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Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 40
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व। अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः

हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

MarathiIND

तुला पुढे आणि मागे नमस्कार! तुला सर्व बाजूंनी नमस्कार! हे सर्व! तू, सामर्थ्य आणि पराक्रमाने असीम, सर्वांमध्ये व्याप्त आहेस; म्हणून तुम्ही सर्व आहात.

BhojpuriIND

सामने आ पीछे रउरा के नमस्कार! हर तरफ से रउरा के नमन! हे सब लोग! तू, शक्ति आ पराक्रम में अनंत, सब में व्याप्त बाड़ू; एही से रउआ सभे हईं।

KonkaniIND

तुमकां मुखार आनी फाटल्यान नमस्कार! दरेक वटेन तुका नमस्कार! हे सगळे! तूं, शक्ती आनी पराक्रमान अनंत, सगळ्यांक व्याप्त; देखून तुमी सगळे आसात.

DogriIND

सामने ते पिच्छे तुहानू नमन! हर पासे तुहानू नमन ! ओ सारे ! तुस, शक्ति ते पराक्रम च अनंत, सारें च व्याप्त ओ; इस आस् ते तुस सारे ओ।

ManipuriIND

ꯃꯃꯥꯡ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯃꯇꯨꯡꯗꯥ ꯑꯗꯣꯃꯗꯥ ꯁꯦꯂꯨꯇꯦꯁꯟ! ꯃꯥꯌꯀꯩ ꯈꯨꯗꯤꯡꯗꯥ ꯑꯗꯣꯃꯗꯥ ꯁꯦꯂꯨꯇꯦꯁꯟ! ꯑꯣ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛ! ꯁꯛꯇꯤ ꯑꯃꯁꯨꯡ ꯊꯧꯅꯥꯗꯥ ꯂꯣꯏꯕꯥ ꯅꯥꯏꯗꯕꯥ ꯅꯍꯥꯛ, ꯄꯨꯝꯅꯃꯀꯄꯨ ꯁꯣꯀꯍꯜꯂꯤ; ꯃꯔꯝ ꯑꯗꯨꯅꯥ ꯅꯈꯣꯌ ꯄꯨꯝꯅꯃꯛꯅꯤ꯫

MaithiliIND

आगू-पाछू अहाँ के प्रणाम! हर तरफ अहाँ के प्रणाम! हे सब ! अहाँ, शक्ति आ पराक्रम मे अनंत, सब मे व्याप्त छी; तेँ अहाँ सभ छी।

BengaliIND

আপনাকে সামনে এবং পিছনে নমস্কার! সব দিক থেকে আপনাকে অভিবাদন! হে সকল! তুমি, অসীম শক্তি ও পরাক্রমে, সর্বত্র পরিব্যাপ্ত; তাই আপনি সব.

TeluguIND

ముందు మరియు వెనుక నీకు నమస్కారములు! ప్రతి వైపు నీకు వందనాలు! ఓ ఆల్! మీరు, అనంతమైన శక్తి మరియు పరాక్రమం, అన్నింటిలో వ్యాపించి ఉన్నారు; కావున మీరందరూ.

KannadaIND

ಮುಂದೆ ಮತ್ತು ಹಿಂದೆ ನಿನಗೆ ವಂದನೆಗಳು! ಎಲ್ಲಾ ಕಡೆಯಿಂದ ನಿಮಗೆ ವಂದನೆಗಳು! ಓ ಎಲ್ಲಾ! ನೀವು, ಶಕ್ತಿ ಮತ್ತು ಪರಾಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಅನಂತ, ಎಲ್ಲಾ ವ್ಯಾಪಿಸಿರುವ; ಆದ್ದರಿಂದ ನೀವೆಲ್ಲರೂ.

TamilIND

முன்னும் பின்னும் உனக்கு வணக்கம்! ஒவ்வொரு பக்கத்திலும் உங்களுக்கு வணக்கம்! ஓ அனைத்து! எல்லையற்ற சக்தியும் பராக்கிரமமும் நிறைந்த நீ, எல்லாவற்றிலும் வியாபித்திருக்கிறாய்; எனவே நீங்கள் அனைவரும்.

MalayalamIND

മുന്നിലും പിന്നിലും നിങ്ങൾക്ക് അഭിവാദ്യങ്ങൾ! എല്ലാ ഭാഗത്തുനിന്നും നിങ്ങൾക്ക് അഭിവാദ്യങ്ങൾ! ഓ എല്ലാവരും! അനന്തമായ ശക്തിയിലും പരാക്രമത്തിലും നീ എല്ലാവരെയും വ്യാപിച്ചുകിടക്കുന്നു; ആകയാൽ നിങ്ങൾ എല്ലാവരും ആകുന്നു.

GujaratiIND

તમને આગળ અને પાછળ નમસ્કાર! તમને દરેક બાજુથી વંદન! ઓ બધા! તમે, શક્તિ અને પરાક્રમમાં અનંત, બધામાં વ્યાપેલા છો; તેથી તમે બધા છો.

Sacred Commentaries

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Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या--'नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व'--अर्जुन भयभीत हैं। मैं क्या बोलूँ-- यह उनकी समझमें नहीं आ रहा है। इसलिये वे आगेसे, पीछेसे सब ओरसे अर्थात् दसों दिशाओंसे केवल नमस्कारहीनमस्कार कर रहे हैं।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

तथा --, आपको आगसे अर्थात् पूर्वदिशामें और पीछेसे भी नमस्कार है। हे सर्वरूप आपको सब ओरसे नमस्कार है अर्थात् सर्वत्र स्थित हुए आपको सब दिशाओंमें नमस्कार है। आप अनन्तवीर्य और अपार पराक्रमवाले हैं। वीर्य सामर्थ्यको कहते हैं और विक्रम पराक्रमको। कोई व्यक्ति सामर्थ्यवान् होकर भी शस्त्रादि चलानेमें पराक्रम नहीं दिखा सकता? अथवा मन्दपराक्रमी होता है। परन्तु आप तो अनन्तवीर्य और अमित पराक्रमसे युक्त हैं। इसलिये आप अनन्तवीर्य और अमितपराक्रमी हैं। आप अपने एक स्वरूपसे सारे जगत्को व्याप्त किये हुए स्थित हैं? इसलिये आप सर्वरूप हैं? अर्थात् आपसे अतिरिक्त कुछ भी नहीं है।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

विधान्तरेण भगवन्तं स्तुत्या नमस्कुर्वन्नभिमुखीकरोति -- तथेति। यस्यां दिशि सवितोदेति सा पूर्वा दिगुच्यते। तस्यां व्यवस्थितं सर्वं त्वमेव तस्मै ते तुभ्यं ननोऽस्त्वित्याह -- नम इति। अथशब्दः समुच्चये। पश्चादपि स्थितं सर्वं त्वमेव तस्मै ते तुभ्यं नमोऽस्त्वित्याह -- अथेति। किं बहुना यावन्त्यो दिशस्तत्र सर्वत्र यद्वर्तते तदशेषं त्वमेव तस्मै तुभ्यं प्रह्वीभावः स्यादित्याह -- नमोऽस्त्विति। फलितं सर्वात्मत्वं सूचयति -- हे सर्वेति। वीर्यविक्रमयोर्न पौनरुक्त्यमित्याह -- वीर्यमित्यादिना। वीर्यवतो विक्रमाव्यभिचारादर्थपौनरुक्त्यमाशङ्क्याह -- वीर्यवानिति। भगवति लोकतो विशेषमाह -- त्वं त्विति। उक्तं सर्वात्मत्वं प्रपञ्चयति -- सर्वमिति। सप्रपञ्चत्वं वारयति -- त्वयेति।

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Sri Dhanpati

पुरस्तात् पूर्वस्यां दिशि तत्तद्रूपेण स्थिताय ते तुभ्यम्। अथ पृष्ठस्ते तुभ्यं नमोस्तु। सर्वत एव सर्वासु दिक्षु स्थिताय। हे सर्व। यद्वा पुरस्तात्कर्मणमादौ पृष्ठस्तेषां समाप्तौ सर्वतः मध्येऽपि ते नमोस्ित्वति। अस्मिन्पक्षे कर्मणामित्यध्याहारदोषः सर्वत इत्यादि संकोचे मानाभावश्च बोध्यः। हे सर्वेत्युक्तं निरुपयति। अनन्तं सामर्थ्य यस्य? अमितः पराक्रमः शस्त्रादिविषये यस्य अनन्तवीर्यश्चासौ अमितविक्रमश्च सः त्वं हेऽनन्तवीर्येति व्यस्तपक्षस्त्वाचार्यैः गौरवात् विशेषाभावाच्च न प्रदर्शितः। सर्वमखिलं विश्वं सम्यगाप्नोषि व्याप्नोषि। यतस्ततोऽसि सर्वः। त्वया विना भूतं न किंचिदस्तीत्यर्थः।

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Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
namaḥoffering salutations
purastātfrom the front
athaand
pṛiṣhṭhataḥthe rear
teto you
namaḥ astuI offer my salutations
teto you
sarvataḥfrom all sides
evaindeed
sarvaall
anantavīrya
amitavikramaḥ
tvamyou
sarvameverything
samāpnoṣhipervade
tataḥthus
asi(you) are
sarvaḥeverything
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Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.39
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च। नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते

आप ही वायु, यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, दक्ष आदि प्रजापति और प्रपितामह (ब्रह्माजीके भी पिता) हैं। आपको हजारों बार नमस्कार हो! नमस्कार हो ! ! और फिर भी आपको बार-बार नमस्कार हो ! नमस्कार हो ! — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.41
सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति। अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि

आपकी महिमा और स्वरूपको न जानते हुए 'मेरे सखा हैं' ऐसा मानकर मैंने प्रमादसे अथवा प्रेमसे हठपूर्वक (बिना सोचे-समझे) 'हे कृष्ण ! हे यादव ! हे सखे !' इस प्रकार जो कुछ कहा है; और हे अच्युत ! हँसी-दिल्लगीमें, चलते-फिरते, सोते-जागते, उठते-बैठते, खाते-पीते समयमें अकेले अथवा उन सखाओं, कुटुम्बियों आदिके सामने मेरे द्वारा आपका जो कुछ तिरस्कार किया गया है; वह सब अप्रमेयस्वरुप आपसे मैं क्षमा माँगता हूँ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 40
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 40
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व। अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः

हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं। — VaniSagar

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 40 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 40 का हिंदी अर्थ: "हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 40?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 40 translates to: "Salutations to You in front and behind! Salutations to You on every side! O All! You, infinite in power and prowess, pervade all; therefore You are all. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व। अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं स" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 40 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। हे सर्व ! आपको आगेसे भी नमस्कार हो ! पीछेसे भी नमस्कार हो ! सब ओरसे ही नमस्कार हो ! हे अनन्तवीर्य ! अमित विक्रमवाले आपने सबको समावृत कर रखा है; अतः सब कुछ आप ही हैं। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "namaḥ purastād atha pṛiṣhṭhatas te" mean in English?

"namaḥ purastād atha pṛiṣhṭhatas te" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 40. Salutations to You in front and behind! Salutations to You on every side! O All! You, infinite in power and prowess, pervade all; therefore You are all. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.