Preserving the eternal wisdom of all sacred traditions — 100% ad-free & open-source.
Sudarshana Chakra
Adhyay 11, Shlok 32
श्री भगवानुवाच कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः

श्रीभगवान् बोले -- मैं सम्पूर्ण लोकोंका क्षय करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ और इस समय मैं इन सब लोगोंका संहार करनेके लिये यहाँ आया हूँ। तुम्हारे प्रतिपक्षमें जो योद्धालोग खड़े हैं, वे सब तुम्हारे युद्ध किये बिना भी नहीं रहेंगे। — VaniSagar

Global Translations

Wisdom transcends borders. Statically translated into 133 world languages.

TamilIND

, "நான் முழுவளர்ச்சியடைந்த, உலகத்தை அழிக்கும் காலம், இப்போது உலகங்களை அழிக்கும் பணியில் ஈடுபட்டுள்ளேன், நீங்கள் இல்லாமல் கூட, எதிரி படைகளில் அணிவகுத்துள்ள வீரர்கள் யாரும் வாழ மாட்டார்கள்.

MarathiIND

, "मी पूर्ण वाढ झालेला, जगाचा नाश करणारा काळ आहे, आता जगाचा नाश करण्यात गुंतलेला आहे. तुझ्याशिवाय, शत्रु सैन्यात सज्ज झालेला एकही योद्धा जिवंत राहणार नाही.

GujaratiIND

, "હું સંપૂર્ણ પુખ્ત, વિશ્વનો નાશ કરનાર સમય છું, હવે વિશ્વનો નાશ કરવામાં વ્યસ્ત છું. તમારા વિના પણ, પ્રતિકૂળ સૈન્યમાં સજ્જ યોદ્ધાઓમાંથી કોઈ જીવશે નહીં.

NepaliIND

, "म पूर्ण विकसित, विश्व विनाशकारी समय हुँ, अहिले संसारको विनाश गर्नमा व्यस्त छु। तिमी बिना, शत्रु सेनामा लडिएका योद्धाहरू मध्ये कोही पनि बाँच्नेछैन।

KannadaIND

, "ನಾನು ಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಬೆಳೆದ, ಜಗತ್ತನ್ನು ನಾಶಮಾಡುವ ಸಮಯ, ಈಗ ಪ್ರಪಂಚಗಳನ್ನು ನಾಶಮಾಡಲು ತೊಡಗಿದೆ. ನೀನಿಲ್ಲದಿದ್ದರೂ ಸಹ, ಶತ್ರು ಸೈನ್ಯಗಳಲ್ಲಿ ಸೇರಿರುವ ಯಾವುದೇ ಯೋಧರು ಬದುಕುವುದಿಲ್ಲ.

PunjabiIND

, "ਮੈਂ ਪੂਰਿਆ ਹੋਇਆ, ਸੰਸਾਰ ਦਾ ਨਾਸ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਸਮਾਂ, ਹੁਣ ਸੰਸਾਰਾਂ ਨੂੰ ਨਾਸ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਲੱਗਾ ਹੋਇਆ ਹਾਂ, ਤੇਰੇ ਬਗੈਰ, ਵੈਰੀ ਫੌਜਾਂ ਵਿੱਚ ਲੜੇ ਹੋਏ ਯੋਧਿਆਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ਰਹੇਗਾ।

TeluguIND

, "నేను పూర్తిగా ఎదిగిన, ప్రపంచాన్ని నాశనం చేసే సమయం, ఇప్పుడు లోకాలను నాశనం చేయడంలో నిమగ్నమై ఉన్నాను. మీరు లేకుండా కూడా శత్రు సేనలలో ఉన్న యోధులు ఎవరూ జీవించరు.

BengaliIND

, "আমি পূর্ণ বয়স্ক, বিশ্ব-নাশকারী সময়, এখন জগৎ ধ্বংস করতে নিযুক্ত। এমনকি তোমাকে ছাড়া, শত্রু সেনাবাহিনীতে সজ্জিত যোদ্ধাদের কেউ বাঁচবে না।

MalayalamIND

, "ഞാൻ പൂർണ്ണവളർച്ചയെത്തിയ, ലോകത്തെ നശിപ്പിക്കുന്ന സമയമാണ്, ഇപ്പോൾ ലോകങ്ങളെ നശിപ്പിക്കുന്നതിൽ ഏർപ്പെട്ടിരിക്കുന്നു. നീയില്ലാതെ പോലും, ശത്രുസൈന്യങ്ങളിൽ അണിനിരന്ന ഒരു യോദ്ധാവും ജീവിക്കുകയില്ല.

SindhiIND

”آءٌ پوري ڄمار، دنيا جي تباهيءَ جو وقت آهيان، هاڻي دنيا کي تباهه ڪرڻ ۾ مصروف آهيان، تنهن کان سواءِ، دشمنن جي لشڪر ۾ تيار ڪيل ويڙهاڪن مان ڪوبه نه رهندو.

BhojpuriIND

, "हम त पूरा बढ़ल, दुनिया के नाश करे वाला समय हईं, अब दुनिया के नाश करे में लागल बानी। तोहरा बिना भी शत्रुतापूर्ण सेना में सज-धज के कवनो योद्धा ना जिंदा रही।"

ManipuriIND

, "ꯑꯩꯗꯤ ꯃꯄꯨꯡ ꯐꯥꯅꯥ ꯆꯥꯎꯔꯕꯥ, ꯃꯥꯂꯦꯝ ꯃꯥꯡꯍꯟ ꯇꯥꯀꯍꯅꯕꯥ ꯃꯇꯃꯅꯤ, ꯍꯧꯖꯤꯛ ꯃꯥꯂꯦꯃꯁꯤꯡꯕꯨ ꯃꯥꯡꯍꯟ ꯇꯥꯀꯍꯅꯕꯒꯤ ꯊꯕꯛꯇꯥ ꯌꯥꯑꯣꯔꯤ꯫ ꯅꯈꯣꯌ ꯌꯥꯑꯣꯗꯅꯥ ꯐꯥꯑꯣꯕꯥ ꯌꯦꯛꯅꯕꯥ ꯂꯥꯟꯃꯤꯁꯤꯡꯗꯥ ꯂꯦꯞꯂꯤꯕꯥ ꯂꯥꯟꯃꯤ ꯑꯃꯠꯇꯥ ꯍꯤꯡꯂꯣꯏ꯫"

Sacred Commentaries

Explore timeless interpretations from the world's most revered scripture scholars.

Scripture Scholar

Swami Ramsukhdas

व्याख्या --[भगवान्का विश्वरूप विचार करनेपर बहुत विलक्षण मालूम देता है; क्योंकि उसको देखनेमें अर्जुनकी दिव्यदृष्टि भी पूरी तरहसे काम नहीं कर रही है और वे विश्वरूपको कठिनतासे देखे जानेयोग्य बताते हैं --'दुर्निरीक्ष्यं समन्तात्' (11। 17)। यहाँ भी वे भगवान्से पूछ बैठते हैं कि उग्र रूपवाले आप कौन हैं? ऐसा मालूम देता है कि अगर अर्जुन भयभीत होकर ऐसा नहीं पूछते तो भगवान् और भी अधिक विलक्षणरूपसे प्रकट होते चले जाते। परन्तु अर्जुनके बीचमें ही पूछनेसे भगवान्ने और आगेका रूप दिखाना बन्द कर दिया और अर्जुनके प्रश्नका उत्तर देने लगे।]

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Harikrishnadas Goenka

श्रीभगवान् बोले -- मैं लोकोंका नाश करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ। मैं जिसलिये बढ़ा हूँ वह सुन? इस समय मैं लोकोंका संहार करनेके लिये प्रवृत्त हुआ हूँ? इससे तेरे बिना भी ( अर्थात् तेरे युद्ध न करनेपर भी ) ये सब भीष्म? द्रोण और कर्ण प्रभृति शूरवीर -- योद्धालोग जिनसे तुझे आशङ्का हो रही है एवं जो प्रतिपक्षियोंकी प्रत्येक सेनामें अलगअलग डटे हुए हैं -- नहीं रहेंगे।,

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Anandgiri

स्वयं यदर्था च स्वप्रवृत्तिः तत्सर्वं भगवानुक्तवानित्याह -- श्रीभगवानिति। कालः क्रियाशक्त्युपहितः परमेश्वरः? अस्मिन्निति वर्तमानयुद्धोपलक्षितत्वं कालस्य विवक्षितम्। लोकसंहारार्थं त्वत्प्रवृत्तावपि नासावर्थवती प्रतिपक्षाणां भीष्मादीनां मत्प्रवृत्तिं विना संहर्तुमशक्यत्वादित्याशङ्क्याह -- ऋतेऽपीति।

VaniSagar Research Vault
Scripture Scholar

Sri Dhanpati

एवं पृष्टः श्रीभगवानुवाच। लोकक्षयं करोतीति लोकक्षयकृत्कालोऽस्मि। प्रवृद्धिं प्राप्तः। इहास्मिन्काले। नन्विहास्मिंल्लोके संग्रामे वेत्याचार्यैः कुतो न व्याख्यातमितिचेत् कालस्यैव प्रकृतत्वात् प्रधानत्वाच्च सर्वनाम्रश्च प्रधानपरामर्शित्वनियमात् लोकान्सहर्तुं प्रवृत्तः। किं सर्वे लोका न भविष्यन्तीत्यत आह। ये सैन्यं प्रत्यवस्थिता भीष्मद्रोणादयस्ते सर्वे न भविष्यन्ति। ननु मां युद्धकर्तारं विना कथं सर्वेषां नाश इतिचेत्तत्राह। ऋतेऽपि त्वां त्वां त्वयि त्यक्तयुद्धव्यापारे सत्यपि मया कालरुपेणावश्यं विनाशनीया इति भावः।

VaniSagar Research Vault

Word-by-Word Lexicon

Original WordContextual Meaning
śhrībhagavān uvācha
kālaḥtime
asmiI am
lokakṣhaya
pravṛiddhaḥmighty
lokānthe worlds
samāhartumannihilation
ihathis world
pravṛittaḥparticipation
ṛitewithout
apieven
tvāmyou
na bhaviṣhyantishall cease to exist
sarveall
yewho
avasthitāḥarrayed
pratianīkeṣhu
yodhāḥthe warriors
आगे पढ़ें

Related Shloks

Bhagavad Gita · 11.31
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद। विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्

मुझे यह बताइये कि उग्ररूपवाले आप कौन हैं? हे देवताओंमें श्रेष्ठ ! आपको नमस्कार हो। आप प्रसन्न होइये। आदिरूप आपको मैं तत्त्वसे जानना चाहता हूँ; क्योंकि मैं आपकी प्रवृत्तिको नहीं जानता। — VaniSagar

Bhagavad Gita · 11.33
तस्मात्त्वमुत्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून् भुङ्क्ष्व राज्यं समृद्धम्। मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्

इसलिये तुम युद्धके लिये खड़े हो जाओ और यशको प्राप्त करो तथा शत्रुओंको जीतकर धन-धान्यसे सम्पन्न राज्यको भोगो। ये सभी मेरे द्वारा पहलेसे ही मारे हुए हैं। हे सव्यसाचिन् ! तुम निमित्तमात्र बन जाओ। — VaniSagar

Bhagavad GitaAdhyay 11Shlok 32
Bhagavad Gita · Adhyay 11, Shlok 32
श्री भगवानुवाच कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः

श्रीभगवान् बोले -- मैं सम्पूर्ण लोकोंका क्षय करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ और इस समय मैं इन सब लोगोंका संहार करनेके लिये यहाँ आया हूँ। तुम्हारे प्रतिपक्षमें जो योद्धालोग खड़े हैं, वे सब तुम्हारे युद्ध किये बिना भी नहीं रहेंगे। — VaniSagar

Shlokify.inWISDOM FOR THE MODERN SOUL

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Frequently Asked Questions

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 32 का हिंदी अर्थ क्या है?

Bhagavad Gita अध्याय 11 श्लोक 32 का हिंदी अर्थ: "श्रीभगवान् बोले -- मैं सम्पूर्ण लोकोंका क्षय करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ और इस समय मैं इन सब लोगोंका संहार करनेके लिये यहाँ आया हूँ। तुम्हारे प्रतिपक्षमें जो योद्धालोग खड़े हैं, वे सब तुम्हारे युद्ध किये बिना भी नहीं रहेंगे। — VaniSagar" यह पावन श्लोक Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga से लिया गया है। जो लोग गीता का दैनिक श्लोक, कर्म योग, और जीवन की कठिनाइयों में मार्गदर्शन खोज रहे हैं, उनके लिए यह श्लोक जीवन के गहरे सत्यों के बारे में शिक्षित करता है। VaniSagar पर इसकी विस्तृत व्याख्या, शब्द-अर्थ और आज का श्लोक (Shloka of the day) उपलब्ध हैं।

What is the meaning and translation of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32?

Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32 translates to: ", "I am the full-grown, world-destroying Time, now engaged in destroying the worlds. Even without you, none of the warriors arrayed in the hostile armies will live. — VaniSagar" This verse is highly regarded for those seeking a daily Gita shloka, guidance on karma, depression, success, or daily motivation. In the hinduism tradition, such verses authored by Sacred Wisdom provide essential guidance. Explore the complete word-by-word analysis, translations, and the shloka of the day and motivational Gita quotes for students and life at VaniSagar.

"श्री भगवानुवाच कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽप" — इस श्लोक का अर्थ और महत्व क्या है?

यह श्लोक Bhagavad Gita अध्याय 11, श्लोक 32 है जो Bhagavad Gita के Vishvarupa-Darsana Yoga में संकलित है। श्रीभगवान् बोले -- मैं सम्पूर्ण लोकोंका क्षय करनेवाला बढ़ा हुआ काल हूँ और इस समय मैं इन सब लोगोंका संहार करनेके लिये यहाँ आया हूँ। तुम्हारे प्रतिपक्षमें जो योद्धालोग खड़े हैं, वे सब तुम्हारे युद्ध किये बिना भी नहीं रहेंगे। — VaniSagar Sacred Wisdom द्वारा रचित यह श्लोक hinduism दर्शन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे अक्सर 'morning mantra' या शांति के लिए जपा जाता है। पूर्ण अर्थ और व्याकरण-विश्लेषण VaniSagar पर देखें।

What does the mantra "śhrī-bhagavān uvācha" mean in English?

"śhrī-bhagavān uvācha" is the opening of Bhagavad Gita Chapter 11 Verse 32. , "I am the full-grown, world-destroying Time, now engaged in destroying the worlds. Even without you, none of the warriors arrayed in the hostile armies will live. — VaniSagar As a core part of the Bhagavad Gita, this verse reflects the wisdom of Sacred Wisdom and the rich hinduism heritage. Perfect for meditation, chanting, or your daily spiritual routine. For a full breakdown of each word and its philosophical context, visit VaniSagar.