीं? जिससे भगवान्कोजैसी मरजी आये? वैसा कर -- यह कहना पड़ा। अब तो मैं कुछ भी कहनेके लायक नहीं हूँ ऐसा सोचकर अर्जुन बड़े दुःखी हो जाते हैं? तब भगवान् अर्जुनके बिना पूछे ही सर्वगुह्यतम वचनोंको कहते हैं? जिसका वर्णन आगेके श्लोकमें है। सम्बन्ध -- पूर्वश्लोकमें भगवान् विमृश्यैतदेषेण पदसे अर्जुनको कहा कि मेरे इस पूरे उपदेशका सार निकाल लेना। परन्तु भगवान्के सम्पूर्ण उपदेशका सार निकाल लेना अर्जुनके वशकी बात नहीं थी क्योंकि अपने उपदेशका सार निकालना जितना वक्ता जानता है? उतना श्रोता नहीं जानता दूसरी बात? जैसी मरजी आये? वैसा कर -- इस प्रकार भगवान्के मुखसे अपने त्यागकी बात सुनकर अर्जुन बहुत डर गये? इसलिये आगेके दो श्लोकोंमें भगवान् अपने प्रिय सखा अर्जुनको आश्वासन देते हैं।

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Sri Harikrishnadas Goenka

मुझ सर्वज्ञ ईश्वरने तुझसे यह गुह्यसे भी गुह्य अत्यन्त गोपनीय रहस्ययुक्त ज्ञान कहा है। इस उपर्युक्त शास्त्रको? अर्थात् ऊपर कहे हुए समस्त अर्थको पूर्णरूपसे विचारकरइसके विषयमें भलीप्रकार आलोचना करके? तेरी जैसी इच्छा हो वैसे ही कर।

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Sri Anandgiri

शास्त्रमुपसंहर्तुमिच्छन्नाह -- इति ते ज्ञानमिति। ज्ञानं करणव्युत्पत्त्या गीताशास्त्रम्? यथेच्छसि तथा कुरु ज्ञानं कर्म वा यदिष्टं तदनुतिष्ठेत्यर्थः।

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Sri Dhanpati

शास्त्रमुपसंहर्तुमिच्छन्नाह -- इतीति। इत्येतत्ते तुभ्यं ज्ञायतेनेनेति ज्ञानं गीताशास्त्रं गुह्याद्गोप्याद्हुह्यतरं अतिशयेन गोप्यं रहस्यं मया सर्वज्ञेनाप्ततमेन शास्त्रयोनिना आख्यातं कथितम्। एतद्यथोक्तशास्त्रमशेषेण समस्तं विमृश्य विमर्शनमालोचनं कृत्वा यथेच्छसि तथा कुरु नत्वेतत्सा कत्येनाविमृश्यैवेत्यर्थः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
itithus
teto you
jñānamknowledge
ākhyātamexplained
guhyātthan secret knowledge
guhyataram
mayāby me
vimṛiśhyapondering
etaton this
aśheṣheṇacompletely
yathāas
ichchhasiyou wish
tathāso
kurudo
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 18.62
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! तू सर्वभावसे उस ईश्वरकी ही शरणमें चला जा। उसकी कृपासे तू परमशान्ति-(संसारसे सर्वथा उपरति-) को और अविनाशी परमपदको प्राप्त हो जायगा। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 18.64
सर्वगुह्यतमं भूयः श्रृणु मे परमं वचः।इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्

सबसे अत्यन्त गोपनीय वचन तू फिर मेरेसे सुन। तू मेरा अत्यन्त प्रिय है, इसलिये मैं तेरे हितकी बात कहूँगा। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 18Shlok 63
Bhagavad Gita · Adhyay 18, Shlok 63
इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु

यह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 63 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 18 श्लोक 63 का हिंदी अर्थ: "यह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 63?

Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 63 translates to: "Thus, wisdom more secret than secrecy itself has been declared to you by me. Reflect on it fully, then act as you wish. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 18, श्लोक 63 है जो Bhagavad Gita के Moksha-Opadesa Yoga में संकलित है। यह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā" mean in English?

"iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 18 Verse 63. Thus, wisdom more secret than secrecy itself has been declared to you by me. Reflect on it fully, then act as you wish. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.